बेहद में विनाश कैसे होगा??? 31.03.2021

 बेहद में विनाश कैसे होगा?? 

Date - 31.03.2020


1.

*Most Important Point*

बेहद की हर हर बंम्ब बंम्ब की नगरी बम्बई ने समुन्दर को सुखाया, कैसे?? 👇

*_बाबा कहतें है-पहले ये बम्बई ये इतना बड़ा था थोड़े ही। समुन्दर को सुखाया ना। क्या?? चैतन्य ज्ञान का सागर को कैसे सुखाया?? लोग जब जान जाते हैं, की यह अथाह ज्ञान का सागर है, अखुट ज्ञान का भंडार है, और साकार में भी है, तो तो उसका संग का रंग लेने की कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ। तो जो ढेर के ढेर इंद्रियों से सुख लेने वाले आत्माए है, वह इसका संग का रंग लेने के लिए नजदीक आवेगी, कम से कम मन बुद्धि से तो संग रहेगी? उसे भी नहीं रहेगी? वाचा  से तो संग करेंगी? करेंगी। तो देखो, यह सागर जो है-ऐसे ही भरा पूरा रहेगा या बेहद का सागर सूखेगा? देहअभिमानियो की देह का मिट्टी, पड़ते पड़ते पड़ते पड़ते मुंबई की तरह सूखेगा या नहीं सूखेगा? नहीं सूखेगा? अच्छा क्षीण नहीं होगा? अच्छा, यह बम्बई डूबेगी नहीं? हाँ, हर हर बम बम की नगरी बम्बई, क्या नगरी? अरे आत्मा की नगरी यह शरीर है ना? हाँ। तो यह शरीर मन बुद्धि से खत्म होगा या नहीं होगा? हाँ, तो देखो समुंदर को सुखाया है।_*

_★ *बाबा समझाते हैं अभी देखो यह बांबे है। यह कितना इतना बड़ा हो जाता है। पहले पहले यह बॉम्बे इतना बड़ा था थोड़े ही। अरे यह समुंदर को सुखाया है ना, हाँ? वह तो स्थूल समंदर है, बेहद का समंदर कौन है? हाँ? अरे इस दुनिया में वह बेहद समंदर का पार्ट भी तो बजाने वाला कोई है ना! वह तो कवियों ने अपनी रूपक, अलंकारिक भाषा बनाई है। हाँ,  जो मुकर्रर रथधारी आत्मा हीरो पार्ट धारी वही तो ज्ञान सागर है ना। तो जब बाप हैं नॉलेज देते हैं क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की। जान तो गए हैं ना क्षेत्र क्या है। हे, अर्जुन यह तेरा शरीर ही क्षेत्र है। हाँ। यह ज्ञान सूर्य नहीं है। ज्ञान सागर है अथाहा ज्ञान सागर। तो लोग जब जान जाते हैं, की यह अथाह ज्ञान का सागर है, अखुट ज्ञान का भंडार है, और साकार में भी है, तो तो उसका संग का रंग लेने की कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ। इंद्रियों से भी संग का रंग लेने का कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ, यह है श्रेष्ठ आत्माएं जो देवात्माएं  कहीं जाते हैं उनकी बुद्धि में बैठ जाता है जल्दी। बाप इशारे से समझाते है तभी बैठ जाता है। क्या? की श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ तो सुख है- ज्ञान इंद्रियों का सुख। हाँ। तो वह ज्ञान इंद्रियों के आधार पर संग का रंग लगाएंगे श्रेष्ठ बनेंगे या भ्रष्ट इंद्रियों का संग लगाते रहेंगे? हाँ, नहीं लगाएंगे ना। ना मनसा में, वाचा में, न कर्मणा में। तो देखो ऐसी देवात्माओं की संख्या तो दुनिया में बहुत कम है ना, की स्वर्ग में ढेर के ढेर होंगे? नहीं होंगे। तो जो ऐसी आत्माएं नही है श्रेष्ठ इंद्रियों का सुख भोगने वाली, भ्रष्ट इंद्रियों का सुख भोगने वाली जो धर्म पिताओ ने सिखाया है, उनकी फॉलोवर्स की संख्या बहुत है ना, तो वह कौन सा संग का रंग लग जावेगी, कौन सा संग का रंग लेगी? क्या कोशिश करेंगी? हाँ? भ्रष्ट इंद्रियों का सुख छोड़ेंगे क्या??  नहीं छोड़ेंगे। तो देखो ये जो मुकर्रर रथ धारी आत्मा है, जो ज्ञान सूर्य तो वास्तव में नहीं है, ज्ञान सूर्य तो शिव है, लेकिन यह इस मुक़र्रर रथधारी में प्रवेश करते हैं, वह तो ज्ञान का सागर है। अथाहा ज्ञान का सागर सुख का सागर है, शांति का सागर है, प्यार का सागर है। सागर तो है परंतु जो ढेर के ढेर इंद्रियों से सुख लेने वाले आत्माए है, वह इसका संग का रंग लेने के लिए नजदीक आवेगी, या नहीं आवेगी? हाँ? कम से कम मन बुद्धि से तो संग रहेगी? उसे भी नहीं रहेगी? वाचा  से तो संग करेंगी? करेंगी। तो देखो, यह सागर जो है- ऐसे ही भरा पूरा रहेगा यह बेहद का सागर, या सूखेगा? देहअभिमानियो की देह का मिट्टी, पड़ते पड़ते पड़ते पड़ते मुंबई की तरह सूखेगा या नहीं सूखेगा? नहीं सूखेगा? अच्छा क्षीण नहीं होगा? अच्छा, यह बम्बई डूबेगी नहीं? हाँ, हर हर बम बम की नगरी बम्बई, क्या नगरी? अरे आत्मा की नगरी यह शरीर है ना? हाँ। तो यह शरीर मन बुद्धि से खत्म होगा या नहीं होगा? हाँ, तो देखो समुंदर को सुखाया है। तो फिर जरूर ऐसा होगा। क्या? जो मच्छीमार है, अच्छा वह मच्छी बयानी हो जाएगी। (time@8.27-13.48*_ dt 31.03.2020





