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Showing posts from November, 2021

एडवांस पार्टी में भी डरपोक लोगो का झुंड है। कैसे?

 एडवांस पार्टी में भी डरपोक लोगो का  झुंड है। कैसे? 👉 *धृत राष्ट्र जो शासन चला रहे है ना- प्रजातंत्र शासन, उनके कंट्रोल में रहने वाले, उनसे बड़ा डरते है, हाँ हमारा वारेंट निकल जाएगा, भागों यहां से, गुप्त हो जाओ, गुप्त हो जाएंगे तो हमें कोई नही पकड़ेगा, हाँ, हमारा मुखिया कोई दिखायी पड़ता है, वह गुप्त जहां रहेगा हम भी वही रहेंगे। हाँ? हाँ। उसको हम फॉलो करेंगे, हाँ। तो झुंड हुआ कि नही? डरपोक लोग जो होते है ना, उनका झुंड हुआ कि नही?* _*★ जो पशु पक्षी होते है ना, ये पक्षी होते है ना, इनका झुंड होता है की नही? और ये जो जानवर होते है जंगल में जाकर देखों, गाईयों का झुंड होगा, हिरणों का झुंड होगा, या जो भी झुंड होंगे जानवरों के तो कोई मुखीया आगे आगे चलता है कि नही? चलता है। उसके पीछे भागते है कि नही? उसको बड़ा समझते है कि नही? बाप समझते है। तो यहां कोई ऐसा झुंड नही है ब्राह्मणों की दुनिया मे? न बेसिक ब्राह्मणों की दुनिया मे, वह तो शरीर ही छोड़ दिया और न एडवांस के ब्राह्मणों की दुनिया मे? हाँ? दिखाई नही पड़ता? अंधे है? अंधे है कि सोजरे है? अरे बताओ भाई। अंधे के औलाद अंधे। धृतराष्ट्रों के औला...

जैसे ब्रह्मा बाबा (चन्द्रमाँ) ने किया, वैसे एडवांस पार्टी वालों ने भी किया।* क्या किया?

 *जैसे ब्रह्मा बाबा (चन्द्रमाँ) ने किया, वैसे एडवांस  पार्टी वालों ने भी किया।* क्या किया?  👉एडवांस पार्टी वाले जो हुद्धा दिखाते हैं कि हमने भगवान को पहचान लिया, और जब कोर्ट कचहरी शुरू होती है गवर्नमेंट की, तो सारे निश्चय पत्र छुपाए के रख देते हैं, समर्पण पत्र सारे छुपाई के रख देते हैं, कहीं हमसे कोई जज पूछ ना बैठे यह तुम्हारा भगवान कौन सा है, हमें भी तो दिखाओ, हाँ? हाँ बस भाग खड़े होते हैं। _*★ यह खुद भी कहता था। कौन? यह ब्रह्मा बाबा, क्या कहता था? हम नीच, कपटी, विकारी और तुम सर्वगुण संपन्न, लेकिन वहां तो पत्थर की मूर्तिओ के सामने कहता था, और अभी किसके सामने कहता है? अभी कहता है कि नहीं? जब जिंदा था, शरीर मौजूद था, दादा लेखराज ब्रह्मा का, तब कहता था कि नहीं? नही कहता था? हाँ। किसको कहेगा? तब भी भगत था या ज्ञानी बन गया? कहेंगे भगत ही था। किसको कहता था? नहीं तो बताए। कोई था? आप सर्वगुण सम्पन्न, सम्पूर्ण अहिंसक, मर्यादा पुरुषोत्तम, किसी के पीछे पीछे भागा तो, भागा कि नहीं भागा? गुरुओं के पीछे भागा, विद्वान पंडित आचार्य के पीछे वानारसी में भागा, कहे कुछ नहीं मिला तो किसके पी...

हीरे की कटिंग

 शिवबाबा के लिंग का हीरे की पूजा होती है एकदम, *अभी देखों इंग्लैंड की महारानी के ताज में लगाया, तो इतना भारी हिरा कहा से आता होगा और उस को कौन कट करते होंगे?* अरे बच्चे यहां जो कट करने वाले एक्सपर्ट होते है ना इंडिया में, एक्सपर्ट है कट होते है हीरे। *ऐसे मत समझो यहां हीरे की कटिंग नही होती है* हीरे की कटना सब से तीखे बेल्जियम।  *यहां भी अभी कट होतें है। और यहां वाले भी बहुत एक्सपर्ट होते जाते है दिन प्रतिदिन। ... और छोटे2 भी यहां कट होते है।* और जास्ती होशियार होते रहेंगे, होते रहेंगे। और वह आएंगे न अपनी होशियारी लेकर के और उनको नाम का तो मालूम ही पड़ेगा आंकर के कारीगरी बनेंगे हीरा काटने के लिए, ऐसे तो नही किसके ऊपर रफ़ हीरा डाले जाते है, नही। रफ हिरा नही डाल सकते। *(time 16.00-20.08) dt 25.10.2021*

मनन चिंतन ज्यादा कैसे होता है ?

