सूर्यवंशीयों की पहचान✓
*सूर्यवंशीयों की पहचान*---
1---ऊँचे ते ऊंची कुरी है सूर्यवंश। फिर नंबर बार चंद्रवंशी, इस्लामी, बौद्ध, क्रिश्चियन वंश आदि आदि। तो *ब्रह्मा से उत्पन्न हुई आत्माएं, जो पक्का पक्का ज्ञान लेते हैं वह तो सूर्यवंशी बनते हैं। और जो नंबरवार कच्चा ज्ञान लेते हैं तो चंद्रवंशी, इस्लामी, बौधी, क्रिश्चियन बंशी बन पड़ते हैं।*
*ईश्वरीय ज्ञान को कम महत्व देने वाले ही दूसरे धर्मों में कन्वर्ट होते रहते हैं।*
तो श्रेष्ठ सूर्यवंशी आत्माएं गीता का यह उपदेश पक्का याद रखती है--- *"आत्मा अपना स्वयं ही मित्र है और आत्मा अपना स्वयं ही शत्रु है"*
*कोई दूसरे के ऊपर उंगली उठाने की बात ही नहीं।*
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*बाप के असल सूर्यवंशी बच्चे/विरले बच्चे की पहचान क्या बताई??* 👇
*(1) कोई-2 विरले बच्चे हैं, कोटों में कोई-2 हैं, जो अपना पूरा दुर्योधन-दुःशासनपने का पोतामेल भगवान बाप के सामने दे देते हैं, सच्चाई से, कुछ भी छुपाय बगैर। तो भगवान बाप को क्या प्रिय है? सच्चाई प्रिय है। (2) वो सूर्यवंशी बच्चे झाड़ मे दिखाया, ऐसा तना जो नीचे से ले करके ऊपर तक एक ही धर्म में पक्के रहते हैं वो बच्चे। इधर उधर मोड़ते नही है।*
ऐसे सच्चे बच्चे, सचखण्ड, जिसे सतयुग कहा जाता है, उस युग की स्थापना में सहयोगी बनते हैं और वो बच्चे विरले हैं। कैसे विरले? जैसे गीता में कहा- *मनुष्याणां सहस्त्रेषु कश्चित् यतति सिद्धये। (गीता 7/3) हज़ारों मनुष्यों में, जो भी मनुष्यमात्र हैं, उनमें थोड़े निकलते हैं जो यत्न करते हैं; काहे(/किस) के लिए? योग की सिद्धि प्राप्त करने के लिए और यत्न करने वालों में भी कोई-2 निकलते हैं जो मुझे प्राप्त करते हैं;*
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3---- *पुरुषार्थ करने पर पवित्रता की पावर सिर्फ मनुष्यों में ही आ सकती है। और जो अच्छी तरह से समझते हैं पवित्रता क्या चीज है?? वो हैं-- सूर्यवंशी*
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4---- *गीता का भगवान जो श्रीमत देता उसे मानने वाले ही सूर्यवंशी बच्चे हैं। वो शिव के कार्य में पूरा सहयोग करते हैं। अपने देह की भी परवाह नहीं करते।*
*बाप तो परिवार का कल्याणकारी होता है ना। ऐसा कल्याणकारी होता है कि इस सृष्टि रूपी रंगमंच कहो, सृष्टि रूपी परिवार कहो,वसुधैव कुटुंबकम कहो, उस कुटुंब में अगर आग भी लग जाए पूरे मकान में, इस सृष्टि रूपी मकान में,तो कम से कम अपने बच्चों को निकालेगा या नहीं निकालेगा? हाँ? निकालेगा।*
*अपने बच्चों को तो निकालेगा ही। जिन बच्चों के ऊपर धर्मपिताओं का कब्जा बन गया, वो तो जल्दी मानते नहीं कोई बात। जो बात मानते हैं उनको तो निकाल लू?? तो गीता मे श्रीमत देता है श्रेष्ठ मत, उस श्रेष्ठ मत को जो मानने वाले बच्चे हैं ,वो ही-- सूर्यवंशी बच्चे हैं।*
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5-- *ऊँच ते ऊँच जो धर्म है उसके 12 मणके है, जिनमें सब समाए हुए हैं। जैसे 12 राशियां होती हैं, कोई भी मनुष्य दुनिया का हो उन 12 राशियों के अंदर ही होगा। तो ऐसे ही यह 12 विशेष आत्माएं हैं। सूर्यवंशी माला के 108 मणके।*
