कृष्ण गावड़े का छोरा था, बरोबर ना टोपी थी, ना जूती था।"--बेहद में क्या अर्थ है??

 _*मुरली में आता रहता है- ''कृष्ण गावड़े का छोरा था, बरोबर ना टोपी थी, ना जूती था।"--बेहद में क्या अर्थ है??*_


_★ *कृष्ण गावडे का छोरा था ना। बरोबर ना टोपी थी न जुती थी। बेहद में? टोपी माना इज्जत। और बोला न जुती थी। जुती माना? स्त्री को जूती मानते है। मुरली में बोला है भारत में ऐसा परम्परा है कि एक स्त्री मर जाती है तो कहते है एक स्त्री मरी, एक जुती गई, अब दूसरा पहनते है। फिर मुरली में बोला- यह ब्रह्मा भी पुरानी जुती है ना। जुती माना? पाव की सुरक्षा करने वाली। मन बुद्धि रूपी जो आत्मा है, उस आत्मा को आराम देने वाली। स्त्री का धर्म क्या है? पहला धर्म है अपनी पति को किसी भी प्रकार से सुख और शान्ति से भरपूर करना, हर कार्य में सहयोगी बनना। कोई भी बात में बिपरीत नहीं बनना। Audio-299*_

Comments