*मनन चिंतन ज्यादा कैसे होता है ?* *(याद से) अरे, वो ही बात, ज्ञान में ज्यादा हम रहे सदैव बुद्धि ज्ञान में रमण करे वो कैसे हो ?(सेवा से) दोनों बातें है। निराकार बाप जो साकार तन में आया हुआ है उस निराकार ज्योति बिन्दु को उस साकार में हम जितना प्यार से याद करे ।* ग्लानि से याद करेगें तब याद आएगा या प्यार से याद करेगें तब याद आएगा??? प्यार से याद करेगें तो बहुत याद आता है। और जब बहुत याद आयेगा तो निराकारी स्टेज का असर हमारे ऊपर होगा या नहीं होगा???? *निराकार ज्योतिबिन्दु को हम लम्बे  समय तक याद करने के अभ्यासी बनेगें तो हमारी बुद्धि सूक्ष्म बनेगी या विस्तार वाली बनेगी??? सूक्ष्म बनेगी।* सूक्ष्म को याद करने से क्या बनेगी?सूक्ष्म बनेगी। डकैत को याद करेगें तो डकैत बनेगें, चोरों को याद करेगें तो चोर बनेगें। *तो हम उस निराकार को एक्यूरेट प्रैक्टिकल जगह याद करते है, मुकर्रर तन में याद करते है तो उसका रिजल्ट ये आता है कि, हमारी बुद्धि सूक्ष्म बनती है। और सूक्ष्म बुद्धि में मनन चिंतन मंथन गहराई से चलेगा या भैस बुद्धि में? सूक्ष्म में ज्यादा मनन चिंतन मंथन चलेगा। ज्यादा मनन चिंतन मंथन चलेगा अंद...

प्रजातंत्र राज्य कब खत्म होगी? अज्ञान का अंधेरा कब खत्म होगी? 2028.

 *प्रजातंत्र राज्य कब खत्म होगी? अज्ञान का अंधेरा कब खत्म होगी?  2028*  Varta 1799 ( VCD-3773) _★ सोजरा होगा ज्ञान का और ये अज्ञान का अंधेरा मिटेगा। अभी ये प्रजातंत्र गवर्नमेंट तो समझने वाली तो है नही। इनको तो बहुत जन्मों के बाद अंत मे जाकर के राजाई मिल गई टूटी फूटी अल्प काल की। तो ये अपनी राजाई तो छोड़ने वाले है? नही। तो इनका तो जरूर बिनाश होने का ही है। *सब धर्म खंडों में दुनिया मे जो भी प्रजातंत्र राज्य चल रहा है सब खलास होने वाला है। कब? जब राजयोग के द्वारा तुम बच्चे ऐसे राजयोगी बनेंगे की राजाई करने की ताकत तुम्हारे में आ जाएगी, तो जन्म जन्मान्तर के तुम राजाए बनेंगे। और हिस्ट्री उठा के देख लो, जो हिस्ट्री मिलती है अनेक जन्मों की, उसमे भी राजाओं का राज्य चला है कि ये प्रजातंत्र गवर्नमेंट थी? राजाओं का राज्य चला है।* तो बच्चे तो समझते है ना ये बात बिल्कुल ठिक। *व्याख्या 24.10.2021  (time @ 12.30-14.25)*_

108 बीज रूपी आत्माएं सभी चैतन्य सेंटर है।

 (सेंटर्स-- माना केंद्रीय स्थल।) *108 बीज रूप आत्माएं, जो सारी दुनिया के हर प्रकार की कैटेगरी की आत्माओं के बीज हैं, वो जैसे कि बाबा की दृष्टि में सेंटर्स हो गए। यह हो गए चैतन्य सेंटर।* बाप रोज अमृतवेला पढ़ाने आते हैं, तो उस समय बाप के सामने सब सेंटर्स के बच्चे होते हैं। सब सेंटर के बच्चे कैसे आ जाएंगे?? *सेंटर्स-- माना केंद्रीय स्थल।*  *सेंटर- माना जहां सब आकर सेंटर में इकट्ठे हो जाएं।*  *तो दुनिया की जितनी मनुष्य आत्माएं हैं उन सब मनुष्य आत्माओं के जितने भी बीज हैं, वही हैं-- सेंटर, और सब सेंटर का बीज रूप है- अहमदाबाद।* स्वामीनारायण मंदिर का मिसाल दिया। वहां स्वामीनारायण के 108 मंदिर बने हैं, ढेर पैसा आता होगा, तो मिलता तो सब स्वामीनारायण को होगा। यादगार सब यहां की है।        *वह 108 बीज रूप आत्माएं, जो सारी दुनिया के हर प्रकार की कैटेगरी की आत्माओं के बीज हैं, वो जैसे कि बाबा की दृष्टि में सेंटर्स हो गए। यह हो गए चैतन्य सेंटर।*          तो बाप जब रोज आकर पढ़ाते हैं उस समय बाप के सामने सब सेंटर्स के बच्चे होते हैं। भल सामने न...

