अष्टदेव कौनसा अलौकिक दिव्य कर्म करते है?
* अष्टदेव कौनसा अलौकिक दिव्य कर्म करते है?*
★ अलौकिक दिव्य कर्म तुम आठ बच्चों से सिखकर के फिर वो दुसरे भी जो तुमसे सुनेंगे, फिर वो दिव्य अलौकिक कर्म करेंगे। अपन को आत्मा समझकर के जो ऊँच ते ऊँच सुप्रीम सोल है, जो जन्म मरण के चक्र में नही आता, त्रिकालदर्शी है, अखुट ज्ञान का भंडार है, जिसकी यादगार सारे संसार में खुदाईयो में मिल रही हैं, और भारत में गांव गांव शहर शहर में उसकी यादगार मंदिर बने हुए है, तो वह भगवान मुकर्रर रूप में शरीर रूपी रथ में प्रवेश करके पार्ट बजाये रहा है, उसने जैसे कर्म किये वैसे ही कर्म हम करेंगे, तो हम भी उन आठ जैसे बनेगें। शिव शंकर भोले नाथ ने उनको अपने सर पर बैठाया है। क्योंकि उन्होनें हर धर्म की आत्माओं में बाप को प्रत्यक्ष कर के दिखाया, ऐसी सर्विस की है, सर्विस सर्विस सर्विस। और कोई दूसरा धन्धा ही नहीं। तो यह आलौकिक कर्म है, जो भी सर्विस करे, उस बाप की याद में करे *Vcd 2706*
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