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Showing posts from January, 2022

साक्षात्कार संबंधित प्वाइंट

1. *झूठी चीज का साक्षात्कार नहीं होता, जो भी साक्षात्कार होते हैं वह सच्चे होते हैं।*    वीसीडी 225 2.बाप की याद में रह सर्विस करेंगे तो आगे चल तुमको साक्षात्कार भी होते रहेंगे।*घर बैठे आपेही साक्षात्कार आदि होते रहते हैं। बहुतों को ब्रह्मा का साक्षात्कार होता है, उनके साक्षात्कार के लिए कोई पुरूषार्थ नहीं करते। बेहद का बाप इन द्वारा साक्षात्कार कराते हैं।* Mu 4-6-2020 3.ओम भाई: तुम तो पहाड़ी पर बैठे हो। *अन्त में सब पहाड़ी पर ही साक्षात्कार होंगे। बाबा बतलाते हैं - मुझे भी जब साक्षात्कार हुआ था तो मैं पहाड़ी पर था।*  मु०-10-12-21 4. ओम भाई: *शुरू-शुरू में बहुतों को यह साक्षात्कार होते थे। लाइट ही लाइट दिखाई देती थी। अपने लाइट के क्राउन के भी अनेक बार साक्षात्कार करते थे। जो आदि में सैम्पल था, वह अन्त में प्रैक्टिकल स्वरूप होगा। संकल्प की सिद्धि का साक्षात्कार होगा।*   18-1-22 5. ओम भाई: *बहुतों को तो आगे चलकर के साक्षात्कार भी होता रहेगा। कहाँ-कहाँ के तुम राजायें होंगे वह भी तुमको साक्षात्कार होगा; क्योंकि राजाओं की ड्रेस भिन्न-भिन्न होती है ना !*    ...

अष्ट देव - नष्ट देव - रत्न - नारायण - धर्मपिता।

 _*ऊपर से आने वाले धर्मपिताए जीनमे प्रवेश करते है वह हुए आधार मूर्त और उन आधार मूर्त को जन्म देने वाले विजरूप बाप हुए। तो उनको भी जन्म देने वाले कौन है? अष्टदेव है या 12 में से 4 नष्टदेव होंगे??*_ _*★ ये पूछा है जो इस्लामी, बौद्धि, क्रिश्चन आदि धर्मों की स्थापना होती है, उन-उन धर्मों के धर्मपिताए कोई आधार मुर्तों में प्रवेश करते हैं ना, उन आधारमूर्तों को जन्म देने वाले बीजरूप आत्माए होती हैं या आधारमूर्त होती हैं? जो जन्म देने वाले हैं धर्मपिताओं को, वो बीजरूप होते हैं, या आधारमूर्त होते हैं? धर्मपिताए ऊपर से आते हैं, जिनमें प्रवेश करते हैं वो आधारमूर्त हुए, वो सतयुग के नारायण होते हैं-नंबरवार और उन नारायणो को भी जन्म देने वाले को भी कोई द्वापर में कोई जन्म देने वाले होंगे या नहीं? वो उनके बीजरूप बाप हुए। उन बीजों को भी जन्म देने वाले कोई होंगे या नहीं होंगे? होंगे। तो उन बीजों को भी जन्म देने वाले जो हैं, वो पूछा की जो सूर्यवंशियों की 12 की लिस्ट है, उन 12 में से नष्टदेव होंगे या अष्टदेव के जो 3 पहले रत्न हैं, वो होंगे? पहले नंबर के तीन होंगे? अष्टदेव जो हैं, वो 12 में से पहले 8 ह...

जो ऊपर में याद करते है वह है शुद्र सम्प्रदाय, बाप ब्रह्मा के तन में आया है तो ब्रह्मा का तन जरूर याद पड़ेगा, तो देखो ब्रह्मा के तन में याद करना पड़े ना!

 *जो ऊपर में याद करते है वह है शुद्र सम्प्रदाय, बाप ब्रह्मा के तन में आया है तो ब्रह्मा का तन जरूर याद पड़ेगा, तो देखो ब्रह्मा के तन में याद करना पड़े ना!* ★  अभी तुम यहां याद करेंगे। पहले तो मैं परमधाम में था, अभी तो यहां जो भी है सब शुद्र सम्प्रदाय, शुद्र सम्प्रदाय वह सब ऊपर में याद करेंगे। तो देंखों शुद्र में और ब्राह्मण में कितना फर्क है। तुम कही भी होंगे बेलायमत में होंगे तो भी यही जानेंगे बाप ब्रह्मा के तन में आए है तो ब्रह्मा के तन तो जरूर याद पड़ेगा, याद करना पड़े। नही तो वह आए, कहा भटकता है क्या ऐसे!  जरूर कोई शरीर मे आएगा। तो देखो तुम अभी कहा भी बैठे हो या बैठे हुए होंगे तो जरूर याद करेंगे। ब्रह्मा के तन में याद करना पड़े। नही तो बेहद के बाप को कहा याद करेंगे। कोई ऐसे ऐसे बुद्धिहीन होते है जो ब्रह्मा को भी नही मानते, बाबा ये नही कहते-ब्रह्मा को याद नही करो, ब्रह्मा की याद करने बिगर शिवबाबा याद कहा से आएगा? आधार तो चाहिए। सिर्फ बाप कहते है ब्रह्मा के तन में आता हूँ। तन में ही आता हूँ। ये तुम को याद करना है। बताते है ऊपर में अभी मैं नही हूँ। अभी मैं साधरण ब्रह्मा के तन...