परिवार का महत्व

 ★ *कोई समझे परिवार नहीं तो क्या हुआ? परिवार में ही तो बाप है यहां धर्म राज्य दोनों की स्थापना है। यहां तो सब को राजी भी करना है। और इसी जन्म में करना है। तो राज्य में परिवार की आवश्यकता होता है। और 21 जन्म भिन्न भिन्न रूप से परिवार के साथ रहना है। परिवार को छोड़कर कहीं जा ही नहीं सकते। तो चेक करो। ऐसा नहीं समझो कि बाप जाने और मैं जानू। बाप से ही कार्य है ऐसा नहीं समझो। इन चार बातों में निश्चय होने से एक में भी कम है तो आगे चलकर के जरूर हलचल में आ जाएंगे।* Vcd:1223

प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए साकार बाप को साकार धरणी चाहिए। बिज साकार तो धरणी भी साकार चाहिए।

 _*प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए साकार बाप को साकार धरणी चाहिए। बिज साकार तो धरणी भी साकार चाहिए।  और वो एन्टी सेक्स रुद्रमाला से नही क्योंकि रुद्रमाला तो पुरुष संस्कार के है, तो प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए धरणी चाहिए विजयमाला से। vcd  2704.*_ जोहर करती थीं उन विदेशियो को टच नहीं होने देती थीं तो जन्मजन्मान्तर की प्यूरिटी उन आत्माओं मे भरी हुई है वो पवित्र आत्माओं को पहले ज्ञान लेने की दरकार है या जो भारत के राजाए जन्मजन्मांतर अपवित्र बनते रहे उन अपवित्र आत्माओं के पहले ज्ञान लेने की दरकार है। अपवित्र आत्माएं हैं जो बाप के बच्चे कहे जाते हैं रूद्र माला के मणके कहे जाते हैं वो जन्मजन्मान्तर के राजाए हैं उनको पहले ज्ञान मिलता है ज्ञान की गहराईयां एडवांस मिल जाती हैं क्योंकि बहुत मैला कपड़ा हैं गंद ज्यादा भरी हुई है तो पानी यूज के लिए ज्यादा चाहिए टाइम यूज के लिए ज्यादा चाहिए साफ ही नहीं होता है कितनी रगड़ करो फिर भी सुधरते नहीं है! मु.ता.07.10.1966 वीसीडी नं.258 *रुद्र माला की माताएं कन्याएं जो है वो सब पुरुष स्वभाव संस्कार के है या विजय माला के रानियों के स्वभाव, संस...

हम क्या योगिनी माता के संतान /औलाद है?? प्रजापिता ब्रह्मा की संतान है।

 *हम क्या योगिनी माता के संतान /औलाद है?? प्रजापिता ब्रह्मा की संतान है।*   प्रजापिता की भी, बाप की भी संतान है और ब्रह्मा दादा लेखराज की भी संतान है या नहीं है? है। प्रैक्टिकल में थे ना! हाँ, की योगिनी माता थी? अरे, उस समय योगिनी माता थी? नहीं थी। तो काहे के लिए लिख दिया? अभी है। अब माता बदल गई। क्या? जैसे वह दूसरे धर्म वाले होते हैं ना, उनकी माता बदलती रहती है। बदलती है ना? डाइवोर्स वाइवोर्स चलता है ना? तो माता बदल जाती है। ऐसे! यह तो सुना था, कि बाप तो एक ही होता है, वह तो बदलता नहीं। हाँ? अभी देवी देवता सनातन धर्म वालों की तो एक ही माता होती है की दो-चार माताए होती है? हाँ, होंगी। उनको छोटी माता कहेंगे कि बड़ी माता कहेंगे? छोटी कहेंगे ना!* ★ तो बताया, सब आपस में भाई-भाई हो असूल में। हाँ, लेकिन ब्रह्मा के बच्चे बने, तो ब्रह्माकुमार -कुमारी हो। ठीक है ना बच्चे! अच्छा, क्योंकि यह तो समझते हो, कि यह नई सृष्टि है। कौन सी? हाँ? अरे कौन सी नई सृष्टि है? ब्रह्मा कि जो संतान बने वह नई सृष्टि, कि कोई और भी है? हाँ? परम ब्रह्म की संतान? अच्छा, परम ब्रह्म की संतान वह नई सृष्टि है...

सृष्टि का सृजन कैसे होता है?