उनमें 12-12 के 9 ग्रुप है। जो 9 नंबर बार ग्रुपों से कनेक्टेड है। *जो सबसे ऊँचा ग्रुप है- वो सूर्यवंशी ग्रुप है। उस सूर्यवंशी ग्रुप में आठ है। उन सभी धर्मों के पूर्वज, जो बाप से वर्सा लेते हैं।* बाकी चार ऐसे हैं, जो खुद भी वर्सा नहीं लेते। नाम मात्र का वर्सा लेते हैं। और दुनिया के संहार के काम में विशेष लग जाते हैं। यह संहार का कार्य भी विशेष है।
*तो 12 आत्माएं जैसे हर धर्म की बीज हैं। उनमें स्थापना कार्य भी है। पालना करने वाले भी हैं। और विनाश करने वालों के भी बीज हैं।*
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6-- *सूर्यवंशी तमोप्रधान ज्यादा तब बनते हैं, जब भगवान इस सृष्टि पर आ जाता है।* और चंद्रवंशी ज्यादा तमोंप्रधान तब बनते हैं, जब भगवान इस सृष्टि पर आकर साकार रूप धारण कर लेता है।*
*यह अंतर पड़ता है।* वार्ता 874(56 मि
7-- *राजाई की पगड़ियां सबकी अलग-अलग होती हैं। सूर्यवंशीओ की अलग पगड़ी, चंद्रवंशीयों की अलग, क्रिश्चियन की अलग पगड़ी। सूर्यवंशीयों की पगड़ी की निशानी है-- मोर का पंख* 3239
8-- *जिनका खून अपने बाप के खून से मिलता जुलता होगा, जो बाप का खून सो बच्चों का संकल्प रूपी खून, उन सूर्यवंशी बच्चों को कोई प्रश्न नही आवेंगे। क्या? जो बाप ने बोला सो अच्छा लगेगा। जो बोले सो निहाल। सत श्रीं अकाल। किसी बात मे प्रश्न पैदा नही होगा। लेकिन ऐसे सूर्यवंशी सब होंगे क्या? नही होंगे। नंबर वार होंगे, तो प्रश्न भी करेंगे। अब उन प्रश्नों का समाधान नही होना चाहिए? कोई अंदर कचड़ा पैदा हुआ, तो कचड़ा बाहर आना चाहिए या नही आना चाहिए? तो बाप भी कहते है कोई बात अंदर मे आती है, समाधान नही मिलता है तो बाप से पूछों।*
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9-- *सूर्यवंशी ग्रुप गर्म होगा, गर्मी देने वाला होगा, रोशनी देने वाला होगा, या अंधियारा देने वाला होगा? रोशनी देने वाला। सूर्यवंशी ग्रुप होगा तो वो अष्ट में आने वाला होगा।* वार्ता 398
10--Most imp- *तुम सूर्यवंशी बच्चों की खातिर सब को किल्लत उठानी पड़ती है,माना बाप के सन्मुख आकर वापस जाना पड़ता है। (और धर्म वालों को)*
तुम्हारे खातिर तो खास बाप आए हैं। *तुम बच्चों की खातिर तो सब को वापस जाना पड़ता है। माना जब तक तुम, जो 100/. परसेंट तमोप्रधान बने हो, जब तक तुम 100/. परसेंट तमोप्रधान से सतो प्रधान ना बन जाए, तो वह आते रहेंगे, जाते रहेंगे। आते रहेंगे, जाते रहेंगे।*
तो सब धर्म वालों को जब भी आवें, आदि में आवें, मध्य में आवे, तुम्हारी खातिर उनको देखो वापस तो जाना ही पड़ेगा ना। कहां से जाना पड़ेगा?? *बाप के सन्मुख आ करके वापस तो जाना ही पड़ेगा। जाना पड़ता है, माना ड्रामा में नूँध है।* अब यह ड्रामा ही ऐसा बना हुआ है, *जो तुम्हारे कारण तुम्हारे कारण-- माना तुम सूर्यवंशी बच्चों के खातिर सबको किल्लत उठानी पड़ती है, भाग दौड़, भाग दौड़, आना-जाना आना जाना* क्योंकि तुमको तो जरूर एकदम सौ परसेंट नईदुनिया चाहिए, और धर्म वालों की मुकाबले, और जरूर चाहिए। तो फिर उनका हिसाब किताब खलास करके चले जाते हैं। किनका??
