तीसरी दुनिया विनाश पॉइंट्स

       तीसरी दुनिया विनाश 



सारी दुनिया बोलेगी--ये आतंकवादियों का संगठंन है(108 के लिये)।उनका मुखिया है---वीरप्पन।वीरों का अप्पा*

ब्रह्मा द्वारा रची गई तीसरे नंबर की दुनिया चल रही है भले ये ब्राह्मणों की तीसरी दुनिया *अध्यात्मिक  विश्व विद्यालय, वो सारे के सारे विश्व विद्यालय और सारे के सारे आध्यात्मिक विश्व विद्यालय के पीछे चलने सारे के सारे ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्राह्मण और ब्रह्मा कुमारी विश्व विद्यालय  के पीछे चलने वाली सारी भक्ति मार्ग वालों की दुनिया एक तरफ हो जाएगी, और वो 108 आत्माओं का एक माला रूपी संगठंन एक तरफ हो जाएगा। सारी दुनिया बोलेगी--- ये आतंकवादियों के संगठंन है।* जैसे आज ब्रह्माकुमारिंया बोलती हैं न एडवांस पार्टी वालों के लिए - कि *हमारी बच्चों को मार देते है, हमारे बच्चों को किडनैप करके ले जाते हैं। माना उनके लिए उन्होकि दृष्टि में आतंकवादियों का संगठन हो गया ना?*
*जैसे ओसामा बिन लादेन।
*ओ...शाम आ गई, सूरज छुप गया कोई को दिखाई नहीं देता। शाम आ गई। बिन लादेन अर्थात बिना लाए दिए छोड़ूंगा नहीं। जो कुछ भी तेरे पास है तन, मन, धन,वो सारा इधर लाना पड़ेगा। उसका नाम ही है--- ओसामा बिन लादेन।*
   *तो सारे देशों में जो महाशक्ति कही जाती है, उस महाशक्ति ने कब धर दबोचा उसे? जब जासूस अंदर भेज दिए। पूरी जासूसी कर ली कि अमुक स्थान पर अमुक संगठन के बीच में ये छुपा बैठा है। तो जासूस घुस गए न?*
*ऐसे ही बताया वो तो था हद का ओसामा बिन लादेन, हद का डकैत है वीरप्पन, दक्षिण भारत का।*
*जिस दक्षिण भारत से अष्ट देव प्रत्यक्ष होते हैं।अष्ट देवों का भी कोई मुखिया है कि नहीं?*
वो वीरों का अप्पा-- वीरप्पन
ये इंडिया की गवर्नमेंट भी 20 वर्ष तक नाक रगड़ती रही, उसका बाल बांका भी नहीं कर सकी। जब अंदर के भेड़ियों ने उसका भेद बताया तभी पकड़ा गया न?*
                *तो बताया तो ब्राह्मणों का संगठन ऐसा पक्का संगठन बन जाएगा, ऐसी पक्की माला बन जाएगी एक के स्नेह के सूत्र में पिरोए हुई 108 मनके,ऐसे पक्के हो जाएंगे कि कोई भी जासूस अंदर ,विकारी मनुष्य अंदर पाँव भी नहीं रख सकेगा*।
 
              *ऐसी सशक्त राजधानी स्थापन होगी। उसके सामने दुनिया के बड़े-बड़े संगठन राज्यसत्ताधीशों के ,दुनिया के बड़े बड़े संगठन धर्मसत्ताधीशों के ,हर धर्म के सत्ताधीश होते हैं ना? जैसे क्रिश्चन में हर गिरजाघर में देख लो-- एक फादर बैठा होगा। और दुनिया में जितने भी गिरजाघर हैं उन सब का मुखिया एक पोप, तो धर्म सत्ताधीश हो गए ना।*
*तो कोई भी सत्ताधीश, कोई भी राज्यसत्ताधीश तुम बच्चों का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे। ऐसा पक्का तुम्हारा संगठन बन जाएगा। ऐसी पक्की संगठन के माला को दुनिया में कोई तोड़ नहीं सकेगा।।*












Most imp--

*भगवान आकर ऐसे भुक्कड़ को पसंद करता है जिसकी भूख तीन दुनिया बना कर भी पूरी पूरी नहीं होती, तो तीन दुनिया का विनाश कर देता है। फिर चौथी दुनिया संपन्न बनती है।*