 *जब दोनों ही प्रकृति मिलती हैं शरीर और आत्मा भाव वाली, तो सृष्टि का सृजन होता है।*  *दोनों प्रकार की प्रकृति मिलकर माता का प्रैक्टिकल रूप हो गई जिसे कहा गया-- महालक्ष्मी ।लेकिन वो माता प्रैक्टिकल रूप और वो पिता लिंग रूप, जिसकी स्मृति में वो निराकार समाया हुआ है।*  *तो फिर माता और पिता का जब मेल होता है तो किस की पैदाइश होती है? पहला ग्रुप जो तैयार होता है बाप के बच्चों का, जिसे कहते हैं- रूद्र गण। रूद्र माला पहले तैयार होती है जब माता-पिता का प्रैक्टिकल योग होता है।*               *वो धर्मपिताएं तो प्रैक्टिकल में योगी नहीं है। क्योंकि स्वयं भी ज्योति बिंदु और निराकार से ही योग लगाया तो दोनों मेल हो गए। तो जो सृष्टि बननी चाहिए ,वो बन नहीं सकती। वास्तविक सृष्टि तो हैविन की बननी चाहिए, वह तो नहीं बन सकती।*  *सात्विक सृष्टि तभी बनती है, जब पुरुष स्त्री का मेल सात्विक रूप में हो। तामसी रूप में मेल होता है, मारामारी चलती है तो बिच्छू टंडन जैसे बच्चे पैदा होंगे।* Vcd 2476

त्रिमूर्ति में कौन है बंधन काटने वाला?

  **त्रिमूर्ति में कौन है बंधन काटने वाला??  उसको कहते-- देव देव महादेव। ब्रह्मा को नहीं कहेंगे, विष्णु को भी नहीं कहेंगे। शंकर को ही क्यों??*क्योंकि वो एक ही आत्मा इस सृष्टि में ऐसी है, जो आप समान सभी बीज रूप आत्माओं को पैदा करती है। वृक्ष में सबसे पावरफुल बीज होता है।* जड़ें भी सड़ जाती हैं। जड़ों से जो तना निकलता है, वह भी सड़ जाता है। टहनियां फूल पत्ती डाल डाली सब सड़ जाते हैं।लेकिन मनुष्य सृष्टि के बीज अविनाशी है।Vcd 2635(9-9-18)1.09मि

ऐसे नही आत्माओं के बाप को याद करना है सिर्फ, नही

 *_ऐसे नही आत्माओं के बाप को याद करना है सिर्फ, नही। निराकार बाप और निराकार बाप के साथ बाप जिस मुक़र्रर रथ साकार में आते है, तो निराकारी और साकारी दोनों बाप के मेल को याद करना है। अभी कोई बच्चे ऐसे भी बुद्धु होंगे जो ऊपर में आत्मालोक में याद करते होंगे। उनको भक्तिमार्ग कहेंगे ना। ऊपर में याद करते है जो वह भी भक्तिमार्ग में है। भले ज्ञान ले लिया है, बाप से भी मिलें है, परंतु याद ऊपर में परमधामवासी को याद करते है, उनको ऑक्यूपेशन का पता नही है, की बाप धंधा क्या करते है? परमधाम में कोई धंधा धोरी होतें है? समझाने करने का, सुनाने करने का वहां कोई धंधा है टीचर का? कोई धंधा नही। तो ऐसे भक्तिमार्ग में जो ऊपर में याद करते ऐसे को तो बाप का धंधा का ही पता नही, न कोई नाम का पता है, न कोई रूप का पता है।_* _*★ ये तो मालूम है, बच्चों को, की कैसे नम्बरवार आते है, कोई नम्बर वान में आते है, कोई बीच मे आते है, कोई अंत मे भी आते है और फिर आते तो है फ़ीर कैसे ये नंबर वार मिलते भी है। मिलतें है ना। और अभी बाबा को याद करना है। ऐसे नही आत्माओं के बाप को याद करना है सिर्फ, नही। निराकार बाप और निराकार बाप के स...

समझाने वाला बाप कौन है? सन्मुख समझाना किसे कहेंगे ?

