परम ब्रह्म
परम ब्रह्म
1👉 *_नई दुनिया की ओपनिंग कौनसे ब्रह्मा द्वारा? परमब्रह्म। प्रैक्टिकल में परमब्रह्म कौन? रुद्रमाला की माता और विजयमाला की दोनों माताए जब इकट्ठी होंगी।_*
★ _*देखो, तुम समझाते हो किसको भी कितना भी समझाओ। देखो, समझते थोड़े ही है। भले ओपनिंग भी कराते हो दूसरों से; क्योंकि ओपनिंग क्यों कराते हो दूसरों से? हाँ, वो आज की दुनिया में बड़े हैं ना बच्चे! तो कहते हैं फलाने ने ओपनिंग की। वो वजीर ने ओपनिंग की, प्राइम मिनिस्टर ने। तो अभी यहाँ अगर ये जा करके वो तो ब्रह्मा ही ओपनिंग करेंगे नई दुनिया की, समझे ना! कौन-से ब्रह्मा? कौन-सा ब्रह्मा जा करके ओपनिंग करेंगे? प्रजापिता ब्रह्मा ओपनिंग करेंगे? हाँ, परम्ब्रह्म भूल गया। परम्ब्रह्म प्रैक्टिकल में कौन? दोनों माताएँ जब इकट्ठी होंगी। कौन-2? विजय माला और रुद्रमाला। तो ओपनिंग उनसे कराएँगे जो पवित्र होंगे। समझे ना! हाथ तो इनके चलते हैं ना! कोई और तो मनुष्य नहीं समझेगा कि कोई दो आत्माओं ने मिल करके ओपनिंग की। वैसे भी तो परमपिता परमात्मा कहा जाता है ना! परमपिता माने बाप और परमात्मा माना हीरो पार्टधारी।* *(time@6.40-10.13) VCD 3036*_
2👉 *_चौमुखी महादेव में सन्मुख का मुख है परम्ब्रह्म का और जो पीछे वाला मुख होगया, वो है एकदम फ्रंट में रहने वाला, मुक़र्रर रथ जो बोलेगा इसके एकदम बिपरीत (opposite) बातें। कौन? दादा लेखराज ब्रह्मा। तो परम्ब्रह्म हुआ अव्यभिचारी मुख औऱ ब्रह्मा हुआ व्यभिचारी मुख।_*
_*★ चौमुखी ब्रह्मा में एक मूख जो एकदम front में हो जाता है। ब्रह्मा के 4 मुख तो उनमे एक मुख तुम बच्चों के सन्मुख, मुक़र्रर रथ धारी आत्मा बैठी, जिसे कहते परम्ब्रह्म। और उसके opposite मुख कौनसा है? दादा लेखराज। वो शास्त्रों में दिखाई दिया। क्या? चौमुखी महा देव भी दिखा देते है। कम्पिल में कभी देखा चौमुखी महादेव देखा? अरे एक मंदिर है वहां वो चोर भी आगए थे, दरबाजा वरबाजा तोड़के वो 4 मुखों वाला शिवलिंग उखाड़ने की कोशिश की गई, नही उखाड़ पाए। फिर चले गए। तो वो 4 मुख है वो शिवलिंग में। तो मूर्ति हुई या नही हुई? तो जो पीछे वाला मुख होगया, वो है एकदम फ्रंट में रहने वाला, मुक़र्रर रथ जो बोलेगा इसके एकदम बिपरीत बातें। तो मुक़र्रर रथधारी व्यभिचारी या अव्यभिचारी? अव्यभिचारी। हाँ। तो और उसके जो फ्रंट में है वो पूरा व्यभिचारी। माना परम्ब्रह्म के कनेक्शन में जो भी देह धारी आत्मा आएंगे तो वह परम्ब्रह्मा का पार्ट धारी आत्मा है, वो मन बुद्धि से उनमे लिपायमान होगी? अटैचमेंट नही आएगा। और शिवबाबा की याद में न रहे तो अटैचमेंट में आएगी ना। (time@15.14-19.25) dt 4.09.2019*_
3👉 *_परम्ब्रह्म का पार्ट श्वेताम्बर, श्वेत धवल का है, अर्जुन के घोड़े जो दिखाया-जब सम्पन बन जाता है तो 4ओ घोड़े भी सफेद हो जाते है। सम्पूर्ण अवस्था की यादगार है_*
★ _*परम् ब्रह्मा में हीरो भी है हीरोइन भी है। ये कैसे? दोनों कैसे? अरे बाप आते है तो शर्त रख देते है। क्या? परम्ब्रह्म। जो ब्रह्मा नाम धारी ओ में परम हुआ ना। तो बताया परम्ब्रह्म हुआ निर्विष। वो परमात्मा का पार्टधारी श्वेत कहेंगें या रंगीन-नीलाम्बर कहे? उसका शरीर रूपी वस्त्र जिसमे आत्मा श्वेत, अर्जुन धवन वाली आत्मा काम करती है, वो एक शिवबाबा दूसरा न कोई। दुसरे किसी आत्मा को महत्व दे नही सकते। तो हम उसके सन्मुख बैठ के पढ़ते है। कब से? जब से सन 76 से बाप की प्रत्यक्षता वर्ष मनाया गया। तो वह आदि नारायण आदि देव व महादेव कहो। तो उसको नीलाम्बर कहेंगें की श्वेताम्बर कहें? उसका शरीर रूपी वस्त्र सफेद हो गया। इसलिए उस अर्जुन के रथ के घोड़े सफेद दिखाते है सम्पूर्ण अवस्था की यादगार है, जो सम्पूर्ण बन जाता है तो सफेद है। तो नाम दिया सफेद धवल। (time@19.02-22.43) 04.09.2019*_
4👉*परम्ब्रह्म में तो आवाज करने की दरकार ही नही, क्योंकि वहां देह तो होती नहीं। और शरीर बगैर कोई आवाज नहीं कर सकते। वाइब्रेशन से ही सारा काम होता रहेगा।*
*जब उस सच्चे गुरु के पास बैठेंगे, तो देह याद नहीं रहनी चाहिए। कहां बैठे हैं बाबा?? परम ब्रह्म में बैठे हैं।तो ये शरीर का भान तोड़ देने का है ना। क्योंकि इस दुनिया में जो भी देहधारी हैं उनमें आवाज चलती है। और परम्ब्रह्म?*
*उसमें तो फिर आवाज करने की दरकार ही नही। वाइब्रेशन से ही सारा काम होता रहेगा। तो यहां तो आवाज चलती है। तो शरीर बिगर कोई आवाज कर सकते हैं क्या? नही कर सकते। तो आवाज करना है।*
*तो मनुष्य को ये समझना है बरोबर,कि शरीर हैं तो आवाज, ये आवाज होती है बातचीत करते हैं। तो अगर जब कहा जाता है आत्मा अपन को समझ करके, सुप्रीम सोल की आत्माको देखो, तो कोई ये भी कहते हैं कि इस मुख के द्वारा देखें? मुक़र्रर मुख से या टेम्पोररी मुख से? तो भी मुख चाहिए ना।*
3093(13.12.19)18मि
5👉 Important point.