*सभी धर्म वालों का जो हिसाब किताब है सूर्यवंशीयों के साथ, और सूर्यवंशी भी कोई एक जैसे नहीं है, सब नंबरबार हैं। तो सब का हिसाब किताब चुकतु करना है।*
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11-- *बाप का खून कैसा होगा? ऐसा होगा जो सबको असर करें। 'O' ग्रुप वाला होगा सूर्यवंशीयों को कुछ ज्यादा ही असर करता है*। 'O' ग्रुप, यूनिवर्सल डोनर होता है, जो सब को खून दे सकता है। हद और बेहद दोनों प्रकार के खून की बात है।
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12- *सूर्यवंशी आत्माएं ब्रह्मांड का मालिक बनकर फट से, वैकुंठ का मालिक बन जाती है। माना ब्रह्मांड में बहुत थोड़े समय रहती है। जो जितना ज्यादा ज्ञान लेते हैं उतनी ही ज्यास्ती खुशी होती है।कोई को लंबे टाइम के बैकुंठ की खुशी, कोई को अल्पकाल की खुशी* 3016
13---- *(अव्यक्त वाणी* 6/01/1079)
1] सदा बाप के साथ और सर्व सम्बन्ध की अनुभूतियों में लवलीन रहेंगे।
2] सूर्यवंशी चढ़ती और उतरती कला में नहीं आते। सदा चढ़ती कला अनुभव करते जैसे सूर्य सदा प्रकाश स्वरूप अनुभव होता, कलाओं के चक्कर में नहीं आता। कब 14 कला सम्पन्न स्टेज कब 8 कला सम्पन्न स्टेज हो इतना अन्तर नहीं होता।
3] सूर्यवंशियों के आगे माया बादल की तरह सामने आती जरूर है लेकिन बादल आता और चला जाता।
4] सूर्यवंशी अपने स्वरूप को सदा समान रखते, बादल को देख प्रकाश कम नहीं होता। सदा अपने बाप के गुण से गुणों में साकार रूप में अनुभवी होते और औरों के आगे भी प्रत्यक्ष होते।
5] सूर्यवंशी सदा बेहद के सेवाधारी स्वयं को लाइट हाउस माइट हाउस अनुभव करते।
6] सूर्यवंशी का हर कदम साकार ब्रह्मा बाप के कर्म रूपी कदम के पीछे कदम उठाने वाले होते अर्थात् कर्म और पुरूषार्थ की गति में साकार ब्रह्मा बाप समान होंगे।
7] सूर्यवंशियों का पहला कदम फालो फादर का होगा - मन-बुद्धि और साकार में सदा बाप के आगे समर्पण होंगे।
8] सूर्यवंशी सदा निश्चय बुद्धि का प्रत्यक्ष स्वरूप सदा निश्चिन्त और सदा स्वयं को कल्प-कल्प के निश्चिंत विजयी अनुभव करेंगे।
9] सूर्यवंशी सदा विश्व कल्याण की जिम्मेदारी को निभाते हुए जितनी बड़ी जिम्मेदारी उतना ही डबल लाइट रूप होंगे।
10] सूर्यवंशी अपने वृति और वायब्रेशन की किरणों द्वारा अनेक आत्माओं को स्वस्थ अर्थात् स्वस्मृति में स्थित करने का अनुभव करावेंगे।
