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Showing posts from August, 2021

शार्ट में समझाना है, की 2 दिन के अंदर उनका कोर्स, एडवांस कोर्स, जिसेकहते है रियलाइजेशन कोर्स, हाँ उनकी बुद्धी में बैठें।

ऐसे शार्ट में समझाना है, की 2 दिन के अंदर उनका कोर्स,  एडवांस कोर्स, जिसेकहते है  रियलाइजेशन कोर्स, हाँ उनकी बुद्धी में बैठें। _*★ फिर  ये बात है, ऐसी कोई युक्ति बतावें, की मनुष्यों की, की झट उसकी बुद्धी में बैठ जावे।  की लंबा लंबा सुनाते रहे 4-4 घंटे का एक एक चित्रों पर कोर्स सुनाते रहे?? कोई ऐसे होते है  ब्राह्मण ब्राह्मणी, बस एक चित्र को लेके बैठेंगे और 4-5 घंटा बस वही चित्र का राम रहेन्दा लगातें रहते। है कोई? ऐसे कोई देखे की नही ब्रह्मा कुमार कुमारीं? हाँ, बड़ा लंबा-2 टाइम वेस्ट करते रहते है। नही? ऐसा समझाना चाहिए शार्ट में, शार्ट भी हो और शार्प भी हो। तीखें तीखें ज्ञान के पॉइंट्स देना है। शार्ट में देना है। नही तो सीढ़ी बिगर थोड़े ही आगे आएंगे। आगे आएंगे? अगर सीढी पर नही समझा तो आगें नही आएंगे सूर्यवंश की और! हाँ। सीढ़ी पर कौन समझेंगे? सीढ़ी पर भारतवासीओ के समझ में अच्छे से आएगा। तो सीढ़ी तक ले जाना है की बस  त्रिमूर्ती में ही साथ रोज लटके रहे और समझा ही न पाए? हाँ? हाँ, ऐसे शार्ट में समझाना है, की 2 दिन के अंदर उनका कोर्स,  एडवांस कोर्स, जिसेकहते है...

तीसरा नेत्र खोला, और विनाश। तीसरा नेत्र कब खुलता है?

*तीसरा नेत्र खोला, और विनाश। तीसरा नेत्र कब खुलता है??* *जब राजा हरिश्चंद्र का निर्मोही राजा का पार्ट बजाया जाता है। मैं आत्मा ज्योति बिंदु, और मेरा बाप शिव ज्योति बिंदु। एक शिव बाबा दूसरा न कोई।* *पत्नी, पत्नी नहीं, बाप बाप नहीं, भाई,भाई नहीं। नाना चाचा काका ताऊ की तो बात ही नहीं। सारी आसुरी सृष्टि, जो जड़त्व मई सृष्टि बन चुकी है,कब्रिस्तान बन चुकी है, सारी आसुरी सृष्टि का विनाश।* Vcd 473(56मि

सूक्ष्म शरीर धारी आत्माएं धर्मराज की सजाएं कैसे खाएंगे?

 *सूक्ष्म शरीर धारी आत्माएं धर्मराज की सजाएं कैसे खाएंगे?*  मुरली में बोला-- *स्थूल शरीर धारण कराके सजाएं देंगे।* माना उन आत्माओं में स्थूल शरीर धारण करेंगी, जो अपने शरीर से अलग रहना सीख जाएंगे। अभी तो हम अलग नहीं हो पा रहे हैं। लेकिन पुरुषार्थ करते करते सन्मुख बैठने वाली आत्माएं, शरीर से अलग रहना सीख जाएंगी। बीज रूप स्टेज में टिक जाएंगी, जिन्हें बाबा *"तुम बच्चे"* कहते हैं, वो पुरुषार्थ में बहुत तीखे हैं। इसीलिए *जब बीजरूप आत्माएं संपन्न बन जाएंगी, तो वह अपने शरीर से अलग होकर देखेंगे, और प्रवेश करने वाली आत्माएं उनके शरीर में प्रवेश करके अपने पाप कर्म धर्मराज से भोगेंगी। और एक सेकंड में अनेक जन्मों की सजाओं का अनुभव करेंगे।* वार्ता 564

बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है।

*बाप कहते है- बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है।*   _*बाप कहते है- बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न पूछते रहते है। पूछते रहते है तो श्रीमत की वर्ख़िलाफी करते है की अपने होशियार समझते है? नही? हाँ समझते है। पर प्रश्न पूछने की जरूरत नही है। क्योंकि बाप बिना बताए सब कुछ देते हैं या बोल बोल करने से देते हैं? हाँ, अरे जब टाइम आता है के बच्चे बड़े हो गए हैं, समझदार हो गए, तो गहरी गहरी बातें ज्ञान की बाप खुद रहस्यमई बातें बताते हैं, की नहीं बताते हैं? बताते हैं। तो प्रश्न पूछने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न पूछते तो है, नहीं पूछते? क्यों? क्योंकि आत्मा को धीरज नहीं है, पता नहीं के यह गुरु है कि नहीं, ऊंचे ते ऊंचा सद्गुरु। हाँ, आगे चलकर कोई डब्ब हो गया तो? मामला फेल हो गया, बताया बताया ना बताया, तो क्या करेगा? पूछेगा के नहीं?...*_ _*★  तो बताओ, ये जो दो हैं ऊंच ते ऊंच हैं इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली आत्माए। बाकी हम क्या प्रश्न पूछें? हम माने कौन? हाँ, ब्रह्मा हो, सरस्वती हो, और ब्रह्मा कुमार कुमारी हो, वो क्या प्रश्न पूछेंगे! सबसे ऊंच ते ऊ...

प्रैक्टिकल कर्म क्या होता है?

 *प्रैक्टिकल कर्म क्या होता है??*  इंद्रियों पर जीत पहनना- माना इंद्रियों से कर्म तो करें, लेकिन इंद्रियों से जो भी कर्म करें, उस कर्म का लेप क्षेप बुद्धि में बिल्कुल भी ना लगे। तो जो आत्माएं ऐसा कर्म करके दिखाती हैं, कर्मातीत स्टेज वाली आत्माएं, उस से वातावरण अच्छा बनता है। उस वातावरण में जो भी ज्ञान सुनना सुनाना होता है, अच्छा ही होता है। सतयुग स्थापन करने वाला होता है। *प्रैक्टिकल कर्म के द्वारा जो ज्ञान दिया जाता है, उसमें सब कुछ होता है माना वह पानी पीने का है, कुल्ली करने का नहीं है।* Vcd 2110(53मि

पहला सूर्यवंशी ग्रुप लोग संग्रह से तैयार होगा।

 *पहला सूर्यवंशी ग्रुप लोग संग्रह से तैयार होगा* *★ तो बताया वह जो पहला ग्रुप तैयार होता है, तो वह अपना लोग संग्रह करेगा या नहीं करेगा? लोग संग्रह माना? लोगों का संग्रह, माना इकट्ठा करना। कैसे करेगा? तरीका क्या है? शिव बाप आते हैं, तो नीच ते नीच को पहले उठाते हैं। या साधु सन्यासीओ को पहले उठाते हैं? किसको उठाते हैं? नीच कौन?  नीच तो बता दिया ना पतितम कामी कांटे में शिव साकार होते हैं जब तक, संगम युग तब तक। क्या? संगम युग कब तक? संगम युग तब तक पतितम कामी कांटे में शिव साकार होते हैं जब तक। तो संगमयुग में जो ज्यादा से ज्यादा 100 साल बताया है, उसमें शिव साकार तन में आते हैं, तो वह संगमयुग में तो विष्णु लोक बनता ही है। बनता है ना! उस विष्णुपुरी में राजाई चलेगी, या नहीं चलेगी? देखने में राजाई नहीं आएगी। देखने में परिवार नजर आएगा या राजाई?  बच्चा भी क्या समझेगा छोटा बच्चा? क्या समझेगा? मेरा या मेरे बाप का? मेरा। तो मेरे पन का भाव होगा। यह भाव नहीं होगा की जैसे छोटे बच्चे परिवार में होते हैं, जो बड़े भाई बहन होते हैं, वो उसको कहलाते रहते हैं- इधर जाओ, वह चीज उठा कर लाओ, यह उठा क...

अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ।

 *अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ।* ★ अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ। तो जो विजय का टीका लगाते हैं ना यहाँ या विजय का जो झंडा लहराते हैं ना तो बताया कि एक आत्मा नहीं चाहिए तो असली त्रिमूर्ति का झंडा है, उसमें तीन आत्माएँ तो कम-से-कम ज़रूर चाहिए- ब्रह्मा, विष्णु, शंकर बाकी एक आत्मा स्वर्ग की स्थापना नहीं कर सकती। कर सकती है? नहीं कर सकती। ऐसे ही जब युद्ध में जाते हैं ना तो कन्याएँ-माताएँ विजय का टीका लगाती हैं और उसमें ढेर सारे चावल पकड़ती हैं और वहाँ चिपकाए देती हैं। क्या? कि अकेली आत्मा नहीं समझना कि युद्ध में हम अकेले जा रहे हैं। नहीं; संगठित, यूनिटी बनाकर जा रहे हैं। यूनिटी माने जैसे एक का डायरैक्शन मिले सेनापति का, वैसे ही सारी सेना अपना कार्य करे। ऐसे नहीं कि एक इधर जा रहा है, एक उधर जा रहा है, एक उधर। हाँ, डायरैक्शन मिले तिड़ी-बिड़ी हो जाओ, थोड़े समय के लिए इधर-उधर भाग जाओ। तो सामने वाली सेना समझेगी दुश्मनों की अरे, ये तो भाग गए तो ये पीछे लौटने लगे। फिर हमला हो, हम...