*_तुमको शिव की आत्मा से आत्मा बनकर बात करनी है तो कहा याद करना है?? बताओ शिव की आत्मा कहा रहती है? कहा देखोगे शिव की आत्माको?? कहा ठहरती है शिव? परम्ब्रह्म में। तो जहां मैं प्रवेश करता हूँ तो मैं उसे किस रूप में स्थिर होकर के प्रवेश करता हूँ? बिंदु रूप में। तो मुझे जैसे क्या चाहिए? ब्रह्मा चाहिए ना। तो ब्रह्मलोक चाहिए कि नही? हाँ। तो ब्रह्मा तो नाम धारी बहुत है परंतु परम्ब्रह्म तो एक ही है ना। तो ये परम्ब्रह्म में वहां देहभान होता है, देह होती है? नही होती है।_*
*_★ ये शिव की आत्मा कहा रहती है? जिस आत्मासे तुम्हे आत्मा बनकर बात करना है, वो कहा रहती है? अरे बताओ जल्दी, हमेशा रहती है? मुक़र्रर रथ में हमेशा रहती है? हाँ? कहा रहती है? और मुक़र्रर रथ में भी रहेगी तो, तो क्या मन बुद्धि से वो पतित शरीर मे रहेगी? बुद्धि से... अरे मन तो उनको होता ही नही। किनको? अरे शिव को मन होता है? नही। तो बुद्धि तो होती है। बुद्धिमानो की बुद्धि है। तो बुद्धि से कहा रहता है? हमेशा समझो इसी में कल्याण है कि इसी में रहता है मानें 100 साल नही रहता है 5000 साल इसी में रहता है? ऐसे समझों? ऐसे समझे? हाँ, वो परमधाम में रहता है। जैसे तुम्हारी आत्मा भृकुटि के मध्य में ललाट में रहती है ऐसे बाप कहा रहता है? परमधाम में रहता है। तो उसका भी तो मालूम होना चाहिए न याद रहना चाहिए न। क्या? सिर्फ आत्माको आत्माके रूप में ही नही देखना है, कही ठहरेगी की नही? कहा ठहरेगी? परमधाम में। वाह तो येउ रखना अच्छी है । क्या अभ्यास रखना? की हम आत्मा सुप्रीम सोल से बात कर रहे है अपन को आत्मा समझ करके, और सुप्रीम सोल कहा बैठा है? हाँ? अरे वो सदाकाल कहा कि वासी है? सदाकाल परमधाम का वासी है। तो ये टेउ अच्छी रहना चाहिए क्योंकि इनसे तुम्हारा देहभान टूट जाएगा। क्या? वो परमधाम में तो कोई देह होती है क्या? होती है? नही होती है। जब तुम देह में ही याद करते रहोगे और देह को तुम समझोगे नही की जिस देह में मैं प्रवेश करता हूँ मुक़र्रर रूप से, तुमको ये पक्का नही होगा, क्या? जहां मैं प्रवेश करता हूँ तो मैं उसे किस रूप में स्थिर होकर के प्रवेश करता हूँ? बिंदु रूप में तो, लेकिन ये समझ करके ना। की मुझे जैसे क्या चाहिए? ब्रह्मा चाहिए ना। तो ब्रह्मलोक चाहिए कि नही? हाँ। तो ब्रह्मा तो नाम धारी बहुत है परंतु परम्ब्रह्म तो एक ही है ना। तो ये परम्ब्रह्म में वहां देहभान होता है, देह होती है? नही होती है। देखता ही है अपन को भी आत्मा समझते है और दूसरों को भी आत्मा समझ करके ज्ञान देता है। ज्ञान देता है तो इन शरीरों के द्वारा देखता है। ज्ञान तो शरीर के द्वारा ही दिया जाएगा न और उसके द्वारा दिया जाएगा वो भी तो शरीर धारी है ना। परंतु यहां क्या है? देहभान तोड़ने का है। शरीर का भान तोड़ने का है। तो तुम बाबा से ही हर समय बात करते रहोगे बाबा का ही पास बैठोगेे ना। वो कहते है ना उपासनाए करो गुरु के पास। उप मानें नजदीक और आसन माने आसन मार के बैठो। किसके पास? गुरु के पास। तो तुम्हारा गुरु कौन है? अरे वो गुरु तो झूठे है। यव तो तुम्हारा सच्चा गुरु है ना। तो उसके पास बैठेंगे तो देह याद नही रहनी चाहिए। क्या याद रहनी चाहिए? परम्ब्रह्म। कहा बैठे है बाबा? परम्ब्रह्म में बैठे है। (time@13 00-19.15) dt 13.12.2019_*
6👉 ★ *_पहला पुरुषार्थ क्या है पुरुषार्थीओ का? निराकार बाप शिव आते है तो निराकार से निराकारी वर्सा मिलेगा ना? तो वो निराकारी वर्सा लेने वाले कौन है कितने है? जो परम् ब्रह्म के भुजाए है। कितने है? 1000 है। बाकि, वह निराकार बाप का निराकारी वर्सा जो ज्ञान है, उस ज्ञान के मननंचिन्तन मन्थन के धंधे में, लेने और देने की धंधे में उन ब्राह्मणों के शिवाए, 1000 ब्राह्मणों के शिवाए और कोई परम्ब्रह्म के सहयोगी नही बनते है। थोड़े है या ज्यादा है? थोड़े है। VCD-2303, time @ 1 hour 25mins_*
7👉 *मन मनाभव किसने बोला? मनुष्य सृष्टि का बाप नहीं कह सकता, वो तो पत्थर बुद्धि। उसके मन मे मनमनाभव होके क्या करेंगे? अरे शिव बाप कहते है-मन माना दिल। शिव बाप का दिल परमब्रह्म के ऊपर आगया? ये परमब्रह्म बने, तो फिर मेरे दिल की बात पूरी हो जाए। कि ये जो पत्थर बुद्धि है, पारस बुद्धि बन जाए। और जब पारस बुद्धि बनेगा तो क्या होगा? बाप के दिल मे ही रहेगा ना।*
*कोई कह नहीं सकता हम 80--82 साल से श्रीमत पर चलते हैं। तो भी कोई गुंजाइश है कि हां बाबा से वर्सा मिलेगा?? हां गुंजाइश है।*
*अरे! ये तो मनमनाभव की बात है। क्या? मेरे मन मे समा जा। ये किसने बोला? आत्माओं का बाप ने बोला या मनुष्य सृष्टि का बाप ने बोला?? मनुष्य सृष्टि का बाप ने बोला मनमनाभव??तेरे मन मे तो पत्थर हैं, पत्थर बुद्धि। तो तेरे मन मे मन मना भव होके क्या करेंगे?*
*अरे, शिव बाप कहते है-मन माना दिल। शिव बाप का दिल किसके ऊपर आगया? शिवबाबा का दिल आगया परमब्रह्म के ऊपर। बाप को क्या चाहिए? अम्मा चाहिए ना। तो ये परमब्रह्म बने, तो फिर मेरे दिल की बात पूरी हो जाए। क्या बात पूरी हो जाए? कि ये जो पत्थर बुद्धि है, ये क्या बन जाए? पारस बुद्धि बन जाए। और जब पारस बुद्धि बनेगा तो क्या होगा? अपने मन मे ही रहेगा, बाप के दिल मे ही रहेगा,कि दूसरो की बात सुनेगा? नही। तो फिर मद्याजीभव।* *मद्याजीभव मानें-- जो भी कर्म करेगा, सिर्फ मत माने मेरे लिए करेगा। यजन जो भी करेगा, वो मेरे लिए करेगा। अपने देह के लिए भी परवाह करेगा?? अपने देह का भी परवाह नही करेगा। तो हो गया मनमनाभव, मद्याजीभव।*
3134( 23.01.20)13मि
8👉 *शात्रों में भी आई है कि शंकर 32 वर्ष की आयु में परमब्रह्म में लीन हो जाता है।*
“द्वात्रिशदरवर्मययसि भौतिकशरीरं परित्यज्य परब्रह्मणि लीनमासीत” (अमरकोश में
कल्पद्रुम, शंकर शब्द, 12-13 वीं पंक्ति से उद्धृत)
“द्वात्रिशदस्योज्वलकीर्तिशशेः समाव्यतीयु: किल शंकरस्य" (महा भा.3-228-6)
(मंगलकारके त्रिकाण्डशेष)
9👉 *Important point*
_*वो आदम, शंकर, आदिदेव, वो जब सम्पन्न स्टेज धारण करता है पुरूषार्थ की, तो वो शंकर उस साकार रूपधारी बैल पर सवार हो जाता है या नहीं? हाँ, सवार हो जाता है। किस रूप में सवार होता है? स्त्रीं रूप मे या पुरुष रूप मे? परम्ब्रह्म के रूप मे। ऐसे परमब्रह्म को जो पहचानेंगे, ऊँच-ते-ऊँच भगवंत को जो पहचानेंगे, जो शास्त्रकारों ने भी शास्त्रों में लिख दिया है- “गुर्रूर ब्रह्मा, गुर्रूर विष्णु, गुर्रूर देवो महेश्वर:, गुर्रूर साक्षात परमब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः।”*_
