नव ग्रह
1.👉 8 की विशेषता। vcd 127 से।
बड़े दिल वाले, राज्य अधिकारी
विश्व राज्य अधिकारी, तख्त पर बैठने वाले, बाप समान, वेफ़ीकर बादशाह की स्टेज में रहने वाले, इनकी पूजा सब से पहले होती है नवग्रह के रूप में, डबल नशेे में रहते क्योंकि स्पेशल चांस मिली है, स्पेशल बाप के सहयोगी, दीदी दादाओं का श्रृंगार करने वाले, डबल विदेशी, सारे ही विदेशी, लौकिक और अलौकिक दुनिया से धक्के खाने वाले। विशेष स्नेही और सहयोगी बच्चे।
2.👉 _*रूहानी सेना का मार्शल है शंकर। और वो युद्ध मे विजय पाता है। और उनके 8 बच्चे उनके साथी है। अकेला चना भाड़ फोड़ नही सकता। जो शिव की अष्टमूर्तिया कही जाती है, वो 8 मूर्तियो की पूजा उनके मंदीर दक्षिण भारत मे बनते है*_
_*★ पत्ता भी हिल सकता नही, सत्ता तेरी के। क्या? नई झाड़ की बात है या पुराने झाड़ की बात है? जो बाप ने आकर के नई दुनिया स्थापन किया, उस नई दुनिया के पत्तों की बात है। वो नई दुनिया युद्ध के बाद स्थापना होती है या पहले ही स्थापना होती है? युद्ध के बाद स्थापना होती है। ये महाभारी महाभारत गृहयुद्ध होगा तो मार्शल कौन होगा? कोई मार्शल होगा कि नही रूहानी सेना का? कौन? शंकर। रूहानी और जिस्मानी के बीच मे युद्ध होता है। उस युद्ध मे विजय होती है मार्शल की। अभी समझा? क्या समझा? तो जब विजय होती है तो अकेली की विजय होती है, या अकेला चना भाड़ फोड़ता है या कोई साथी भी होते है? तो 8 साथी है। जो शिव की अष्टमूर्तिया कही जाती है, वो 8 मूर्तियो की पूजा उनके मंदीर दक्षिण भारत मे बनते है। उत्तर भारत मे नही बनते। पूजा भी नही होती। सिर्फ मानते है नवग्रह के रूप में। varta 1630*_
3.👉 _*★ देखो कहते हैं ना भक्तिमार्ग में शुक्र की दशा, बृहस्पति की दशा। शुक्राचार्य को तो जानते हो ना। कौन? हाँ? राक्षसों के गुरु। जब राक्षसों के गुरु की दशा बैठेगी तो क्या बनाएगा? अपना चेला बनाएगा राक्षस को? हाँ। बृहस्पति की दशा। कौन? बृहस्तपति, हाँ। बड़े से बड़े जो देवताएं होते हैं ना उनके भी गुरु बन कर बैठते हैं। तो क्या बनावेंगे? उनके पास जो चेले-चपाटे होंगे तो क्या बनेंगे? देवता ही बनेंगे। फिर कहते हैं राहु की दशा। अरे, ये तो बहुत बुरी दशा है। फिर? शनीचर की दशा। क्या? तो ये दशाएं ढेर की ढेर बैठती हैं ना। तुमने सुना है ना। क्या? 9 ग्रह होते हैं ना। हाँ? तो नौ ग्रहों की; सब एक जैसे होते हैं? नंबरवार होते हैं। तो ग्रहचारी बैठती है। नहीं सुना होवे तो हम फिर बहुतों को बताय देवें। ये दशाओं का कोई को तो बिल्कुल ही अब्सोल्युटली अभी देखेंगे तो एकदम राहु की दशा बैठ गई। है ना? हाँ? वो जैसे पहले था वैसे ही जाकर के हो गया। है ना। अब वो उसमें ही खुश है। तो भी है वंडरफुल बात। VCD-2830*_
4.👉 _*8 आत्माओं का श्रेष्ठ संगठन के यादगार रूप में हमारे भारतीय परंपरा में जो भी अनुष्ठान किया जाता है, उस अनुष्ठान में आठ, नौ आत्माओं को आज भी पूजा जाता है। कोई भी अनुष्ठान करेंगे, मरने के पहले करेंगे, मरने के बाद करेंगे, शादी ब्याह में करेंगे, यज्ञोपवीत में करेंगे, वह नवग्रह पूजा जरूर किये जाते हैं। वह आसमान के ग्रह है जड़े सितारे, यह है धरती के चैतन्य सितारे।*_
