बाप का पहचान, वह कैसा होगा?

 *बाप का पहचान, वह कैसा होगा??*



👉  जो बाप का पार्ट होगा वो भी स्वरूप दिखाया जाता होगा संसार में, उसकी विशेषता क्या होगी, उसका चरित्र क्या होगा? वह खुद तो फकीर बनकर के रहेगा, और दूसरों को? और और बच्चों को राजाई देता है। खुद नहीं बनता है, इसलिए उनको कहा जाता है निष्काम सेवा धारी।


_*★ बाप कब आते है? संगम में, रात्रि के 12:00 बजे। आधी रात पूरी हो जाती है और दिन की शुरुआत? शुरुवात भी हो जाती है; अभी तुम बच्चे समझते हो हम मास्टर नॉलेजफूल बन, एक बाप ही है जो तुम बच्चों को पढाकर विश्व का मालिक बनाए देता है। और इधर उधर भटकने की दरकार, दरकार नहीं है। खुद नहीं बनता है। ये भी खास बात है। क्या? जो बाप का पार्ट होगा वो भी स्वरूप दिखाया जाता होगा संसार में, उसकी विशेषता क्या होगी, उसका चरित्र क्या होगा? वह खुद तो फकीर बनकर के रहेगा, और दूसरों को? और और बच्चों को राजाई देता है। खुद नहीं बनता है, इसलिए उनको कहा जाता है निष्काम सेवा धारी। मनुष्य कहते हैं हम धन की आस नहीं रखते हैं, हम तो निष्काम सेवा करते हैं, परंतु ऐसे नहीं होता है। क्या? कोई मनुष्य कर्म करें और उसका फल उसको ना मिले, जैसा संस्कार ले जाते हैं, उस अनुसार जन्म मिलता जरूर है। हाँ। कर्म का फल अवश्य मिलता है। *ऑडियो-12*_






*_बाप की पहचान बताया @  


तुम पढ़कर पद पाए लेते हो फिर थोड़े ही गीता का ज्ञान पढेंगे, जब बाबा राजाई दे गए तो गीता ज्ञान क्यों पढ रहे? फिर तुम्हें गीता ज्ञान पढ़ने और पढ़ाने की दरकार फिर तो नहीं होनी चाहिए। यह तो बात तुम झूठ बोलते हो, कि हमें बाबा राजाई दे गए।_*


_★ बाप ने गीता सुनाई जिसने श्री कृष्ण ने ये पद पाया, फिर तो पढ़ने पढ़ाने की दरकार ही नहीं हैं। तुम पढ़कर पद पाए लेते हो फिर थोड़े ही गीता का ज्ञान पढेंगे। क्या?? यह भी एक पहचान बताई कोई कहे कि हमें तो बाबा राजाई दे गए, तो जब बाबा राजाई दे गए तो गीता ज्ञान क्यों पढ रहे? फिर तुम्हें गीता ज्ञान पढ़ने और पढ़ाने की दरकार फिर तो नहीं होनी चाहिए। यह तो बात तुम झूठ बोलते हो, कि हमें बाबा राजाई दे गए। हाँ? वो बेहद की राजाई तुम स्थापन करोगे? वो हद की राजाई शिवबाबा दे गए? ऐसी बात? अरे शिवबाबा बेहद का बाप है, तो बेहद की ही रजाई आकर के देगा, हद की राजाई थोड़े ही देगा, हद की राजाई तो लौकिक बाप देते हैं। ज्ञान से सद्गति मिल गया, तो फिर ज्ञान लेने की क्या दरकार? जब सद्गति हो जाए फिर तो ज्ञान लेने की दरकार और देने की दरकार रहती नहीं। जितना पुरुषार्थ उतना ऊँच पद पाएंगे। *ऑडियों-12*_




*बाप क्या कहते है?*


👉 पूर्व जन्मों की अपने कर्मो के अनुसार ही तो वो तुम्हारा पति बना है। पूर्व जन्म में ऐसे कर्म किये है तुमने, तो तुमको ऐसा पती मिला है। तो अब जिस रूप में भी तुमको मिला है, क्या करना है तुमको? तुमको उसमें निभाना है, अगर निभाकर के पास हो जाओ, तो जीत होगी; नही तो ये बंधन क्यों बना, बंधन किसने बंधा? बन्धन तो अपने ही कर्मो का बंधन होता है, तो ये बंधन बंधा। तो उस बंधन को पूरा करना चाहिये ना, निभाना चाहिये ना।


_*★ वो तो तव समझाया जाता था,  जब भक्ति भी सतो प्रधान थी। क्या? ये वात कब समझाई जाती थी भक्ति मार्ग में? जब भक्ति सतो प्रधान थी, तव ये बात समझाई जाती थी, की तुम्हारा बाप, टीचर, गुरु पति ही है तुम्हारा। वही तुम्हारा ईश्वर है, परमेश्वर है, पति ही तुम्हारा परमेश्वर है और जब भक्ति तमोप्रधान होती है, तो ये नहीं सिखाते, क्या? की तुम्हारा पति ही सब कुछ है। कह देते है कि पति सब कुछ नहीं है, तुम्हारा समझ नही बनता की तुम नोकरी करलो भारत मे। क्या? भक्ति जब सतोप्रधान होती है तो नतीजा ये दिखाया। क्या? की गुरु कैसा भी हो, पति कैसा भी हो लेकिन उसको परमेश्वर की तरह मानो, क्योंकि मिला कब है? पूर्व जन्मों की अपने कर्मो के अनुसार ही तो वो तुम्हारा पति बना है। पूर्व जन्म में ऐसे कर्म किये है तुमने, तो तुमको ऐसा पती मिला है। तो अब जिस रूप में भी तुमको मिला है, क्या करना है तुमको? तुमको उसमें निभाना है, अगर निभाकर के पास हो जाओ, तो जीत होगी; नही तो ये बंधन क्यों बना, बंधन किसने बंधा? बन्धन तो अपने ही कर्मो का बंधन होता है, तो ये बंधन बंधा। तो उस बंधन को पूरा करना चाहिये ना, निभाना चाहिये ना। तो कलयुग में ऐसा नही सिखाते तमोप्रधान युग मे। क्या? की पति तुम्हारा परमेश्वर है। सतयुग में तो गुरु नहीं था। भक्ति की शुरुवात में भी गुरु होते नहीं है।* *ऑडियो-12*_

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