Posts

Showing posts from September, 2021

सूर्यवंशी की जो माला बनती है ना 108 कि, उसमे भी 8 ग्रुप कैसी है?

*सूर्यवंशी की जो माला बनती है ना 108 कि, उसमे भी 8 ग्रुप कैसी है?? देहभिमानी साढ़े है या देहभीमान को जल्दी छोड़ देते हैं? मानलों चंद्रवंशी है, चंद्रमा का पार्ट बजाने वाली आत्मा है सोम, सोमवार नाम पड़ता है नाज़ चंद्र बार। हाँ, तो वो आत्मा नाक रगड़ रगड़ करके संपन्न सम्पूर्ण बनती हैं, या शिवबाबा आतें है, सुनाते जाते हैं, स्वीकार करती जाती है, मानती जाती है, और चलने का पुरुषार्थ करती जाती है, तुरंत मान लेती हैं? मानती है तुरंत? ज्ञान सूर्य की जो रोशनी है, उस रोशनी को तुरंत स्वीकार करती है??  नही।*_    _*★ कौन पुजे जाते है? ब्राह्मण पूजे जाते है, जो ब्राह्मण से देवता पद पाते है, या क्षेत्रीय, वैशिया, या शूद्रों की पूजा होती है? किसकी पूजा होती है? ब्राह्मणों की पूजा होती है। तो ब्राह्मण नहीं बनना है पक्का? तो पक्के ब्राह्मण तो सूर्यवंशीओ को कहेंगे, लेकिन सूर्यवंशीओ में भी जो माला बनती है ना 108 की रूद्र माला, उसमें 8 ग्रुप कैसे हैं? हाँ? देहभिमानी साढ़े है या देहभीमान को जल्दी छोड़ देते हैं? मानलों चंद्रवंशी है, चंद्रमा का पार्ट बजाने वाली आत्मा है सोम, सोमवार नाम पड़ता है नाज़ चं...

अष्टदेव, लक्ष्मी और जगदम्बा में अंतर?

अष्टदेव, लक्ष्मी और जगदम्बा में अंतर?  अष्टदेव जितना पहचानते है बाप को, उतना जगदम्बा और लक्ष्मी भी बाप को पहचान नही पाती। और जितना जल्दी पहचानते, क्योंकि वह सूर्यवंशी है। और जो मुख्य भुजाए है उनमे एक भुजा तो राइट हैंड लक्ष्मी तो ऐसी है जो जल्दी बाप को पहचानती ही नही और दूसरी भुजा बाप को जल्दी पहचानती भी है तो भी तिरक जाती है माया की परीक्षा में!  अष्टदेव में तो फिनिशिंग में अंतर है। बहुत थोड़े समय के लिए अनिश्चय के चक्र में आति है। और आत्माए लंबे समय तक अनिश्चय। अष्टदेव जो है उनके भी तो नम्बर बनना है। अगर नम्बर नही बनेंगे तो नम्बर बनने के लिए माया जो है, वह उनको नीचे गिराएगी या नही? *मुरली में बोला-ऐसा अहंकार कोई ना करें, की माया हमको नही पछाड़ सकती।  चाहे वह अष्टदेव हो, चाहे वह राम कृष्ण की आत्माए हो, माया किसी को भी छोड़ती नही है। varta 114*

आदि ब्रह्मा सो विष्णु कौन है??

 ( ऊर्धमुखी ब्रह्मा) आदि ब्रह्मा सो विष्णु कौन है?? ★ बीज पिता माता में डालता है ना। तो अब्बल नंबर की माता कौंन जिसमे बीज डाला?? परा प्रकृति। परा प्रकृति कौन?? ये पराप्रकृति कौन हुआ?? लक्ष्मी??.... *लक्ष्मी  अव्वल नंबर का ब्रह्मा हुआ?? तो लक्ष्मी वाले आत्मा को ब्रह्मा सोे विष्णु, लक्ष्मी की आत्मा को विष्णु के शर में बैठा ना चाहिए।... वाह भैया!! परमब्रह्मा। हाँ, उसका लक्ष्य है ना ज्ञान सुनाने काज़ वह पूरा होना है ना। वही पूरा होता है। तो शुरुआत में जिसने ज्ञान सुनाया पूरी ब्राह्मण परिवार के संगठन को, वही हुआ ब्राह्मण चोटी। तो उसके द्वारा व्यास के द्वारा लिखा हुआ गीता का क्लेरिफिकेशन कराया। तो वही फिर आदि ब्रह्मा सो आदि विष्णु हुआ। क्या?? आदि विष्णु का मतलब विष्णु- विष्णु के 4 भुजाएँ है, वो लास्ट वाले ब्रह्मा और जो फर्स्ट ब्रह्मा है, जिसका शर ब्रह्मा के चार मुखों के ऊपर दिखाया जाता, वह ब्रह्मा अब्बल नंबर का ब्रह्मा हुआ। क्यों?? क्यों हुआ अब्बल नम्बर का?  अधोमुखी ब्रह्मा हुआ या ऊर्धमुखी ब्रह्मा हुआ? उर्ध माने ऊपर की और जिसकी बुद्धि जाए और। अधो जिसकी बुद्धि नीचे की ओर जाए। तो...

