माया आधों को खा जाती है। क्या मतलब हुआ?*
*माया आधों को खा जाती है। क्या मतलब हुआ?*
राजयोग की पढ़ाई 16108 पढ़ते हैं। उनमें से आधे को यानी 8000 को माया खा जाती है, लेफ्टिस्ट बना देती है। माला के दो छेड़े हुए, 8000 तो राइटियस चलते हैं, उनको तो बाप बचा लेता है। जो माया के पंजे में आ जाते हैं माया उनको लेफ्टिस्ट या अपवित्र बना देती है। तो बाप समझाते हैं, इसमें मूंझने की बात नहीं है।
झाड़ होता है इसमें पुराने पत्ते होते हैं, वह झड़ते रहते हैं नए पत्ते निकलते रहते हैं। जिनको माया खा जाती है, वो यहां दास दासी बनते हैं। वो फिर द्वापर युग से दूसरे दूसरे धर्म में कन्वर्ट हो जाते हैं। तो उन सारों को गिराने के निमित्त (साकार ) वही 8000 बने, जो लेफ्टिस्ट बन जाते हैं। इसमें मूंझने की बात नहीं, कल्प कल्प ऐसा होता है ।। वीसीडी 1403,21 मि
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