*भगवान ऐसे ही भुक्कड़ को आकर पसंद करते हैं।ड्रामा ऐसा बना हुआ है, कि आखिरी जन्म में जाकर ऐसा जन्म मिलता है, किस दिन जन्म मिलता होगा?? उस दिन जन्म मिलेगा जिस दिन ना कुछ खाने को मिलता है, ना कुछ पीने को भक्ति मार्ग में। क्योंकि बहुत खाएगा तो पचेगा कैसे? थोड़ा बहुत खाया होगा, तो पानी से पचेगा।*

       *तो आखरी जन्म में आकर के, जो निर्जला एकादशी मनाई जाती है भारत में, जहां पानी भी नहीं पिया जाता। उस एकादशी का नाम है-- भीमसेनी एकादशी। उसकी क्या खासियत थी भीमसेन की। बहुत खाता था, महाभारत में दिखाया।अब लोगों ने समझ लिया द्रौपदी चावल बहुत खिलाती होगी। तो आधा में जाम, आधा में रैयत।पांडवों का आधा खाना वह खा जाता था। बाकी आधी में सब खाते थे।। पेटू ब्राह्मणों ने (ऋषि-मुनियों ने) पेट की बात समझ ली,कि भीमसेन स्थूल पेट का भोजन खाता था।*

 *अब है बेहद की बात। जब बाप आते हैं, तो वह उस तन में आते हैं, जो बुद्धि रूपी पेट का भी बहुत भोजन करता है। बहुत तृप्ति चाहिए। कितनी रानियां चाहिए?? निजाम बादशाह की तरह 500 में काम चल जाएगा? नहीं।*   

               *ओम मंडली में आदि ने 300-- 400 रानियां थी, अमेरिका के अखबार में भी निकला था की कलकत्ते में ऐसा जौहरी है जो कहता है मुझे 16000 चाहिए। तो 300 400 रानियों से उसका काम पूरा नहीं हो सकता। वह दुनिया नहीं चलेगी।। 300 -400 रानियों वाली दुनिया तो बिगाड़ देगा, भई हमारा काम पूरा नहीं होगा। फिर ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय वाली दुनिया चलती है। उसका आखरी अंजाम क्या होता है? आखरी अंजाम यह होता है कि उसमें से वह निकलता है, जिसका प्रत्यक्षता वर्ष मनाया गया। बाप का प्रत्यक्षता वर्ष। कौन से बाप का प्रत्यक्षता वर्ष?? शिव बाप का? वह तो ब्रह्मा तन में  प्रत्यक्ष हो ही रहा था। मनुष्य सृष्टि के बाप का प्रत्यक्षता वर्ष प्रजापिता आदम का।*

*तो उसका आखरी अंजाम है-- प्रजापिता तो उसको यहां 1500- 1600  रानिया मिल जाएंगी। तो भूख तृप्ति हो जाएगी? नहीं उसे तो  16000 चाहिए।*

*उसके लिए फिर तीसरी दुनिया रची गई- एडवांस पार्टी कहो, रूद्र माला कहो, बीज रूप आत्माओं की दुनिया कहो।*

         *जैसे बाहर की दुनिया में भी तीन दुनिया मानी जाती हैं।*

*1- एक दुनिया उनकी जो पूंजीवादी है जैसे अमेरिका।* 

*2-एक दुनिया उनकी जो समाजवादी राष्ट्र हैं-- रशिया।*

 *3-और तीसरी दुनिया- न्यूट्रल।*

         *ऐसे ही बाप आकर तीन दुनिया की रचना करता है। पहली दुनिया में पूर्ति नहीं होती, तो दूसरी दुनिया चाहिए। दूसरी दुनिया में भी भूख पूरी नहीं होती, फिर तीसरी दुनिया चाहिए। तीसरी दुनिया में भी भूख पूरी नहीं होती, तो तीसरी दुनिया का भी विनाश। तो शास्त्रों में लिखा है- ब्रह्मा ने 3 दुनिया का विनाश कर दिया, फिर चौथी दुनिया संपन्न बन गई।*


3131(20-1-20)23मि








*सारी दुनिया बोलेगी--ये आतंकवादियों का संगठंन है(108 के लिये)।उनका मुखिया है---वीरप्पन।वीरों का अप्पा*


ब्रह्मा द्वारा रची गई तीसरे नंबर की दुनिया चल रही है भले ये ब्राह्मणों की तीसरी दुनिया *अध्यात्मिक  विश्व विद्यालय, वो सारे के सारे विश्व विद्यालय और सारे के सारे आध्यात्मिक विश्व विद्यालय के पीछे चलने सारे के सारे ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्राह्मण और ब्रह्मा कुमारी विश्व विद्यालय  के पीछे चलने वाली सारी भक्ति मार्ग वालों की दुनिया एक तरफ हो जाएगी, और वो 108 आत्माओं का एक माला रूपी संगठंन एक तरफ हो जाएगा। सारी दुनिया बोलेगी--- ये आतंकवादियों के संगठंन है।* जैसे आज ब्रह्माकुमारिंया बोलती हैं न एडवांस पार्टी वालों के लिए - कि *हमारी बच्चों को मार देते है, हमारे बच्चों को किडनैप करके ले जाते हैं। माना उनके लिए उन्होकि दृष्टि में आतंकवादियों का संगठन हो गया ना?*

