माया अच्छे-अच्छे महारथियों को भी नाक से पकड़ लेती है।
बाबा अभूल बनाते हैं। माया अच्छे-अच्छे महारथियों को भी नाक से पकड़ लेती है। हाथ से क्यों नहीं पकड़ती? नाक से क्यों पकड़ती है?
*जो खुद विकारी होता है वह दूसरों को पहले उस नजर से ज्यादा देखता है।*
👉जो दूसरों को भी उस नजर से देखता है, सब को उस नजर से देखता है, भगवान को भी उसी नजर से देखने लगता है। *जो ईश्वरीय पार्ट है उसको भी काली आंख से देखने लग पड़ता है, तो बाप कहते हैं-- माया इसको नाक से पकड़कर के फ़तकाओ। *महारथियों को नाक से पकड़ती है।क्यों? साधारण पुरुषार्थियों को नाक से नहीं पकड़ती??*
जैसे बंदर है जब पकड़ लेता है ना तो उसकी नाक जमीन मे रगड़ेंगा। किसी के ऊपर ज्यादा गुस्सा होता है तो उसे नाक रगड़ाया जाता है।
तो महारथियों को नाक से पकड़ लेती है, और उनको पता ही नहीं चलता।
Vcd 68(55मि
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