*समझाने वाला बाप कौन है? सन्मुख समझाना किसे कहेंगे??*  ★ रूहानी बाप बैठ करके समझाते है, माना सनझाने वाला रूहानी बाप है सुप्रीम सोल, गलत फहमी नही होना चाहिए कि कोई जिस्मानी बाप है या प्रजापिता है समझाने वाला, हाँ ये जरूर है की समझाते तब है जब ये की ये शरीर है। ये मुक़र्रर रथ है तो समझाते है, नही तो समझाए नही सकेंगे, क्योंकी निराकार आत्मा बिना शरीर के कैसे बोलेगीं, कैसे सझाएगीं। तो नई समझाए सकेंगे। और वह भी समझाए करना सन्मुख समझाना होता है। ऐसे नही की परुक्ष रूप में खही पीछे से प्रेरणा से समझाते रहेंगे। जो सन्मुख समझाया जाता है, फिर ये जो लिखत बनती है वह दुर-2 तक बच्चों के लिए जाती है। दूर-2 तक जाती है उनको सन्मुख सुनना थोड़े ही कहेंगे। और तुम तो सन्मुख सुनते हो ना। यहां आते ही हो सन्मुख सुनने में लिए की बेहद के बाप हम डायरेक्ट सुनेंगे हम आत्माए, क्योंकि बाप ने समझाया है आत्मा ही सब कुछ सुनती है। शरीर तो जड़ है ना। सब कुछ आत्मा करती है शरीर के द्वारा। शरीर तो इंस्ट्रूमेंट है।  *(time @22 sec- 4.10) dt 31.10.2021*

कृष्ण तो प्रत्यक्ष होता ही है--भागवत के द्वारा।

 *कृष्ण तो प्रत्यक्ष होता ही है--भागवत के द्वारा। यज्ञ के आदि में भी कैसे प्रत्यक्षता हुई ? सिंध हैदराबाद में।तरीका क्या हुआ??अपने घरवार छोड़ कर के जो श्रेष्ठ आत्माएं थी,वो सब सत्संग में भागने लगी-- चलो वृंदावन, भज राधे गोविंद।*              *तो वह था पार्ट आदि का।और अंत का पार्ट क्या है?? आदि' मध्य और अंत।आदि में एक छोटा सा सैंपल था,मध्य में सिर्फ बीज रूप आत्मा की प्रत्यक्षता की बात है।* जैसे 500 करोड़ मनुष्य आत्माओ की दुनिया, उसका छोटा रूप अगर देखना हो, हर प्रकार की सैंपल देखना हो, तो कितनी आत्माओं के संगठन को देख ले? 108 आत्माओं के संगठन को देख ले।उसमे सारी दुनिया का नजारा का हर प्रकार की आत्माओ के प्रैक्टिकल पार्ट हम देख सकते हैं।          *तो 108 आत्माओं की जो बीज रूप आत्माओ का जो संगठन है, रूद्र माला का जो संगठन है, जो पहले पहले माला प्रत्यक्ष होता है, उस दुनिया के बीच वो कृष्ण बच्चा ब्राह्मणों में प्रत्यक्ष होता है।जो बड़ेबड़े हैंड्स हैं, उनमें  बिजली की तरह कौंध आ जाता है।लेकिन देहअभिमान तो देहअभिमान, सर पकड़ ...

असली शिव जयंती कब कहे ?

 तो बाप कहते हैं--- *भारत में ही शिवजयंती गाई जाती है। तो असली शिव जयंती कब कहे?76 कहे या 89 में  कहें?89 में भी नहीं कह सकते, क्योंकि कृष्ण को काला दिखाया गया है।*  कृष्ण की भी ग्लानि है,राम की भी ग्लानि है। कृष्ण और राम दोनों को काला मुंह वाला दिखाते है।  *लेकिन नारायण की कोई ग्लानि शास्त्रों में नहीं है।कारण?कि कृष्णा जब तक सिंगल है, तब तक उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई। कृष्ण जब सिंगल से डबल बन जाता है, प्रवृत्ति मार्ग का पक्का हो जाता है, तब उसकी प्रत्यक्षता होती है। तो कृष्ण जयंती के बाद है- राधा जयंती।*  राधा के रूप में पार्ट बजाने वाली आत्मा कौन है?? कहां पार्ट बजा रही है,वो चंद्रवंशी आत्मा कौन सी है, वह जब तक क्लियर ना हो, प्रत्यक्ष ना हो, तब तक राधा कृष्ण की जोड़ी कैसे बनेगी?            *तो ये ब्राह्मणों की संगमयुगी  दुनिया में दोनों ही प्रत्यक्षत होते है। दोनों का ही मेल होता है, और दोनों वंश,  दोनों कुल मेल होकर एक हो जब तक,तव तक बाप की प्रत्यक्षता नहीं हो सकती।*            *क्योंकि बाप ...

परमपिता परमात्मा के हुकुम से पत्ता-पत्ता हिलता है। क्योंकि वो समझते हैं पत्ते-पत्ते में परमात्मा है। तो रॉन्ग समझते हैं?