_*★ कौन है हनुमान की आत्मा जो मान-मर्तबे का हनन कर देती है? कोई भी हो; मान-मर्तबे का हनन करती है या नहीं करती है? करती है। हाँ, उसको भी कोई जन्म देने वाला है या नहीं? हाँ, उसको भी कोई जन्म देने वाला, उसको भी अपना सेवाधारी बनाने वाला कौन है? वो ही आदम, वो ही शंकर, वो ही आदिदेव, वो जब सम्पन्न स्टेज धारण करता है पुरूषार्थ की, तो फिर क्या होता है? वो शंकर उस साकार रूपधारी बैल पर सवार हो जाता है या नहीं? हाँ, सवार हो जाता है। किस आधार पर? पुरूष चोले के आधार पर सवार हुआ या स्त्री चोला? पुरूष चोला और स्वभाव-संस्कार भी, स्वभाव-संस्कार भी परमब्रह्म का धारण करता है या नहीं धारण करता है? धारण करता है। तो बताया, ऐसे परमब्रह्म को जो पहचानेंगे, ऊँच-ते-ऊँच भगवंत को जो पहचानेंगे, जो शास्त्रकारों ने भी शास्त्रों में लिख दिया है- “गुर्रूर ब्रह्मा, गुर्रूर विष्णु, गुर्रूर देवो महेश्वर:, गुर्रूर साक्षात परमब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः।” जिसका इस साकार सृष्टि पर अगर कोई उदाहरण दिया जाए, जड़ जो भी तत्व हैं, उनमें कोई तत्व ऐसा है जो आज भी देखने में आता है कि बोलने में आता है कि शांति का सागर है।(time@46.07-48.12) dt 13.04.2020*_
10👉 *Important point*
*_जैसे शिव के तीन शक्ति है ब्रह्मा विष्णु शंकर, ऐसे ही उस मुक़र्रर रथ धारी की 3 शक्ति है। कौन? सरस्वती, लक्ष्मी, और जगदम्बा। तो वो पुरुष पैदा होता है स्त्रीं चोले से। स्त्रीं चोले कि 3 शक्ति से पैदाइश होता है। और परम्ब्रह्म का रूप बनकर रहता है, सबसे ज्यास्ती सहन शक्ति वाली माता।_*
_*★ जब बाप आते हैं-तो कलयुग के अंत सतयुग के आदि में पुरुषोत्तम संगमयुग में वह तीनों माताए, उनके संस्कार स्वभाव मिलकर के एक होते हैं या नहीं होते हैं? तीनों माताओं के स्वभाव संस्कार में मिलकर के एक होते हैं। सरस्वती कहो, उसको लक्ष्मी कहो या उसको जगतपिता के साथ वाली क्या कहो? जगदंबा कहो। तो यह तीनों शक्तियां जब मिलती है, तो वैष्णवी देवी कही जाती हैं। क्या? कहीं जाती है ना। और पुरुष पैदा किस से होता है? स्त्री चोले से पैदा होता है या पुरुष पुरुष से पैदा होता है? नहीं। वह तो स्त्री चोले से ही जन्म लेता है। तो वह स्त्रीं चोले की तीन शक्तियां है। जैसे भगवान को तीन मूर्तियों के रूप में पुरुष रूप में दिखाते हैं भक्ति मार्ग में- ब्रह्मा-विष्णु-शंकर, ऐसे ही भगवान जिस मुक़र्रर रथ में प्रवेश करते हैं, उसको आप सामान बनाने के लिए शर्त रखते हैं। क्या करना है? परम ब्रह्मा का रूप बनकर के दिखाओ। क्या? ब्रह्मा नाम धारियों में सबसे ज्याती सहनशक्ति रूप धारण करने वाली माता बनना है या नहीं बनना है? बनना है। देखो उनको कहेंगे कि हाँ जीते जी मर गया। माता के स्वभाव संस्कार को प्रेफरेंस दिया या नहीं दिया? नहीं दिया? नहीं दिया तो दुर्योधन दुशासन। और फिर प्रीफेरेंस दिया, तो क्या कहेंगे? (Time@25.54-28.05) dt 06.04.2020*_
11👉 *Important point.*
शिव जैसे ना स्त्रीं, न पुरुष रूप ऐसा परम्ब्रह्म बाप समान बने, तो उसकी यादगार बनती है-शिवलिंग👇
_*परम ब्रह्मा बना, सबसे ज्यास्ती सहन शक्ति वाला बन गया तो कहेंगे जीते जी मर गया। कहेंगे- शिवलिंग। वो मुक़र्रर रथ मन बुद्धि से ऐसा स्वरूप धारण करता है, उस लिंग की याद रहती है नही। न लिंग रूप की याद रहती, न फीमेल रूप की याद रहती। देह मात्र की याद रहती है नही। तब कहेंगे उसे बाप समान परम पुरुष बना-सम्पन्न आत्मा। उसका नाम देते है शिवलिंग।*_
_*★ ऐसे ही भगवान जिस मुक़र्रर रथ में प्रवेश करते हैं, उसे आप सामान बनाने के लिए शर्त रखते हैं। क्या करना है? परम ब्रह्मा का रूप बनकर के दिखाओ। क्या? ब्रह्मा नाम धारियों में सबसे ज्याती सहनशक्ति रूप धारण करने वाली माता बनना है या नहीं बनना है? बनना है। देखो उनको कहेंगे कि हाँ जीते जी मर गया। माता के स्वभाव संस्कार को प्रेफरेंस दिया या नहीं दिया? नहीं दिया? नहीं दिया तो दुर्योधन दुशासन। और फिर प्रीफेरेंस दिया, तो क्या कहेंगे? नाम भले देते हैं शिवलिंग, शिव का लिंग, लेकिन शिव तो तो निराकार है, उसका तो शरीर होता ही नहीं, उसको लिंग होता है? उसको तो लिंग होता ही नहीं है। तो शिवलिंग क्यों कहते हैं? जिस मुक़र्रर रथ में प्रवेश करते हैं, वह मन बुद्धि से ऐसा स्वरूप धारण करता है, कि उस लिंग रूप की याद रहती ही नहीं है। ना लिंग रूप की याद रहती और ना फीमेल रूप की याद रहती है। देहमात्र की याद रहती ही नही। तब कहेंगे उसे बाप समान परम पुरुष बना। पुरुष माने आत्मा। तो आत्माओं का बाप माना सुप्रीम सोल। तो सुप्रीम सोल आप सामान किसी को बनाता है या नहीं बनाता है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर? जिसको बनाता है उसके लिए कहते है, मैं जैसे कन्या माताओं के रूप में सहनशक्ति धारण करने वालों में प्रवेश करता हुँ 4 मुखों वाले ब्रह्मा में, तो बताओ का पार्ट बजाने वाला मैं हूँ या वो मुख है? दादा लेखराज ब्रह्मा ने जो सहह शक्ति का पार्ट बजाया, शांत स्वरूप रहने का पार्ट बजाया, वह पार्ट शिव की आत्मा ने बजाया या दादा लेखराज ने बनाया? अगर दादा लेखराज ने बनाया होता, तो पूर्व जन्मों में भी बजा लेता ना! बजा पाया? नहीं बजा पाया। तो बाप कहते हैं जैसे मेरे अंदर सहनशक्ति के संस्कार है। है या नहीं? और फिर सामना करने के भी शक्ति के संस्कार, पुरुष रूप के भी संस्कार, रूद्र रूप भी धारण करता हूँ। क्या?? ऐसा रूद्र रूप धारण करता हूँ, कि क्या करता हूँ? जिस मुक़र्रर रथ में प्रवेश करता हूँ, उसके द्वारा वह रौद्र पार्ट, भयंकर पार्ट बजाता हूँ। और कहता हूँ क्या? यही है शंकर द्वारा, क्या? क्या कार्य करना? शंकर द्वारा विनाश। कौन कराता है? कौन सी आत्मा है शंकर द्वारा विनाश? कराती नही है, सिर्फ ऐसा ज्ञान सुनाती है, ऐसा ज्ञान सुना करके उसकी बुद्धि में ज्ञान के वह संस्कार डाल देती है, कि ऐसा पुरुषार्थ हम करेंगे, तो विकराल से विकराल रूप भी धारण कर सकता है। और फिर सौम्य रूप भी धारण कर सकता है माता का। उसको कहा जाता है जीते जी मर गया। माना ना पुरुष रूप में जिंदा है, और ना स्त्री चोले के रूप में जिंदा है। जिंदा है? संपन्न बने आत्मा मुक़र्रर रथधारी, तो उसको स्त्री भी नहीं कहेंगे, और पुरुष भी नहीं कहेंगे। जैसे शिव, शिव ना स्त्रीं है, ना पुरुष है, लेकिन पार्ट दोनों ही बजाता है या नही बजाता? दोनों ही बजाता। (time@27.14-31.58) dt 06.04.2020*_
12👉 Important point