*जैसे ओसामा बिन लादेन। 

*ओ...शाम आ गई, सूरज छुप गया कोई को दिखाई नहीं देता। शाम आ गई। बिन लादेन अर्थात बिना लाए दिए छोड़ूंगा नहीं। जो कुछ भी तेरे पास है तन, मन, धन,वो सारा इधर लाना पड़ेगा। उसका नाम ही है--- ओसामा बिन लादेन।*

   *तो सारे देशों में जो महाशक्ति कही जाती है, उस महाशक्ति ने कब धर दबोचा उसे? जब जासूस अंदर भेज दिए। पूरी जासूसी कर ली कि अमुक स्थान पर अमुक संगठन के बीच में ये छुपा बैठा है। तो जासूस घुस गए न?*

 *ऐसे ही बताया वो तो था हद का ओसामा बिन लादेन, हद का डकैत है वीरप्पन, दक्षिण भारत का।*

 *जिस दक्षिण भारत से अष्ट देव प्रत्यक्ष होते हैं।अष्ट देवों का भी कोई मुखिया है कि नहीं?*

वो वीरों का अप्पा-- वीरप्पन 

ये इंडिया की गवर्नमेंट भी 20 वर्ष तक नाक रगड़ती रही, उसका बाल बांका भी नहीं कर सकी। जब अंदर के भेड़ियों ने उसका भेद बताया तभी पकड़ा गया न?*

                *तो बताया तो ब्राह्मणों का संगठन ऐसा पक्का संगठन बन जाएगा, ऐसी पक्की माला बन जाएगी एक के स्नेह के सूत्र में पिरोए हुई 108 मनके,ऐसे पक्के हो जाएंगे कि कोई भी जासूस अंदर ,विकारी मनुष्य अंदर पाँव भी नहीं रख सकेगा*।

  

              *ऐसी सशक्त राजधानी स्थापन होगी। उसके सामने दुनिया के बड़े-बड़े संगठन राज्यसत्ताधीशों के ,दुनिया के बड़े बड़े संगठन धर्मसत्ताधीशों के ,हर धर्म के सत्ताधीश होते हैं ना? जैसे क्रिश्चन में हर गिरजाघर में देख लो-- एक फादर बैठा होगा। और दुनिया में जितने भी गिरजाघर हैं उन सब का मुखिया एक पोप, तो धर्म सत्ताधीश हो गए ना।*

 *तो कोई भी सत्ताधीश, कोई भी राज्यसत्ताधीश तुम बच्चों का बाल बांका भी नहीं कर पाएंगे। ऐसा पक्का तुम्हारा संगठन बन जाएगा। ऐसी पक्की संगठन के माला को दुनिया में कोई तोड़ नहीं सकेगा।।*








*ब्राह्मणों की तीसरी दुनिया का विनाश और नई दुनिया की स्थापना के संदर्भ में।* 👇


अब यह ब्राह्मणों की पुरानी दुनिया अब बदल रही है, *पहले स्थापना फिर विनाश।*...  108 बादशाह की बुद्धि में रहेगा कि यह पुराना मकान तोड़ कर के हम खलास कर देंगे, नए मकान में बैठेंगे, *नए संगठन रूपी किला में बैठेंगे, और पुराने को क्या करेंगे? तोड़कर खलास कर देंगे।*


