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Showing posts from December, 2021

महाकाली-- का मतलब सारे संसार में अज्ञान अंधकार फैलाने वाली है। खुद भी गांधारी बनती है अंधी, और जानबूझकर बनती है*

 *महाकाली-- का मतलब सारे संसार में अज्ञान अंधकार फैलाने वाली है। खुद भी गांधारी बनती है अंधी, और जानबूझकर बनती है* *सबसे ज्यादा देहभान में रहने वाली आत्मा है, इस सृष्टि पर-- जगदंबा,( पृथ्वी) पृथ्व्यात। जो लगातार चौड़ी होती जाती है। मिट्टी बढ़ती जाती है, जल (ज्ञान) सूखता जाता है।*  जैसे मुंबई को सागर के जल को सुखाकर बसाया गया, तो रिजल्ट आखिरीन क्या होगा? रिजल्ट में होगा कि पृथ्वी तो माता है। सागर है पिता। सागर की गोद में पृथ्वी समाई हुई है ना। या तो बच्ची कहो, या पत्नी कहो, बात एक ही है।*  *तो जब कोई बात की अति हो जाती है तो अंत करना पड़ता है। तो जो अति करने वाली है-- पृथ्वी बहुत देहभान बढ़ जाता है, बहुत राक्षसी बन जाती है-- महाकाली। सारी दुनिया के लिए काल रूप बन जाती है।*  *सारी दुनिया को खपाखप खपाखप मारती जाती है। किसी को नहीं छोड़ती। सारी दुनिया में असुर बन जाते हैं। राक्षस बन जाते हैं, दुखदाई बन जाते हैं सब एक दो को दुख देते जाते हैं, तो वह महाराक्षसी रूप जो धारण करती है, वह सब के गले काट देती है।*  *महाकाली का मतलब सारे संसार में अज्ञान का अंधकार फैलाने वाली...

सूर्यवँशी पक्की प्रजा में आने के लिये कम से कम 33/. मार्क्स चाहिये*

 *सूर्यवँशी पक्की प्रजा में आने के लिये कम से कम 33/. मार्क्स चाहिये* *इन आंखों से जो भी देखते हैं सबसे वैराग्य।*  कोई भी *अजीज संबंधी क्यों ना हो, कितना भी प्यार दिखाने वाला क्यों ना हो समझ लो हमारा बड़े से बड़ा दुश्मन है। धोखेबाज है, ईश्वर से बुद्धियोग तुड़वाने वाला है, माया रावण का रूप है।*  *कभी झांसे में नहीं आना चाहिए। लेकिन होता क्या है? अपने अपने वर्तमान जीवन का आंकलन करें क्या हो रहा है? 24 घंटे में से ज्यादा समय बुद्धि का योग कहां जाता है?*  जिस *साकार सो निराकार को हम याद करते हैं उसमें बुद्धियोग कितना जाता है?* भले ब्रह्मा की वाणी में भगवान बाप कहते हैं --अमृतवेले खास मुझे याद करो।जिस *साकार में निराकार को याद करने का हमने संकल्प लिया है ,जानकर पहचानकर संकल्प लिया है, कितना परसेंटेज में याद आता है?* देखना है कितनी देर बुद्धियोग टिकता है?  *वह याद की स्टेज पास करने के लिए कम से कम सूर्यवंशी पक्की प्रजा में आने के लिए योगबल में कितने परसेंट मार्क्स चाहिए?* चलो पास विदऑनर नहीं ,फर्स्ट क्लास भी नहीं 60% ,सेकंड क्लास भी नहीं 45% भी नहीं,  *पास मार्क्...

