कृष्ण तो प्रत्यक्ष होता ही है--भागवत के द्वारा।

 *कृष्ण तो प्रत्यक्ष होता ही है--भागवत के द्वारा। यज्ञ के आदि में भी कैसे प्रत्यक्षता हुई ? सिंध हैदराबाद में।तरीका क्या हुआ??अपने घरवार छोड़ कर के जो श्रेष्ठ आत्माएं थी,वो सब सत्संग में भागने लगी-- चलो वृंदावन, भज राधे गोविंद।*

             *तो वह था पार्ट आदि का।और अंत का पार्ट क्या है?? आदि' मध्य और अंत।आदि में एक छोटा सा सैंपल था,मध्य में सिर्फ बीज रूप आत्मा की प्रत्यक्षता की बात है।*

जैसे 500 करोड़ मनुष्य आत्माओ की दुनिया, उसका छोटा रूप अगर देखना हो, हर प्रकार की सैंपल देखना हो, तो कितनी आत्माओं के संगठन को देख ले? 108 आत्माओं के संगठन को देख ले।उसमे सारी दुनिया का नजारा का हर प्रकार की आत्माओ के प्रैक्टिकल पार्ट हम देख सकते हैं।

         *तो 108 आत्माओं की जो बीज रूप आत्माओ का जो संगठन है, रूद्र माला का जो संगठन है, जो पहले पहले माला प्रत्यक्ष होता है, उस दुनिया के बीच वो कृष्ण बच्चा ब्राह्मणों में प्रत्यक्ष होता है।जो बड़ेबड़े हैंड्स हैं, उनमें  बिजली की तरह कौंध आ जाता है।लेकिन देहअभिमान तो देहअभिमान, सर पकड़ लेता है। तो कृष्ण की प्रत्यक्षत्ता द्वापर युग की शूटिंग की आदि में। इसीलिए शास्त्रों में कृष्ण को कौन से युग में डाल दिया??द्वापर में कृष्ण को डाल दिया।*

कोई पूछता है-- *कृष्ण को द्वापर में क्यों डाल दिया?* 

         ऐसी क्या भूल हो गई? तो कोई जवाब नहीं आता। 

        👉 *लेकिन यहां तो ज्ञान ही ऐसा है ,कि शास्त्रों की बातें हो, चाहे कोई साइंस की बातें हो, चाहे किसी भी तरीके से कोई बात क्यों ना हो, ईश्वरीय  ज्ञान के पत्ते पर हर बात सच्चे साबित होनी होनी ही होनी है। हर पॉइंट ऑफ व्यू से, ये ज्ञान क्लियर जरूर होना है।क्लियर करने वाला ना कर पाए ,वह दूसरी बात है।*


केसेट 83(49मि

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