_★ अब यह दुनिया बदल रही है। कौन सी दुनिया? झूठ खंड की दुनिया। बदल रही है, इसलिए इनसे प्रीत नहीं लगानी है। जो खत्म होने वाली चीज है, उनसे प्रीत नहीं रखनी चाहिए। लौकिक बाप का नया मकान बनता है, तो बच्चों को दिल में नया मकान ही पड़ेगा कि मकान तैयार होगा फिर हम नए मकान में बैठेंगे। याद किन को पड़ेगा? बच्चों को दीगर लोगों को? बच्चों को याद पड़ेगा। *तो यहां भी जो बाप के बच्चे हैं, वारिसदार बच्चे हैं, बाप का वर्सा पाने वाले बच्चे हैं, कौन सा वर्सा? बादशाही का वर्सा। 108 बादशाह। उनको वह नया मकान रूपी संगठन, वह संगठन रूपी किला, उसकी रूप रेखाएं याद जरूर पड़ेगी। ऐसा नहीं हो सकता कि उसकी प्लैनिंग उनकी बुद्धि में ना चले; बाकी तो सारी दुनिया विनाश होने के है। बुद्धि में रहेगा कि यह पुराना मकान तोड़ कर के हम खलास कर देंगे, नए मकान में बैठेंगे, नए संगठन रूपी किला में बैठेंगे, और पुराने को क्या करेंगे? तोड़कर खलास कर देंगे।* तो पुरानी ईंटें बिचारी क्या कहेंगी? *पुराने ईंटें तो यही कहेंगी कि यह तो विनाशकारी है। और नई ईंटें? नई ईंटें तो उनके दिल में यही होगा, कि हम तो कंस्ट्रक्टिव है, हम कोई डिस्ट्रुक्टिव कार्य नहीं कर रहे हैं। पहले बनाना होता है, और फिर पुराना मकान बिगड़ता है। बिगाड़ा जाता है। अब इस सारी दुनिया का विनाश होना है। कौन सी दुनिया का पहले विनाश होना है? विनाश ज्वाला इस रूद्र ज्ञान यज्ञ कुण्ड से निकली है। तो विनाश कल्याणकारी है या अकल्याणकारी है? विनाश भी कल्याणकारी है।* क्योंकि कचड़े का विनाश नहीं होगा, तो शुद्ध सतोप्रधान संगठन तैयार नहीं हो सकता। तो बच्चों ने साक्षात्कार भी किया है। किया किसने साक्षात्कार? यहां किसी ने साक्षात्कार किया है? है? बंद आंखों का साक्षात्कार करने वाले हम नहीं है। हम तो ज्ञानी तु आत्मा-मास्टर ज्ञान सागर ज्ञान सागर के बच्चे है। तो बुद्धि का साक्षात्कार हमने यह कर लिया। क्या? की *अभी ये पुरानी संगठन ब्राह्मणों की दुनिया का खलास होना है और नई दुनिया का संगठन अब हमारे सामने खड़ा है। कृष्ण के हाथ मे क्या दिखाते है? तिरी पर बहिस्थ। इसका क्या मतलब हुआ? बुद्धि रूपी हथेली में सदैव सामने क्या रहता है? की अब नई दुनिया का संगठन आया कि आया और पुरानी दुनिया को लात मार रहा है। इसका क्या मतलब हुआ? हाँ? पुरानी दुनिया है देहधारी धर्मगुरुओं की दुनिया। इन देहधारी धर्म गुरुओं को मारो गोली। अब गोली मारो, चाहे लात मारो, चाहे पुरानी दुनिया को खलास करो बात एक ही है।* तो बच्चों ने साक्षात्कार किया है कि कैसे आग लगती है। किनमे आग लगेगी? पुरानी दुनिया, पुराने मकान, पुराने संगठन, पुराने किला में अब आग लगने वाली है। जो गुल गुल बगीचा बाप तैयार कर रहे है, बगीचे में कभी आग नही लगती, क्योंकि बगीचे में तो स्नेह का पानी दिया जाता है। आग किसमे लगी है? कांटों के जंगल में। काटें आपस मे जंगल के वृक्ष, सूखे वृक्ष आपस में टकराते है और टकराने से आग लगती है और आग लगने से सारा जंगल खलास हो जाता है।  *ऑडियों-95* *(time @ 10.55-16.55)*_









*बाप ने आकर के जो तीसरी दुनिया रची न एडवांस पार्टी, वो विजरूप आत्माओ की दुनिया, वो ऐसी तमोप्रधान बनजाती है, की बाप बोलते रहते है, बोलते बोलते रिटायरमेंट तक ले लेते है। और आप समान किसी को बनाने का पुरुषार्थ करके जाते है, की नही? हाँ। जैसे आप वाणी चालते थे, वैसी वाणी चलाने वाला कोई दूसरा तैयार करता है बच्चे को की नही  करता? नही। तो वो वाणी को नही सुनते है  कोई, ध्यान नही देते है। किसकी वाणी सूनते है?वाचा की देवी की वाणी सुनते है। तो उल्टे बन पड़ते है। बाबा सुल्टा बनाते है। तो देखो ये सीधी बात है। क्या? उल्टा लटकना है उल्लू की तरह, उल्लुओं की वाणी सूनते सूनते या सुल्टा बनना है, जो बाप सूनाते है वाणी! 7.02.2020*









