शांति आत्मा का स्वधर्म है।

 *असली परीक्षा कब होगी आत्मा की? जब अशांत वातावरण हो, और उस अशांत वातावरण में भी हम शांत होकर दिखाएं।*


 पुराने,पुराने भी ज्ञान में चलने वाले हैं,चल रहे हैं ज्ञान में। और नए-नए भी निकल रहे हैं। *👉यह कोई जरूरी नहीं है कि जो पुराने ज्ञान में चल रही है, वो उस स्टेज को पकड़े हुए होंगे। और जो नए निकले हुए  हैं, वह नहीं पकड़ सकते।*

          *👉ये तो पूर्व जन्मों का हिसाब किताब है। जिसने पूर्व जन्मों में किसी को ज्यादा अशांत किया हुआ होगा,खुद भी धमाल मचाया हुआ होगा अशांत रहा होगा,तो ज्ञान में आने के बाद भी जल्दी शांति की स्टेज  को नहीं पकड़ सकेगा।भल कितने भी साल से चल रहा हो ज्ञान में।*

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समझते हैं-- यह जो लड़ना झगड़ना जो चलता है, वह शांत हो जाए। 

*परंतु शांत वातावरण में शांति समझना, शांत रहना, यह शांति कोई काम की नहीं है।*  

घर में स्त्री पुरुष होते हैं, कोई तो झगड़ते हैं, कोई नहीं झगड़ते, तो वह नेचुरल शांति हुई क्या??

 *शांति आत्मा का स्वधर्म है। माना आत्मा अशांत होती है, तो अपनी धर्म से, अपनी धारणा से नीचे गिरती है। किस आधार पर?*

*👉कोई ना कोई संग का रंग का आधार बनाया हुआ है, तो संग का रंग लग जाता है। वातावरण से, व्यक्ति से, प्रभावित हो जाती है।* बाप का भी स्वधर्म शांत है आत्माओं का बाप है-- परमपिता परमात्मा।


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