 जैसे कहते हैं-- *परमपिता परमात्मा के हुकुम से पत्ता-पत्ता हिलता है। क्योंकि वो समझते हैं पत्ते-पत्ते में परमात्मा है।* तो रॉन्ग समझते हैं? या सही समझते हैं?           👉झाड़ का वृक्ष आज समझाएं रहे हैं। *तो कौन से पत्ते पत्तों की बात है? चैतन्य पत्तों की बात है। 500 करोड़ की झाड़ की बात नहीं हो रही है। कौन से झाड़ की बात हो रही है? ब्राह्मणों की जो संगमयुगी दुनिया का झाड़ होता है,वही जब पुराना हो जाता है,तो उसकी सैंपलिंग लगाई जाती है। उस पुराने झाड़ में से कुछ पत्ते लेकर के,टहनिया लेकर के और नये वृक्ष की सैंपलिंग लगाते हैं। तो जो नए-नए शोभनीक पत्ते हैं, रूद्र माला के पत्ते हैं, एडवांस पार्टी की विशेष आत्माएं हैं,तो उनके लिए यह गायन है-- कि परमात्मा की हुकुम से पत्ता पत्ता भी हिलता है। जड़ पत्तों की बात नहीं है।* *तो क्या परमात्मा बैठ पत्तों को हुकुम करेगा?? जड़ पत्तों को हुकुम करने की तो बात ही नहीं। चैतन्य पत्तों की बात है।*      केसेट 83(1.03मि

आगे विनाश होगी तो मुरली कैसे मिलेगी ?

*आगे विनाश होगी तो मुरली कैसे मिलेगी?? कोई सोचते हम वेबसाइट्स से मुरली लेते रहेंगे, वह होगा??*  ★ सेंटर पर मुरली पहुँचती है, मानलो कोई हंगामा हो जाता है, अभी तो ये है, जब बहुत हंगामे होने लगेगी तो पीछे तुम को ये मुरलीया कैसे मिलेगीं। ब्रह्मा बाबा को चिंता होने लगी, कैसे मुरलिया मिलेगी, क्या होगा, वह भी तो विचार करो। बाहर में तोपे, अर्थक्वेक वगैरह तुम्हारा, ये रेडियो, फेडियो, अरे जब बहुत जोर से विनाश होगा, हंगामा होगा, तो ये रेडियो फेडियो धुरछाई सब उड़ाए देंगे। फिर ये मुरली उरली कोई थोड़े ही मिल सकेगी...! कोई सोचते है हम वेबसाइट्स से मुरली लेते रहेंगे, अभी देखते तो हो इस पुरानी दुनिया मे दिन प्रतिदिन आदमी कैसे होते जावेंगे, एकदम क्रोधी, जलाए देते है बैग्स, पोस्ट की बैग्स जलाए देते है, सब जलाए देंगे। जलाने का तो कोई एक, वह जो बड़ा जलाने की बात होती है न, जलाने का तो कोई एक वह जो बड़ा जलाने की बात होती है न, तो वह छोटे जलाने के लिए शुरू करती है अभी से, तो बच्चो की ये जो बैटरी है न आत्मारूपी बैटरी वह सदैव बाप के साथ होंगीं। और निरंतर बाप की याद होवें ये बड़ी मुश्किल बात। *(time @18.36-21.38...

सबसे बड़ा तीर्थ स्थान, आबू।

 _*एक दिन वह यहां जरूर आएगा जो फ़ारेनर्स बहुत आएंगे। सभी जो भी जाते है न इंडिया को देखने आते है न, वह सब से पहले आबू में आएंगे और सब छोड़ देंगे। तीर्थ यात्राएं जो यहां, वहां जाते है न, क्योंकि वह उत्सुक रहते है भारत का प्राचीन राजयोग, वह कहा है, वह कौन था...*_ _★ जो सच्चे2 बच्चे होते है न, वह बहुत सच्ची दिल से पुरुषार्थ करते है, और ऐसे पुरुषार्थ होने से बाबा क्यों क्यों ख्याल करते है। कि एक तो इनमें बच्चे बहुत है, जो सर्विक में कोई अच्छा गोप होगा तो अच्छी मद्त देगा। तुम बच्चियों से भी इनकी जास्ती मदत मिलेगी। तो इनको यह जो यहां का काम है तेजगारी का, बिखराव का, उनसे भी इनकी दिल लगेगी, अच्छी तरह से उसमे दिल लगेगी  और अपना पद भी ऊँचा पाएंगे, मेहनत करेंगे तो आप समान बहुतों को बनाएंगे, ऊंची ख्याल से बच्चों को भी कोशिश करनी चाहिए और बच्चियों को भी कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि एक दिन वह यहां जरूर आएगा जो फ़ारेनर्स बहुत आएंगे। सभी जो भी जाते है न इंडिया को देखने आते है न, वह सब से पहले आबू में आएंगे और सब छोड़ देंगे। तीर्थ यात्राएं जो यहां, वहां जाते है न, क्योंकि वह उत्सुक रहते है भारत का प्...

