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Showing posts from December, 2022

सहज राजयोग क्या है??

 ★ _*उनको तो मालूम ही नही है सहज राजयोग क्या है?,वो अनुभव ही नही कर पा रहे है। जिस सहज राजयोग में इंद्रिया निश्चल हो जाएगी।और जब इंद्रिया निश्चल होगी, तो इंद्रियों में डिसचार्ज होगा?? नही होगा। जो सबसे ज्यास्ती चंचल इंद्रिया है ना कर्मेन्द्रियों में, वो कौनसी है?(कामइन्द्रिय) हाँ, तो कमेंद्रियों से जब काम भोगना शुरु करते हैं ना पुरुष रूप दुर्योधन दुशासन, तो वो इंद्रियों को स्थिर कर देंगे? भोग में रहे लेकिन भोग मे रहते हुए भी स्थिर हो जाए। की चंचलता किए बिगर रह नही सकते? क्या होता है? अरे इंद्रिया चंचल होती है या नही भोग की इंद्रियों के साथ? पुरुष इन्द्रिय और स्त्री इंद्रिय एक दूसरे के साथ भोग भोगते है ना, एक दूसरे के इंद्रियों से, तो जो भोग भोगते है, उसमे निश्चल हो पाते है? नही हो पाते है। ऐसे निश्चल हो जाए की उस समय कोई फोन आजाए जरूरी, तो वो उस स्टेज में फोन भी अटेंड करते रहे। क्या? बात भी कर ले पूरी 5-10 मिनट जो करनी हो, और फोन उठा के रख दे। तो सहज राजयोगी हुए की कठिन राजयोगी हुए? क्या कहेंगे? तो वो तो जानते ही नही है कुछ भी। कौन? (सन्यासी ) उनको तो मालूम ही नही है। मालूम कब? जब...

जब पोल पट्टी खुलेगी तब बुद्धि से सारा ज्ञान उर जायेगा।

 _*यहां जो एटामिक आत्मिक बॉम्ब बना रहे हैं, ऐसी ऐसी आत्माओं की ग्लानि भर रहे हैं, कि वह सूंग ने से ही कोई का ज्ञान खल्लास हो जावे। ज्ञान ही छोड़ देंगे। कहेंगे अरे! इन आत्मा को तो हम बहुत ऊंची आत्मा समझते थे, अरे इनकी यह पोल पट्टी निकली। बस ज्ञान उनका सारा उड़ जावेगा।*_ _*★ पुरानी दुनिया को आग जरूर लगनी है। वह लोग भी उन्नति करते जाते हैं। एटॉमिक बॉम्ब कोई दिन उनके बिकेंगे जरूर। एक दो को एटॉमिक बॉम्ब देने का मदद करते रहते हैं। यहां कौन सी एटॉमिक बॉम्ब है? हाँ, उनके है एटॉमिक बॉम्ब। और हमारे हैं आत्मिक बॉम्ब। क्या? एटम और आत्मा। उन बॉम्ब में ऐसा मसाला भरते हैं, की सूंघने से ही आदमी खत्म हो जावेगा। यहां जो एटमिक आत्मिक बॉम्ब बना रहे हैं, ऐसी ऐसी आत्माओं की ग्लानि भर रहे हैं, कि वह सूंग ने से ही कोई का ज्ञान खल्लास हो जावे। ज्ञान ही छोड़ देंगे। कहेंगे अरे! इन आत्मा को तो हम बहुत ऊंची आत्मा समझते थे, अरे इनकी यह पोल पट्टी निकली। बस ज्ञान उनका सारा उड़ जावेगा। बाप कहते हैं बड़े ते बड़ा बॉम्ब कौन सा है? बड़े से बड़ा बॉम्ब है? परमात्मा बॉम्ब। वह परमात्मा बॉम्ब भी फटा नहीं है। वह परमात्मा बॉ...