धर्मराज कौन?

 *जो हमारे मुकाबले ज्यादा ईश्वरीय ज्ञान धारण किया है वो हमें सजा देने के निम्मित बनेगा*  _★ धर्मराज जो धारणा करने वाला है। *जिसने हमारे मुकाबले ज्यादा धारणा की है ईश्वरीय ज्ञान की प्रैक्टिकल जीवन मे, वो हमको सजा देने के लिए निमित्व बनेगा। कोई एक नही बनेगा। अनेक बनेंगे। अपने अपने कनेक्शन के आधार पर बनेंगे। जिन्होंने जाना भी है और प्रैक्टिकल करके दिखाया भी है, वो हमको सजा देने के लिए निमित्व बनेगा।* varta 914 B

अष्टदेव कौनसा अलौकिक दिव्य कर्म करते है?

 * अष्टदेव कौनसा अलौकिक दिव्य कर्म करते है?* ★ अलौकिक दिव्य कर्म तुम आठ बच्चों से सिखकर के फिर वो दुसरे भी जो तुमसे सुनेंगे, फिर वो दिव्य अलौकिक कर्म करेंगे। अपन को आत्मा समझकर के जो ऊँच ते ऊँच सुप्रीम सोल है, जो जन्म मरण के चक्र में नही आता, त्रिकालदर्शी है, अखुट ज्ञान का भंडार है, जिसकी यादगार सारे संसार में खुदाईयो में  मिल रही हैं, और भारत में  गांव गांव शहर शहर में उसकी यादगार मंदिर बने हुए है, तो वह भगवान मुकर्रर रूप में शरीर रूपी रथ में प्रवेश करके पार्ट बजाये रहा है, उसने जैसे कर्म किये वैसे ही कर्म हम करेंगे, तो हम भी उन आठ जैसे बनेगें। शिव शंकर भोले नाथ ने उनको अपने सर पर बैठाया है। क्योंकि उन्होनें हर धर्म की आत्माओं में  बाप को प्रत्यक्ष कर के दिखाया, ऐसी सर्विस की है, सर्विस सर्विस सर्विस। और कोई दूसरा धन्धा ही नहीं। तो यह आलौकिक कर्म है, जो भी सर्विस करे, उस बाप की याद में करे *Vcd 2706*

बहुत प्रश्नों का उत्तर देने का वह तो बन्द ही कर देना है।

 *बहुत प्रश्नों का उत्तर देने का वह तो बन्द ही कर देना है। कह देना है हमारे पास बाबा का ये डायरेक्शन है* ★  बहुत प्रश्नों का उत्तर देने का वह तो बन्द ही कर देना है। क्योंकि जब कोई बहुत प्रश्न करते है, मनुष्य प्रश्नों में पड़ते है ना, प्रश्न कर कर के बहुत मेहनत कराते है, तो उनका जवाब देते देते ये बच्चियों का गला भी थक जाता है। और फिर कहते है बाबा, आज तो गला घुट गया। उनका गला घुट जाता है  और ये गला घुटता तब है जब टू मच किसी के साथ argue करते है। argue करती है या argue करते है, नही, नब्ज देख लेना चाहिए, उनकी ये नब्ज देखना है ये जल्दी समझने वाला नही है। एक नही तो दूसरा, दूसरा नही तो तीसरा चौथा, अपनी पंडिताई झाड़ते ही रहेंगे, पूछते ही रहेंगे। उनको कह देना है हमारे पास बाबा का ये डायरेक्शन है, यही श्रीमत है। श्रीमत माना ही सभी brothers को एक ही श्रीमत है, आत्मा2 भाई2 है ना!  अपन को आत्मा समझो और बाप को याद करो।  *(time @10.55-13.15) dt 28.04.2021* VCD-3594

वशीकरण मंत्र क्या है?

