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Showing posts from November, 2022

स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ

 *स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ* *तुम सूर्यवंशी बच्चों की स्टूडेंट लाइफ सबसे ऊंची है, और धर्म वालों के मुकाबले। क्योंकि तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट है-- नर से सीधे एकदम नारायण बनना, प्रिंस नहीं* बच्चों को तो बड़ा नशा होना चाहिए, इसीलिए तुम बच्चों की गाई जाती है ना, क्या?? *स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ।बहुत अच्छी लाइफ। क्यों?? तुम तो सूर्यवंशी बच्चे हो। आदि से लेकर अंत तक पूरी पढ़ाई पढ़ते हो ना। तो बहुत नशा होना चाहिए। इसलिए गाया जाता है ना-- स्टूडेंट लाइफ इज द बेस्ट लाइफ।* बस यही स्टूडेंट लाइफ जो गाई जाती है ना, अंग्रेजी में, इज द बेस्ट लाइफ, तो *किसके स्टूडेंट की लाइफ??*  *ऐरा गैरा नत्थू खैरा तो ढेर सारी टीचर्स हुए हैं दुनिया में, तो उन सबके स्टूडेंट की लाइफ?? नहीं, सुप्रीम सोल शिव बाबा, जिनको कहा जाता है।*             तो शिव बाबा कहें, तो उसमें भी प्रजापिता ऐड हो गया। *तो दोनों में एकदम पढ़ाने वाला कौन है? शिव और बाबा के बीच में पढ़ाई कौन पढ़ाता है? बाबा या शिव?*            शिव पढ़ाई पढ़ाता है? और पढ़ता कौन है? बाबा ही पढ...

ये शरीर तब तक अपना पार्ट बजाते हैं जब तक इनमें परमपिता परमात्मा की दी हुई ऊर्जा(आत्मा) है।

 *जैसे वो दुनियावी इंस्ट्रूमेंट काम तब ही करते हैं, जब उसमें पावर(ऊर्जा) आएगी कहीं से। ऐसे ही ये शरीर तब तक अपना पार्ट बजाते हैं जब तक इनमें परमपिता परमात्मा की दी हुई ऊर्जा(आत्मा) है।* *जैसे वो इंस्ट्रूमेंट होते हैं- रेडियो है, टीवी है, टेप रिकॉर्डर है, अब उसमें यंत्र तो सारे हैं पर क्या सदा वो अपना काम करता है?? कब काम करता है? कब नहीं करता है?*  *उसमें पावर आएगी कहीं से तो काम करेगा ,नहीं आएगी तो नहीं करेगा। ऐसे ही है। ये आत्मा पावर है।*  *और पावर कहां से आती है? जैसे वह रेडियो में, टीवी में, पावर कहां से आती है? जनरेटर से आती है।*  *तो यह जो दुनिया में जनरेशन चल रही है, ये जनरेशन कैसे चलती है? आजकल वैज्ञानिकों ने तो रोबोट बनाए हैं। वह भी अपने आप चलते हैं क्या? बिना ऊर्जा के चलते हैं?*  *ऐसे ही यह शरीर भी है। इसमें जो ऊर्जा है परमपिता परमात्मा की दी हुई ,तब तक ये शरीर अपना अपना पार्ट बजाते हैं और ऊर्जा गई तो पार्ट खत्म।* 16-12-18(54मि)2732 *संगम युग में ब्राह्मणों को ऊर्जा कहां से आती है??* *84 जन्मों में ऊर्जा कहां से मिलती है?* *मनुष्य ये बात भूल गए हैं, वो...

पुरुष जिसको कांटा लगाते है, उसको भी आप समान कांटा बनाते।

 *मोस्ट इंपोर्टेंट प्वाइंट* - *पुरुष जिसको कांटा लगाते है, उसको भी आप समान कांटा बनाते। महाकाली और महाकाल में कौन बड़ा कांटा दुनिया के लिए बन जाती? महाकाली_* ★ _तो बताया, जो भी *इस दुनिया में पुरुष मात्र है वह तो सब कांटे है ही, लेकिन जिसको कांटा लगाते हैं उसको भी आप समझ सके रंग से कांटा ही बनाते हैं। तो 2 चाहिए ना। क्या? कांटा लगाने वाला भी चाहिए, और शुरू शुरू में कांटा सहन करने वाला भी चाहिए और बाद में वह भी कांटा। वो और बड़ा कांटा। क्या? क्या कहा? पुरुषों से भी बड़ा कांटा। कैसा काटा? जैसे महाकाल और महाकाली है, महाकाल क्या है? महाकाल पुरुष है कि नहीं? महाकाल तो पुरुष हैं। और महाकाली स्त्री है। बड़ा कांटा कौन बनता है? कौन से आत्मा दोनों के बीच में बड़ा कांटा दुनिया के लिए बन जाता है?? एक अक्षर लिखो, काली नही, महाकाली। कालिया तो बहुत होती है। हाँ, उस से महान बड़ी काली कोई नही। तो महाकाली सबसे बड़ा कांटा इस दुनिया के लिए हो जाती है। होती है कि नही? तो कांटे होते ही हैं ऐसे। कैसे? दुखदाई। जहाँ से ये ऐसे... पहले मोटे और उपर मे जाके तीखे पतले महीन काटे। ऐसे काटे होते है और ये जितना बा...