पास्ट हो गया, जिसके लिए बाबा बोलते-

 *पास्ट हो गया, जिसके लिए बाबा बोलते-------* ★ बीती को बीती देखो, चितवों नही। जो जो पास्ट हो जाता है टाइम, उसका चिंतन नही किया जा सकता है। अगर किया भी जाता है तो फिर उनको भूल समझी जाती है। ये जो कहते है बीती को चितवों नही , फिर फिर आगे के लिए पुरुषार्थ चाहिए। फिर ये है ईश्वरिय मिशन। कोई पूछेगा, इस मिशन का हेड कौन है? अरे ईश्वरिय मिशन का हेड फिर किसको कहेंगें? वह तो नाम ही है ईश्वरिय मिशन। ये भी बड़ी मदत करनी है। यज्ञ में ये मद्त करनी है। बाकि कोई पैसे की खर्चे की बात नही है। *(time@10.35- 13.00) dt 30.10.2021 VCD-3779*

आत्मा परमात्मा अलग रहे बहु क़ाल। तो हिसाब बताओ कब रहे अलग बहुत काल?

आत्मा परमात्मा अलग रहे बहु क़ाल। तो हिसाब बताओ कब रहे अलग बहुत काल? तिथि तारीख बताओ। बच्चे परम ब्रह्म से बीछोड करके बच्चे यहां आए है पार्ट बजाने। 👉 यहां बाप से मिलने कब आए? कोई पूछेंगे कोई कितना समय अलग रहे बाप से, बेहद का बाप से? वहां ॐ मंडली में मिलें थे या नही मीले थे? मिलें थे। 1936 से 1976 तक अलग रहे?? तो बाप जिन बच्चे से बात करते है उनमें मुख्य 76 से पहले कोई बच्चा नही है?  है ना? हाँ। तो 69 की तिथि पुछते है न, तिथि माना तारीख, तारीख बताओ तिथि तारीख? 5 दिसम्बर। _★ पुरुषोत्तम संगमयुग में ही आत्मा और परमात्मा, जो परमपार्ट धारी परमात्मा है और जो आत्माए है वह बहु काल अलग-2 रहे, यज्ञ के आदि में साथ में थे फिर बहुत काल तक अलग-2 रहे, फिर इसका हिसाब भी तो बच्चों ने समझा जा। तो सब से जास्ती कौन वहां से आते है बिछोड करके घर से? परम ब्रह्म तुम्हारा घर है न, बाप जीस मुक़र्रर रथ में पहले पहले प्रवेश करते है नाम ब्रह्मा रखते है, ब्रह्मा तो है ही परन्तु पहले-2 प्रवेश करते है इसलिए परम ब्रह्म है। तो बच्चे परम ब्रह्म से बीछोड करके बच्चे यहां आए है पार्ट बजाने। तो ये तिथि है ना। तिथि तारिख याद ...

शांति आत्मा का स्वधर्म है।

 *असली परीक्षा कब होगी आत्मा की? जब अशांत वातावरण हो, और उस अशांत वातावरण में भी हम शांत होकर दिखाएं।*  पुराने,पुराने भी ज्ञान में चलने वाले हैं,चल रहे हैं ज्ञान में। और नए-नए भी निकल रहे हैं। *👉यह कोई जरूरी नहीं है कि जो पुराने ज्ञान में चल रही है, वो उस स्टेज को पकड़े हुए होंगे। और जो नए निकले हुए  हैं, वह नहीं पकड़ सकते।*           *👉ये तो पूर्व जन्मों का हिसाब किताब है। जिसने पूर्व जन्मों में किसी को ज्यादा अशांत किया हुआ होगा,खुद भी धमाल मचाया हुआ होगा अशांत रहा होगा,तो ज्ञान में आने के बाद भी जल्दी शांति की स्टेज  को नहीं पकड़ सकेगा।भल कितने भी साल से चल रहा हो ज्ञान में।* Vcd 68(5मि) समझते हैं-- यह जो लड़ना झगड़ना जो चलता है, वह शांत हो जाए।  *परंतु शांत वातावरण में शांति समझना, शांत रहना, यह शांति कोई काम की नहीं है।*   घर में स्त्री पुरुष होते हैं, कोई तो झगड़ते हैं, कोई नहीं झगड़ते, तो वह नेचुरल शांति हुई क्या??  *शांति आत्मा का स्वधर्म है। माना आत्मा अशांत होती है, तो अपनी धर्म से, अपनी धारणा से नीचे गिरती है।...