_*जब सुप्रीम सोल बाप का पार्ट खलास होता है, तो सारी सृष्टि को समझाने के निमित्व बनता है। कब? जब परम्ब्रह्म का रूप धारण करता है तब या उस से पहले? परम ब्रह्मा के रूप में जो प्रक्टिकल पार्ट बजाने वाली आदि लक्ष्मी की आत्मा है, उसमे प्रवेश करके और जब सुप्रीम सोल पार्ट बजाता है, तो उसको कहा जाता है कौनसी शक्ति? पराशक्ति। पराप्रकृति एक हो जाती है। समझाने का पार्ट बजाने वाला है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर प्रक्टिकल में जो आदि लक्ष्मी भी, और वो समझती किस से है? किसी साकार से ही समझेगी, की निराकार बिंदु से समझती है? भले निराकार बिंदी को याद करती हो लेकिन पूरी बात गहराई से समझेगी? समझ नही सकती।*_
*_★ अब्बल नंबर मुकर्रर रथ वो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर अंत मे, जब सुप्रीम सोल बाप का पार्ट खलास होता है, तो सारी सृष्टि को समझाने के निमित्व बनता है। कब? जब परम्ब्रह्म का रूप धारण करता है तब या उस से पहले? परम ब्रह्मा के रूप में जो प्रक्टिकल पार्ट बजाने वाली आदि लक्ष्मी की आत्मा है, उसमे प्रवेश करके और जब सुप्रीम सोल पार्ट बजाता है, तो उसको कहा जाता है कौनसी शक्ति? पराशक्ति। पराप्रकृति एक हो जाती है। कौन? समझाने का पार्ट बजाने वाला है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर प्रक्टिकल में जो आदि लक्ष्मी भी, और वो समझती किस से है? किसी साकार से ही समझेगी, की निराकार बिंदु से समझती है? भले निराकार बिंदी को याद करती हो लेकिन पूरी बात गहराई से समझेगी? समझ नही सकती। और उस याद मे टिकेगी? टिकती है कि अपने ही मुख से बोलती है कितना भी याद करों, कितना भी पक्का करों की मैं नही बोलूंगी, फिर? फिर भूलती है कि नही? क्यों भूलती है? इसलिए भूलती है, की जिसके संगठन में सरिक हो जाती है उसके प्रभाव से प्रभावित हो जाती है। और प्रभावित हो जाती है, तो जिस से प्रभावित हो जाती है, तो उससे कमजोर आत्मा उस रूप के बनेगी, की नही? हाँ, उस रूप में तब तक कमजोर रहेगी। कब तक? जब तक उस अत्माको जीत न ले। किसकों? किस रूप में जीत ले? कहते है सीता जो तुम सब सीता रूपी आत्मा हो, उसका बड़े ते बड़ा फर्स्ट क्लास दास कौन? जो उसका बहुत सेवा करने वाला बनता हो संसार मे। हाँ? हनुमान। हनुमान ने सीता की ऐसी सेवा की जो रामकी सेना में कोई ने भी वो सेवा नही करके दिखाया। सीताका पता लगया न और पता लगाकर के ले आया कि नही ढूंढ ढाँढ के? हाँ, ले आया। तो सीता जो चाहती थी, वो काम करके दिखाया। वो काम करके दिखाया, की जो हनुमान कहो, या गणेश कहो या उसे चन्द्रमाँ कहो, वो चन्द्रमाँ लक्ष्मी पार्ट धारी है आदि लक्ष्मी, नाम रूप से पार्ट बजाने वाली और सहयोगी आत्माए है, सतयुग में और लक्ष्मी या है कि नहीं? कि एक ही पीढ़ी चलती है? अनेक पीढिया चलती है। तो जो लास्ट लक्ष्मी है जिसको कहा जाता है महाकाली। जगदंबा। सारे जगत की मनुष्य आत्माओ की संग के रंग में रहकर के सबसे ज्यास्ती काली बनती है, कि गोरी बनती है? अनेकों के संग के रंग में आएगी, तो कालापन आएगा कि गोरा पन ही रहेगा? तो वह आत्मा एक के संग में रहती है। कौन? लक्ष्मी। किसी भी रूप में रहे, कोई भी सम्बन्ध से रहे, लेकिन उस संबंध की जो लगाव है उसी एक में रहेगा। बहन के रूप में रहेगी, तो भाई, उसी भाई को याद करेगीं, पति पत्नी के रूप में रहेगी, तो पति के रूप में उस पति को याद करेगी, की औरों को याद करेगीं? नही मानेगीं। एक लिंग भगवान। तो बताया- प्रैक्टिकल में परम ब्रह्म का पार्ट बजाने वाली आत्मा है, कौन? आदि लक्ष्मी। परंतु वह आदिलक्ष्मी भी जब तक वह काम ना करें, कौन सा काम?? बाप ने क्या काम किया? ऊँच ते ऊँच बाप,जो ऊँच ते ऊँच सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाता है, सृष्टि रूपी रंगमंच पर ऊँच ते ऊँच पार्टधारी कौन कहा जाता है? ऊँच ते ऊँच ऐसा पार्टधारी, जो पार्ट तो बजाता है, लेकिन वो देखने मे किसी को नही आता है, पर्दे के पीछे रहता है। अरे, उसका रंगमंच पर नाम क्या बताते है नाटक वाजी करने वाले, ड्रामा खेलने वाले, क्या नाम बताते है? डायरेक्टर? हाँ, डायरेक्टर। तो डायरेक्टर तो है ना रंगमंच पर। तो सुप्रीम सोल ऐसा डायरेक्टर है, की, जो हीरो पार्ट धारी मुक़र्रर रथ धारी में ऐसा पार्ट बजाता है कि,सारी दुनिया मे उस एक हीरो पार्ट धारी के शिवाए उसे कोई पहचान ही भी पाता। (time@55.45-to end) dt 29.02.2020, vcd 3771_*
13👉 *Most imp--*
*पहले पहले मन बुद्धि में राजधानी स्थापन होती है। अर्थात उस मुकर्रर रथ धारी के मन बुद्धि में स्थिरता आ जाती है तो उसका शरीर ही राजधानी बन जाता है, माना संपन्न स्टेज- परमब्रह्मा।*
*जो राजधानी स्थापन होती है ,वो पहले मन बुद्धि रूपी आत्मा के अंदर राजधानी स्थापन होती है? या कोई स्थूल में स्थापन होती है??*
*पहले पहले तो कोई एक आत्मा है, जिस मुकर्रर रथ में प्रवेश करते हैं उस मुकर्रर रथ धारी की आत्मा है ,जिसमें प्रवेश करते हैं तो उसके मन बुद्धि में स्थिरता हो जाती है। क्या बन जाता है??*
*उसकी राजधानी क्या है??*
*उसका शरीर ही उसकी राजधानी है, संपन्न स्टेज- परमब्रह्म। उसका शरीर ही परम ब्रह्मलोक हुआ, ऊंच ते ऊँच, जहां सारी सृष्टि की बीज रूप आत्माएं बिंदु बिंदु बिंदु बाप समान आत्माएं, उस परम ब्रह्म में ठहरेगी, पहुंचेगी। राजधानी स्थापन हुई तो एक आत्मा के लिए कहेंगे या 8 के लिए कहेंगे??*
*एक आत्मा के लिए कहेंगे उसकी ऐसी स्थिति बन गई जैसे उसकी राजधानी, राजा की धारणा शक्ति।*
*धारण कौन करता है? आत्म ही धारण करती है। आत्मा राजा बनती है, आत्मा रंक बनती है। तो शरीर ने धारण किया आत्मा को, तो जिस शरीर ने धारण किया वो राजधानी माना राजा की धारणा शक्ति हो गया। कैसी हो गई?? लाइट का गोला हो गई, एकदम लाइट का गोला। आत्मा में रोम रोम में प्रकाश ही प्रकाश फैल जाता है ,तो जैसे कि शरीर के अंदर ही राजधानी स्थापन हो गई।*
*इसीलिए उस शरीर में विराट रूप दिखाते हैं। विराट रूप में देबताएं भी दिखाते हैं। इसका मतलब देवताओं की दुनिया भी उस शरीर में है, और फिर नरक की दुनिया में राक्षस भी शरीर में दिखाए जाते हैं दाढ़ी मूछ वाले।*
2879(13-05-19)1.16 मि
14👉 *जो भी बीज रूप आत्माएं हैं, अपने चंचल मन को कंट्रोल करते हैं ना। जो कंट्रोल करते हैं वही प्योर बीज रूप आत्माएं हैं 4:30 लाख। उन साढे चार लाख आत्माओं का शरीर इस रंगमंच पर कहीं ना कहीं रहता जरूर है। पर उन सब की आत्माएं कहां निकल कर चली जाती हैं?? परम ब्रह्म में चली जाती हैं। क्योंकि इसी सृष्टि रूपी रंगमंच पर फिर से जन्म लेना है, तो अम्मा में ही जाएंगी आत्मा। और अम्मा बाप के साथ कंबाइंड है जिसे कहा जाता है--- हिरण्यगर्भ।*
1-12-18(1.44मि)