11] सूर्यवंशी सदा अपने प्राप्त हुए सर्व खज़ानों का स्वार्थ अर्थात् स्व अर्थ नहीं लेकिन सर्व प्रति महादानी और वरदानी होते।
12] सूर्यवंशी की विशेष दो निशनियाँ अनुभव होगी - एक तो सदा निर्वाण स्थिति में स्थित हो वाणी में आना। दूसरा सदा स्थिति में स्वमानबोल और कर्म में निर्माण अर्थात् निर्वाण और निर्माण दो निशानियाँ अनुभव होगी।
सूर्यवंशियों की पहचान
1. सूर्य जैसे खुद जलता है पर दुसरो को रोशनी देता है, बैसे ये आत्मे भी खुद जलते है पर दुसरो को ज्ञान की रोशनी प्रदान कर्त्ये है| और सूर्य गर्म भी होता है| तो सूर्यवंशी ग्रुप गर्म होगा, गर्मी देने वाला होगा,कौनसी गर्मी? याद की गर्मी देने बाले| रोशनी देने वाला होगा| सूर्यवंशी ग्रुप होगा तो वो फर्स्ट में आने वाला होगा।
सूर्यवंशी बच्चे जो है बो अपने रोशनी को सूरज की रोशनी में इमर्ज कर लेते है। खुद प्रत्यक्ष नहीं होते, बाप को प्रत्यक्ष करते है। जैसे बाहर की दुनिया में भी जो दुकान होते है, बहा भी बहत जगह बच्चे अपने खुद का नाम नहीं डालते, बाप का नाम डालते।
जैसे राम & sons company । खुद का नाम नहीं डालते। वैसे ही ये सूर्यवंशी बच्चे है।
2. वो सूर्यवंशी बच्चे झाड़ मे दिखाया, ऐसा तना जो नीचे से ले करके ऊपर तक एक ही धर्म में पक्के रहते हैं वो बच्चे। इधर उधर मोड़ते नही है।
3. गीता का भगवान जो श्रीमत देता उसे मानने वाले ही सूर्यवंशी बच्चे हैं। वो शिव के कार्य में पूरा सहयोग करते हैं। अपने देह की भी परवाह नहीं करते। देहाम्बा पातेयामी कार्यम्बा साधेयामी|
4. बाप का खून कैसा होगा? ऐसा होगा जो सबको असर करें। 'O' ग्रुप वाला होगा सूर्यवंशीयों को कुछ ज्यादा ही असर करता है। 'O' ग्रुप, यूनिवर्सल डोनर होता है, जो सब को खून दे सकता है। मन देवता है| तो सूर्यवंशी बच्चे जो असल होंगे उनका भी संकल्प रूपी खून o पॉजिटिव होगा, मन सबको ज्ञान धन देले बाले होंगे| लेवता नही होंगे|
5. सूर्य स्वयं प्रकाशित होता है और सूर्यवंशी बच्चे भी स्वयं के मनन चिंतन मंथन से प्रकाशित होते हैं| और यही ज्ञान फिर अंत तक रहता है क्योकि ये हमारा खुद का है| खुद का ज्ञानामृत है| और ये ज्ञानामृत जिसके पास ज्यादा रहेगा , यही फिर आगे चलके भबिश्य 21 जन्म में स्थूल धन में कन्वर्ट हो जाएगा|
6. बाप के असल सूर्यवंशी बच्चे/विरले बच्चे की पहचान क्या बताई?