2.

Important Point

_*बाबा कहते है- अकाल पड़ेगा, अन्न नही मिलेगा, बरसात नही पड़ेगी। तो देखों बाबा जो भी बात करते है पहले बेहद ब्राह्मणों की बाते करते है, बेहद ब्राह्मणो की दुनिया मे पहले होगीं ना। तो क्या होगा?? बेहद की बरसात कौन सा है और बेहद का अन्न कौन सा है? पहले तो यह ब्राह्मणों की दुनिया में शूटिंग हो। कौन सी बरसात? ज्ञान जल की बरसात नहीं होगी। जब ज्ञान जल की बरसात भी नहीं होगी, तो यह अन्न कहां से आवेगा? और अन्न है याद, तो अकाल में दुक्कड़ में मरेंगे न*_

👉हम नहीं सुधरेंगे, तो यह पिछाड़ी में आफते आवेगे जरूर।

_*★  विकार को नहीं छोड़ेंगे, तो यह सब होगा या नहीं होगा? होगा। तो कुछ तो होगा। कुछ है जो वो समझते हैं, और बुद्धि भी कहती है ना- यह नेचुरल कैलेमिटीज आती जावेगी, अकाल पड़ता जावेगा, दुकाल पड़ता जावेगा, अतिवृष्टि होती जावेगी, तो फिर यह अन्न कहा से आवेगा? मल्टीफिकेशन होती जाती है, दुनिया की आबादी बढ़ती जाती है, और अन्न खाने का कम होता जाता है। खरीददारी सारी वहा विलायत से होती जाती है। भले वहा विलायत में हाँ जमीन तो बहुत है, बड़े-बड़े जंगल है ना? हाँ। फिर वहा का भी तो यही हाल होगा ना, आखरी  न तो यही हाल होगा। कहा बरसात नहीं पड़ेगी, तो अन्न कहां से आवेगा? बेहद की बरसात कौन सा है और बेहद का अन्न कौन सा है? पहले तो यह ब्राह्मणों की दुनिया में शूटिंग हो। कौन सी बरसात? ज्ञान जल की बरसात नहीं होगी। जब ज्ञान जल की बरसात भी नहीं होगी, तो यह अन्न कहां से आवेगा? अन्न खाने से ताकत आती है ना, की ज्ञान जल पीने से ताकत आ जाएगी?? ज्ञान जल पीते रहो तो ताकत आएगी? नहीं। ज्ञान जल तो इसीलिए है कि बाप को पहचानो, हाँ आत्माओं के बाप को भी पहचानो, इस मनुष्य सृष्टि के बाप को भी पहचानो, और उसको याद करेंगे, तो आत्मा में ताकत आएगी ना, हाँ! तो यह अन्न है याद का। बेहद ब्राह्मणों की दुनिया की बात है। तब वह लोग भी समझते हैं, जब यह बात समझ में आती है, कि भाई कुछ आफते हैं, हम नहीं सुधरेंगे, तो यह पिछाड़ी में आफते आवेगे जरूर। क्या? (Time@20.04-23.11) dt 31.03.2020*_




3.