 *वशीकरण मंत्र (राजतंत्र) क्या है??* 1--   *वशीकरण मंत्र आत्मा की शक्ति है ,मन बुद्धि की शक्ति है कि वो आत्मा इतनी शक्तिशाली हो जाए कि वाइब्रेशन की शक्ति से अनेकों को चेंज कर दे।*          हां कोई  में ये ताकत कम होती है, तो कोई भी ज्यादा। मिसाल के तौर पर-- *जैसे नेहरू जी थे, उनके पीछे से उनकी बुराई करने वाले बहुत थे, लेकिन जब सामने आकर के भाषण करते थे तो उनके वाइब्रेशन में आकर के सारी जनरेशन उस समय तो उनके पक्ष में हो ही जाती थी। तो यह कौन सी पावर हुई?? आत्मा की दृष्टि की पावर कहें? या कर्मेंद्रियों की पावर कहें? या वाइब्रेशन की पावर??*  *तो इसको कहा जाता है-- विज्ञान विशेष ज्ञान।वि-माना विशेष, ज्ञान माना ज्ञान।* Vcd 2437(16मि 2--   *वशीकरण मंत्र है-- योग, याद। तो योग का जो मंत्र है मनमनाभव वो देने वाला कौन प्रैक्टिकल में??*             *मनुष्य सृष्टि का बाप। तो जो मनुष्यों का बाप है, वो वशीकरण मंत्र प्रैक्टिकल में धारण करके मनुष्य आत्माओं को देता है, और बताता है कि मन रूपी जो चंद्रमा है बड़ा चंचल...

अष्टदेव कहा से आएंगे?

 • जिज्ञासु –अष्टदेव में बोला पूर्व दिशा से दो, दक्षिण दिशा से दो और पश्चिम दिशा से दो ... • बाबा- चार दिशायें हैं उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और चार दिशाओं के चार कोण हैं कोने | जैसे बंगाल पूर्व में है और नेपाल उत्तर में है और दोनों का कोना है ईशान कोण | ईशान कोण में ईश्वर का वास है | ईशान कोण का अधिपति कौन है ? ईश्वर माना शंकर का चित्र दिखाते हैं | तो संसार में जो प्रत्यक्षता होती है | कौन से कोण से होती है ? ईशान कोण से प्रत्यक्षता होती है | भारत में बनियन ट्री भी यादगार बना हुआ है | बीज कहाँ पड़ता है ? बंगाल में बीज पड़ता है | इस रथ को कहाँ से ढूँढा, पूर्वी बंगाल से ढूँढा | ढूँढा तो, तो पूर्व से प्रत्यक्षता होनी चाहिये, ईशान कोण में क्यों चला गया क्योंकि नेपाल का भी महत्व है | जिस समय नेपाल निकलता है, उसका अर्थ क्या है ? नई दुनियां का पालना करने वाला | तो एडवांस पार्टी में वो ग्रुप कौन सा है ? जो नई दुनियां का पालना करने वाला ग्रुप है ? विजयमाला | इसलिए नेपाल उत्तर दिशा और बंगाल पूर्व दिशा दोनों के बीच का कोण है ईशान कोण जहाँ से ईश्वर प्रत्यक्ष होता है | [ [Varta-374, Time-23....

एडवांस वाले सब कहेंगे क्या हमारा लौकिक बाप प्रजापिता है? विधर्मी कहेंगे, क्या?

 एडवांस वाले सब कहेंगे क्या हमारा लौकिक बाप प्रजापिता है? विधर्मी कहेंगे, क्या?  कि हमारा लौकिक बाप नहीं है। जो स्वधर्म के पक्के होंगे, पक्के सूर्यवंशी होंगे वो क्या कहेंगे? कि हाँ, हमारा लौकिक बाप, इस लोक में अगर हमारी कोई परवरिश करने वाला है, अगर कोई हमें जन्म देने वाला है, ब्राह्मण का जन्म, तो वो तो हमारा, हमारा तो भई लौकिक बाप इस लौकिक दुनिया में मौजूद है कि नहीं? कि लौकिक दुनिया को छोड़ करके दादा लेखराज की तरह अलौकिक बन गया? है ना!*  ★  एडवांस वाले ब्राह्मण सब कहेंगे कि हमारा प्रजापिता ब्रह्मा लौकिक बाप है? सब, सब कहेंगे हमारा लौकिक बाप है? अगर उनसे पूछा जाए तुम्हारा लौकिक बाप कौन है इस दुनिया में? तो सब कहेंगे? सरेण्डर हों या नॉन सरेण्डर हों सब कहेंगे? हाँ या ना? सब कहेंगे- हाँ, है? जितने भी सरेण्डर हुए? ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ अपन को सरेण्डर समझते हों या सरेण्डर हो गए, सब कहेंगे कि हमारा लौकिक बाप है प्रजापिता ब्रह्मा? अरे, कोई जवाब ही नहीं!.... हाँ, विधर्मी कहेंगे, क्या? कि हमारा लौकिक बाप नहीं है। जो स्वधर्म के पक्के होंगे, पक्के सूर्यवंशी होंगे वो क्या कहेंगे?...