15👉 *परमब्रम्ह के मुख से निकलने वाला ज्ञान दूध, तुरंत का तुरंत पिएंगे ज्यों का त्यों और हजम कर लिया तो बड़ी ताकत मिलती है। और जितना दुनिया की हवा लगेगी उतना ही दूषित होता जाता है*
*अभी तो दुनिया वाले क्या क्या रिसर्च करते रहते हैं? ये जो तुम दूध पीते हो, ऋषि मुनि कहते थे तुरंत का दुआ हुआ दूध तुरंत पी जाओ। बर्तन में छन्नी डाल कर रखो, गिलास में डालते जाओ, तुरंत पीते जाओ। वह दूध ही अच्छा, बहुत फायदेमंद होता है।*
*जितना ज्यादा देर हो जाएगी रखे रखे, उतना ही दुनिया की हवा लगेगी, और दूध अशुद्ध हो जाएगा। अब वो तो स्थूल दूध है, और तुम्हारा है-- ज्ञान दूध।*
*ज्ञान दूध भी डायरेक्ट-डायरेक्ट जो निकलता है ब्रह्मा मुख से,वो ज्यों का त्यों जो निकलता है, वो पी ले लिया और हजम कर लिया या फिर बाद में जो निश्चय बुद्धि बनेंगे कि पता नहीं यह ब्रह्मा का मुख है, भगवान बोलते हैं या शैतान बोलता है, हमको बरगलाता है कि हम तन मन धन लगा दे। हमको बुद्धू बनाता है, तो अनिश्चय बुद्धि हो गए, तो ताजा दूध पिया या बासी दूध?? दूषित हो गया ना। एक घंटा हुआ, 2 घंटे या 24 घंटे तो भी दूषित हो गया।*
*जितना जितना हवा लगती जाती है ,परम ब्रह्मा के मुख से जो निकलता है उसको दुनिया की जितनी हवा लगेगी तो ज्ञान भी सतोप्रधान से सतो सामान्य ,रजो प्रधान और तमोप्रधान बनेगा कि नहीं दुनिया की हवा लग कर?? बनता जाता है।*
*तो तुरंत का तुरंत निश्चय किया, तुरंत पिया और तुरंत पचाया उसकी तो बात ही क्या?? बहुत ताकत देगा।*
28-3-19
16👉*तुम कोई सामान्य आत्मा थोड़ी हो? तुम तो उर्ध्वलोकी बाप के बच्चे हो।तो तुम्हारी आत्मा ऊंची स्टेज में उड़ेगी। तुम्हारा घर भी ऊंचा है।*
*पहले तो गति में जाएंगे। माना ये शरीर छूटेगा, चाहे अपने पुरुषार्थ से शरीर छूटे, या धर्मराज की सजाओं से शरीर छूटे, लेकिन नंबरवार छूटेगा, तो आत्मा उड़ेगी। देह का भान जब छूटेगा, तो आत्मा ऊपर उड़ेगी।*
*तो सब भक्तियों की आत्माएं, सीताओं की आत्मा कहां जाएगी?? परम ब्रह्म में जो बड़ी मां है, वही जाएगी।*
*किसकी मां?? जो तुम आत्मा बनने वाले बच्चे हैं, उनकी मां। जो इस सृष्टि के बीज रूप बच्चे हैं, वह वहीं जाएंगे। वैसे भी आत्मा शरीर छोड़ती है तो कहां जाती है? अम्मा के पेट में।*
*वो तो सामान्य बात है। तुम कोई सामान्य आत्मा थोड़ी ही हो। वह तो दुनिया में जो भी आत्माएं हैं वह सब नीचे जाने के स्वभाव वाली हैं। और तुम तो उर्ध्वलोकी बाप के बच्चे हो ना?*
*तो तुम्हारी आत्मा ऊंची ऊंची स्टेज में उड़ेगी। तुम्हारा घर भी ऊंचा है।*
20-1-19
17.👉Most imp👇* *नंबरबार ब्रह्मा रूपी अम्माएं कौन कौन सी हैं??*
*अव्वल नंबर में है- परम ब्रह्म जो बीज रूपों की सबसे पावरफुल सृष्टि तैयार करती है*
*जो पहली अम्मा बनाई जाती है वह बढ़िया बच्चे पैदा करती है। बाद वाली अम्माओं से तो पैदाइश कम ताकत वाली होगी उत्तरोत्तर।*
तो यही बात है-- जो *शिव बाप ने परम ब्रह्म को अम्मा बनाया, तो बीज रूप आत्माएं पैदा हुई। सबसे पावरफुल दुनिया की आत्माएं।* सतयुग वालों से भी, त्रेता वालों से भी, द्वापर और कलयुग वालों से भी। माना जितनी भी आत्माएं परमधाम से आती है पार्ट बजाने सृष्टि रूपी रंगमंच पर, उनमें *सबसे पावरफुल तो पावरफुल अम्मा है--- परम ब्रह्म।*
*फिर किसका नंबर?? स्वर्ग की बैकुंठ सृष्टि रची, जिसमें बीज रूप आत्माएं होती हैं।*
उसके बाद दूसरी सृष्टि कौन सी है जो *दूसरी अम्मा के द्वारा रची गई? वह है-- लक्ष्मी। कौन सी सृष्टि रचती है? सतयुग की*
फिर तीसरी अम्मा? *लक्ष्मी ने तो सोलह कला संपूर्ण कृष्ण को जन्म दिया।*
*फिर और भी कम कला के नारायण है। उनको जन्म कौन देता है?? ब्रह्मा बाबा,वो हुई तीसरी अम्मा।*
फिर उसके बाद त्रेता या क्षत्रियों का जमाना, छात्र तेज वालों का। *सीढ़ी में दिखाया है सतयुग में छत्रछाया नहीं है लक्ष्मी नारायण को, और राम को छत्रछाया है। इसका मतलब असल क्षत्रिय हैं। उनको ताकत मिलती रहती है युद्ध करने के लिए--- मारो असुरों को, ससुरों को गोली,बाण मार मार कर खत्म करो। ताकत मिल ही रही है ना? संगम युग में शूटिंग में योग का कवच मिलता है ना।* तो वह कवच सुरक्षा करता है। *तो उन क्षत्रियों की सृष्टि फिर कौन सी अम्मा ने बनाई??ओम राधे मम्मा ने(आधार मूर्त जगदम्बा)*
जगदंबा के भी दो रूप हैं। आधारमूर्त और बीज रूप।
*फिर बची जगदंबा द्वैतवादी दुनिया की रचना कर देती है। एक पति से हमारा पेट नहीं भरता। प्रकृति पति एक से नहीं मानेगी। पर कटी क्या करेगी?? रजो प्रधान बनेगी,तमोप्रधान बनेगी। प्रकृति का तो धंधा है वह सिर्फ सत्व प्रधान बनकर नहीं रह सकती।*
*जो परा प्रकृति है वह सदा सात्विक बनकर रहती है। एक से ही काम चलाती है। एक पति, एक शिवबाबा दूसरा न कोई।। बाकी तो नंबर वार है।*
*उनमें जो लास्ट वाली है ना, वह रजो प्रधानता की दुनिया चालू कर देती है।*
तो इन मनुष्यों के द्वारा जो ब्रह्मा नामधारी बनते हैं, इनको पार्ट मिला हुआ है क्रिएशन करने का। बाप को क्रिएटर बनने का पार्ट मिला हुआ है। *इन ब्रह्मा के द्वारा क्रिएट करते हैं।तो 5 मनुष्य हो गए, जो अम्मा बनते हैं।*
*1-- पहली अम्मा परम ब्रह्म(बीज रूप की दुनिया बनाती)*
*2--दूसरी अम्मा लक्ष्मी(सतयुगी दुनिया)*
*3-- तीसरी अम्मा ब्रह्मा दादा लेखराज(कम कला के नरायन)*
*4--चौथी अम्मा ओम राधे(क्षत्रियों की सृष्टि)*
*5--पांचवी अंबा- जगदंबा(द्वेतवादी दुनिया)*
Vcd 2691(4-11-18)41मि
18👉*गीता में लिखा है--4/6
*कि मैं अपनी आत्मा की जो भावना है, अपनी भावना की शक्ति से प्रत्यक्ष होता हूं, जिसकी भावना को कोई तोड़ ही नहीं पाता 84 जन्मों में भी। इसीलिए कहा गया है --भाव प्रधान विश्व रचि राखा।*
*परमब्रह्म भी परम ब्रह्म का रूप प्रैक्टिकल में कब धारण करता है?? जब ब्रह्मा अपनी रचना को (जिसे चंद्रवंशी राधा कहा जाता है) उसे परमिशन दें, और परमिशन भी तब देगा जब खुद समझेगा। ब्रह्मा को भी अपनी पहचान का जन्म किस से मिला?? वही पराप्रकृति से, जो यज्ञ के आदि में दादा लेखराज की मां समान बड़ी बहन थी।( ओम मंडली की बात) ओम मंडली में भी ज्ञान का बीज पड़ा, वही माता के द्वारा। ब्रह्मा को स्वयं साक्षात्कार हुए थे तो पक्का हो गया। जिसको अनुभूति होती है तो पक्का हो जाता है।*
*ब्रह्मा अधूरा रूप है, संपूर्ण रूप नहीं। संपूर्ण रूप होता तो बुद्धि में बैठ जाए कि मैं ब्रह्मा हूं तो मेरा बाप कौन ??(जो बाबा मुरली में पूछते हैं )*
*वो पता पड़ने में स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर दोनों से मिलकर पूरा पूरा 80-81 साल लग जाते हैं तब कहीं जाकर बुद्धि में बैठता है।*