योग किससे लगाना है??

 योग किससे लगाना है?? इस सृष्टि पर जिसे साकार भगवान कहा गया जिसकी यादगार मंदिर में रखी है उसने क्या किया? काम विकार की इन्द्रिय से युद्ध करके दिखाया या भाग गया? युद्ध करके दिखाया, और जितके दिखाया। उसका तरीका भी बताया, क्या? कैसे? योगवाल से। आपन को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो, क्या मतलब? आपन आत्मा योतिर्विन्दू निराकार, मुझ बाप निराकार योतिर्विन्दू निराकार को याद करने से हो जाएगा? कैसे होगा? आपन को आत्मा समझ जो मनुष्य सृष्टि का बाप है हीरो पार्टधारी, उस हीरो पार्टधारी में शिव समान सदा शिव स्वरूप रहनेवाली योतिर्विन्दू आत्मा से योग लगायो। वो हमारा उस्ताद है।    VCD - 2355

तुम सब रूहानी क्षत्रिय हो। क्षत्रियों की विशेषता क्या रही?

*तुम सब रूहानी क्षत्रिय हो। क्षत्रियों की विशेषता क्या रही?*  श्रेष्ठ ब्राह्मणों की रक्षा करना, शूद्रो की नहीं। असुरों की रक्षा नहीं करेंगे। करेंगे किसकी?? जो पवित्रता का पालन करने वाली आत्माएं हैं दृष्टि से, वृत्ति से, वाइब्रेशन से, पवित्रता को तरजीह देने वाली पवित्रता का पुरुषार्थ करने वाली, उनकी तो रक्षा करेंगे। *जो ब्राह्मण नहीं है, या ब्राह्मण बनने का जिनका एम ऑब्जेक्ट नहीं है ,उनको मार-मार बाणों के छलनी करते रहेंगे।*            👉 *लड़ाई के मैदान में आने वाले को क्षत्रिय कहा जाता है।*            👉बिना लड़ाई के राजाई तो मिल ही नहीं सकती। लड़ने की ताकत ही नहीं होगी, तो मुकाबला कैसे करेगा?तो सामना करने की शक्ति विशेष होनी चाहिए।          *👉और मैदान में ही कोई ना आए, तो उनको क्षत्रिय नहीं कहेंगे। मैदान में आने वाले को क्षत्रिय कहा जाता हैं।* आजकल तो ऐसे भी लड़ने वाले हैं, कि अपने घर में बैठे-बैठे ही बटन दबाएंगे, लड़ाई के मैदान में जाएंगे ही नहीं, घर में बैठे-बैठे ही खलास कर देंगे। और यहां क्या ...

कौन आशिक? और कौन माशूक?

 बच्चों को छि छि आदतें छोड़ देनी चाहिए नहीं तो क्या पद मिलेगा? माशूक भी गुण देखकर ही आशिक होंगे ना। *कौन आशिक? और कौन माशूक? शिवबाबा है माशूक आशिक है आत्माएं।* 👉लेकिन ऐसा माशूक है जो किसी पर फ़िदा नहीं होता। चरित्र कर सकता है, बाकी फिदा नहीं होता। हां जो बाप को प्यार करते हैं, उनको बाप प्यार करता है। *आशिक उन पर होगा जो उनकी सर्विस करते होंगे।* तन मन, धन, समय, संबंध संपर्क सब अर्पण कर दिए, तो फिदा हो गए। एक वाणी में तो कहा है, बाप किसी पर आशिक नहीं होता वह तो माशूक है।  👉 *सुप्रीम सौल बाप किसी पर आशिक नहीं होता है। आशिक कौन होता है? जो प्रजापिता है मनुष्यों का बाप,वो श्रेष्ठ आत्माओं के ऊपर, सतो प्रधान आत्माओं के ऊपर आशिक होता है।* 👉यह बातें बहुत समझने की हैं। ऑडियो 40

सूर्यवंशी और चंद्रवंशी का आधार कौन?

 *सूर्यवंशी और चंद्रवंशी का आधार कौन?*  सूर्यवंशी की आधार आत्मा जिसे कहेंगे- *वो तो लक्ष्मी हो गई ना। आधार के बगैर आधेय टिकेगा?? आधार के बैगर आधेय माना जो सारे वृक्ष का बीज है, वो धरणी बैगर फलीभूत नही होगा। तो बीज को आधार चाहिए। रामवाली आत्मा स्वयंम चाहे कि मैं सरसब्ज हो जाऊं, नही हो सकती।  रुद्रमाला का सारा संगठंन देखने मे आ रहा है अभी,लेकिन रुद्रमाला,माला में संगठित नही दिखाई दे रही, क्योंकि आधार नही है।* आधार होगा तो संगठन बनेगा। varta 915(1.06मि