तुम सूर्यवंशी बच्चों की खातिर सब को किल्लत उठानी पड़ती है।

 Most imp- *तुम सूर्यवंशी बच्चों की खातिर सब को किल्लत उठानी पड़ती है,माना बाप के सन्मुख आकर वापस जाना पड़ता है। (और धर्म वालों को)* अभी पुरुषोत्तम संगम युग में सतोप्रधान से तमो प्रधान बनना जरूर है। क्योंकि शूटिंग हो रही है यहां चारों युगों की। देवता वर्ण की आत्माओं की भी शूटिंग हो रही है।वो भी सतो प्रधान से तमोप्रधान बनती हैं, और क्षत्रिय वर्ण की आत्माएं भी सत्व प्रधान से तमो प्रधान बनती हैं। *तो हर युग चार अवस्थाओं से पसार जरूर होता है ।अभी बनना सबको जरूर है।*            *जो भी आते हैं चार अवस्थाओं से पसार जरूर होते रहते हैं। पीछे कभी भी आवें, सतयुग में आवें, त्रेता में आवे, द्वापर की शूटिंग में आवें, या कलयुग की शूटिंग के अंत में आवें, जब भी आएंगे पहले सतो प्रधान पार्ट बजाएंगे और बाद में यज्ञ में तमोप्रधान बनेंगे।*                 तुम्हारे खातिर तो खास बाप आए हैं। *तुम बच्चों की खातिर तो सब को वापस जाना पड़ता है। माना जब तक तुम, जो 100/. परसेंट तमोप्रधान बने हो, जब तक तुम 100/. परसेंट तमोप्रधान से सतो प्र...

बेहद में कम खर्च बालनशीन कैसे बने??

 *कमखर्च बालानशीन कैसे बने??* ★ *कोई भी काम हो, कम-से-कम खर्चे में चलाए लेना चाहिए। व्यर्थ पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए। अपने हाथ में भी जो पूंजी है, वो भी ईश्वर के कार्य के लिए पूंजी है। विश्व कल्याण के लिए है। स्वार्थ के लिए जितना कम खर्च करे उतना जास्ती हमारा नाम बाला होगा। और विश्व कल्याण के लिए जितना जास्ती खर्च करें उतना हमारा नाम बाला होगा। सिर्फ धन की बात नहीं है, ज्ञानधन की भी बात है। ज्ञानधन को भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। पात्र-सुपात्र का ज्ञान लेकर के, पहचान लेकर के ज्ञान देना चाहिए। समय की भी बात है। आज की दुनिया में समय का सबसे ज्यादा मूल्य है तो कर्मखर्च बालानशीन। अपने आमोद-प्रमोद के लिए, अपने रथ के लिए, अपने रथ से कनेक्टड संबंधियों के लिए कम-से-कम समय लगाना चाहिए। विश्व-कल्याण के लिए ज्यादा-से-ज्यादा समय खर्च करना है और वो भी हिसाब से, बेहिसाब नहीं। संकल्पों में भी कम खर्च बालानशीन। संकल्प बीज होते हैं। बीज की बहुत वैल्यु होती है। अभी संगमयुग में जितना श्रीमत के अनुकूल संकल्प चलाएँगे, उतना हमारा भाग्य बनेगा।* *varta 1368*

_जितना इंडिपेंडेंट निराधार पुरुषार्थ करेंगे, उतना ऊंच पद पाएंगे।

 *_जितना इंडिपेंडेंट निराधार पुरुषार्थ करेंगे, उतना ऊंच पद पाएंगे। और कोई का आधार लेकर के डिपेंडेंट होकर के पुरुषार्थ करेंगे, तो घाटा हो जाएगा।_*  _*★ बच्ची कहा भी तुम रहो, तो वहां रहकर के भी तुम ऊंच ते ऊंच पद पाए सकते हो। क्योंकि जितना तुम इंडिपेंडेंट मेहनत करेंगे, कोई का आधार नही, निराधार पुरुषार्थ, उतना ही फल पाएंगे। बाकी कोई का आधार लेकर के डिपेंडेंट होकर के पुरुषार्थ करेंगे, तो उसका हिस्सा उसको मिलेगा की नही? तो तुमको घाटा होगा ना। हाँ! तो मेहनत करनी है। तो ये अपनी मेहनत में लगा ही रहना चाहिए। निराधार बनेंगे तो शरीर छोड़ने के बाद कहि भी जाएंगे तो स्वाधीन रहेंगे की पराधीन रहेंगे? दूसरे का आधार की दरकार रहेगी? नही। तुम यहाँ राजयोग सीखते हो, स्वाधीन बनने की पढ़ाई। ये स्वाधीन होने की बात अपने ऊपर है। मेहनत तुम अपने ऊपर करते हो तो तुम्हारे लिए राज्य तो जरूर चाहिए। समझे ना!  (@18.18-20.37) dt 25.09.2019.*

