शंकर जी महाकाली के पाँव के नीचे आजाता है कीड़े मकोड़े की तरह, तो उनके सर के ऊपर रखें हुए जो अष्टदेव है, वो बचें रहेंगे?
*_शंकर जी महाकाली के पाँव के नीचे आजाता है कीड़े मकोड़े की तरह, तो उनके सर के ऊपर रखें हुए जो अष्टदेव है, वो बचें रहेंगे?
उनकी मुंडी कुचलेगी की नही कुचलेगी?? अरे बताओ, उनकी भी मुंडी कुचल जाएगी।_*
_*★ शास्रो में लिखदीया है मनुष्यात्मा कितने जन्म लेती है? 84 लाख जन्म लेती है। तो ऐसी कोई आत्मा है? उन्होंने तो आत्मा सो परमात्मा कर दिया। जितने भी आत्मा है वो सब परमात्मा मिसल 84 लाख योगिया लेती है, अब ऐसा हो सकता है? नही। अब वो तो एक ही आत्मा का गायन है वो संसार रूपी सृष्टि का बीज है। तो बीज में तो सब का पार्ट भरा हया होगा कि नही? मानलो बरगद का वृक्ष है बहुत बड़ा और उसमे छोटे बड़े बहुत ढेर सारे पत्ते है, करणौ पत्ते है कि नही? तो वो सब पत्ते एक जैसे होंगे? एक जैसे पार्ट तो नही बजाने वाले होंगे। वो तो जड़ वृक्ष है, जड़ पत्ते है और ये है प्राणी। इस मनुष्य सृष्टि में मुख्य प्राणी है मनुष्य सृष्टि के 500-700 करोड़ प्राणी, तो उनमे नम्बरवार पार्ट बजाने वाले है ना। हाँ! तो कीड़ीयो जैसे पार्ट बजाने वाले भी है। हाँ! तो जब शंकर जी नीचे आजाएँगे पाव के नीचे, कीड़े मकोड़े की तरफ, तो उनके सर के ऊपर रखें हुए जो अष्टदेव है, वो बचें रहेंगे? उनकी मुंडी कुचलेगी की नही कुचलेगी?? अरे बताओ, उनकी भी मुंडी कुचल जाएगी। (20.16-22.10) dt 11.02.2020*_
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