अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ।
*अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ।*
★ अगर इस दुनिया में सब धर्मों के ऊपर विजय पानी है तो क्या करना है? संगठन बनाओ। यूनिटी बनाओ। तो जो विजय का टीका लगाते हैं ना यहाँ या विजय का जो झंडा लहराते हैं ना तो बताया कि एक आत्मा नहीं चाहिए तो असली त्रिमूर्ति का झंडा है, उसमें तीन आत्माएँ तो कम-से-कम ज़रूर चाहिए- ब्रह्मा, विष्णु, शंकर बाकी एक आत्मा स्वर्ग की स्थापना नहीं कर सकती। कर सकती है? नहीं कर सकती। ऐसे ही जब युद्ध में जाते हैं ना तो कन्याएँ-माताएँ विजय का टीका लगाती हैं और उसमें ढेर सारे चावल पकड़ती हैं और वहाँ चिपकाए देती हैं। क्या? कि अकेली आत्मा नहीं समझना कि युद्ध में हम अकेले जा रहे हैं। नहीं; संगठित, यूनिटी बनाकर जा रहे हैं। यूनिटी माने जैसे एक का डायरैक्शन मिले सेनापति का, वैसे ही सारी सेना अपना कार्य करे। ऐसे नहीं कि एक इधर जा रहा है, एक उधर जा रहा है, एक उधर। हाँ, डायरैक्शन मिले तिड़ी-बिड़ी हो जाओ, थोड़े समय के लिए इधर-उधर भाग जाओ। तो सामने वाली सेना समझेगी दुश्मनों की अरे, ये तो भाग गए तो ये पीछे लौटने लगे। फिर हमला हो, हमला करो पीछे से और पीछे से हमला कर दे तो हड़बड़ा जाएँगे ना वो भागने वाले? हाँ, तो बताया कि संगठित हो करके जो कार्य करेंगे तो सबके सहयोग से सुखमय संसार बनेगा तो सालिग्राम नाम रख दिया है। अकेला चावल नहीं, ग्राम माने गाँव। गाँव माने जहाँ अनेक लोग रहते हैं या एक की कुटिया को गाँव कहेंगे? कहेंगे? नहीं कहेंगे। *VCD-3123*
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