न स्वर्ग के सुख लेना है ,ना नर्क के। उसे कहेंगे असली वैरागी/संन्यासी ।

 *न स्वर्ग के सुख लेना है ,ना नर्क के। इस दुनिया को भी छोड़ा, इस दुनिया के सुखों को भी और इस दुनिया के दुखों को भी छोड़ा, तो क्या हुए?? बैरागी, सन्यासी* *वो साधु भी ऐसे ही कहते रहते हैं-- ज्ञान भक्ति और वैराग्य। तो झूठ बोलते हैं या सही?? सही बोलते हैं।* पहले ज्ञान की प्रारब्ध स्वर्ग में सुख भोगते हो, फिर भक्ति की प्रारब्ध दुर्गति, दुख भोंगते हो, नीचे गिरते हो।           *फिर जब मैं आता हूं, तो देवताओं के सुख को भी छोड़ो, ज्ञानेंद्रियों का सुख भी नहीं भोगेंगे, और भक्ति में क्या करते हैं? व्यभिचारी सुख भोगते हैं, तो वह सब अनेकों को याद करना, अनेकों से सुख भोगना, अनेकों से इंद्रियों के संबंध भोगना, सब छोड़ो।*        *क्या करो??* *वैराग्य, इन सब से विपरीत राग।*  राग- प्यार, इन सब से प्रीति छोड़ दो। *न स्वर्ग के सुख लेना है, ना नरक के।* कहां जाना है?? शांति धाम में जाना है, तो बैरागी हुए कि नहीं?  *इस दुनिया को भी छोड़ा, इस दुनिया के सुखों को भी, इस दुनिया के दुखों को,तो क्या हुए?? बैरागी, सन्यासी।*         इसीलि...

असली ज्ञान वो, जो प्रैक्टिकल काम करके दिखाएं।

 असली ज्ञान वो, जो प्रैक्टिकल काम करके दिखाएं। प्रैक्टिकल कुछ भी नहीं तो नकली ज्ञान* *ज्ञान ऊंच ते ऊंच बाप से आता है, फिर सागर में जाता है। सागर से फिर धरनी पर आता है। सूर्य कौन? और सागर कौन? धरनी कौन?*  *सूर्य हुआ शिव, सागर हुआ प्रजापिता, धरनी हुई जगदंबा। तो यह 3 आत्माएं हुई। कोई चौथी आत्मा भी तो है, उसके पास नहीं जाता??*  *जाता है, उसके पास ना जाए तो असली ज्ञान जल का स्वरूप बनेगा ही नहीं।*                   *असली ज्ञान जल कैसा?? जो प्रैक्टिकल में काम करके दिखाये, तो असली ज्ञान और प्रैक्टिकल कुछ भी नहीं, सिर्फ बोल बोल करना सुनना सुनाना, समझना समझाना, और परिवर्तन कुछ भी नहीं, तो नकली ज्ञान कहेंगे। तो चौथी आत्मा है--पराप्रकृति* 2748(2-1-19)27 मि)

अष्ट देव की परिपक्व स्टेज..... जिसमे चाहे उसमे प्रवेश करे।।

 जिज्ञासु: बाबा जो अष्ट देव है वह अष्ट दिगपाल अष्ट देव है। वह बाप को अंतिम जन्म में छोड़कर पूर्व जन्म में वह सहयोगी बनते है सूर्यवंशी । वह अष्ट रतन से भी श्रेष्ठ है ना। बाबा: उनसे ज्यादा श्रेष्ठ है। क्यों? रतन जो होते हैं वह एक दूसरे से कम कीमत वाले होते हैं और जो सूर्यवंशी अष्ट देव है वह सिर्फ सूर्यवंशी है। सब हीरे हीरे हैं। कोई भी माणिक नहीं है, मोती नहीं है, पन्ना नहीं है, मूंगा नहीं है। जिज्ञासु: तो अष्ट रतन से भी श्रेष्ठ है वो ? बाबा: हां। वो सदैव सूर्यवंशी के पार्ट बजाने वाले और वो.. वो बीच में द्वापर युग से ही दूसरे धर्म में कन्वर्ट हो जाएंगे जिज्ञासु: लेकिन अष्ट रतन की ही क्यों गायन है अष्ट देव की क्यों नहीं है? बाबा:,अष्ट रतन बनेंगे ही तब जब उनमें वह देव प्रवेश करेंगे। जिज्ञासु: वह अष्ट देव? बाबा: हां जी। वह अष्ट देव जब तक प्रवेश करके उनके द्वारा श्रेष्ठ पार्ट नहीं बजाएंगे तब तक वह अष्ट रत्नों की गिनती में ही नहीं आएंगे। जिज्ञासु: माना उनका भी वह गायन है? बाबा: अष्ट देव है आत्मा तो अष्ट रतन है जैसे उनका शरीर । और? जिज्ञासु: तो वास्तविक अष्ट रतन का गायन वह सूर्यवंशी ही है। ...