अष्टदेव के लक्षण.
महाकाल के पक्के बच्चे 8, अष्टदेव के लक्षण
★ तो पक्के कितने होगें? आठ पक्के होगें। उनको पक्का पक्का ज्ञान होगा। जिनको पक्का पक्का ज्ञान होगा जब से ज्ञान में आए, एडवांस में आए, तब ही से उनके अन्दर लक्षण कौन से देखने में आवेगें? नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा। भले 100 परसेन्ट देखने में नहीे आवेगें लेकिन परसेनटेज में वो नष्टोमोह जरूर होगें, जब से ज्ञान में निकले है। वो लौकिक संबधियों को सहयोग देगें? देगें? क्यों? एक शिवबाबा दूसरा ना कोई। क्योंकि लौकिक संबधियों का ज्ञान मिलते ही उनके अन्दर भाव नष्ट हो जाता है। ये तो हमारे अन्तिम जन्म के संबंधी है। हमारा तो फाउंडेशन का पहला पहला जन्म है संगमयुग में हम उसके सहयोगी बनेगें हम और कोई के सहयोगी नहीं बनेगें। तन से भी, तन भी उसी क्षण से कहाँ अर्पण करेगें?? तन की सेवा, लौकिक संबंधियों को? नहीं। कहाँ अर्पण करेगें? ईश्वरीय सेवा जहाॅ चल रही होगी वही तन की सेवाए अर्पण करेगें। वो नहीं देखगें कि यहां यो हमें लगातार खिचड़ी खाने को मिल रही है। अरे, हम तो हजारों रूपया महीनों की नौकरी कर रहे है, हम काहे के लिए खिचड़ी खाए? नहीं। नौकरी भी छोड़ देगें या रखेंगे? छोड़ देगें। चाहे कैसा भी धंधा धोरी हों। अगर आठ में आने वाले होगें तो उनके ये लक्ष्ण देखने में जरूर आएगें। पहला पहला मुख्य लक्ष्ण और पहला पहला मुख्य जो गुण है वो उनमें देखने में जरूर आएगा। लास्ट में उसी परीक्षा में अव्वल नम्वर जाएगें। कौन सी परीक्षा में? नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा क्योंकि फाउंडेशन उनका पक्का है पहले से ही। *Varta-1696*
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