कहते हैं ब्रह्मा ने 4 बार सृष्टि रची।3 बार बिगाड़ दी क्योंकि उनको पसंद नहीँ आई फिर चौथी बार में पूरी राजधानी तैयार हो जाती है

पहली बार रची 1936-37 से 47 तक में फिर दूसरी बार 47 से 76 तक जिसके लिये 66 में ही मुरली में घोषणा कर दी थी--कि 10 वर्ष के अंदर इस पुराणी दुनिया का विनाश हो जायेगा तो कौन सी दुनिया की बात थी?बाबा तो ब्राह्मणों की दुनिया की ही बात करता है बाहर की दुनिया की नहीं।तो बेसिक ब्राह्मणों की दुनिया जहाँ छोटे छोटे बच्चे पढ़ते हैं उनका बाप ब्रह्मा भी बच्चा बुद्धि तो उन बच्चा बुद्धि की दुनिया का विघटन हो जाता है फिर स्थापना भी होती है।76 में विघटन भी तो स्थापना भी पर किनके लिये?उनके लिये जिनके लिये ये बात लागू होती है---आप मुये मर गई दुनिया

फिर उन बच्चों की बीज रूप आत्माओ की दुनिया 76 से शुरू होती है ।उन बच्चों के लिये बोला --तुम बच्चो को तमोप्रधान से सतोप्रधान बनने में 40 से 50 वर्ष लगते हैं तो समय आता है 2017 -2018 ।ये तीसरी बार विनाश होता है।

तो स्थापना करने वाला ,विनाश करने वाला कोई एक मूल तो होगा न?

शास्त्रों में बोला है ब्रह्मा तो अनेकों के नाम है तो उनमें अव्वल नम्बर कौन?परमब्रह्म

उस परमब्रह्म ने पहली बार सृष्टि रची 1936-37 में ।उस समय वो पहला ब्रह्मा था प्रजापिताब्रह्मा।अभी भी परमब्रह्म वही है न।

तो कहते हैं सृष्टि 3 बार पसंद नहीँ आई ,क्यों?क्योंकि अभी सभी की यह हालत है की आज निश्चय बुद्धि और कल अनिश्चय बुद्धि बन जाते हैं।आज कहते हैं बाप मिला और कल ग्लानि करने लग पड़ते।तो शास्त्रों में है की फिर ब्रह्मा ने चौथी बार सृष्टि रची तब पसंद आई और एवरलास्टिंग राजधानी स्थापन हो जाती है पूरे ढ़ाई हजार वर्ष के लिये।

जब पूरी राजधानी स्थापन होती है आत्मिक स्टेज  में स्थित होने वाले मनकों की ,वो टाइम है 2028।तब सब रूहानी स्टेज वाले मनके आत्मिक स्थिति में स्थित हो जाते हैं वो हैं साढ़े 4 लाख आत्माये जो इस पुरुषार्थी जीवन में ही आत्मिक स्टेज में स्थित हो जाते हैं।वो साढ़े 4 लाख तो प्रजा वर्ग है राजयोग का पुरुषार्थ करने वाले हैं 16 हजार 108 उनमें भी सिर्फ 108 ही हैं जो जन्म जन्मातर रजाई पद पाते हैं राजा बच्च्चे हैं उनमें भी जो अव्वल नम्बर हैं सूर्यवँशी जो सबके पूर्वज हैं वो सिर्फ 8 ही हैं।












दुनिया एडवांस पार्टी रची, बीज रूप  आत्माओँ की दुनिया,वो ऐसी तमोप्रधान बन जाती है, कि बाप बोलते रहते हैं, बोलते बोलते रिटायरमेंट तक ले लेते, और आप समान किसी को बनाने का पुरुषार्थ करके जाते हैं। जैसे आप वाणी चलाते थे, वैसे ही वाणी को चलाने वाले बच्चे को तैयार करता है।*

 *तो वह वाणी को नहीं सुनते हैं कोई, ध्यान नहीं देते हैं। किसकी वाणी सुनते हैं? वाचा की देवी की वाणी सुनते हैं, तो उल्टे बन जाते हैं।बाबा सुलटा बनाते हैं। तो देखो यह सीधी बात है उल्टा लटकना है उल्लुओं की तरह?? उल्टी वाणी सुनते सुनते? या सुलटा बनना है, जो बाप वाणी सुनाते हैं? किसके द्वारा?? प्रैक्टिकल वाणी सुनाते हैं-- बुद्धि की देवी सावित्री के द्वारा।*



3149(7-2-20)55मि





Link

https://youtu.be/Xbm6Sg9hOKM





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