प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए साकार बाप को साकार धरणी चाहिए। बिज साकार तो धरणी भी साकार चाहिए।
_*प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए साकार बाप को साकार धरणी चाहिए। बिज साकार तो धरणी भी साकार चाहिए।
और वो एन्टी सेक्स रुद्रमाला से नही क्योंकि रुद्रमाला तो पुरुष संस्कार के है, तो प्रैक्टिकल में योग सिखाने के लिए धरणी चाहिए विजयमाला से। vcd 2704.*_
जोहर करती थीं उन विदेशियो को टच नहीं होने देती थीं तो जन्मजन्मान्तर की प्यूरिटी उन आत्माओं मे भरी हुई है वो पवित्र आत्माओं को पहले ज्ञान लेने की दरकार है या जो भारत के राजाए जन्मजन्मांतर अपवित्र बनते रहे उन अपवित्र आत्माओं के पहले ज्ञान लेने की दरकार है। अपवित्र आत्माएं हैं जो बाप के बच्चे कहे जाते हैं रूद्र माला के मणके कहे जाते हैं वो जन्मजन्मान्तर के राजाए हैं उनको पहले ज्ञान मिलता है ज्ञान की गहराईयां एडवांस मिल जाती हैं क्योंकि बहुत मैला कपड़ा हैं गंद ज्यादा भरी हुई है तो पानी यूज के लिए ज्यादा चाहिए टाइम यूज के लिए ज्यादा चाहिए साफ ही नहीं होता है कितनी रगड़ करो फिर भी सुधरते नहीं है!
मु.ता.07.10.1966
वीसीडी नं.258
*रुद्र माला की माताएं कन्याएं जो है वो सब पुरुष स्वभाव संस्कार के है या विजय माला के रानियों के स्वभाव, संस्कार के है ?राजाओं के स्वभाव, संस्कार के है,और राजाएं सब कलियुग की अंत तक आते-आते पतित व्यभिचारी बनते है कि नहीं ? खास कर भारत के राजाएं ? रुद्रमाला के सब दुर्योधन दुशासन है।* vcd 2317
ज्ञानी है रूद्र माला और स्नेही है विजय माला। सदा की साथी कहां से निकलते हैं? रूद्र माला के मण के तो कलयुग के अंत में आकर खूब आपस में मोड़ घटोल करते हैं। लेकिन विजय माला स्नेही होने के कारण सदा ही अपने को बाप के साथी समझते हैं। स्नेही आत्मा सदा रमणीक रहती है। सूखे नहीं रहते। रमणीक रहते हैं। ये आत्मा सदा निःचिंत और निश्चित भाव बली रहती है।_
*Vcd 1032*
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