टाइम की वैल्यू है।

 टाइम की वैल्यू है।  न अपना टाइम वेस्ट करना है न दूसरों का। इस तरीके से समझाना है कि समय किसी का बर्बाद न हो। परख करके समझाना पड़ता है ना। हाँ। तो किस प्रकार से हम उनको समझावें जो जल्दी उनकी बुद्धि में बैठें, परख करके समझाओ। ऐसे क्यों कहा? आराम से समझाओ न, क्यों ऐसे कहा टाइम वेस्ट न करो??_*  _★  *कैसे हम किसका कल्याण करे, क्या क्या समझाए, किस कैटेगरी की आत्मा को क्या समझाए, जो उसका कल्याण हो जाये। परख करके समझाना पड़ता है ना। हाँ। तो किस प्रकार से हम उनको समझावें जो जल्दी उनकी बुद्धि में बैठें, हाँ? उनका भी टाइम वेस्ट न हो, और हमारा भी टाइम वेस्ट न हो। क्यों? अरे तसल्ली से समझाओ, टाइम वेस्ट की क्या बात? कोई ट्रैन छूटी जा रही है क्या? अरे भाई, हाँ ट्रैन छूटी जा रही, पता नही ये विनाश सामने खड़ा है, आज हो जाए, कल हो जाए कुछ पता है? वो तो सामनेे खड़ा है। कभी कभी सुरु हो सकता है। इसलिए विनाश सुरु होने से पहले से जल्दी जल्दी वो भी समझ जाए समझनेे वाला, और हम भी? हम भी अपना टाइम वेस्ट न करे, उसका भी टाइम वेस्ट है। तो यही पुरुषार्थ किया जाता है ना। तो आज की दुनिया मे सब से ज्यादा...

8 की माला

 ★ *8 की माला बहुत ऊपर नीचे होती है, क्योंकि 8 ऐसे वंडरफुल पुरुषार्थी हैं कि धक्क से ऊपर चढ़ते हैं, ऊँची स्टेज में और धक्क से नीचे उतर जाते हैं।* नीचे उतरना कैसे होता है और ऊपर चढ़ना कैसे होता है?? बाबा कहते हैं कोई विकार में गिरते हैं तो जैसे 5 मंजिल से नीचे गिर जाते हैं, ये हुआ नीचे गिरना और याद में ऊँचे चढ़ जाना, याद की उंचाई में जो पुरुषार्थ किया जाता है, जो ईश्वरीय सेवा की जाती है उसका रिजल्ट भी वंडरफुल होता है। अच्छे-अच्छे वारिसदार बच्चे निकलते हैं। तो जिन्न के मुआफिक पुरुषार्थ कहा जाता है। ऊपर चढ़ना होता है याद की यात्रा से, जो याद है उसे योगाग्नि कहा जाता है। ये जिन्न काहे की औलाद है??? अग्नि की औलाद है। कौन सी अग्नि?? योग की अग्नि। फिर नीचे गिरते हैं तो काम की अग्नि। काम की भी अग्नि है तो याद की भी अग्नि है; इसलिए जिन्नात को अग्नि की पैदाइश बताया!  *Varta-637*

सबसे अच्छा चुप हो जाओ।

 सबसे अच्छा चुप हो जाओ। कोई धमचक्कर मचाता है, चुप हो जाओ।  *क्यों भाई??*  चुप ही बने रहेंगे तो क्या परिवर्तन हो जाएगा??  *होगा।*  वाचा की शांति आएगी ना।  *अगर बोलते ही रहेंगे, दोनों तरफ से बोलते रहेंगे, झगड़ा होता रहेगा, वाइब्रेशन टूटते रहेंगे, मनसा भी चलती रहेगी, हो सकता है कर्मणा भी चल जाए*।  तो बताया, चुप रहेंगे लगातार तो मनसा का वाइब्रेशन तीखा हो जाएगा कि नहीं चुप रहने से??  *चुप रहने से मनसा का वाइब्रेशन तीखा हो जाता है तो कैसे भी आत्मा हो उसको चेंज होना ही पड़ेगा*  बी सी डी 2755 44 मिनट

बीमारी आने का कारण क्या?

 बीमारी आने का कारण क्या? *जो योग में नहीं होंगे, कोई को देखेंगे तो चलायमानी जरुर आती हैं। दृष्टि चलायमान हो जावेगी। अपनी परीक्षा लेनी होती हैं ना।बाप की याद में ही रहते हैं, तो कोई भी प्रकार की बीमारी नहीं आती।बीमारी कब आती हैं?*           *बीमारी आने का मूल कारण-- बाप की याद के अलावा औरों औरों की याद बीच में आती हैं ,व्यभिचारी याद आती है, व्यभिचारी खयालात आते हैं तो बीमारी भी जरूर आयेगी। अगर एक की याद में टिक जावें तो बीमारी सब खलास होने लगेगी।* Vcd 393(03.02.1967)10मि

कैसे पता चले कि 63 जन्म में हमारे ज्यादा नजदीक कौन रहा?

