मनन चिंतन ज्यादा कैसे होता है ?
*मनन चिंतन ज्यादा कैसे होता है ?*
*(याद से) अरे, वो ही बात, ज्ञान में ज्यादा हम रहे सदैव बुद्धि ज्ञान में रमण करे वो कैसे हो ?(सेवा से) दोनों बातें है। निराकार बाप जो साकार तन में आया हुआ है उस निराकार ज्योति बिन्दु को उस साकार में हम जितना प्यार से याद करे ।* ग्लानि से याद करेगें तब याद आएगा या प्यार से याद करेगें तब याद आएगा??? प्यार से याद करेगें तो बहुत याद आता है। और जब बहुत याद आयेगा तो निराकारी स्टेज का असर हमारे ऊपर होगा या नहीं होगा???? *निराकार ज्योतिबिन्दु को हम लम्बे समय तक याद करने के अभ्यासी बनेगें तो हमारी बुद्धि सूक्ष्म बनेगी या विस्तार वाली बनेगी??? सूक्ष्म बनेगी।* सूक्ष्म को याद करने से क्या बनेगी?सूक्ष्म बनेगी। डकैत को याद करेगें तो डकैत बनेगें, चोरों को याद करेगें तो चोर बनेगें।
*तो हम उस निराकार को एक्यूरेट प्रैक्टिकल जगह याद करते है, मुकर्रर तन में याद करते है तो उसका रिजल्ट ये आता है कि, हमारी बुद्धि सूक्ष्म बनती है। और सूक्ष्म बुद्धि में मनन चिंतन मंथन गहराई से चलेगा या भैस बुद्धि में? सूक्ष्म में ज्यादा मनन चिंतन मंथन चलेगा। ज्यादा मनन चिंतन मंथन चलेगा अंदर से बहुत बाते आयेगीं ज्ञान की, मुरली के एक एक प्वांइट के विस्तार में जाएगें तो वो अन्दर का अन्दर ही रखेंगे या बाहर निकालने का दिल होगा?? बाहर निकालने का दिल होगा। तो फिर दूसरों की सेवा करेगें या नहीं करेगें??? तो सेवा बहुत होती है। याद करने से भी सेवा बहुत होती है।*
Vcd- 2161
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