भगवान को जितना रुलाया है उतना दुनिया में किसी को भी नहीं रुलाया है।प्रत्यक्षता के समय की बात है।इसीलिए नर्क की दुनिया में जो भी बच्चे पैदा होते हैं रोते-रोते होते हैं।

 *भगवान को जितना रुलाया है उतना दुनिया में किसी को भी नहीं रुलाया है।प्रत्यक्षता के समय की बात है।इसीलिए नर्क की दुनिया में जो भी बच्चे पैदा होते हैं रोते-रोते होते हैं*  यहाँ तो बाप ने समझाया-- *जो पहले आते हैं सतोप्रधान में, उनके आने से ही, उनको इतनी सजा?? यह कौन सा कर्म है? जिसके कारण उनको सजा मिली।* जो क्रॉस पर चढ़ाया गया। सजा जीसस को मिली। प्रवेश करने वाली आत्मा को तो सजा मिल ना सके।  *संगम युग में बाबा जो उदाहरण दे रहे हैं, वो टेली करने के लिए दे रहे हैं ना। तो किससे टेली किया??*                *भगवान को जितना रुलाया है, उतना दुनिया मैं और किसी को भी नहीं रुलाया।*           *ये तो प्रत्यक्षता के समय की बात है। जो भी बच्चे पैदा होते हैं, नर्क की दुनिया में खास द्वापर कलयुग में, तो (नरक की दुनिया में ही बाप प्रत्यक्ष होते हैं) तो हंसते-हंसते पैदा होते हैं या रोते रोते हैं??*           जन्म होता है , जब बच्चा बाहर आता है तो रोते रोते ही आता है। तो *मनुष्य को इस बात की समझ नहीं कि ...

एकादशी

 *एकादशी* ★ एकादशी का अर्थ होता है एक और दस, ग्यारह। महीने का पहला या दूसरा जो 15वां होता है उसमें ग्यारह दिन को एकादशी कहते हैं। एक और दस मिलकर बनते हैं ग्यारह रुद्रगण। यह  ग्यारह रूद्र गणों से भगवान विनाश का कार्य करवाते हैं। स्पैशली। ये वो आत्माएं है जो सब कुछ त्याग करके, संसार का विध्वंस कराने की निमित्त बनती हैं। खुद भी लंगोटिया बनती हैं और अपने सारे ग्रुप रूद्र माला को भी लंगोटिया बनाती हैं। इसलिए लोग डरते हैं कि शंकर जी की उपासना करेंगे तो हमें विभूतियां बना देगा। ( माना?) कुछ नहीं है अपने पास। एकादशी का व्रत है, जो ग्यारह आत्माओं के द्वारा विशेष रूप से किया जाता है।  *(time@ 20.42-22.34) Varta 1000*

अभी परमात्मा है, सम्पन्न हो गया, ये कहना- अज्ञानी भगत है।

 *अभी परमात्मा है, सम्पन्न हो गया, ये कहना- अज्ञानी भगत है*👇 _*क्या अभी परमात्मा हो गया?? सम्पन्न बनने के बाद कहो ना। अभी क्यों कहते हो? अभी कहना ये अज्ञान है की ज्ञान है?? अभी तो कहते हैं सो अज्ञानी भगत हैं। उनको पता ही नहीं है कि हम देहधारी की भक्ति कर रहे हैं। परमात्मा जो कहा जाता है परम पार्टधारी संसार में साबित हो जाएगा, हर मनुष्य आत्मा इस सृष्टि रूपी रंगमंच की 500-700 करोड़ मनुष्यात्माएँ भी ये स्वीकार कर लें, क्या? कि ये हीरो पार्टधारी है। तब ही कहेंगे हीरो पार्टधारी परमात्मा कि पहले से ही कहेंगे? और अगर अभी सारी दुनिया ने तो माना ही नहीं।*_  _★ (बाबा मैं गलत लिखा था अभी सिर्फ़ तीन चम्मच ही खा रहे हैं। तो गलत नहीं है क्या? खा रहे हैं ना? भोगी है कि नहीं? क्या? नहीं भोगी है?) हाँ, अच्छा समझो बाबा मिसाल देते हैं- *अहमदाबादी साधु का ना खाता है, ना पीता है, ना हगता है तो क्या परमात्मा हो गया? हो गया? नहीं हो गया। क्यों? क्यों नहीं हो गया? अरे, हाँ तो सम्पन्न बनने के बाद कहो ना, अभी क्यों कहते हो? अभी कहना ये अज्ञान है या ज्ञान है? अभी तो कहते हैं सो अज्ञानी भगत हैं। उनको पता ...