 इस बात का कैसे पता चले कि 63 जन्म में हमारे ज्यादा नजदीक कौन रहा? इस संगम युगी ब्राह्मण जीवन में जो ज्यादा हमारा पीछा करता है, जिससे हम पीछा छुड़ाना चाहता है ,फिर भी पीछा छूटता नहीं, उसकी याद आ ही जाती है।  फिल्म बनाने वालों ने गीत बना दिया --- *जिन्हें हम भूलना चाहे ,वह अक्सर याद आते हैं। 1-2 बार याद नहीं आते अक्सर करके बार-बार याद आता है। तो क्या करें?* बार-बार याद नहीं आए, उस से कैसे पीछा छुड़ाएं?  घड़ी घड़ी धर्मराज को याद करे। वह मार मार के सारा कुसंग झाड़ देगा। आत्माएं ये समझती हैं, यह हमारे बड़े सहयोगी है। क्या समझती है आत्माएं? यह हमारे जन्म जन्मांतर की सहयोगी  है। तब तो हमारे साथ इनका इतना हिसाब किताब है।धर्मराज कह रहे हैं यह तुम्हारे सहयोगी नहीं है, यह तुमको जन्म जन्मांतर नीचे गिराने वाला हैं। इस दुनिया में ऊंचा चढ़ाने वाला कोई नहीं, सब नीचे गिराने वाले हैं। *ऊंचा चढ़ाने वाला सिर्फ एक बाप है, जो अंत में आता है इसीलिए कहते हैं-- मांमेकम याद करो।*  vcd278(38मि)

अष्टदेव के लक्षण.

 महाकाल के पक्के बच्चे 8, अष्टदेव के लक्षण ★ तो पक्के कितने होगें? आठ पक्के होगें। उनको पक्का पक्का ज्ञान होगा। जिनको पक्का पक्का ज्ञान होगा जब से  ज्ञान में आए, एडवांस में आए, तब ही से उनके अन्दर लक्षण कौन  से देखने में आवेगें? नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा। भले 100 परसेन्ट देखने में नहीे आवेगें लेकिन परसेनटेज में वो नष्टोमोह जरूर होगें, जब से ज्ञान में निकले है। वो लौकिक संबधियों को सहयोग देगें? देगें? क्यों? एक शिवबाबा दूसरा ना कोई। क्योंकि लौकिक संबधियों का ज्ञान मिलते ही उनके अन्दर भाव नष्ट हो जाता है। ये तो हमारे अन्तिम जन्म के संबंधी है। हमारा तो फाउंडेशन का पहला पहला जन्म है संगमयुग में हम उसके सहयोगी बनेगें हम और कोई के सहयोगी नहीं बनेगें। तन से भी, तन भी उसी क्षण से कहाँ अर्पण करेगें?? तन की सेवा, लौकिक संबंधियों को? नहीं। कहाँ अर्पण करेगें? ईश्वरीय सेवा जहाॅ चल रही होगी वही तन की सेवाए अर्पण करेगें। वो नहीं देखगें कि यहां यो हमें लगातार खिचड़ी खाने को मिल रही है। अरे, हम तो हजारों रूपया महीनों की नौकरी कर रहे है, हम काहे के लिए खिचड़ी खाए? नहीं। नौकरी भी छोड़ देगें या रखे...

रिजल्ट में किस समय का पुरुषार्थ काउंट होगा?

रिजल्ट में किस समय का पुरुषार्थ काउंट होगा? *जो भी पुरुषार्थ है वो पुरुषार्थ अंतिम समय का ज्यादा काउंट होगा या मध्य के समय का या  आदि के समय का ज्यादा काउंट होगा?? अंत के समय का। अंत मते सो गते।*  *मुरली में भी बताया वास्तव में बेहद का अमृतवेला कब होगा? जो बाप ही आकर बताते हैं वास्तव में कोई मनुष्य गुरु नहीं बता सकता। जब कृष्ण वाली आत्मा, पहला पत्ता अपने स्वरूप को और बाप के स्वरूप को पहचान लेगी तो उस समय जिसकी जैसी बुद्धि होगी और जैसा अमृतवेला होगा वही काउंट किया जाएगा अभी की बात नहीं है।* वार्ता 795

गीता का भगवान कौन?