*जब तक पक्का ना हो जाए 100 परसेंट flawless ना बन जाए,, तब तक बार-बार अभ्यास होता रहता है, शूटिंग होती रहती है, रिहर्सल होती रहती है।*
*तो जब ब्रह्मा को 80 साल लगते हैं तो उस को जन्म देने वाली मां को उससे कम समय लगेगा?? तो पहले मां समझती है। इसीलिए गीता में लिखा है---- संभवामिआत्मामायया...*
*मैं अपनी आत्मा की जो भावना है, अपनी भावना की शक्ति से संभवामि (प्रत्यक्ष होता हूं )
जिसकी भावना कोई तोड़ ही नहीं पाता है 84 जन्मों में भी।*
*इसीलिए कहते--- भाव प्रधान विश्व रचि राखा। भावना प्रधान विश्व है, जिसमें प्रधान किसकी हुई?? जो प्रैक्टिकल में ज्ञान को धारण कर सके। प्रैक्टिकल होता ही है पवित्रता से। इस दुनिया के सारे कार्य ज्ञान से नहीं होते हैं। ज्ञान कोई शक्ति नहीं है। ज्ञान तो जल है। भोजन से शक्ति आती है। तो जो शुद्ध याद है ,अव्यभिचारी याद किसी का इंटरफेरेंस नहीं ---"मेरा तो एक शिव बाबा" सिर्फ कहने कहने की बात नहीं, प्रैक्टिकल में परीक्षा होती है।*
*उस परीक्षा में जो 100 परसेंट अव्यभिचारी मनसा की याद में पास हो जाए तो,तो वो आत्मा भावना में पक्की कही जाती है।*
Vcd 2476
19👉जब परमात्म प्रत्यक्षता बॉम्ब फटेगा - तो भगवान जो परमब्रह्म के रूप में माता भी है और सम्पन्न स्टेज में पिता भी,वो रोती है।*
जब पावन दुनिया स्थापन करनी होती है, पतित से पावन करनी होती है, तब आना पड़े। *आना पड़े माना प्रत्यक्षता रूपी जन्म की बात है।* माना उस *ज्ञान सूर्य के जन्म जन्मान्तर पड़ोस में रहने वाले आठ हैं,*वो पड़ोस वालों को पहले आवाज पड़ जाती है कान में...उँआ... ऊँआ... ऊँआ।...
शास्त्रों में भी लिखा हुआ है-- *रुद्रमाला के मणके रोेते हुए पैदा हुए। जैसा बाप का पार्ट, वैसा बच्चों का भी पार्ट।* नम्बरवार पार्ट बजाते है। दुनिया की जो *बीजरूप आत्माएं है, जब वही रोते रोते पैदा होती हैं,* तो 500/700 करोड़ पत्ते भी कैसे पैदा होंगे??
ये शूटिंग कहाँ होती है? ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनिया में। *बड़े से बड़ा बॉम्ब क्या है??* परमात्मा प्रत्यक्षता बॉम्ब।
*तो कोई बच्चा जब प्रत्यक्ष होता है, तो सबसे ज्यास्ती दु:ख किसको होता है?? माँ को होता है।यहाँ बीजरूप आत्माओं की दुनिया मे, जब माला के मणके प्रत्यक्ष होंगे तो वो मुख्य आत्मा कौन है?? जो बहुत रोती है। रुद्रमाला के जो *सूर्यवंशी बच्चे है,* जो कभी दूसरे धर्म मे जीवन रहते *कन्वर्ट नही होते है,* सृष्टि रूपी वृक्ष में सीधे तने में जन्म लेते हुए जाते है... उन बच्चों की माँ रोती हैं?? *जब ग्लानि का बॉम्ब, परमात्मा प्रत्यक्षता बॉम्ब फटेगा तो बच्चे की प्रत्यक्षता होगी। जिस बच्चे की प्रत्यक्षता होगी, वो बच्चा परमब्रह्मा का रूप है*
तो वो रोयेगी न? मनुष्य आत्मा है ,तो मनुष्य-मनुष्यो के सामने *कोई ग्लानि करता है, उस मनुष्य की... तो मनुष्य आत्मा दुःखी हो जाती है। तो वो तो सब मनुष्यों का बाप है, और माता का भी पार्टधारी है।*
*मुरली में तो बोला है-- भगवान को जितना रुलाया है, उतना और किसीको नही रुलाया है। भगवान का पार्टधारी, जो माता भी है तो पिता भी।*
*त्वमेव माता, च: पिता त्वमेव।*
*तू ही मेरी माता, तू ही मेरा पिता है।* तो उसमें *प्रजपिता का पार्ट बजाने वाली आत्मा भी है। और परम ब्रह्म का पार्ट बजाने वाली आत्मा भी है,है एक ही आत्मा*।
जो माता होती है, वो देहभान वाली होती है, देह का ओना माताओं को, कन्याओं को ज्यादा होता है। तो देहभान रुलाता है।
*तो परमब्रह्म का,माता के रूप में जब तक पार्ट है, तो वो आत्मा रोती है। माताएँ आसुओं से रोती है, और पुरुष मन से रोते है।* आँसुओं से नही रोते। तो वो *प्रजपिता भी है, परमब्रह्म भी है। जब तक असम्पन्न है, तो देहभान वाला है, माता है। और जब सम्पन्न बन जाता है, तो पिता है।*
20👉बताया, क्षेत्र और छेत्रज्ञ को पूरा जान लिया पहचान लिया, तो समझो ये पढ़ाई पूरी हो गई। दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञानपुरा।ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए? डरने की बात है? फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? हाँ? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है।*_
_*★ तो अभी तुम जरूर कहेंगे अभी मौत ना आवे, क्योंकि अभी हमने पूरी पढ़ाई पढ़ी थोड़े ही है तो तुम डरेंगे अभी मौत न आ जाए। क्या है पूरी पढ़ाई? वह गीता में भी बताया दिया पूरी पढ़ाई क्या है. क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। क्षेत्र माना यह शरीर इदम् शरीरम कौन्तेय क्षत्रं इत्या विदियते, ये शरीर रूपी क्षेत्र है, यह क्षेत्र क्या है? अर्जुन यह तेरा शरीर रूपी जो क्षेत्र है, युद्ध क्षेत्र है युद्ध भूमि है खेत है, खेत में बीज बोया जाता है कि नहीं? हाँ, बीज बोया जाता है। तो बताया इस क्षेत्र को जानने वाला कौन है, कौन है और कितने हैं इस दुनिया 8?? 8 ने जान लिया? उनको पढ़ाई पढ़ाने की अब दरकार नहीं रही, ऐसे? एक जानता है? अच्छा! एक जानता है अगर तो पढ़ाई पूरी हो गई। गीता में भी लिखा है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ, क्षेत्र को जानने वाला ज्ञानी, इन दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञानपुरा। और ज्ञान पूरा मिल गया तो कि मैं आत्मा हूँ और मेरा बाप परमपिता परमात्मा हाँ, ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए? डरने की बात है? फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? हाँ? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है। कहेंगे अब हमने इंतहान कहां पूरा पार कर दिया। जो हम आत्माओं के लोक में चले जावे! (Time@34.17-37.43)* dt 15.03.2020_
21👉 *Important Point*
_*परम्ब्रह्म सहन शक्ति का रूप धारण करें, तब ही कहेंगे जीतें जी मरा। परम ब्रह्म का सम्पन्न रूप शिवलिंग जो सार्वोभौम ख्याती है, वो पूजा जाता है मंदिर में। वो लिंग रूप का जब तक भान है, उस कर्मेन्द्रियों का, उस देह की इन्द्रियों का, तब तक वह अर्धनारेश्वर नही कहा जा सकता। कब कहा जाएगा? जब वो ऐसे स्वभाव संस्कार धारण करें ब्रह्मा जैसे सहन शक्ति का।*_
