यहाँ पर बेहद की कुमारियाँ है , बेहद की बुढ़िया है।*
*छोटेपन में बुद्धि तीखी होती है ,धारणा करने की।* *क्यों?* क्योंकि प्योरिटी ज्यादा होती है।प्योरिटी की पावर बच्चों में ज्यास्ती होती है। इसलिए उनको धारणा ज्यास्ती होती है। और *बुढ़िया इतनी ज्ञान रत्नों की धारणा कर न सके। क्योंकि बुद्धि कैसे हो गई ? तामसी हो गई , विकारी हो गई। बुढ़िया इतनी ज्यास्ति नही समझाय सकती है।* *यहाँ भी बाबा कुमारियों का ज्यादा मान रखते है। लेकिन यहाँ पर बेहद की कुमारियाँ है , बेहद की बुढ़िया है।* ऐसे न हो बुद्धि हद में चली जाए। *दुनिया भी क्या करती है? ज्यादा बुद्धि किसके पीछे भागती है? कुमारियों के पीछे भागती है। क्योंकि काम विकार प्रधान है। सारी दुनिया में।* ये तो कोई बड़ी बात नही हुई।यहाँ बाबा हद की बात नही कह रहे है बेहद की बात कह रहे है। *यहां अगर माता भी है और ज्ञान में आने के बाद उसने पवित्र रहना शुरु कर दिया तो क्या है ? वो कुमारी है। ज्ञान में आने के बाद उसने कभी अपवित्रता को टच किया ही नही। तो वो भी कुमारी ही है।* ऑडियो 259 @34 मिनट