  गीता का भगवान कौन?  अभी आज का टॉपिक है की गीता का भगवान् कौन? तो ये टॉपिक हम शुरू करते है एक वात है की आज तक दुनिया में जितनी भी खुदिया हुई है (हरप्पा, मोहन जोद्रो में) या दुनिया के किसी भी प्रान्त में वहा ज्यादा से ज्यादा शंकर का सारभौम यादगार, लिंग मूर्ति मिली है| तो बो ही इस सृष्टि का आदिपुरुष है| शंकर को आदि पुरुष कहा जाता है| गीता के 11/38 नंबर श्लोक में लिखा है (त्वमादिदेव पुरुषम पुराण त्वमस्य विश्यस्य परमं निधान ) – सब देवो से भी प्रथम देवादिदेव शिव-शंकर पुरातन पुरुष है| सब कुछ जानने बाले है| जगत विज से बृक्ष के जैसे इनसे विश्त्रित हुई है|   शास्त्र में दिखाया गया है की विष्णु और ब्रह्मा को| दोनों शंकर के लिंग का आदि और अंत ढूढने गये , बिष्णु उपर की तरफ गया और ब्रह्मा निचे की तरफ पर किसीको उसका आदि या अंत नहीं मिला| जो गीता में लिखा है की मै अदि और अनंत हु| अजन्मा, असोचता और अकर्ता हु| तो कृष्ण को हम ऐसे भगवन नहीं कह सकते क्योकि उसे जन्मते दिखाया है और मरते भी दिखाया की ब्याध ने उसके पैर में तीर मारा और बो मर गया पर जो भगवान होगा बो तो न जन्मेगा और न मरेगा| ...

अष्टदेवो के लिये सदा ही अमृतवेला है

 अष्टदेवो के लिये सदा ही अमृतवेला है। *जिसे सेवा से फुर्सत ही नहीं मिलती उसके लिए अमृतवेला क्या? लगातार की लगन है, जिसे कहते हैं-- निरंतर योगी, सो निरंतर सहयोगी।* उनके लिए तो सदा ही अमृतवेला है। उनके लिए हर समय अमृतवेला है। सोते जागते, चलते, फिरते जो बोला है--  *वो बाप के बगैर नहीं रह सकते, बाप उनके बगैर नहीं रह सकते।* सेवा का कमाल है। वार्ता 276(23मि

बेहद का पुरुषोत्तम संगमयुग, यानी बेहद का अमृतबेला कब से है?

 बेहद का पुरुषोत्तम संगमयुग, यानी बेहद का अमृतबेला कब से है?  क्या 1976 से कहेंगे?? भूलने का अभ्यास सुबह को तो कोई कुछ भी ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती है, प्रैक्टिस हो जाएगी तो कुछ भी नहीं। वह अभ्यास किया जाता है। कहते हैं ना प्रैक्टिस मैक्स मैन परफेक्ट_* _*★  मुकर्रर रथ धारी आत्मा को कोशिश करनी पड़ती है कि शरीर को भूले तो शरीर की जो खीटपीट है बीमारियों की, या पिछले कर्म भोग की, वह भूलना होता है। वह शरीर को भी भूलना होता है तो वह दुनिया को भी, यह पुरानी दुनिया को भी भूलना होता है। ये 84 जन्म का पुराना शरीर है। और दुनिया भी अंतिम जन्म वाली है। तो यह जो भूलने का अभ्यास रहता है, कौन से टाइम? हाँ?  संगमयुग? संगमयुग में भी कौन सा टाइम? हाँ?  बेहद का अमृतवेला। कौन सा है बेहद का अमृतवेला? कब होता है बेहद का अमृतवेला? वह ही पुरुषोत्तम संगमयुग। सारा ही पुरुषोत्तम संगमयुग अमृतवेला होता है?? हाँ, 76 से? अच्छा 76 के बाद बीमारी धीमारी तो नहीं आता है? हाँ? बीमारी तो आएगी, शरीर तो अंत तक सड़ते जाएंगे, आत्मा पावरफुल होती जाएगी। तो कोशिश करके इस देह को भूलना होता है। दुनिया को भ...

बेहद का अमृतवेला कब होता है?

 *बेहद का अमृतवेला कब होता है?* *विचार सागर मंथन आत्मा करती है ।।मक्खन निकालना होता है। मक्खन माना--सार। मंथन करेंगे तो मक्खन निकलेगा। क्या??*        * *मैं आत्मा कौन? मुझ आत्मा का सृष्टि रुपी रंगमंच पर क्या विशेष पार्ट है??*  *मक्खन निकलता है कि मैं ज्योति बिंदु आत्मा तो हूं, लेकिन 500- 700 करोड़ मनुष्यों के बीच मेरी स्टेज क्या है?*  *सवेरे में ही यह मक्खन निकलता है ।सवेरे सवेरे यह मक्खन निकालना होता है मंथन करके। ज्ञान सागर का मंथन करेंगे, तो मक्खन निकलेगा।*  *तो बेहद का सवेरा कौन सा है? हर जगह (देशो) में अमृतवेला भी अलग-अलग टाइम पर होता है। तो जिस धर्म खंड में आत्माओं को पार्ट बजाना है ,उनका अमृतवेला भी आगे पीछे होगा कि नहीं ?* *बेहद ब्राह्मणों की दुनिया में जब रिहर्सल होती है ब्रॉड ड्रामा की,तो अमृत वेले का टाइम कौन सा है??*  *बेहद के सूर्योदय की बेला कौन सी है?*  *उस बेला का पता होगा, तो ज्यादा ध्यान देंगे।*   *उस एक बाप को पहचान कर अमृतवेले पुरुषार्थ कर के नजदीक जाने का पुरुषार्थ करना है।*   ★ _वो पुरुषार्थ जो असली अमृतवे...