_*★ बाप कहते हैं जिस पुरुष तन में मैं आता हूँ, उसका भी नाम देता हूँ, क्या? ब्रह्मा। और कैसा ब्रह्मा? ब्रह्मा नामधारी मुख तो ढेर है ना? चार मुखों वाला ब्रह्मा, पांच मुख वाला ब्रह्मा, मंदिरों में यादगार दिखाते हैं ना। तो उनमें कौन सा ब्रह्मा? बड़े ते बड़ा ब्रह्मा, जो पांचों मुख रूप देह रूपों को कंट्रोल करने वाला है। परम ब्रह्मा! तो बस साइलेंस और जीते जी फिर मरते भी है। क्या? जब वह परम ब्रह्मा का रूप धारण करते हैं, तब ही कहेंगे, कि जीते जी मरा, और परम ब्रह्मा का रूप धारण किया, आत्मा ने वह सहनशक्ति ही धारण नहीं की, तक फिर वह संपन्न रूप जो मंदिरों में पूजा जाता है। कौन से मंदिरों में? जिनकी सार्वोभोम ख्याती है। शिवलिंग के मन्दिर होते हैं ना, शिव के मंदिर में जाकर के क्या कहते हैं? तुम मात-पिता हम बालक तेरे, तुम हमारी माता भी हो, पिता भी हो। है एक शिवलिंग, अरे वह तो लिंग है, वह तो माता हुआ या पिता हुआ? नहीं। वो लिंग रूप का जब तक भान है, उस कर्मेन्द्रियों का, उस देह की इन्द्रियों का, तब तक वह अर्धनारेश्वर नही कहा जा सकता। कब कहा जाएगा? जब वो ऐसे स्वभाव संस्कार धारण करें ब्रह्मा जैसे। कोई भी आत्मा अच्छे ते अच्छे, बुरे ते बुरे दुष्ट ते दुष्ट, सामने आजाए, तो उसके सामने शांत स्वरूप रहती, या अशांत हो जाती थी? कौन? ब्रह्मा। अशांत होती थी? नही होती थी ना! तो उस ब्रह्मा से भी ऊँचा ब्रह्मा बनना है, चार मुखों को कंट्रोल करने वाला चतुर्मुखी ब्रह्मा बनना है या पंचमुखी ब्रह्मा महादेव कहा जाता है? पंचमुखी ब्रह्मा महादेव कहा जाता है। तो कहेंगे पंचमुखी ब्रह्मा कब बना? जब वो पुरुष तन धारी आत्मा अपने अंदर ऐसे संस्कार स्वभाव धारण करें, जो माताओं की भी माता बने। कौन-कौन सी माताए? कहते हैं लक्ष्मी माता, कहो राधा माता। राधा माता बनती है कि नहीं लक्ष्मी बनने के बाद? जगदंबा माता। और फिर सरस्वती भी माता है कि नहीं? (Time@22.21-25.54) dt 06.04.2020*_
22👉*एक ब्राह्मण है। पवित्र है। फिर महाब्राह्मण अर्थात महान पवित्र ब्राह्मण। पवित्र को ही ब्राह्मण कहा जाता है। अगर पवित्र नहीं रहता फिर तो नीचे गिरेगा, शुद्र बनेगा। तो वह कौन?? शिव बाप,वो एवर प्योर है। भले ब्राह्मण चोटी में प्रवेश करता है उसे भी आप सामान बनाता है।*
*महा शब्द जब लगाया जाता है तो दो मिलकर जब एक हो जाते हैं तब कहते हैं-- महाब्राह्मण। महा ब्राह्मण और ब्राह्मण के कर्म में कुछ खास अंतर होता है क्या?? कर्म है-- जो महाब्राह्मण है सब की पुरानी चीजें ले लेता है, सब पुरानापन, जितना भी कचरा बचता है, वह सब ले लेता है। जिस में प्रवेश करता है वह ले पाता है क्या??*
*नहीं, वह नहीं ले पाता। तो महाब्राह्मण में और ब्राह्मण में अंतर हुआ? महा शब्द ही तभी लगाया जाता है। तो परम ब्रम्ह कहो महान ब्रह्म कहो, उसमें बिल्कुल शांत।*
23👉 *तुम कोई सामान्य आत्मा थोड़ी हो? तुम तो उर्ध्वलोकी बाप के बच्चे हो।तो तुम्हारी आत्मा ऊंची स्टेज में उड़ेगी। तुम्हारा घर भी ऊंचा है।*
*पहले तो गति में जाएंगे। माना ये शरीर छूटेगा, चाहे अपने पुरुषार्थ से शरीर छूटे, या धर्मराज की सजाओं से शरीर छूटे, लेकिन नंबरवार छूटेगा, तो आत्मा उड़ेगी। देह का भान जब छूटेगा, तो आत्मा ऊपर उड़ेगी।*
*तो सब भक्तियों की आत्माएं, सीताओं की आत्मा कहां जाएगी?? परम ब्रह्म में जो बड़ी मां है, वही जाएगी।*
*किसकी मां?? जो तुम आत्मा बनने वाले बच्चे हैं, उनकी मां। जो इस सृष्टि के बीज रूप बच्चे हैं, वह वहीं जाएंगे। वैसे भी आत्मा शरीर छोड़ती है तो कहां जाती है? अम्मा के पेट में।*
*वो तो सामान्य बात है। तुम कोई सामान्य आत्मा थोड़ी ही हो। वह तो दुनिया में जो भी आत्माएं हैं वह सब नीचे जाने के स्वभाव वाली हैं। और तुम तो उर्ध्वलोकी बाप के बच्चे हो ना?*
*तो तुम्हारी आत्मा ऊंची ऊंची स्टेज में उड़ेगी। तुम्हारा घर भी ऊंचा है।*
20-1-19
24.👉 Most imp-- *जड़ आत्मा का ब्रह्मांड अलग, और चैतन्य आत्माओं का ब्रह्मांड है-- परम ब्रह्म, जहां सभी चैतन्य आत्मा रूपी अंडे रहते हैं।*
*बच्चा माँ के गर्भ से निकलता है तो अण्डे के रूप में बाहर आता है, और दायीं माँ पेट मे से जो नार निकलता है जिसमे से वो अण्डा बंधा हुआ होता है, जिसके अंदर बच्चा होता, उस नार को काट देती है। वो जेर जो कवर है अण्डे का, वो अलग हो जाता है, और बच्चा बाहर आ जाता है*
*आत्मिक स्थिति में जहां आत्माएं ओरिजिनल आत्मिक स्थिति में रहती हैं, देह होती ही नही, उसको कहा जाता है-- ब्रम्हांड। कैसा अण्ड? ब्रह्मा का अण्ड। अण्डा। कोई भी जन्म लेता है प्राणी, तो पहले कहाँ होता है? माँ के गर्भ में अण्डा होता है कि नही? मनुष्य भी जब पैदा होगा, या जानवर भी जब पैदा होते है, तो अण्डे के रूप में बाहर आते है कि नही? हाँ।*
*फिर क्या करती है?दायीं माँ जो है, वो पेट मे से वो नार निकलता है,जिसमे से वो अण्डा बंधा हुआ होता है न,जिसके अंदर बच्चा होता, उस नार को काट देती है। तो क्या होता है? वो जेर जो कवर है अण्डे का, वो अलग हो जाता है, और बच्चा? बच्चा बाहर आ जाता है। तो देखो अण्डे के रूप में आत्माए कहाँ रहती है? ब्रह्म-अण्ड। ब्रह्मा के अण्ड में रहती है। उसे कहा जाता है--- ब्रम्हाड।*
*वह तो है जड़ रूप आत्माओं का अंड, जहां जड़त्व रूप में आत्माएं रहते हैं ।वहां मन बुद्धि काम नहीं करती। इंद्रियां ही नहीं है तो काम कैसे करेंगे? वहाँ आत्माएं जड़त्वमई रहती है, तो वह तो है ब्रह्मांड जड़त्वमई आत्माओं का, और यह है-- परम ब्रह्म बड़े ते बड़ा ब्रह्मा।*
*उसका अंड कैसा? चैतन्य आत्मा या जड़त्व मई आत्मा?? चैतन्य आत्मा। अंडे में गर्भ में 5 महीने के बाद आत्मा प्रवेश करती है तो माता को अनुभव होता है चुर्र पुर्र का,तो चैतन्य हुई ना। तो है अंडे में। अंडा कहा जाता है।*
*अंडे भी देखो कोई कितने बड़े, कोई कितने छोटे। अब इस आत्मा रूपी अंडे को भी तो जानना चाहिए न। आत्मा क्या है? अंडा मिसल है, बीज है बहुत छोटी है, अति सूक्ष्म। जैसे आत्माओं का बाप वैसे बाप का बच्चा। जो गीता में लिखा है--अणु आणियाँन सम.... लेकिन उन्होंने तो समझ लिया कि भगवान होता है और अणु से भी अणु रूप। अरे जब बाप अनुरूप होगा तो बच्चे भी कैसे होंगे अनुरूप ही होंगे न।*
*तो अंग्रेजी में उनको कहते हैं-- एटम।वो तो जड़ एटम को समझ लेते हैं ,उसी का विश्लेषण करते हैं। लेकिन बाप आकर कहते हैं, नहीं अरे तुम तुम भी एटम हो एटम कहो आतम कहो। हिंदी में कहते हैं- आतम(आत्मा)। स्पेलिंग ATM(अ ट म) तीन अक्षर हैं, और हिंदी में भी आत्मा। तो आत्मा अति सूक्ष्म बिंदु समान है।*
3126(15.01.20)21 मि
25👉परम ब्रह्म के द्वारा पहला पहला वर्सा मिलता है जो विश्वपिता बनता है आगे चलकर। vcd 2317
और ब्रह्मा के द्वारा युक्ति बताने का वर्सा मिलता है यानी ज्ञान का वर्सा मिलता है। vcd 2317
तो परम ब्रह्म के द्वारा ब्रह्मा को वर्सा मिला, बुद्धि में पक्का2 युक्ति बैठी मैं सतयुग में पहला पत्ता बनने वाला हूँ। मुझे वर्सा मिलने वाला है और युक्ति भी मिली।.... vcd 2317
26👉अच्छा परम ब्रह्म और परम ब्रह्मा में क्या अंतर है ?
