असली शिव जयंती कब कहे ?

 तो बाप कहते हैं--- *भारत में ही शिवजयंती गाई जाती है। तो असली शिव जयंती कब कहे?76 कहे या 89 में  कहें?89 में भी नहीं कह सकते, क्योंकि कृष्ण को काला दिखाया गया है।*

 कृष्ण की भी ग्लानि है,राम की भी ग्लानि है। कृष्ण और राम दोनों को काला मुंह वाला दिखाते है। 

*लेकिन नारायण की कोई ग्लानि शास्त्रों में नहीं है।कारण?कि कृष्णा जब तक सिंगल है, तब तक उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई। कृष्ण जब सिंगल से डबल बन जाता है, प्रवृत्ति मार्ग का पक्का हो जाता है, तब उसकी प्रत्यक्षता होती है। तो कृष्ण जयंती के बाद है- राधा जयंती।*

 राधा के रूप में पार्ट बजाने वाली आत्मा कौन है?? कहां पार्ट बजा रही है,वो चंद्रवंशी आत्मा कौन सी है, वह जब तक क्लियर ना हो, प्रत्यक्ष ना हो, तब तक राधा कृष्ण की जोड़ी कैसे बनेगी?

           *तो ये ब्राह्मणों की संगमयुगी  दुनिया में दोनों ही प्रत्यक्षत होते है। दोनों का ही मेल होता है, और दोनों वंश,  दोनों कुल मेल होकर एक हो जब तक,तव तक बाप की प्रत्यक्षता नहीं हो सकती।*

           *क्योंकि बाप जब आता है तो अनेक कुल, अनेक भाषाओ को मिलाकर क्या कर देता है?? एक बना देता है।तो ब्राह्मणों की संगम युगी दुनिया में, जब तक द्वेत देखने में आता हो, तो दुनिया में कोई मानेगा कि परमात्मा बाप आकरके एक स्वर्ग की स्थापना कर रहाहै?*

 *ब्राह्मणों की दुनिया में दो गुट हो गये।ज्ञान सूर्यवंशियों का गुट, जो सिर्फ ज्ञान की मुरलियो, को ही मानते हैं, परमात्मा बाप के महावाक्यो  के आधार पर ही चलने वाले है, किसी मनुष्य के आधार पर चलने वाले नहीं है।*

         और दूसरा चंद्रवंशीयों का  ग्रुप, जो ज्ञान चंद्रमा ब्रह्मा है, उसके द्वारा चलाई गई जो परंपरा है, ब्राम्हण परिवार है, उनके जो कंट्रोलर है उसके आधार पर चलने वाला जो है वह हुए चंद्रवंशी। क्योंकि चंद्रमा में खुद की रोशनी नहीं होती है चंद्रमा रोशनी सूर्य से लेता है।



केसेट  83(51मि)

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