_*★ माला है संगठन रूपी माला, जो भगवान ने आकर के श्रेष्ठ आत्माओं का संगठन बनाया था, उस संगठन में सबसे श्रेष्ठ आत्माएं हैं आठ, हमारे भारतीय परंपरा में जो भी अनुष्ठान किया जाता है, उस अनुष्ठान में आठ, नौ आत्माओं को आज भी पूजा जाता है। कोई भी अनुष्ठान करेंगे, मरने के पहले करेंगे, मरने के बाद करेंगे, शादी ब्याह में करेंगे, यज्ञोपवीत में करेंगे, वह नवग्रह पूजा जरूर किये जाते हैं। वह आसमान के ग्रह है जड़े सितारे, यह है धरती के चैतन्य सितारे। वह आसमान के सितारे जो ग्रह नक्षत्र है, वह दुनिया को चलाने वाले नहीं है। दुनिया चैतन्य के द्वारा चलाई जाएगी, या जड़ के द्वारा चलाई जाएगी?? दुनिया का परिवर्तन चैतन्य आत्माओं के द्वारा होगा, या जड़त्व के द्वारा होगा?? चैतन्य में ज्यादा ताकत होती है यहां जड़त्व में ज्यादा ताकत होती है?? चैतन्य आत्मा में ज्यादा ताकत होती है। VCD 246
5.👉 *ऐसे ही भगवान भी जब इस सृष्टि *पर आता है तो जो श्रेष्ठ आत्माएं हैं, उनका चयन करता है नवग्रहों के रूप में। वे तो आसमान के जड़ ग्रह हैं, उनमें सोचने- विचारने की शक्ति नहीं है। वह तो परसानिफिकेशन किया हुआ है शास्त्रों में- बुध देव, मंगल देव, सोमदेव, शुक्राचार्य, शनिदेव।वह परसानिफिकेशन मनुष्य की जड़ बुद्धि ने जड़ ग्रहों के ऊपर समझ लिया। वास्तव में मनुष्य जाति में ही वे नौ श्रेष्ठ आत्माएं हैं, जिनको भगवान पहचानता है, उनको चुनता है, पढ़ाई पढ़ाता है, पालना देता है सृष्टि का नियंता बनने के लिए आगे बढ़ाता है*। वीसीडी 582
6.👉 ★ ग्रह माना घर गृहस्थ, वह एक नही है, उसमे बाल बच्चे भी है, उसके पत्नी भी है, और उसमे पूर्वज भी है। (तो नवग्रहों में एक दिखाई दी है पर उसमे सारी परिवार समाई है। लेकिन एक को दिखातें है।) (तो इस्लाम धर्म बीज का पूर्वज तीसरा नंबर यमराज जरूर शुक्र चार्य होना चाहिए न?) नही, वह उसकी आत्मा है, शुक्रचार्य शरीर भी है, और आत्मा भी है। आत्मा जो वही अष्टदेव है। (जो लक्षण बीज में है वह पूर्वज में भी रहता हैं न जो काम इस्लामी का बताया, तो तिसरे नम्बर में भी जरूर होगी न?) हाँ है। अगर नही है तो नंबर कैसे बनता है तीसरा नम्बर। दुनिया तो पूछेगी न इसको अब्बल नंबर क्यों दे दिया, इसको दूसरा नंबर क्यों दे दिया। इसको तीसरा नंबर क्यों दे दिया। हमारा नाम होना चाहिए। जब टूटेगा तभी तो नंबर मिलेगा। कुछ न कुछ टूटा हुआ। अब थोड़ा समय के लिए टूटेगा या लंबे समय के लिए टूटेगा? जो लंबे समय के लिए टूटेगा वह कमजोर आत्मा और थोड़ा समय के लिए टूटेगा वह पावरफुल आत्मा। *vcd 1703A* [समय- 5.16-8.00]
7.👉 *जब रूद्र माला सम्पन्न रूप में प्रत्यक्ष होती है, तो पहले पहले 8 के द्वारा प्रत्यक्षता होती हैं।* वो 8 देव आत्माएं जो अष्ट देव के रूप में पूजी जाती हैं अष्ट ग्रह के रूप में पूजी जाती है, और नवग्रह के रूप में पूजी जाती है, वो अंत में माना दूसरी मूर्ति का पार्ट जब सम्पन्न स्टेज को प्राप्त होता है, कब??