बाबा ने मुरली में बताया परम ब्रम्ह हुआ जड़ , बीज रूप आत्माओ का रहने का स्थान। और परम ब्रम्हा हुया परम पुरुष की अब्बल नो प्रकृति, हीरोइन, माता, भगबति। जब तक परंब्रम्हा का रूप , सहन शीलता का मूरत न बने माता गुरु न बने तबतक उनका खुदका और दुनिया का उद्धार नही हो सकता। परम ब्रम्ह बो स्थान है जिसमे परम पुरुष और परम ब्रम्हा भी रहते है । माना परम पुरुष हुआ सम्पन्न स्टेज, परम ब्रम्हा हुई भगबति का रूप उस परमपुरुष की और परमब्रम्ह हुआ प्रैक्टिकल शरीर जिसके द्वारा पार्ट बजा रहे है ।
ब्रह्म कहते है तत्त्व को, प्रकृति को ! तो शिव जिस पंच भूत के पुतले मे प्रवेश करके सृस्टि की रचना रचता है, तो पुतला उस समय माता का रूप हो गया!
इसलिए उस समय उसे ब्रह्म नही ब्रह्मा कहेंगे। क्योंकि रचियता के संदर्भ में एक मात्रा बढ़ जाती है !
तो इस प्रकार जो ब्रह्मा शब्द आ रहा है वो रचना के संदर्भ में आ रहा है ।
और ब्रह्म शब्द आ रहा है रचयिता के संदर्भ में ।अब हम जिस समय परमब्रह्म शब्द का प्रयोग कर रहे है उस समय वो पुतला हुआ रचियता का रूप। और जिस समय परमब्रह्मा शब्द का प्रयोग कर रहे है उस समय हुआ रचना का रूप ।
यह युक्ति तो हुई एक के ऊपर। अगर प्रैक्टिकल में पकड़े तो परम ब्रम्ह और परम ब्रम्हा कौन -२ है ?
परम् ब्रह्मा हुआ साकारी स्टेज .. परमब्रह्म हुआ निराकारी स्टेज ..
प्रैक्टिकल में नई सृस्टि की रचना रचने के लिए साकारी स्टेज चाहिए
तो परम ब्रम्ह हुआ प्रजापिता का साकारी शरीर। और परम ब्रम्हा हुआ लक्क्मी प्रैक्टिकल में। इसलिए कही कही क्लेरिफिकेशन में आदि लक्ष्मि को परमब्रह्मा कहा है!
27👉 मनुष्य सृष्टि का बाप हो गया- परम ब्रह्म बड़े ते बड़ी अम्मा। तो उसको कहा जाता है-- परमधाम अंत में सभी आत्माएं मनमनाभव की स्टेज में आगे पीछे, उसी परमधाम में टिक जाती हैं।*
*आत्माओं का झाड़ है वहाँ और यहाँ है ये मनुष्य सृष्टि का झाड़। उनकी पालना कैसी होती है? उनकी- यहाँ वालों की नही। कैसी होती है पालना? स्थापना, पालना और विनाश होता यहाँ ही होती है इसी सृष्टि में होती है ना। इसी सृष्टि की बात है। शिव बाप भी इसी सृष्टि पर कोई के तन में प्रवेश करके रहता होगा? जो बोला-- शिवबाबा इस सृष्टि पर सदाकायम है। और कोई चीज़ नही जो सदकायम है। जब सदाकायम है तो बाप के बुद्धिरूपी पेट में वो आत्माए भी तो बैठी होगीं। हाँ? लौकिक बाप जब बच्चा पैदा करता है तो कहाँ से आता है? बीज कौन डालता है? इस सृष्टि में जो भी प्राणी मात्र पार्ट बजाते हैं, उन प्राणीयो की बीजरूप आत्मा, कारण रूप शरीर कहे, वो कहाँ से आती है? बाप की बुद्धिरूपी पेट से आती है। तो बाप की बुद्धिरूपी पेट मे 500 करोड भी होंगे? हाँ।*
*जब विनाश होगा साकार सृष्टि का तो सभी आत्माएं किसकी याद में शरीर छोड़ेंगे? सब की गति सदगति शिवबाबा के द्वारा होगी ना, जिसे कहा जाता है-- परमब्रह्मा। बड़े से बड़ा ब्रह्मा।*
*तो आत्माए अम्मा के पेट मे से आते है ना? तो मनुष्य सृष्टि का बाप हो गया- परमब्रह्मा।अम्माएँ जितनी भी हैं उनमे परमअम्मा तो उसे कहा जाता है-- परमधाम। उसमे सभी आत्माए मनमनाभव की स्टेज लेकरके उसी परमधाम में आगे पीछे टिक जाती है। लेकिन उनका क्रम भी होगा न? पहले टिकने का, और बाद में टिकने का?*
*जो पहले टिकती हैं, वो है बीजरूप आत्माएं बाप के डायरेक्ट बच्चे। बाप ज्ञान सूर्य है तो बच्चे भी सूर्यवंशी। तो बच्चे कहाँ से जन्म लेंगे फिर? बीज में तो सारा वृक्ष समाया हुआ है। कोई वृक्ष ऐसे होते एक ही वृक्ष में 2,3,4 तरह के वृक्ष भी पैदा होते है। जैसे पीपल में देखा जाता है- कि नीम भी पैदा हो गया, आम भी पैदा हो गया। तो ऐसे ही है। ये बीजरूप आत्माएँ जो है, जिन्हें सूर्यवंशी आत्माए कहे, सूर्य से डायरेक्ट पालना लेने वाली, वो पहले पहले मनमनाभव की स्टेज में स्थित हो जाती(30-7-18)
28.👉*Important point*
Links
👉 https://youtu.be/CFH6MvI8nZA
👉 https://youtu.be/-013nhypbqQ
👉 https://youtu.be/98P9mugDTUc
👉https://youtu.be/oac-Aoc5VT0
👉https://youtu.be/yh3_neHdT1U
*[VCD 2734 + Varta 1576 + Varta 719, Merge Point] (IMP Point) बेहद में गांडीव धनुष का राज क्या है??*
1. [Timing for VCD 2374 @ 38.58-42.00]
2. [Timing for Varta 1576 @ 11.00-13.19]
3. [Timing for Varta 719 @ 49.44-56.13]
Playlist
परम ब्रह्म 👇
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