तुम सब रूहानी क्षत्रिय हो। क्षत्रियों की विशेषता क्या रही?

*तुम सब रूहानी क्षत्रिय हो। क्षत्रियों की विशेषता क्या रही?* 

श्रेष्ठ ब्राह्मणों की रक्षा करना, शूद्रो की नहीं। असुरों की रक्षा नहीं करेंगे। करेंगे किसकी?? जो पवित्रता का पालन करने वाली आत्माएं हैं दृष्टि से, वृत्ति से, वाइब्रेशन से, पवित्रता को तरजीह देने वाली पवित्रता का पुरुषार्थ करने वाली, उनकी तो रक्षा करेंगे।

*जो ब्राह्मण नहीं है, या ब्राह्मण बनने का जिनका एम ऑब्जेक्ट नहीं है ,उनको मार-मार बाणों के छलनी करते रहेंगे।*

           👉 *लड़ाई के मैदान में आने वाले को क्षत्रिय कहा जाता है।* 

          👉बिना लड़ाई के राजाई तो मिल ही नहीं सकती। लड़ने की ताकत ही नहीं होगी, तो मुकाबला कैसे करेगा?तो सामना करने की शक्ति विशेष होनी चाहिए।

         *👉और मैदान में ही कोई ना आए, तो उनको क्षत्रिय नहीं कहेंगे। मैदान में आने वाले को क्षत्रिय कहा जाता हैं।*

आजकल तो ऐसे भी लड़ने वाले हैं, कि अपने घर में बैठे-बैठे ही बटन दबाएंगे, लड़ाई के मैदान में जाएंगे ही नहीं, घर में बैठे-बैठे ही खलास कर देंगे। और यहां क्या बोला--- *लड़ाई के मैदान में आने वाले को ही क्षत्रिय कहा जाता है।* अरे! विरोध ही करना है तो सामने आकर करो, छुपकर पीछे से मारने से क्या फायदा? वह तो कायरता हो गई, हत्या हो गई।

*वीरता का काम है --देश की सुरक्षा करना।*

तो तुम सब हो रूहानी क्षत्रिय , बाकी वह है जिस्मानी क्षत्रिय। उनको कहा जाता है बाहुबल से लड़ना और झगड़ना। *तुम्हारी तो ज्ञान की लड़ाई है,धर्म युद्ध है। शुरू में मल्लयुद्ध होती थी बाहों आदि से।* 👉शुरू में कब? आदि में। तो जो आदि में होता है, तो अंत में भी होता है। आपस में लड़ते थे फिर विजय को पाते थे।

*तुम माया पर जीत पाते हो, श्रीमत पर चलकर योगबल के आधार पर।तुम हो रूहानी क्षत्रिय, तुम बाहुबल के आधार पर कोई मल्लयुद्ध नहीं करते हो।*

              👉हमारी तो याद की यात्रा है। माया से भी लड़ाई भी लड़नी है, तो कैसे लड़ेंगे?? याद करेंगे। योग बल से विजय  पाएंगे। तो तुम श्रीमत चलकर जीत पाते हो।


           *👉यह रूहानी लड़ाई, माया का युद्ध, रूहानी बाप ही आकर सिखाते हैं। किसके द्वारा? इन शरीर की कर्मेंद्रियों द्वारा।* कौन सी कर्म इंद्रियों द्वारा, माया का युद्ध सिखाते हैं?? *ज्ञानेंद्रियों से लड़ी जाएगी संकल्पों की लड़ाई।* और माया की लड़ाई?? माया सिर्फ ज्ञानेंद्रियों से ही लड़ाई लड़ती है क्या? वो बाहुबल से भी लड़ते हैं। बाप आ करके इस शरीर की कर्मेंद्रियों द्वारा रुहों को युद्ध सिखलाते हैं। क्योंकि सभी कर्म इंद्रियों पर विजय प्राप्त करनी है। *इंद्रियजीते जग जीत*

तो कोई एक इंद्रिय की लड़ाई थोड़ी सिखलाता है सभी इंद्रियों पर विजय पानी है। अगर कामेन्द्रिय को जीत लिया, तो बाकी तो सब डकैत अपने आप भाग ही जाएंगे।

इसलिए शंकर का गायन है मुखिया को भस्म किया-- *कामदेव को भस्म किया।*


केसेट 39(35मि

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