*जब वो छोटा सा परिवार ईश्वरीय परिवार स्थापित हो जाता है,स्थेरियम हो जाता है, उसके स्थेरियम होने के बाद ,विनाश शुरू होता है।* ये विनाश का कार्य पूरा वृक्ष को भी समाप्त कर देता है , पुरानी जड़ों को भी समाप्त कर देता है,और जो पुराने पुराने सड़े गले हुए बीज हैं, जिनसे मानवीय धर्म की स्थापना होती है , उनको भी समाप्त कर देता है।
*एक ही बीज रह जाता है सत्य सनातन धर्म का और उससे छोटा सा पौधा तैयार होता है।*
Vcd 254(16मि
8.👉 प्रश्न:- बाबा जो अष्टदेव है , वो आपस में टकराएंगे क्या?
जवाब:- अष्टदेव आपस में नही टकराते है , अस्ट रत्न आपस में टकराते है ।
प्रश्न कर्ता:- आठ ग्रह जो है जब आपस में टकराएंगे तब जाकर के एक दूसरे का समर्थन करेंगे ?
जवाब:- हाँ जी ! सारी दुनिया में विप्लव तभी होता है जब नवग्रह आपस में टकराते है। वो टकराते समय यह नही देखते है,कि किसकी स्थिति कितनी बड़ी है , कितना विशाल है । टकराना शुरू कर देते है अहंकार में आकर के ।
वार्ता 80 @34:27 मिनट
9.👉 *बाप चाहे तो सब कुछ कर सकता है, लेकिन प्राप्ति किस को होगी? जो करेगा सो पाएगा। ज्ञान में तो सब कुछ प्रैक्टिकल चाहिए ना। दुनिया ऐसे नहीं मानने वाली। तो बाप का बच्चों से प्यार है न।बाप अकेला नहीं करना चाहते। आप सब बच्चों को, अवतरित होते ही, साथ में अवतरित किया है।*
*बाप प्रैक्टिकल में जब साकार सृष्टि पर अवतरित हुआ, तो साथ साथ 8 बच्चे, अष्ट देव भी अवतरित हुए। माना बाप के साथ आठ की गिनती जुड़ी हुई है। कोई भी अनुष्ठान होता है भारतीय परंपरा में तो नवग्रहों का पूजन जरूर करेंगे।* *साथ-साथ पूजन होने का रहस्य क्या है? जिम्मेवारी उठाई, और साथ-साथ अवतरित भी हुए।*
केसेट 600(vcd 128)55मि
10.👉 *नास्तिक धर्म के पॉइंट ऑडियो 102b साइड*
** 12 राशियाँ होती है कुंभ राशि, मेष राशि, कन्या राशि, वृष राशि। *12 राशियों में दुनिया के जितने भी मनुष्य हैं वो सब बैठे हुए हैं।* तो ऐसे ही जो त्रैता युग में 12 गद्दियाँ है, उन 12 गद्दियो के जो मालिक होंगे। राजा होंगे। वो ही 12 राशियाँ हो गई। *उनमें से आठ राजाये ऐसे हैं आदि वाले*, जो सतयुग में भी राजा बनते हैं। *नौ वा है संगम युग का।* तो नौ जो सतयुग के महाराजाये हैं, वो और त्रेता में तीन और ऐड होते हैं, *तो कुल मिलाके ये 12 चैतन्य आत्माएँ हैं कोई।* जो राशियों की मानिंद है। यानि *सारी दुनिया की आत्माओं को 12 के ग्रुप में बाँटा जाता है। 500 करोड़ की दुनिया का अगर छोटा रूप देखना हो तो 108 जो बीज है रूद्र माला के उन में देखा जा सकता है।* तो 108 ही क्यों हुए? क्योंकि 12, 12 के 9 ग्रुप है। नौ रतन माने नवग्रह। 9 श्रैष्ठ आत्माएँ हैं जिनके पीछे पीछे जैसे 12 का ग्रुप लगा हुआ है। तो 12 नमा 108। *ये 9 वो श्रैष्ठ ग्रुप है जो अपने अपने धर्मो का फाउंडेशन लगाने के निमित्त बनते हैं।