त्रिमूर्ति में इशारा दीया-उस बाप का परिचय दो, किस बाप का?

 *त्रिमूर्ति में इशारा दीया-उस बाप का परिचय दो, किस बाप का?* जिसकी मंदिरों में पूजा होती है, वह कहता है- जिस बाप का परिचय देने के लिए, कौन कहता है? शिव बाप कहता है उस बाप का परिचय दो,जो बाप इस संसार मे पुरुषार्थ करके निराकारी स्टेज धारण कर लेता है, क्या? बाप समान बन जाता है, बाप का बड़ा बच्चा बन जाता है।  कैसा? निराकारी, निर्विकारी, निरंहकारी बन जाता है। सिर्फ कहने की बात या प्रैक्टिकल शरीर के साथ कर्म करने के आधार पर? हाँ? प्रैक्टिकल कर्म करने के आधार पर वह मंदिर में दिखाया गया है शिव के मंदिर में। की वह प्रैक्टिकल कर्म भी कर रहा है।जो गीता में आदेश है- कर्मेन्द्रियों से कर्म करना है, क्या? बाबा ने कर्म छोड़ने के लिए कहा या कर्म करने के लिए कहा? करना है लेकिन कर्म करते हुए बाप को याद करना है? माना मन बुद्धि ना कर्मेन्द्रियों में लगे, ना कर्मेन्द्रियों की रस में लगे, ना कर्मेन्द्रियों के संग में लगे। कर्मेन्द्रियों की याद भी बुद्धि में ना रहे। किसकी याद करे? बाप की याद रहे। बिंदु की याद रहे। एक शिवबाबा दूसरा ना कोई। ऐसी स्टेज रहे।  तो ऐसी स्टेज धारण करने में जो अब्बल नंबर ह...

कौन पढाते है? परम+आत्मा पढाते है।

 *कौन पढाते है? परम+आत्मा पढाते है* ★   ये तो सभी बच्चों को निश्चय होगा की हम आत्माओं को परमात्मा पढ़ाते है। आत्माओं के बीच में जो परम पार्टधारी है, वो पढ़ाते है। जो साकार रूप में ही पढ़ाते है। क्योंकि ये साकार रूप में पढ़ाना 5000 वर्ष में एक ही बार होता है, और एक ही बार बाप आकर के बेहद का बाप बेहद के बच्चों को पढ़ाते है। बेहद के बच्चे किसलिए है? बेहद के बच्चे इसलिए है क्योंकि 84 जन्मों का ऑलराउंड पार्ट बजाने वाले है। और ये तो बच्चे अच्छी तरह से समझ सकते है ये हमारा बेहद का बाप है। और हम बेहद के बच्चे है। कोई भी नया आदमी आकर यहां आकर बैठ जाय तो कुछ भी नही समझेगा, की यह रूहानी बाप क्या होते है रूहानी बच्चे। क्या होते है? इतना तक भी कोई समझ न सकोंगे।  उनके बुद्धि में बैठेगा ही नहीं। तुम बच्चे जानते हो हम सब ब्रदर्स है आत्मा आत्मा भाई भाई है और वो हम आत्माओं का बेहद का बाप भी है और फिर वो साकार में टीचर भी है, और सुप्रीम गुरु भी ठहरा। ये तुम बच्चों को जरूर अच्छी तरह से ऑटोमेटिकली याद भी रहता होगा, की वो हमारा बाप भी है, टीचर भी है, सदगुरु भी है। *(15sec-1.55) dt 21.12.2...