_*ये समंदर में एटम बंम्ब फटेंगे, तो क्या होगा? समंदर में खलबली हो जाएगी। कैसी जल कैसा होगा? बॉयल्ड वाटर बनेगा ना? हाँ! तो यह मछलियां रह जाएंगी? नही। तो पहले ये बेहद की ब्राह्मणों की दुनिया मे शूटिंग होने वाली है।  यह ज्ञान जल पीने वाली मछलिया जो है, पहला पहला जो अवतार दिखाते है। क्या? मत्स्य अवतार था। ईसके बाल बच्चे बचेंगे?? सब खलास। तो देखो, ये हद और बेहद की अन्न की पैदाइश खलास हो जाएगी।*_

_*★ तभी-कभी लिखते हैं भाई यहा अकाल में दुक्कड़ में करोड़ों मरेंगे। विलायत के लिए कहते हैं-विलायत से पहले तो यहां ही है। धन की पैदाइश अन्न की पैदाइश कम होती जावेगी ना। की बढ़ेगी? एटम बंब फ़टेंगे, की दुनिया में जो इतना बड़ा मछलियों का भंडार समंदर में है जिसे खाके ढेर सारे लोग जो मांसाहारी है ना, वह जिंदा रह सकते हैं ना, फिर एटम बम्ब फ़टेंगे तो समंदर में क्या होगा?? हाँ, समंदर में खलबली हो जाएगी। कैसी जल कैसा होगा? बॉयल्ड वाटर बनेगा ना? हाँ! तो यह मछलियां रह जाएंगी? रह जाएंगी? नहीं रह जाएगी। और फिर बेहद ब्राह्मणों की दुनिया में यह शूटिंग पहले होने वाला है। यह ज्ञान जल पीने वाली मछलिया जो है, पहला पहला जो अवतार दिखाते है। क्या? मत्स्य अवतार था। ईसके बाल बच्चे बचेंगे?? सब खलास। कि देखो, ये हद और बेहद की अन्न की पैदाइश खलास हो जाएगी।  (time@23.05-24.57) dt 31.03.2020*_




4.

Important Point _*हद और बेहद की ब्राह्मणों की दुनिया मे अनेक जोर-जोर से नेचुरल कैलेमिटीज आवेगी। बेहद की दुनिया मे पहले बर्फ (ओले) गिरेंगे। पंक्षी और मनुष्य मरेंगे न। तो पुरुषार्थ की ठंडी आएगी की नही? तो क्या होगा? अरे बरसात होती है जोर से, फिर बाद में ठंडी आती है कि नहीं? हाँ। जब जोर से ठंडी आती है और बर्फ गिर जाती है ढेर की ढेर, तो सब मरेंगे कि नहीं मरेंगे? सब दबकर मरेंगे, सब खत्म हो जाएंगे।*_

_*★ देखो जब यह बर्फ गिरती है ना, यह बर्फ अगर रात को गिरती है या दिन में गिरती है,  तो बर्फ में यह पंक्षी दबकर के मरते हैं, या जिंदा रहते हैं? मर जाते हैं। कितने मरते हैं। पंक्षी माने? बेहद की दुनिया में पंक्षी कौन? जो ज्ञान योग के पंखों से उड़ने वाले हैं ना आत्माएं, ढेर के ढेर मर पड़ेंगे एकदम! और जभी वह गिरते हैं ना, हाँ? क्या? जोर से बरसात होती है, और बर्फ के पत्थर गिरते हैं तो भी लोग मारेंगे कि नहीं? जिन महल माडीयो अटारिया में रहते हैं, वह तो वह अर्थक्वेक आया और पहले ही गिर जाएंगे। तो बाहर की दुनिया में रहेंगे ना आकाश के नीचे, और जोर से बरसात पड़ेगी, पत्थर गिरेंगे, कौन से? बर्फ के पत्थर गिरेंगे, तो क्या हाल होगा मरेंगे कि नहीं मरेंगे? मरेंगे। किसी ने कहा ओले-ओले गिरेंगे, हाँ! ओले कहते है। क्या कहते हैं? तो यह तो वह बहुत तूफान लगेंगे बर्फ के। क्या? तूफान आता है ना, तो बरसात भी लाता है ना,  जोर से बरसात आती है, और बर्फ के पत्थर गिर पड़ते हैं। तो यह नेचुरल कैलेमिटीज होंगी अनेक प्रकार की। बाहर की हद की दुनिया में भी और बेहद की ब्राह्मणों की दुनिया में भी जोर-जोर से नेचुरल कैलेमिटीज आवेगी। यहां कौन से पत्थर है बर्फ के? हाँ? है कि नही? क्या? अरे पुरुषार्थ की ठंडी आएगी,  तो क्या होगा? अरे बरसात होती है जोर से, फिर बाद में ठंडी आती है कि नहीं? हाँ। जब जोर से ठंडी आती है और बर्फ गिर जाती है ढेर की ढेर, तो सब मरेंगे कि नहीं मरेंगे? सब दबकर मरेंगे, सब खत्म हो जाएंगे। नहीं तो बुद्धि कहती है कि भला अब कलयुग में इतनी है। कितने? कितने? 500-700 करोड़ है। (time@26.15-29.21) dt 31.03.2020*_

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