* एक नास्तिक धर्म को छोड़ दिया, *सिर्फ नास्तिक धर्म वाली आत्माएँ बाप से वर्षा नहीं लेती। कोई भी प्रकार का वर्षा नहीं ले पाती। राजाई उनमें चलती ही नहीं। वो राजाओं को मानते ही नहीं जैसे लेलन, स्टेलिन के द्वारा रसिया में मार्क्सवाद चला। कम्युनिज्म चला। वहाँ के राजाओं को मार दिया गया हत्या कर दी गई। तो वो राजाई का वर्षा नहीं लेते। क्योंकि परमात्मा बाप को मानते ही नहीं, स्वर्ग को मानते ही नहीं, नास्तिक है। नर्क को मानते ही नहीं, आत्मा को मानते ही नहीं, परमात्मा को मानते ही नहीं, तो उनमें तो सब प्रकार के भूत रह जाते हैं।*
समय 50मिनिट 43 सेकंड
11.👉 वार्ता 179
1-- *संगम युगी स्वर्ग में स्थूल कपड़ों की दरकार नहीं रहेगी।* 18मि
2-- *शिव बाप के दो बच्चे। एक बच्चा और एक बच्ची। बच्चा हुआ राम बाप और बच्ची हुई ब्रह्मा।*। 20मि
3-- *त्रिमूर्ति में दो ही आत्माएं हैं जो बोला कुमार का बताओ शिव बाबा के कितने बच्चे ब्रह्मा विष्णु बन जाता है विष्णु कोई अलग से होता नहीं बाकी रहा शंकर।दोनों की जयंती साथ साथ हैं इसीलिए कृष्ण जयंती भी रात में मनाते, शिव की जयंती भी रात में मनाते।* 30मि
*जिन्नात को काम दिया ऊपर चढ़े, नीचे उतरो। अगर ऐसा ना करें तो क्या होगा सबको खा जावेगा। खा जाने का मतलब- यह नहीं कि स्थूल में खा जावेगा, उनका जो भी पुरुषार्थ है वह सब खलास हो जावेगा। माना कोई पद नहीं पा सकेगा वह एक ही सारा पद ले जावेगा।।* 32मि
*जो भी 500 करोड़ आत्माएं हैं उनकी अंत में गति क्या होगी? सब अपना-अपना स्थूल शरीर छोड़कर सूक्ष्म वतन में जाकर इकट्ठी होंगी, और बाप पहले चला जाएगा या बाद में? उसको शरीर छोड़ते कोई नहीं देखेगा। क्यों नहीं देखेगा? इसलिए नहीं देखेगा,क्योकि वो सबसे बाद में अपना शरीर छोड़ेगा। उसको शरीर छोड़ते कोई देख नहीं सकेगा। इसलिए भक्ति मार्ग में शंकर की जन्म और शंकर की मृत्यु नहीं मानी जाती। बाप सबसे पीछे जावेगा उसके बावजूद भी परमधाम में सबसे पहले पहुंचेगा। इसलिए जिन्नात नाम दिया*
34
*गंगा एडवांस की आदि सो अंत मे प्रत्यक्ष*
★ *शंकर की जटाओं में गंगा समा गई। समाने का मतलब है,कि बुद्धि में समा गई, कि ये गंगा का पार्ट है। गंगाए अंत मे निकलेंगी या मध्य व आदि की बात बताई? अंत मे निकलेगी। इसका मतलब अंत मे निकलेगी, तो जरूर आदि में भी निकली होगी। लेकिन वो बाप बाप ही जानता होगा। और कोई को इस राज का पता नही रहता। और जो जानते है वो अंत मे जानते है कि गंगा निकली। और पुरखो का उद्धार हुआ। इसलिए गंगा जो है वो बेसिक नॉलेज के आधार से भी होती है और एडवांस नॉलेज के आदि में भी होती है और ज्ञान लेती है। सात्विक स्टेज का ज्ञान। गंगा द्वारा ज्ञान सुनकर के ढेर के ढेर आत्माए पतित से पावन बनेंगे ना। वह ईश्वर से जुड़ी हुई होनी चाहिए। तो जब जुड़ती है, तो अंत की बात है। एडवांस की आदि में भी जुड़ी हुई होती है लेकिन पूरी प्रत्यक्ष नही होती दुनिया वालो के नजरो के सामने। बाप तो जानता ही है ये गंगा बनने वाली है जिसने सात्विक ज्ञान सुना है। और कोई कन्या ने इतनी समझदारी से आदि में इतना ज्ञान नही सुना, चाहे वो जगदम्बा ही क्यों न हो। और इसने सात्विक ज्ञान को सात्विक स्टेज में सुना तो अंत मे जरूर प्रत्यक्ष होगी।* 39मि