तुम्हारी ऐम ऑब्जेक्ट है-- ज्योतिर्लिंगम बनना, बाप समान।

 *Most imp---* *तुम्हारी ऐम ऑब्जेक्ट है-- ज्योतिर्लिंगम बनना, बाप समान। माना आत्मा ज्योति बन जाए, और शरीर में रोम-रोम में ज्ञान की रोशनी समा जाए। यह है-- लक्ष्मी नारायण का कम्बाइंड रूप* *तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट क्या है? नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनना-- यह है तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट*  भक्ति मार्ग में कोई भी साधु संत महात्मा, ऐसे नहीं कहेंगे-- यह तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट है। वो जब सत्यनारायण की कथा सुनाने बैठते हैं, तब सामने ये चित्र रखते हैं। जैसे अभी तुम्हारे सामने ये चित्र रखते हैं।  *भक्ति मार्ग में जड़ चित्रों को रखते हैं, और ज्ञान मार्ग में चैतन्य चित्र को।*  *बाप कहते हैं ना फ़ालो फादर। किस को फॉलो करेंगे?? सारी सृष्टि का जो एक बाप है, उसकी पहचान तुमको देते हैं। तो चित्र तुम्हारे सामने है-- कि यह है तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट।*          *बाप आकरके तुमको एम ऑब्जेक्ट का चित्र रख देते हैं लक्ष्मी नारायण का। तो लक्ष्मी नारायण दो हैं, या एक?? कोई कहेगा कि लक्ष्मीनारायण एक हैं।*  एक कैसे?? चित्र में तो अलग-अलग पर्सनैलिटी दिखाई है। तो ये एम ऑब्जेक्ट ...

इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को, यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है।

 _*इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को,  यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है, पहले तो यह पता चले। और उस ग्रुप में भी मेरा नंबर कौन सा है!...*_ _*★  क्या ज्ञान होना चाहिए ब्यद्धि में? इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को,  यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है, पहले तो यह पता चले। और उस ग्रुप में भी मेरा नंबर कौन सा है!... और फिर विजय माला में भी मेरा साथी कौन सा है। जैसे पहले नंबर को पता चलता है कि नहीं? ज्ञानी आत्मा है तो उसे पता चलेगा कि नहीं? चलेगा ना। ऐसे ही विजय माला के जो पहले नंबर का होगा, उसको कंफर्म हो जाएगा? नही हो जाएगा। कंफर्म हो जाएगा तो निकल पड़ेगा ना। दिल और दिमाग जहां पहुंच गया। जहां हमारा मन होगा वहां हमारा तन होगा। तो मन पहुंच गया? मन बुद्धि से निश्चय बुद्धि बन गया? नहीं। तो यह तो तब ही होगा जब ज्ञान मिले। तो रूद्र माला तैयार होकर, पहले तैयार हो जाते हैं। ...

जो सूर्यवंशी बच्चे हैं बाप के, वह खुद जलते हैं और रावण को जलाते हैं।*

 *जो सूर्यवंशी बच्चे हैं बाप के, वह खुद जलते हैं और रावण को जलाते हैं।* माना जो कचरा है काम क्रोध लोभ मोह अहंकार का, जो खाद पड़ी हुई है लोहे की,चांदी की उसको जलाते हैं।और जलाने के टाइम पर खुद भी गर्म होते हैं। *इतना गरम होते हैं गर्म होते होते तो खुद भी खाक हो जाते हैं।* यज्ञ की आदि में भी वो आत्माएं थी। *विनाश ज्वाला कब प्रज्ज्वलित हुई?* यज्ञ की आदि से ही विनाश ज्वाला प्रज्ज्वलित हुई सारे ही चंद्रवंशी इस्लाम बौधि वंशी एक तरफ हो गए। और सूर्यवंशी आत्माएं एक तरफ हो गई मुठ्ठ भर। आदि में भी झगड़ा चला था। अभी भी ये झगड़ा सामान खड़ा हुआ है। ज्ञान की अग्नि ऐसी है, जो योग अग्नि का रूप धारण करती है। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार इन विकारों को भस्म करती है।भस्म करती है तो नई दुनिया प्रत्यक्ष होती है। Vcd 603(1.03मि

अपने जन्मो के बारे में जानने का तरीका ?

 *अपने जन्मो के बारे में जानने का तरीका ?  पहला - गॉड फादर से कनेक्शन  दूसरा- जो आत्माएं गॉड फादर से कनेक्ट है उनसे कनेक्ट होना* जब आत्मा की सारी कट उतर जाएगी तो आत्मा सूक्ष्म ज्योति बिंदु स्टेज में टिकेगी, तो एडवांस की गहराई की बातों को समझ सकेगी।* *कंसंट्रेशन की बात है बिंदु के ऊपर। अभी यहां बिंदु को विस्तार में ले जाना है। हमारी आत्मा भी ज्योति बिंदु है (seed) लेकिन सीड, वृक्ष के रूप में विस्तार कैसे पाएगा? कैसे-कैसे कितने जन्म लेना है? कहां-कहां कितने पत्ते निकलने हैं? वह कनेक्शन तभी होगा, जब गॉडफादर से कनेक्ट होगा। जितना जितना कनेक्शन बढ़ता जाएगा उतना उतना अपने जन्मों के बारे में मालूम पड़ता जाएगा।* *गॉडफादर के अलावा जो आत्माएं गॉडफादर से कनेक्टेड है, उनसे भी कनेक्ट होकर अपने जन्मों को जाना जा सकता है।* वार्ता 20(7 मिनट)