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Showing posts from October, 2022

मक्खन चुराना, मटकी फोड़ ना, यह किसका काम था?

 *मक्खन चुराना, मटकी फोड़ ना, यह किसका काम था?  प्रजापिता का काम था। लेकिन नाम रख दिया ब्रह्माकुमारीओ ने ब्रह्मा बाबा का। जो गीता किताब लिखी है, अद्भुत जीवन काहिनी। उस अद्भुत जीवन काहिनी में किसका नाम डाल दिया? ब्रह्मा बाबा का नाम डाल दिया। प्रजापिता को उड़ा दिया। बाबा ही मुरली में कहते है त्रिमूर्ति का चित्र बनाते है। उस त्रिमूर्ति की चित्र में त्रिमूर्ति शिव की लाश भी गुम कर दी। उसका नाम निशान गुम कर दिया। तो वास्तव में वह कृष्ण कहो या भगवान कहो वह सतयुग का कृष्ण नही है, बच्चे रूप में जन्म लेने वाला। वह कौन सा कृष्ण है? संगमयुगी कृष्ण है।*   *Varta 1809*

फाल्गुन कौन है??

 *फाल्गुन कौन है:-* वर्ष की शुरुआत चेत्र मास से होती हैं,उसमे कौनसी ऋतु होती है?? वसंत ऋतु। सतयुग को कौनसी ऋतु कहेंगे??सतयुग को वसंत ऋतु व चेत्र मास कहेंगे। और जो कलियुग के अंत में जो संगमयुग आता है पुरुषोत्तम संगमयुग उसको अन्तिम मास कहेंगे, फाल्गुन। क्यो कहेंगे?? जैसे ब्रह्मा का बच्चा ब्राह्मण वैसे फल शब्द से बनता है फाल। जो गुण,कई गुण हो जाते है।सतयुग में कई गुण होते है ?? गुणो का राजा जो सहनशक्ती धारण करने वाली आत्मा है वो सतयुग की जो फ़र्स्ट आत्मा है या पुरुषोत्तम संगमयुग में जो फ़र्स्ट होता है वो है??सतयुग की जो फ़र्स्ट आत्मा हैं,वो है फाल्गुन या जो पुरुषोत्तम संगमयुग की फ़र्स्ट आत्मा हैं वो फाल्गुन??पुरुषोत्तम  संगमयुग की फ़र्स्ट आत्मा हैं वो फाल्गुन। शिवबाबा से ज्यादा गुण किसी में होंगे क्या?? गुणों का सागर शिव बाबा है या शिव बाबा का बच्चा है?? शिव बाबा है। *वार्ता--722*

शिव परमपिता परमात्मा शरीर नहीं बदलते??

 *शिव परमपिता परमात्मा शरीर नहीं बदलते??*  अरे! 36 मे, 47 मे, 76 मे या भविष्य मे आने वाले 40 वर्ष पुरे होने वाले टाइम पर शरीर बदलते है या नहीं बदलते? बदलते है!? अभी तो कहा-- मै घड़ी-घड़ी शरीर तो नहीं बदलते हूँ, तुम बच्चे आत्माए घड़ी घड़ी शरीर बदलते हो। तो *सन 36 मे भी जिस शरीर मे आया, वो शरीर बाद मे लोप हो गया क्या? रहता है या नहीं रहता है?? नहीं रहता!! अच्छा, शरीर एक प्रकार के होते है या दो प्रकार के? जो स्थूल शरीर हम देखते है, यही शरीर है या ये स्थूल शरीर छोड़ने के बाद भी शरीर रहता है? सुक्ष्म शरीर रहता है न, तो मै तो मुकर्रर रथ मे आता हूँ। सुक्ष्म शरीर जो वाईब्रेशन वाला शरीर है, वो तो खलास नहीं होता। भले दूसरे जन्म ले, 84 जन्म ले, सुक्ष्म शरीर तो अपने पूर्वजन्म मे के संस्कार के अनुसार रहता ही है। तो वो सुक्ष्म शरीर धारी आत्मा, वाईब्रेशन के आधार पर उसमे शिवबाप काम करते रहते है। 36 मे भी आए ज्ञान का बीज डाला, जो ज्ञान का बीज डाला वो भी तो एक वाईब्रेशन है। वो वाईब्रेशन का बीज ब्रह्मा के वाणी मे भी है दादा लेखराज की वाणी मे, वो बीज जब बाप प्रत्यक्ष होते है तो विस्तार मे प्रत्यक्ष हो...