*पहले सूर्यवंशी 12 का संगठन तैयार होगा 12 में से जो आठ है12 में से जो 8 है, जिनके लिए अव्यक्त वाणी में बोला है- बाप बच्चों के बिगर रह नही सकते, कनेक्शन जोड़े बिगर। और बच्चे बाप से कनेक्शन जोड़े बिगर रह नही सकते। वो कनेक्शन साकार में होता है, या आकारी निराकारी की बात? तो 8 तो एक तरफ हो गए। 12 में से 8 निकले। अब रह गए 4। 12 में से जो 8 है, उनमें से 4 है स्थापनाकारी, 4 है पालनाकारी। बाकि कौन रह गए? नष्टदेव, जरूर कोई है जो लास्ट में प्रत्यक्ष होने वाले।* 43मि
*नौ ग्रह आपस में टकराएंगे उनमें एक है सूर्य। वह तो है बिंदु। वह कभी अंधकार में नहीं आता। स्वर्ग में भी नहीं आएगा। एक है बृहस्पति पतियों का पति। उसके मुकाबले दूसरे ग्रह बहुत छोटे छोटे हैं तो कौन जीतेगा?? बृहस्पति जीतेगा।* 46मि
*ड्रामा जूं मिसल चलता है। जैसे सर का जू चलता है धीरे धीरे धीरे, चुटकी बजाते हर कार्य नहीं होगा।* 48
*स्थूल ग्रह, स्थूल रूप में टकराएंगे। और सूक्ष्म ग्रह सूक्ष्म वाइब्रेशन के आधार पर टकराएंगे।* *सतयुग में रहेंगे सब, विनाश किसी का नहीं होना है। लेकिन उनका अस्तित्व ना के बराबर रहेगा। अपने को मर्ज कर देंगे एक के अंडर में। त्राहिमाम।* 51
*स्थुल ग्रह, टकराएंगे तो पृथ्वी से भी टकराएंगे ना? क्यों नही? पृथ्थी रहेेगी? क्यों नही रहेगी? सब रहेंगे। रहेंगे सब। लेकिन अपने को मर्ज कर देंगे एक के अंडर में। त्राहिमाम। जो भी ग्रह हैं वो रत्न हैं। और रत्न जो होते है वो एक दूसरे से कम वैल्यू वाले होते है। कोई हीरा कोई पन्ना कोई माड़िक कोई मोती कोई पुखराज। और हीरा जो होता है सब वेस क़ीमती होती है। ये हो सकता कोई बड़ाके हीरा हो, ज्यादा रोशनी मारने वाला कोई कम रोशनी मारने वाला। तो जो ज्यादा रोशनी मारने वाला हीरा होता है उनमें से चुनाव होता है 8 का। वो आठों हीरे ही हीरे हैं। पन्ना मोती माड़िक, इनमे उनकी गिनती नही की जा सकती! ये आत्मारूपी हीरे है 8, जो उन रत्नों में प्रवेश करके पार्ट बजायेंगे। माने वो है आत्मा और वो है शरीर।* 52मि
*नवग्रह घर गृहस्थी की यादगार है। घर माना ग्रह, उनका एक घर बन जाता है। प्रवेश करने वाला, और जिस में प्रवेश किया है।*
*ब्रह्मा के तरह तुम बच्चे भी दूसरे के शरीर मे प्रवेश करके पार्ट बजायेंगे अष्टदेव। अष्टदेव जो है वो अष्टरत्न में प्रवेश करके नवग्रह के रूप में पूजे जाते है। पूजा का आधार प्यूरिटी। प्यूरिटी सूर्यवंशी में होगीं या दूसरे धर्म मे? सूर्यवंशी की प्यूरिटी गाए जाती है। पूजी जाती है*।53मि
*कार्यमवा साध्यामि,देहमवा पातयामि। यह धर्म की परीक्षा है-- या तो धर्म पर डटे रहना है, भल शरीर छूट जावे। तुम बच्चे आए हो सर हथेली पर लेकर। तो कोई ना कोई नंबर बार बच्चे निकलेंगे ना।* 56मि
