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Showing posts from July, 2022

यहाँ पर बेहद की कुमारियाँ है , बेहद की बुढ़िया है।*

 *छोटेपन में बुद्धि तीखी होती है ,धारणा करने की।* *क्यों?*  क्योंकि प्योरिटी ज्यादा होती है।प्योरिटी की पावर बच्चों में ज्यास्ती होती है। इसलिए उनको धारणा ज्यास्ती होती है।  और *बुढ़िया इतनी ज्ञान रत्नों की धारणा कर न सके। क्योंकि बुद्धि कैसे हो गई ? तामसी हो गई , विकारी हो गई। बुढ़िया इतनी ज्यास्ति नही समझाय सकती है।*  *यहाँ भी बाबा कुमारियों का ज्यादा मान रखते है। लेकिन यहाँ पर बेहद की कुमारियाँ है , बेहद की बुढ़िया है।*    ऐसे न हो बुद्धि हद में चली जाए। *दुनिया भी क्या करती है? ज्यादा बुद्धि किसके पीछे भागती है? कुमारियों के पीछे भागती है। क्योंकि काम विकार प्रधान है। सारी दुनिया में।*  ये तो कोई बड़ी बात नही हुई।यहाँ बाबा हद की बात नही कह रहे है बेहद की बात कह रहे है। *यहां अगर माता भी है और ज्ञान में आने के बाद उसने पवित्र रहना शुरु कर दिया तो क्या है ? वो कुमारी है। ज्ञान में आने के बाद उसने कभी अपवित्रता को टच किया ही नही। तो वो भी कुमारी ही है।* ऑडियो 259 @34 मिनट

अभी शिव वंशी हो गए ।शिव वंशी भी हो तो यहां तुमको कोई शिवकुमारी नहीं कहेंगे।

       अभी शिव वंशी हो गए ।   तुम कोई कुख वंशावली ब्राह्मण तो हो नहीं। ब्रह्मा मुख से वेद वाणी सुनकर तुम्हारा फैसला हुआ कि हम ज्योति बिंदु आत्मा हैं, शरीर नहीं हैं। तो अभी शिव वंशी हो गए ।शिव वंशी भी हो तो यहां तुमको कोई शिवकुमारी नहीं कहेंगे।? क्यों नहीं कहेंगे। क्योंकि आत्मा मेल है। बिंदु बिंदु आत्माएं सब मेल हैं, फीमेल तो कोई नहीं है ।और एक बाप के बच्चे हैं। कुमारी तब कहेंगे जब ब्रह्मा के तन में प्रवेश होकर ज्ञान देते हैं। तो भी शिवकुमार कुमारी नहीं कह सकते। क्योंकि शिव के बच्चे दो तरह के होते ही नहीं हैं।हाँ ब्रम्हाकुमारी कहेंगे ,तो यह शिवकुमारी अक्षर रांग है। शिव कुमार अक्षर भी रॉन्ग है। क्योंकि शिव तो बिंदी है। बिंदी के बच्चे भी सब बिंदी,तो उनमें फ़र्क कैसे कैसे पता चलेगा? क्योंकि बिंदी आत्माएं तो सब मेल  है, कुमार हैं।* (5-8-18)