बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है।
*बाप कहते है- बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है।*
_*बाप कहते है- बाप को प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न पूछते रहते है। पूछते रहते है तो श्रीमत की वर्ख़िलाफी करते है की अपने होशियार समझते है? नही? हाँ समझते है। पर प्रश्न पूछने की जरूरत नही है। क्योंकि बाप बिना बताए सब कुछ देते हैं या बोल बोल करने से देते हैं? हाँ, अरे जब टाइम आता है के बच्चे बड़े हो गए हैं, समझदार हो गए, तो गहरी गहरी बातें ज्ञान की बाप खुद रहस्यमई बातें बताते हैं, की नहीं बताते हैं? बताते हैं। तो प्रश्न पूछने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न पूछते तो है, नहीं पूछते? क्यों? क्योंकि आत्मा को धीरज नहीं है, पता नहीं के यह गुरु है कि नहीं, ऊंचे ते ऊंचा सद्गुरु। हाँ, आगे चलकर कोई डब्ब हो गया तो? मामला फेल हो गया, बताया बताया ना बताया, तो क्या करेगा? पूछेगा के नहीं?...*_
_*★ तो बताओ, ये जो दो हैं ऊंच ते ऊंच हैं इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली आत्माए। बाकी हम क्या प्रश्न पूछें? हम माने कौन? हाँ, ब्रह्मा हो, सरस्वती हो, और ब्रह्मा कुमार कुमारी हो, वो क्या प्रश्न पूछेंगे! सबसे ऊंच ते ऊंच पार्ट बजाने वाले इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर वो तो वो हो गए। कौन-कौन? हाँ, सुप्रीम सोल, और मनुष्य सृष्टि का बाप। तो प्रश्न की जरूरत नहीं है। लेकिन फिर भी प्रश्न पूछते रहते है। पूछते रहते है तो श्रीमत की वर्ख़िलाफी करते है की अपने होशियार समझते है? नही? हाँ समझते है। तो प्रश्न पूछने की जरूरत नही है। क्योंकि बाप बिना बताए सब कुछ देते हैं या बोल बोल करने से देते हैं? हाँ, अरे जब टाइम आता है के बच्चे बड़े हो गए हैं, समझदार हो गए, तो गहरी गहरी बातें ज्ञान की बाप खुद रहस्यमई बातें बताते हैं, की नहीं बताते हैं? बताते हैं। तो प्रश्न पूछने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न पूछते तो है, नहीं पूछते? क्यों? क्योंकि आत्मा को धीरज नहीं है, पता नहीं के यह गुरु है कि नहीं, ऊंचे ते ऊंचा सद्गुरु, हाँ, आगे चलकर कोई डब्बो हो गया तो? मामला फेल हो गया, बताया बताया ना बताया, तो क्या करेगा? पूछेगा के नहीं? अरे बोलो, अरे कुछ तो करो हां या ना, कुछ नहीं करोगे? कुछ नहीं करेगा, कोई जवाब नहीं देगा, अच्छा। तो बताया प्रश्न पूछने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि बाप से कोई प्रश्न पूछा नहीं जाता है कभी भी, अगर बात मान लिया तो। क्या? भाई यह हमारा बाप है, हम इसके मूत् से पैदा हुए हैं। है ना? मूत् काय काय में होता है? कौन-कौन सी इंद्रिय में होता है? हाँ, कितने इंद्रिय में मूत् होता है? हाँ? और वह मूत्, काम इंद्रिय में ही मूत् होता है? अच्छा, हाँ? और जो ज्ञान इंद्रियां है उसमें मूत् नहीं होता? उन ज्ञानेंद्रिय से पैदाइश नहीं होती? होती कि नहीं? वाइब्रेशन की पैदाइश होती है। वाइब्रेशन भी की कोई का बहुत तीखा वाइब्रेशन होता है, और कोई का कम तीखा, तो कौन सा इंद्रिय का बहुत तीखा वाइब्रेशन है? आंख का, होता है कि नहीं? तो आंख में भी जो शक्ति जिससे पैदाइश होती है राधा कृष्ण के जैसे 16 कला संपूर्ण बच्चों की, तो वह उसको मूत् कहेंगे कि नहीं? हाँ? नहीं कहेंगे? हाँ, क्यों? वह तो बहुत श्रेष्ठ चीज़ हो गई उससे ऊंची चीज तो कुछ होता ही नहीं बच्चा पैदा। होता है? हाँ, एक सुप्रीम सोल है जिसके वाइब्रेशन से भी बच्चा पैदा नहीं होते। हाँ, वह जिस मुकर्रर रथ में प्रवेश करता है उसके वाइब्रेशन से राधा कृष्ण के जैसे बच्चों की पैदाइश, होते हैं कि नहीं? होती है। तो बाप से कोई प्रश्न पूछा नहीं जाता है, कभी भी नहीं पूछा जाता है। अरे टीचर से पढ़ा जाता है समझने के लिए गहरी बातें, ना कि प्रश्न पूछा जाता है? बुद्धू होते हैं तो टीचर भी उसको समझते हैं, कि यह हमसे ज्यादा होशियार कैसे हो सकता है? तो फिर पूछते हैं। तो देखो गुरु से शिक्षा ली जाती है। और टीचर से, टीचर भी तो बाप है ना, बाप समान है कि नहीं? यह कैसा टीचर है? बाप भी है टीचर भी है और सद्गुरु भी है। (time@19.03-23.48) dt 17.02.2021*_ VCD-3524
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