नव ग्रह

1.👉 8 की विशेषता। vcd 127 से।  बड़े दिल वाले, राज्य अधिकारी विश्व राज्य अधिकारी, तख्त पर बैठने वाले, बाप समान, वेफ़ीकर बादशाह की स्टेज में रहने वाले, इनकी पूजा सब से पहले होती है नवग्रह के रूप में, डबल नशेे में रहते क्योंकि स्पेशल चांस मिली है,  स्पेशल बाप के सहयोगी,   दीदी दादाओं का श्रृंगार करने वाले, डबल विदेशी, सारे ही विदेशी, लौकिक और अलौकिक दुनिया से धक्के खाने वाले। विशेष स्नेही और सहयोगी बच्चे। 2.👉 _*रूहानी सेना का मार्शल है शंकर। और वो युद्ध मे विजय पाता है। और उनके 8 बच्चे उनके साथी है। अकेला चना भाड़ फोड़ नही सकता। जो शिव की अष्टमूर्तिया कही जाती है, वो 8 मूर्तियो की पूजा उनके मंदीर दक्षिण भारत मे बनते है*_ _*★ पत्ता भी हिल सकता नही, सत्ता तेरी के। क्या? नई झाड़ की बात है या पुराने झाड़ की बात है? जो बाप ने आकर के नई दुनिया स्थापन किया, उस नई दुनिया के पत्तों की बात है। वो नई दुनिया युद्ध के बाद स्थापना होती है या पहले ही स्थापना होती है? युद्ध के बाद स्थापना होती है। ये महाभारी महाभारत गृहयुद्ध होगा तो मार्शल कौन होगा? कोई मार्शल होगा कि नही रूहानी सेना का? कौन? श...

माया (जगदम्बा) ने बाप को ठगा। बाप विचारे ठग्गूराम ठगे रह गये, कहती है-जीवन संगिनी बनूंगी, फिर निभाती नही है। बीच मे छोड़ के चली जाती है।

 *माया (जगदम्बा) ने बाप को ठगा।  बाप विचारे ठग्गूराम ठगे रह गये, कहती है-जीवन संगिनी बनूंगी, फिर निभाती नही है। बीच मे छोड़ के चली जाती है*👇 _*माया की जो फारकती चलती है, माया फारकती दिलाए देती है, वो माया कौन हुई? माया न आती तो अच्छा था, जिंदगी में ये आया, तो, तो ये गड़बड़ हो गया। माया ठगनी होती है कि सच्ची होती है? क्या होती है माया? ठगने वाली होती है कि सच्ची होती है? ठगने वाली होती है। तो माया ठगनी है। कैसी ठगनी? कहती है, क्या? कि हम, हम साथ निभाएँगे। जीवन संगिनी बनेंगे। क्या? फिर बीच में छोड़ के चली जाती है कि जीवन संगिनी बनती है? तो ठग लिया कि नहीं ठग लिया? बिचारे ठग्गू, ठग्गूराम ठगे रह गये! तो देखो माया फारकती दिलाए देती है।*_ _*★ तो बताया, ये माया की जो फारकती चलती है, माया फारकती दिलाए देती है, वो माया कौन हुई? नहीं आया होता तो अच्छा था! जिंदगी में ये आया, तो, तो ये गड़बड़ हो गया। क्या? माया उसे कहते हैं- माया ठगनी होती है कि सच्ची होती है? क्या होती है माया? ठगने वाली होती है कि सच्ची होती है? ठगने वाली होती है। तो माया ठगनी है। कैसी ठगनी? कहती है, क्या? कि हम, हम साथ निभा...

