महाकाली-- का मतलब सारे संसार में अज्ञान अंधकार फैलाने वाली है। खुद भी गांधारी बनती है अंधी, और जानबूझकर बनती है*
*महाकाली-- का मतलब सारे संसार में अज्ञान अंधकार फैलाने वाली है। खुद भी गांधारी बनती है अंधी, और जानबूझकर बनती है*
*सबसे ज्यादा देहभान में रहने वाली आत्मा है, इस सृष्टि पर-- जगदंबा,( पृथ्वी) पृथ्व्यात। जो लगातार चौड़ी होती जाती है। मिट्टी बढ़ती जाती है, जल (ज्ञान) सूखता जाता है।*
जैसे मुंबई को सागर के जल को सुखाकर बसाया गया, तो रिजल्ट आखिरीन क्या होगा? रिजल्ट में होगा कि पृथ्वी तो माता है। सागर है पिता। सागर की गोद में पृथ्वी समाई हुई है ना। या तो बच्ची कहो, या पत्नी कहो, बात एक ही है।*
*तो जब कोई बात की अति हो जाती है तो अंत करना पड़ता है। तो जो अति करने वाली है-- पृथ्वी बहुत देहभान बढ़ जाता है, बहुत राक्षसी बन जाती है-- महाकाली। सारी दुनिया के लिए काल रूप बन जाती है।*
*सारी दुनिया को खपाखप खपाखप मारती जाती है। किसी को नहीं छोड़ती। सारी दुनिया में असुर बन जाते हैं। राक्षस बन जाते हैं, दुखदाई बन जाते हैं सब एक दो को दुख देते जाते हैं, तो वह महाराक्षसी रूप जो धारण करती है, वह सब के गले काट देती है।*
*महाकाली का मतलब सारे संसार में अज्ञान का अंधकार फैलाने वाली है। खुद भी गांधारी बनती है अंधी, और जानबूझकर अंधी बनती है। ऐसे नहीं कि अंधी है वास्तव में।*
*नहीं, जैसे रावण है तो रावण वास्तव में भगवान को पहचानने वाला ज्ञानी था। लेकिन फिर भी अहंकार के कारण वास्तव में मानता नहीं था, कि भगवान है तो हमको जीतकर दिखाएं।*
*तो ऐसे ही महाकाली घोर अज्ञान अंधकार की रात्रि है। उस घोर अज्ञान के अंधकार के प्रभाव में आने वाला कौन?? धृतराष्ट्र।*
(10-4-19)
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