108 आत्माएं कैसी हों? कैसी पक्की?

 *108 आत्माएं कैसी हों? कैसी पक्की?*  पक्की का मतलब क्या? *👉तन से, मन से, धन से, समय से, संपर्क से ,अपनी बहू बेटियों के संबंध से हर प्रकार से अर्पण हुए एक के प्रति एक स्नेह सूत्र से बंधी हुई आत्माएं।*                 जो ऐसी पुरुषार्थ स्टेज पर पहुंची हुए आत्माएं होंगी, कि *जब परीक्षा ली जाए, तो यह साबित करके दिखाएं कि हमारा जो अति स्नेही से स्नेही, और बड़े से बड़ा संबधी है,इससे बड़ा संबंधी हमारा दुनिया में कोई है ही नहीं, यह साबित हो जाए, तो ऐसे 108 आत्माएं।* उनका संगठन सुत्र जहां पक्का तैयार हो जाए।  *एक स्नेह के सूत्र में वह आत्माएं बंधी हुई हो।* ऐसे नहीं घड़ी में रुष्टा घड़ी में सुष्टा, एकदम प्रसन्न हो जाए और एकदम बाप से अप्रसन्न हो जाए। ऐसी उस लिस्ट में नहीं होंगे। *👉कैसे होंगे? चाहे प्यार करें चाहे ठुकराए। ऐसी स्टेज वाले जो मणके होंगे ,वह 108 मणको का संगठन जब बन जाए। उनका प्रूफ मिल जाए, उनकी पक्की परीक्षा हो जाए, और वह परीक्षा में पास हो जाएं, तब लिख सकते हैं--चैतन्य दिलवाड़ा मंदिर।* केसेट 33(48मि)

108 में पुरुष होंगे या स्त्री होंगे?

 *108  में पुरुष होंगे या स्त्री होंगे*? 👉बैल भी होगा गाय भी होगा। तो बैल पाल कन्हैया  तो गाया नहीं जाता। अड़ियल बैल को नही पालेगा, बाकी बैल से खेती करेगा ना? ज्ञान की खेती करेगा या नहीं? *तो स्त्रीयां भी होंगे, और पुरुष भी होंगे। लेकिन सब किस प्रवृत्ति की होंगे? किस प्रकृति के होंगे ? आत्मा आत्मा भाई भाई की प्रवृत्ति, प्रकृति में होंगे। दूसरे कोई बृत्ति अपने अंदर पलपने वाले नहीं होगी। देह की कोई प्रबृत्ति नहीं होगी।* *केसेट- 33*(50मि

दिल तख्त नशीन बच्चे कौन है?

 अपने को सदा दिल तख्तनशीन समझते हो ? यह दिलतख्त सारे कल्प में सिवाए इस संगम युग के कहाँ भी प्राप्ति नहीं हो सकता। *दिखतख्त पर कौन बैठ सकता है? जिसकी दिल सदा एक दिलाराम बाप के साथ है। एक बाप दूसरा न कोई ऐसी स्थिति में रहने वालों के लिए स्थान है दिलतख्त* । तो किस स्थान पर रहते हो ? अगर तख्त छोड़ देते हो तो फाँसी के तख्तेपर चले जाते । जनम जन्मान्तर के लिए माया की फाँसी में फंस जाते हो। *यह तो है बाप का दिलतख्त या है माया की फाँसी का तख्ता* । तो कहाँ रहना है? *एक बाप के सिवाए और कोई याद न आये* अपना शरीर भी नहीं। अगर देह याद आई तो देह के साथ देह के सम्बन्ध, पदार्थ, दुनिया सब एक के पीछे आ जायेंगे। जरा संकल्प रूप में भी अगर सूक्ष्म धागा जुरा हुआ होगा तो वह अपनी तरफ खींच लेगा। इसलिए मंसा, वाचा कर्मणा में कोई सूक्ष्म में भी रस्सी न हो । सदा मुक्त रहो तब औरों को भी मुक्त कर सकेंगे। आजकल सारी दुनिया माया के जाल में फँसकल तड़प रही है, उन्हें इस जाल से मुक्त करने के लिए पहले स्वयं को मुक्त होना पड़े। जितना निर्बन्धन होंगे उतना अपनी ऊंची स्टेज पर स्थित हो सकेंगे। अव्यक्त वानी 09.03.1981