सागर मंथन से अपने 84 जन्मों का साक्षात्कार कैसे होता है??

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*सागर मंथन से अपने 84 जन्मों का साक्षात्कार कैसे होता है??👇*


*जब आत्मा कुंदन ही नहीं बनेगी, तपेगी नहीं, तो ज्ञान कैसे निकलेगा? योगी होगा, जो ज्यादा योगी होगा तो बाप के कार्य में, ज्ञान में ज्यादा सहयोगी होगा।*

        *ज्ञान-- माना बाप की पहचान।*

             बाप की पहचान देने में वही सबसे ज्यास्ती सहयोगी बनेगा, जो योगी सो सहयोगी। इसलिए शंकर को ,या ब्रह्मा के पहले पुत्र को योगीश्वर कहा जाता है- योगियों का ईश्वर। *अगर सागर के जल में गर्मी ही नहीं आवेगी, तो सागर का जल भाप बनकर ऊपर उड़ेगा क्या? नहीं, और भाप बनकर अगर ऊंची स्टेज में नहीं जाएगा, तो ज्ञान की बरसात भी नहीं होगी।*

           ऐसे ही वह सागर बाप का बच्चा है शंकर। ज्ञान सागर का बच्चा है, तो योगी अग्नि जरूर चाहिए। जितनी अग्नि प्रज्वलित होगी उतना वाष्प बनेगा। भाप बनकर आत्मा ऊंची स्टेज में जाएगी, उतना ही ज्ञान जल बरसावेगा।  

             इसलिए शास्त्रों में विचार सागर मंथन का नाम बहुत बाला है। *जब कोई मटकी में जमाया हुआ दूध बिलैया जाता है, तो मटकी के अंदर धमाचौकड़ी मचती है।*

           *ऐसे ही जब सागर मंथन हुआ तो बड़े-बड़े एटम बम पृथ्वी के अंदर फटेंगे, तो बड़े-बड़े भूकंप आएंगे। इतने बड़े बड़े भूकंप आ आएंगे, तो समंदर का जल गरम हो जाएगा, खौल जाएगा। सारा समंदर आलोडित हो जावेगा, और ज्ञान का मक्खन, 84 जन्मों की कथा कहानी सबके दिल में उतरने लगेगी। अपने-अपने 84 जन्मों का साक्षात्कार बुद्धि योग से होने लगेगा सार सार ऊपर आ जावेगा।*


वार्ता 612(11मि

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