काम निकालने के लिए गधे को भी बाप बनाने में कोई हर्ज नहीं है।1.01
*मुरली में बोला है शंकर ने जब उल्टा कर्म किया तो बिच्छू टिंडन पैदा हुए। कैसे?*
*वो ऐसे, कि ये दुनिया है, इसमे उल्टा काम करने वाले भी ह और सुलटा काम करने वाले भी है। सब का बाप कौन है? अरे उल्टा काम करने वालो का बाप कौन है? और सुलटा काम करने वालो का बाप कौन है? प्रजापिता। एक ही बाप है ना। तो वो जानता है दुनिया की स्थापना भी करना है, दुनिया की पालना भी होना है और दुनिया का विनाश भी होना है। वो विनाश का काम और कोई नही करने वाला, कोई करने वाला है क्या? कोई धर्मपिताओ ने विनाश का काम किया क्या? नही किया। तो जब हालाहल विष निकला, तो कोई पीने के लिए तैयार हुए क्या? नही हुआ। तो जब पहले से पता है, क्या? कोई है ही नही, तो कौन करेगा? आखिरी विनाश हुए बिगर जो स्थापना है वो प्रत्यक्ष हो जाएगी क्या? नही। और प्रत्यक्ष नही हो जाएगी, तो क्रिश्चियन में पैराडाइस, मुसलमानों में जन्नत, और हिंदुओं में बैकुंठ का गायन कैसे हो जाता है? होगा? गायन भी नही होगा। फिर तो सारे ही शास्त्र झूठे हो जाएंगे। तो सच्चाई प्रत्यक्ष के लिए ये भी जरूरी है, क्या? जो रुद्रगण है, वो रुद्रगण ऐसे भी पैदा होते है,जो प्रजापिता के यज्ञ का विध्वंश कर देते है। सारी दुनिया उस रुद्र ज्ञान यज्ञ में स्वाहा हो जाती है। तो अच्छा काम किया या बुरा काम किया? अच्छा काम किया। स्वर्ग तुम्हारा प्रत्यक्ष हो जाएगा।* 1.06
*सूक्ष्म शरीर से आत्मा सब कुछ कर सकती है, सिर्फ ज्ञान नहीं सुना सकती*।1.09मि
जो महा पापी होते हैं उनकी अचानक मौत होती है, अकाले मृत्यु। इसीलिए थोड़े समय के लिए सूक्ष्म शरीर बनता है। जिस में प्रवेश करके काम करेंगे उसका पाप बनेगा, प्रवेश करने वाली आत्मा का बिना शरीर के पाप पुण्य नहीं बनेगा। 1.10मि
*जो महानारायण होता है उसमें भी चार हाथ दिखाए जाते हैं, और विष्णु में भी चार हाथ दिखाए जाते हैं। माना दोनों एक ही होते है।। जिस नारायण की शास्त्रों में कोई ग्लानि नहीं दिखाते, वो नारायण अकेला है।और विष्णु माना दोनों हैं। सत्य एक ही होता है। वही भगवान साबित होता है बाकी सब झूठे। इस झूठ की दुनिया में कोई सच्चा बनकर सदा काल रह नहीं सकता इसीलिए सत्यनारायण की कथा गाई हुई है, सत्य लक्ष्मी लक्ष्मी की नहीं।* 1.11
12. 👉 ★ नवग्रहों की पूजा उत्तर भारत दक्षिण भारत मे होता है। लेकिन अष्टदेव की पूजा उत्तर भारत मे नही होता है। लेकिन नवग्रहों मे वो अष्टदेव भी समाए हुए है। हाँ, अष्टदेव की अलग से मंदिर नही बनते है। दक्षिण भारत मे अष्टदेवों के मंदिर है, मूर्ति है। उसका कारण ये, संगमयुग मे ज्ञान को सबसे पहले पहले दक्षिण भारत वाले समझते है। तो डबल विदेशी है, बाप को जल्दी पहचानतें है, इसलिए दक्षिण भारत मे वो प्राप्त होते है! Vcd 1584 A.
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