अभी तक 1500 मिले है, 16000 चाहिए।

 Most imp--

*भगवान आकर ऐसे भुक्कड़ को पसंद करता है जिसकी भूख तीन दुनिया बना कर भी पूरी पूरी नहीं होती, तो तीन दुनिया का विनाश कर देता है। फिर चौथी दुनिया संपन्न बनती है।*


*भगवान ऐसे ही भुक्कड़ को आकर पसंद करते हैं।ड्रामा ऐसा बना हुआ है, कि आखिरी जन्म में जाकर ऐसा जन्म मिलता है, किस दिन जन्म मिलता होगा?? उस दिन जन्म मिलेगा जिस दिन ना कुछ खाने को मिलता है, ना कुछ पीने को भक्ति मार्ग में। क्योंकि बहुत खाएगा तो पचेगा कैसे? थोड़ा बहुत खाया होगा, तो पानी से पचेगा।*

       *तो आखरी जन्म में आकर के, जो निर्जला एकादशी मनाई जाती है भारत में, जहां पानी भी नहीं पिया जाता। उस एकादशी का नाम है-- भीमसेनी एकादशी। उसकी क्या खासियत थी भीमसेन की। बहुत खाता था, महाभारत में दिखाया।अब लोगों ने समझ लिया द्रौपदी चावल बहुत खिलाती होगी। तो आधा में जाम, आधा में रैयत।पांडवों का आधा खाना वह खा जाता था। बाकी आधी में सब खाते थे।। पेटू ब्राह्मणों ने (ऋषि-मुनियों ने) पेट की बात समझ ली,कि भीमसेन स्थूल पेट का भोजन खाता था।*

 *अब है बेहद की बात। जब बाप आते हैं, तो वह उस तन में आते हैं, जो बुद्धि रूपी पेट का भी बहुत भोजन करता है। बहुत तृप्ति चाहिए। कितनी रानियां चाहिए?? निजाम बादशाह की तरह 500 में काम चल जाएगा? नहीं।*   

               *ओम मंडली में आदि ने 300-- 400 रानियां थी, अमेरिका के अखबार में भी निकला था की कलकत्ते में ऐसा जौहरी है जो कहता है मुझे 16000 चाहिए। तो 300 400 रानियों से उसका काम पूरा नहीं हो सकता। वह दुनिया नहीं चलेगी।। 300 -400 रानियों वाली दुनिया तो बिगाड़ देगा, भई हमारा काम पूरा नहीं होगा। फिर ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय वाली दुनिया चलती है। उसका आखरी अंजाम क्या होता है? आखरी अंजाम यह होता है कि उसमें से वह निकलता है, जिसका प्रत्यक्षता वर्ष मनाया गया। बाप का प्रत्यक्षता वर्ष। कौन से बाप का प्रत्यक्षता वर्ष?? शिव बाप का? वह तो ब्रह्मा तन में  प्रत्यक्ष हो ही रहा था। मनुष्य सृष्टि के बाप का प्रत्यक्षता वर्ष प्रजापिता आदम का।*

*तो उसका आखरी अंजाम है-- प्रजापिता तो उसको यहां 1500- 1600  रानिया मिल जाएंगी। तो भूख तृप्ति हो जाएगी? नहीं उसे तो  16000 चाहिए।*

*उसके लिए फिर तीसरी दुनिया रची गई- एडवांस पार्टी कहो, रूद्र माला कहो, बीज रूप आत्माओं की दुनिया कहो।*

         *जैसे बाहर की दुनिया में भी तीन दुनिया मानी जाती हैं।*

*1- एक दुनिया उनकी जो पूंजीवादी है जैसे अमेरिका।* 

*2-एक दुनिया उनकी जो समाजवादी राष्ट्र हैं-- रशिया।*

 *3-और तीसरी दुनिया- न्यूट्रल।*

         *ऐसे ही बाप आकर तीन दुनिया की रचना करता है। पहली दुनिया में पूर्ति नहीं होती, तो दूसरी दुनिया चाहिए। दूसरी दुनिया में भी भूख पूरी नहीं होती, फिर तीसरी दुनिया चाहिए। तीसरी दुनिया में भी भूख पूरी नहीं होती, तो तीसरी दुनिया का भी विनाश। तो शास्त्रों में लिखा है- ब्रह्मा ने 3 दुनिया का विनाश कर दिया, फिर चौथी दुनिया संपन्न बन गई।*


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