बेहद का पुरुषोत्तम संगमयुग, यानी बेहद का अमृतबेला कब से है?
बेहद का पुरुषोत्तम संगमयुग, यानी बेहद का अमृतबेला कब से है?
क्या 1976 से कहेंगे?? भूलने का अभ्यास सुबह को तो कोई कुछ भी ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती है, प्रैक्टिस हो जाएगी तो कुछ भी नहीं। वह अभ्यास किया जाता है। कहते हैं ना प्रैक्टिस मैक्स मैन परफेक्ट_*
_*★ मुकर्रर रथ धारी आत्मा को कोशिश करनी पड़ती है कि शरीर को भूले तो शरीर की जो खीटपीट है बीमारियों की, या पिछले कर्म भोग की, वह भूलना होता है। वह शरीर को भी भूलना होता है तो वह दुनिया को भी, यह पुरानी दुनिया को भी भूलना होता है। ये 84 जन्म का पुराना शरीर है। और दुनिया भी अंतिम जन्म वाली है। तो यह जो भूलने का अभ्यास रहता है, कौन से टाइम? हाँ? संगमयुग? संगमयुग में भी कौन सा टाइम? हाँ? बेहद का अमृतवेला। कौन सा है बेहद का अमृतवेला? कब होता है बेहद का अमृतवेला? वह ही पुरुषोत्तम संगमयुग। सारा ही पुरुषोत्तम संगमयुग अमृतवेला होता है?? हाँ, 76 से? अच्छा 76 के बाद बीमारी धीमारी तो नहीं आता है? हाँ? बीमारी तो आएगी, शरीर तो अंत तक सड़ते जाएंगे, आत्मा पावरफुल होती जाएगी। तो कोशिश करके इस देह को भूलना होता है। दुनिया को भी भूलना होता है, की दुनिया में जो पांच तत्व है, जड़ तत्व, उन 5 जड़ तत्व का ही बना हुआ यह शरीर है। तो यह जो भूलने का अभ्यास रहता है ना सुबह-सुबह को। एक होता है हद का अमृतवेला और दूसरा होता है बेहद का सवेरा, तो भूलने का अभ्यास सुबह को तो कोई कुछ भी ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती है, प्रैक्टिस हो जाएगी तो कुछ भी नहीं। वह अभ्यास किया जाता है। कहते हैं ना प्रैक्टिस मैक्स मैन परफेक्ट। तो यह जो भूलने का अभ्यास रहता है सुबह को, क्योंकि बुद्धि में रहता है अब वापस जाना है। (time@1.45-5.00) dt 27.01.2021*_
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