माया अच्छे-अच्छे महारथियों को भी नाक से पकड़ लेती है।

 बाबा अभूल बनाते हैं। माया अच्छे-अच्छे महारथियों को भी नाक से पकड़ लेती है। हाथ से क्यों नहीं पकड़ती? नाक से क्यों पकड़ती है? *जो खुद विकारी होता है वह दूसरों को पहले उस नजर से ज्यादा देखता है।* 👉जो दूसरों को भी उस नजर से देखता है, सब को उस नजर से देखता है, भगवान को भी उसी नजर से देखने लगता है। *जो ईश्वरीय पार्ट है उसको भी काली आंख से देखने लग पड़ता है, तो बाप कहते हैं-- माया इसको नाक से पकड़कर के फ़तकाओ। *महारथियों को नाक से पकड़ती है।क्यों? साधारण पुरुषार्थियों को नाक से नहीं पकड़ती??*        जैसे बंदर है जब पकड़ लेता है ना तो उसकी नाक जमीन मे रगड़ेंगा। किसी के ऊपर ज्यादा गुस्सा होता है तो उसे नाक रगड़ाया जाता है।  तो महारथियों को नाक से पकड़ लेती है, और उनको पता ही नहीं चलता। Vcd 68(55मि

असली अमृतवेला कब कहे?

 कोई कहते हैं-- कि हम पहले क्यों नहीं आये इतने टाइम से, ज्ञान सूर्य उगा हुआ था, हमे क्यों नहीं पहले पता चला?? तो बाबा मुरलीयो में कहते है--  *कि पहले आये होते और फिर माया खा जाती तो क्या  ज्यादा फायदा था? इसलिये अच्छा हुआ ड्रामा प्लान अनुसार बादमे आये।* *तो तुमको सबसे जास्ती मेरी याद अमृतवेले रहेगी।  तो असली अमृतवेला कब कहे?? * बाप कहते है-- कि मैं बच्चोके द्वारा प्रत्यक्ष होता हूँ-- *"सन शोज फादर,फादर शोज सन्स" तो कौन किसको पहले प्रत्यक्ष करेगा??* बच्चे बाप को पहले प्रत्यक्ष कर लेंगे? दम है? 63 जन्म के काली तमोप्रधान आत्माये कमजोर बनी पड़ी है।तमोप्रधान आत्माये सेवा कर सकती है? 👉 *तो बाप है सर्वशक्तिवान, वो सर्वशक्तिवान बाप पहले अपन को  प्रत्यक्ष नहीं करता पहले किसको प्रत्यक्ष करता है?बच्चोको पहले प्रत्यक्ष करता है।* बच्चों में पहला बच्चा-- कृष्ण बच्चा। केसेट 82 (23मि)

स्वर्ग की स्थापना कौन कर सकेंगे??

 स्वर्ग की स्थापना कौन कर सकेंगे?? ब्रह्मा जो मां का रूप था, उस रूप में नहीं कह सकते मांमेंकम याद करो, अगर कहे-- इसका मतलब यह हुआ कि मां अपने को सर्वे सर्वा समझ कर बैठ गई। मां से ऊंचा कोई और है नहीं।ये तो सिंगल उपासना हो गई।  सिंगल उपासना करने वालों को रावण संप्रदाय बता दिया। *सीढ़ी के चित्र में देखो, जो सिंगल गणेश हनुमान या कृष्ण की उपासना कर रहे हैं उनका ताज उड़ गया।* उनके सर पर जिम्मेवारी का ताज नहीं है, वो स्वर्ग की स्थापना नहीं कर सकते।         *👉स्वर्ग की स्थापना कौन कर सकेंगे??वही कर सकेंगे जो देवी देवता को मानने वाले होंगे,जो प्रवृत्ति मार्ग को मानने वाले होंगे।* दूसरे धर्म की आत्माएं सिर्फ गॉडफादर को मानती है गॉड मदर को नहीं मानती इसीलिए उनके भाग्य में नहीं है, कि वह अपने देश में स्वर्ग स्थापन कर सकें।  ऑडियो 66

चंद्रवंशियों को जन्म देने वाली कौन?

 चंद्रवंशियों को जन्म देने वाली कौन?   ये बच्चियां भी सीखें और बच्चे भी सीखें, कौन सी बच्ची के लिए बोला? चंद्रवंशी जो योगिनि है न, वह चंद्रवंशीओ की अम्मा है न, चन्द्रमाँ को पैदा करती है कि नही? अनुशुईया नाम है न, शाश्त्रों में तो दिखाया हुआ है अनुशुईया के बच्चों का नाम चन्द्रमाँ, 3 बच्चे विशेष बताया है न, उनमे एक बच्चा? अत्रि ऋषि और अनुशुईया का एक बच्चे का नाम चन्द्रमाँ। तो ये भी सीखें। कौन? किस ग्रुप की तरफ इशारा किया? जो चंद्रवंशयों की बीज है जो बच्ची, कौन? अरे कौन है कि नही? उसे क्या कहा जाता है ब्राह्मणों की भाषा मे? योगिनि माता, हाँ। तो सभी चंद्रवंशियों को जन्म देने वाली माता है ना। परदादी नाम दिया ना? हाँ। VCD - 3772 (time @ 11.50-17.20)  व्याख्या  23.10.2021.