आत्माएं परमधाम में कितनी जगह में रहते है??

***आत्माएं परमधाम में कितनी जगह में रहते है??***  ** *जो आत्माएं है वो विंदू विंदू है , विंदू रूपी स्टेज वाले है । जो भी विंदू रूपी स्टेज वाली आत्माएं है , आत्मिक स्थिति वाली है , वो सहद की मक्खियों की तरह इकट्ठी रह सकती है के नहीं ? रह सकती है ।*  *कहते है स्थूल में जगह नहीं चाहिए , दिल में जगह चाहिए ।*  *तो जो भी आत्मिक स्थिति वाले होंगे , जब लास्ट विनाश होगा उस समय वो चाहे माउंट आबू में हो और चाहे पैराडाइज में हो , थोड़े से स्थान में होंगे । और वो स्थान ऐसा सुरक्षित होगा, जितना और दुनियां में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं होगा । उस वाईब्रेशन में माया के पांच विकार अथवा प्रकृति के पांच तत्व अपना आक्रमण सफल नहीं कर सकेंगे , इतना वाइब्रेशन तीखा होगा ।* *इसलिए बोला मूरली में की आत्माएं परम धाम में कितनी स्थान में रहती होंगी ? जो भी 500 करोड़ आत्माएं है , उनके लिए कितना स्थान चाहिए ? ____ एक (1) फर्लांग । एक फर्लांग ऊंचाई , एक फर्लांग चौड़ाई , एक फर्लांग लंबाई ~~ ऐसी कोई बिल्डिंग तैयार हो सकती या नहीं ? जिस बिल्डिंग में तीन पैर पृथ्वी हो लेटने और वैठने के लिए , जैसे ट्रेन में ...

परिवार

          परिवार की आवश्यकता परिवार पर निश्चय भी आवश्यक है क्योंकि बाप ने आते ही परिवार को पैदा किया। तो जैसे बाप के निश्चय है वैसे परिवार में भी निश्चय आवश्यक है , क्योंकि परिवार है किसका!!! इतना परिवार विश्व में किसका नहीं है। आप जितना परिवार को चेक करो विश्व में, किसका है?? किसी डिवाइन फादर का भी नहीं है। वहा तो फॉलोअर है। परिवार के साथ सेवा में और संबंध में भी रहते हो। परिवार का निश्चय आपका 21 जन्म चलना है। परिवार में आने से पता चलता है की मैं इतने बड़े परिवार में निश्चय बुद्धि होकर चल रहा हु। परिवार में ये ध्यान देना पड़ता है को *परिवार में हरेक के संस्कार भिन्न भिन्न है लेकिन आपकी यादगार माला है। कहा 1 नंबर कहा 108 नंबर।* तो परिवार में चलते चलते एक दूसरे के संस्कारों को समझ एक राज्य, एक धर्म , एक होकर चलना है। हरेक के प्रति शुभ भावना और शुभ कामना की स्थिति पर चलना है। कोई समझे परिवार से हमे क्या है? परिवार नहीं तो बाबा तो है। लेकिन यहां धर्म और राज्य दोनो की स्थापना है। यहां तो आप सबको राज्य भी करना है और इसी जन्म में करना है तो उसमे परिवार की जरूरत होती ह...

धारणा शक्ति कैसी हो?