गुप्त ज्ञान दान

 *गुप्त ज्ञान दान* ★ *_हुजूम को इकट्टा कर लिया कांफ्रेंस में, मेले मलाखडे किए, और ढेरों को इकट्टा ज्ञान दे दिया, वो गुप्त ज्ञान नही कहा जाता है। ज्ञान का बीज जो है एक एक मे डालना है या अनेको में एक साथ डालना है? लौकिक दुनिया मे भी क्या करते है? दुनिया का  जनरेशन बढ़ाने का काम करते है तो गुप्त में धरणी रूपी माता में बीज गुप्त में डालते है कि 2, 4 को इकट्टे करते है देखो हम बीज डाल रहे है, आओ देखो आ के। बताते है क्या? हाँ, कोई कोई वैश्याएं होते है वो जरूर बताती है।हमारे पास राजा आए थे सेनापति जी आप तो बड़े बलवान है। राजा ऐसा करता था, राजा वैसा करता था। तो ये गुप्त हुआ या प्रत्यक्ष कर दिया? प्रत्यक्ष कर दिया। उसकी कोई वैल्यू नही। varta 1914_*

60 साल के होते है, 60 तो लगी लाठ, इसलिए भागो। अगर तुम घरवार नही छोड़ेंगे तो तुम्हारी बेइज्जती करेंगे, या अच्छे से रखेंगे? बेइज्जती करेंगे। मारते है।

 *60 साल के होते है, 60 तो लगी लाठ, इसलिए भागो। अगर तुम घरवार नही छोड़ेंगे तो तुम्हारी बेइज्जती करेंगे, या अच्छे से रखेंगे? बेइज्जती करेंगे। मारते है।* 👇 *_भक्तिमार्ग में कहते है 60 तो लगी लाठ। 60 साल के हो जाए तो ज्ञान की लाठ लगे। अगर घर मे रहेंगे तो लाठ लगेगी बच्चों की, इसलिए भागो जाके गुरु करो। बुढापे में बच्चे ज्यादा बुड्ढे की कदर नही करते, तो लाठ लगती है बच्चो की, इसलिए भागो।_* _*★  बूढ़े जब होते है ना, 60 वर्ष के, तो कहते है ना भक्तिमार्ग में 60 तो लगी लाठ। क्या? 60 साल के जब हो जाए, अनुभवी हो जाए दुनिया की, तब ज्ञान की लाठ लगे। क्योंकि नौजवान होते है, तो अनुभवी कहेंगे? नही। अनुभवी तो नही कहेंगे। बूढ़े होते है तो बूढें को अनुभवी कहा जाता है! ऐसे कहते है ना-अगर घर मे रहेंगे तो लाठ लगेगी बच्चों को, इसलिए भागो। जाके गुरु करों। बुढापे में भी अगर घर मे बने रहेंगे तो बुढापे में तो बच्चें उतने कदर नौजवानों की ज्यादा कदर करेंगे कि बुड्ढे की ज्यादा कदर करेंगे? करेंगे? फिर तो लाठ लगेगी। बच्चों की लाठ लगेगी की नही? हाँ। इसलिए भागो। बुड्ढे होते है तो कहते है वाणप्रस्थ अवस्था होंगई, अब...

क्षेत्र - क्षेत्रज्ञ

  गीता श्लोक :1/1 , 13/1 , 13/2 , 13/3 , 14/4 , 14/3  1. 👉 Imp-- * क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को पूरा जान लिया पहचान लिया, तो समझो ये पढ़ाई पूरी हो गई। दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञान पूरा।ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए?  फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की  मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है।*   *डरते कब तक है ? जब तक यह देह रूपी मिट्टी याद आती है। तो अभी तुम जरूर कहेंगे, अभी मौत ना आवे, क्योंकि अभी हमने पूरी पढ़ाई पढ़ी थोड़े ही है। तो तुम डरेंगे अभी मौत न आवे।*  *क्या है पूरी पढ़ाई? वह गीता में भी बताया दिया पूरी पढ़ाई क्या है??*        क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। क्षेत्र माना यह शरीर।  *इदम् शरीरम कौन्तेय क्षेत्रममित्यविधीयते...*             *ये शरीर रूपी क...