108 बीज रूपी आत्माएं सभी चैतन्य सेंटर है।
(सेंटर्स-- माना केंद्रीय स्थल।)
*108 बीज रूप आत्माएं, जो सारी दुनिया के हर प्रकार की कैटेगरी की आत्माओं के बीज हैं, वो जैसे कि बाबा की दृष्टि में सेंटर्स हो गए। यह हो गए चैतन्य सेंटर।*
बाप रोज अमृतवेला पढ़ाने आते हैं, तो उस समय बाप के सामने सब सेंटर्स के बच्चे होते हैं। सब सेंटर के बच्चे कैसे आ जाएंगे?? *सेंटर्स-- माना केंद्रीय स्थल।*
*सेंटर- माना जहां सब आकर सेंटर में इकट्ठे हो जाएं।*
*तो दुनिया की जितनी मनुष्य आत्माएं हैं उन सब मनुष्य आत्माओं के जितने भी बीज हैं, वही हैं-- सेंटर, और सब सेंटर का बीज रूप है- अहमदाबाद।* स्वामीनारायण मंदिर का मिसाल दिया। वहां स्वामीनारायण के 108 मंदिर बने हैं, ढेर पैसा आता होगा, तो मिलता तो सब स्वामीनारायण को होगा। यादगार सब यहां की है।
*वह 108 बीज रूप आत्माएं, जो सारी दुनिया के हर प्रकार की कैटेगरी की आत्माओं के बीज हैं, वो जैसे कि बाबा की दृष्टि में सेंटर्स हो गए। यह हो गए चैतन्य सेंटर।*
तो बाप जब रोज आकर पढ़ाते हैं उस समय बाप के सामने सब सेंटर्स के बच्चे होते हैं। भल सामने ना भी हो, तो भी बाप उन्हें अपनी बुद्धि के सामने इमर्ज कर लेते हैं। *बाप कहते हैं-- तुम सभी बच्चों को याद करता हूं, इसमें माया मुझे कोई विघ्न नहीं डालती है। माया तुमको व8गहन डालती होगी मेरे को माया कोई विघ्न नहीं डालती है।* तुम बच्चे मुझे घड़ी घड़ी भूल जाते हो।
कैसेट 88--40मि
Comments
Post a Comment