 *धारणा शक्ति कैसी हो?*  जिस सत्य को धारण करने वाली सती कही गई,  वह सत्य धारण करने वाला, सत्य माना ज्ञान। *वह सत् धारण करने वाला पहले पहले पुरूष बुद्धि में धारण करने वाला, प्रैक्टिकल कर्मेंद्रियो में नही बताया, ज्ञान पहले बुद्धि में धारण होगा या कर्मेंद्रियों में धारण होगा पहले? तो पहले पहले बुद्धि में धारण करने वाला पुरुष, या स्त्री? पुरुष।*  जो *पुरुष सत्य को बुद्धिरूपी योनि में धारण करता है बुद्धि रूपी पेट में धारण करता है, वह पुरुष ही भगवान के रूप में पूजा जाता है*। सत्य उस पुरुष में है। पुरुष से स्त्री में आता है,  वह है सूक्ष्म सत ज्ञान का सत। क्या है? ज्ञान का सत है। ऐसे ही पुरुषों में स्थूल सत भी है। हरेक पुरुष रूपी बाप में वह सत्य है।  उस सत्य से यह सृष्टी उत्पन्न होती है, *जिस सत को अगर माता सही रुप मे धारण करें अव्यभिचारी रूप से, तो वह माता सती कही जाती है।* माताओ में सब से जास्ती पावरफुल कही जाती है। इसीलिए कहा जाता है घर की स्त्री अगर अच्छी हो तो घर स्वर्ग बन जाता है। और घर की स्त्री अगर व्यभिचारिणी है, तो घर नरक बन जाता है। तो सत को धारण करने ...

शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित, कोटि कलेशा।

  शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित कोटि कलेशा *इस दुनिया में जो भी धर्म पितायें आए तो समाज की सत्ताधीशों ने, गद्दीनशीनों ने उन धर्म पिताओं का जोर शोर से विरोध करना शुरु कर दिया। धर्म के धक्के खाने के लिए मजबूर कर दिया।* *बुद्ध को मजबूर किया, मोहम्मद को मजबूर किया, क्राइस्ट को मजबूर किया या नहीं किया??*                *ये धर्म के धक्के बहुत प्रसिद्ध है। हिस्ट्री में भी प्रसिद्ध हैं, तो शास्त्रों में भी प्रसिद्ध हैं।* तो जो इस सृष्टि रुपी रंगमंच पर ग्रेट ग्रेट ग्रैंड फादर का पार्ट धारी होगा, सत्य सनातन धर्म का स्थापक होगा, धर्म पिता होगा वो कितने धक्के खाएगा धर्म के??*             *जो कवियों ने गाए हुए हैं----- "शिव दधीचि हरिचंद नरेशा, सहे धर्म हित, कोटि कलेशा।* *उन्होंने तो अतिश्योक्ति अलंकार डाल दिया। कोटि- माना करोड़ों दुख सहे।* *मुसलमान लोग तो आज भी कहते हैं ।उनकी कुरान में भी लिखा है-- जब कयामत होगी तो खुदा के बंदे बड़े आराम से रहेंगे। तो क्या,जो भगवान का बच्चा प्रैक्टिकल में सत्य धर्म की स्थापना करेगा और ...

इस ज्ञान का मुख्य एग्जाम है नष्टो मोहा।

ईश्वर बाप के बच्चे बो जो बाप के धंधे का अनुकरण करे, पेट की धंधा न करे। कहेंगे छोटे छोटे बाल बच्चे है, उनकी परवरिश कौन करेगा??? कहेंगे न?? तो बाप कहते है जिस परिवार में छोटे छोटे बच्चे है, कारने अकारने बाप का शरीर छूट जाता है , तो बच्चे मर जाते है क्या??? संबंधी संभालते या नहीं संभालते?? और संबंधियों के बुद्धि को प्रेरित करने वाला कौन?? बाप। *सबके औरक प्रेमक हृदय दिन बंधु रघुनाथ*। सबके हृदय में प्रेरणा देने वाला संगमयूग में प्रेरणा देने वाला कौन होता है?? एक ही बाप है जो बापो का बाप होता है। उस सबको संभालने वाला है। तो फिर, रचैता हम अपने को माने?? या सबका रचैता एक है??? अहंकार आता है, क्या?? हम संभालेंगे तो संभले रहेंगे, हम नहीं संभालेंगे तो मर जाएंगे। ये अहंकार नहीं है??? अहंकार है!!! ये अहंकार को त्याग देना चाहिए। सब कुछ उसको अर्पण करना चाहिए। लेकिन ये नहीं कहेंगे की बाल बच्चो में हमारा मोह लगा हुआ है, ये कहेंगे हम संभालने वाले है। हम नही संभालेंगे तो कौन संभालेगा?? तो *बाप कहते है ईश्वरीय ज्ञान की जो पढ़ाई है, इस ज्ञान का मुख्य एग्जाम कौनसा है?? नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा। जबसे ज्ञान में ...