परमपिता परमात्मा के हुकुम से पत्ता-पत्ता हिलता है। क्योंकि वो समझते हैं पत्ते-पत्ते में परमात्मा है। तो रॉन्ग समझते हैं?

 जैसे कहते हैं-- *परमपिता परमात्मा के हुकुम से पत्ता-पत्ता हिलता है। क्योंकि वो समझते हैं पत्ते-पत्ते में परमात्मा है।* तो रॉन्ग समझते हैं? या सही समझते हैं? 

         👉झाड़ का वृक्ष आज समझाएं रहे हैं। *तो कौन से पत्ते पत्तों की बात है? चैतन्य पत्तों की बात है। 500 करोड़ की झाड़ की बात नहीं हो रही है। कौन से झाड़ की बात हो रही है? ब्राह्मणों की जो संगमयुगी दुनिया का झाड़ होता है,वही जब पुराना हो जाता है,तो उसकी सैंपलिंग लगाई जाती है। उस पुराने झाड़ में से कुछ पत्ते लेकर के,टहनिया लेकर के और नये वृक्ष की सैंपलिंग लगाते हैं। तो जो नए-नए शोभनीक पत्ते हैं, रूद्र माला के पत्ते हैं, एडवांस पार्टी की विशेष आत्माएं हैं,तो उनके लिए यह गायन है-- कि परमात्मा की हुकुम से पत्ता पत्ता भी हिलता है। जड़ पत्तों की बात नहीं है।*

*तो क्या परमात्मा बैठ पत्तों को हुकुम करेगा?? जड़ पत्तों को हुकुम करने की तो बात ही नहीं। चैतन्य पत्तों की बात है।*

   

 केसेट 83(1.03मि

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