कोई-2 विरले बच्चे हैं, कोटों में कोई-2 हैं, जो अपना पूरा दुर्योधन-दुःशासनपने का पोतामेल भगवान बाप के सामने दे देते हैं, सच्चाई से, कुछ भी छुपाय बगैर। तो भगवान बाप को क्या प्रिय है? सच्चाई प्रिय है।
7. हरेक साल में एक एक ग्रुप तैयार होगा, जैसे 2020 में अस्त देव आ गए , उसके बाद हरेक साल में एक एक ग्रुप बनता जाएगा, और एसे करते करते 2021 तक 100 आत्माओ का संगठन तैयार हो जाएगा| ये आत्मे प्योर संसार का सूक्ष्म बिज है|
8. सारी दुनिया तो खाली हाथ वापस जाएगी, और जो बाप समान बच्चे हैं, उनके लिए बोला- कि आप खाली हाथ नहीं जाओगे। सर्व खजाने साथ रहेंगे। माना वो आत्माएं आल राउंडर पार्ट धारी होंगी, तो उनकी हाथ खाली जाने की बात ही नहीं रहती। सर्व खजाने आपके साथ रहेंगे|
9. रूद्र माला के बच्चों में भी बोलदिया 8 राजाई स्पष्ट देखने में आएंगे ब्राह्मण परिवार मे। आठ रजाइयां। कौन-कौन सी 8 रजाईया? अव्वल नंबर सूर्यवंशी राजई...!
10 . मुरली पॉइंट तुम बच्चे बाप को प्रत्यक्ष करते हो और बाप तुम बच्चो को प्रत्यक्ष करते है तो बो सूर्यवंशी बच्चो के लिए कहा|
हमारा बाप सूर्य, जिसका यादगार कल्प बृक्ष के उपर दिखाया | की बिज झार से देताच हो गया बैसे ये आत्मे भी बाप जैसे झार को छोर देती है| नस्तोमोहा स्मृति लब्ध स्टेज को पहुच जाती है|
12 . हम सूर्यवंशी बच्चे है तो हमारी माता कौन है ?तो सूर्यवंशियो की जो माता है बो कौन है? लक्ष्मी, बो ही भारत माता है, माना जो भारत वासी है, उनकी माता| भा मन ज्ञान की रौशनी और रथ मन लगा रहने बाला जो हमेसा ज्ञान की रौशनी में लगे रहते, और बो भारत जिनके दिल में रमण करता है बो है भारत वासी| मन जो उस एक बाप के मत , श्रीमत पर चलते है, बो है भारत वासी| मन असल सूर्यवंशी बच्चे| जिनका खून अपने बाप के खून से मिलता जुलता होगा, जो बाप का खून सो बच्चों का संकल्प रूपी खून, उन सूर्यवंशी बच्चों को कोई प्रश्न नही आवेंगे। जो बाप ने बोला सो अच्छा लगेगा। जो बोले सो निहाल। सत श्रीं अकाल। किसी बात मे प्रश्न पैदा नही होगा।
13 .ये सच्चे बच्चे, सचखण्ड, जिसे सतयुग कहा जाता है, उस युग की स्थापना में सहयोगी बनते हैं और वो बच्चे विरले हैं। कैसे विरले? जैसे गीता में कहा- मनुष्याणां सहस्त्रेषु कश्चित् यतति सिद्धये। (गीता 7/3) हज़ारों मनुष्यों में, जो भी मनुष्यमात्र हैं, उनमें थोड़े निकलते हैं जो यत्न करते हैं; काहे(/किस) के लिए? योग की सिद्धि प्राप्त करने के लिए और यत्न करने वालों में भी कोई-2 निकलते हैं जो मुझे प्राप्त करते हैं;
14. आगे चलकर ये सुर्यवशियी का ग्रुप ऐसा पॉवरफुल बन जाएगा, की कोई भी बीकारी कोई भी भेदिया, इसमें पाव नहीं रख सकेगा।
15.*सूर्यवंशी आत्माओं में बाप समान गुण होंगे, उनकी वही पहचान हो। संग दोष से तो बचना ही है। एक और विशेष बात है, अब बहुत रूप से आत्मा के रूप से, शरीर के रूप से आप सभी को बहकाने वाले बहुत रूप सामने आएंगे, लेकिन उसमें बहकना नहीं है। बहुत परीक्षाएं आएंगी, लेकिन है कुछ भी नहीं।* *परीक्षाओं में पास कौन हो सकता है? जिसमें परख शक्ति पूरी होगी।*
अव्यक्त वाणी-- 26-5- 69
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