जो सरेंडर होने के बाद बाहर की दुनिया मे चले जाते है वो कौनसा पद पाएंगे?

 *Important Point*


जो सरेंडर होने के बाद बाहर की दुनिया मे चले जाते है वो कौनसा पद पाएंगे?? 👇


_*राजधानी में अलग अलग ग्रुप्स है ना, तो जो  चलें जातें है बाहर की दुनिया मे सरेंडर हैंड्स, वो कौनसी पद पाएंगे? प्रजावर्ग में चले जायेंगे। राजपरिवार में नही आएंगे।  माना जब तक यहा बाप के सामने है, तो राजकुल में है। राजयोग सीख रहे हैं ना? और चले गए, तो कहां चले गए? बाहर की दुनिया में चले गए, माना कोई पद बना? पद कोई नहीं बना। प्रजा वर्ग में पुरुषार्थ करना पड़े। प्रजा वर्ग में क्या पुरुषार्थ करेंगे? अरे क्या पुरुषार्थ होता है प्रजावर्ग में? बाबा कहते हैं यहां वालों से बाहर वाले उंच बन सकते हैं। कैसे? अरे 16 हजार की माला में से आने से अच्छा है, क्या? जाकर के बड़े-बड़े साहूकार बने। उनके घर में भी ढेर सारी दासदासी होते हैं ना। जो राजघराने में माल खाते हैं, तो वह भी तो खाते होंगे ना। तो देखो, प्रजा में भी पुरुषार्थ करना पड़े*_


 ★ _*पीछे भल कोई आश्चर्यवत होकर के चले गए, भागंती हो गए, ये होके गए। तो जो चले गए उनका भी तो वंडर लगना चाहिए न। और वह वंडर समझना चाहिए, की क्यों चले गए।  अभी भी कोई का कोई नियम थोड़े ही है। कोई कब-कब चला जाए। अभी बाप के पास ऐसे बहुत है, कैसे? जो भाग जाने वाले हैं, को देखे कि नहीं ये तंग है, उनको कुछ प्रबंध करके देवें, अच्छा जाओ, जाके अपने घर में रहो, तो वह तो खुशी से मान जाएँगे। कौन? जो भी सरेंडर हैंड्स है, अगर उनको छुट्टी मिल जाए- तुम जाकर के तुम्हारा जहां मन बुद्धि जिस घर में धरी रहती है, वहां जाओ, तो वह खुशी-खुशी से चले जाएंगे। मान लेंगे। तो फिर वह जैसे कि किस ग्रुप में चले गए? राजधानी में अलग-अलग रूप होते हैं ना, तो कौन से ग्रुप में चले गए? पता ही नहीं? दासदासी? उस से भी नीचे होते हैं  दासदासी तो राजकुल में रहते हैं। चांडाल? चांडाल भी राजकुल के होते है। हाँ, प्रजावर्ग में चले गए। तो यहा से जो गए ना, पहले जो चले गए आदि में, जो आदि में चले गए, तो फिर क्या होगा अंजाम? आदि से अंत में भी चले जाएगें। कौन से वर्ग में चले जाएंगे?? प्रजावर्ग में चले जाएंगे। माना जब तक यहा बाप के सामने है, तो राजकुल में है। राजयोग सीख रहे हैं ना? और चले गए, तो कहां चले गए? बाहर की दुनिया में चले गए, माना कोई पद बना? पद कोई नहीं बना। प्रजा वर्ग में पुरुषार्थ करना पड़े। प्रजा वर्ग में क्या पुरुषार्थ करेंगे? अरे क्या पुरुषार्थ होता है प्रजावर्ग में? बाबा कहते हैं यहां वालों से बाहर वाले उंच बन सकते हैं। कैसे? अरे 16 हजार की माला में से आने से अच्छा है, क्या? जाकर के बड़े-बड़े साहूकार बने। उनके घर में भी ढेर सारी दासदासी होते हैं ना। जो राजघराने में माल खाते हैं, तो वह भी तो खाते होंगे ना। तो देखो, प्रजा में भी पुरुषार्थ करना पड़े। कौनसा पुरुषार्थ? फर्स्ट क्लास प्रजा में जाएंगे, कि सेकंड क्लास प्रजा में जाएंगे की थर्ड क्लास या फोर्थ क्लास प्रजा में जाएंगे? हाँ! बाकी राजाओ के महल में तो नही आ सकें। क्योंकि प्रजा वालों से राजाए तो ऊँची चीज है ना। की नीची है? ऊंची चीज है। कैसे? अरे फर्स्ट क्लास साहूकार होंगे प्रजा वर्ग में फर्स्ट क्लास, तो उनके पास दासदासी ढेर होंगे, महल मारिया ढेर होंगे, होंगे कि नहीं? और?? और क्या चीज नही होगी? जो राजाओ के पास राजवर्ग के पास नहीं होगी? नही याद? अरे कंट्रोलिंग पावर होगी?? कंट्रोलिंग पावर तो नहीं होगी। क्योंकि राजघराने में जो पालने वाले दासदासी भी होंगे तो वो अगर प्रजा वर्ग के बीच में जाएंगेज़ तो कंट्रोल चलाएंगे कि नहीं? हाँ चलाएंगे। तो राजाई तो ऊँची चीज है ना। ऊँच ते ऊँच बाप आकरके रजाई स्थापना करने का तरीका बताते हैं। तो बाबा नहीं समझा है ना बच्चों को, प्रजावर्ग में भले ऊँच ते ऊँच बड़े बड़े साहूकार हो, उनके मुकाबले राजाओ का तो ज्यादा मान मर्तबा होता है ना। नहीं होता है? प्रजा में राजाओं का बहुत मान मर्तवा होता है। क्योंकि उनके महल माड़िया वगैरह सब बहुत ऊंच किस्म के होते हैं। क्योंकि उनका उनका पोजीशन है बहुत बड़ा होता है। किनका?  किन का पोजीशन? राजाओं का। हाँ! (Time@3.18-10.03) dt 18.02.2020*_

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