क्षेत्र - क्षेत्रज्ञ

 गीता श्लोक :1/1 , 13/1 , 13/2 , 13/3 , 14/4 , 14/3 





1.


👉 Imp--* क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को पूरा जान लिया पहचान लिया, तो समझो ये पढ़ाई पूरी हो गई। दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञान पूरा।ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए?  फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की  मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है।*



  *डरते कब तक है ? जब तक यह देह रूपी मिट्टी याद आती है। तो अभी तुम जरूर कहेंगे, अभी मौत ना आवे, क्योंकि अभी हमने पूरी पढ़ाई पढ़ी थोड़े ही है। तो तुम डरेंगे अभी मौत न आवे।*

 *क्या है पूरी पढ़ाई? वह गीता में भी बताया दिया पूरी पढ़ाई क्या है??*

       क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। क्षेत्र माना यह शरीर।

 *इदम् शरीरम कौन्तेय क्षेत्रममित्यविधीयते...*

            *ये शरीर रूपी क्षेत्र है। यह क्षेत्र क्या है? अर्जुन यह तेरा शरीर रूपी जो क्षेत्र है, युद्ध क्षेत्र है युद्ध भूमि है खेत है। खेत में बीज बोया जाता है कि नहीं? हाँ, बीज बोया जाता है। तो बताया इस क्षेत्र को जानने वाला कौन है??*

 कौन है और कितने हैं इस दुनिया में??

 *8 ने जान लिया? उनको पढ़ाई पढ़ाने की अब दरकार नहीं रही, ऐसे? एक जानता है?एक जानता है अगर तो पढ़ाई पूरी हो गई। गीता में भी लिखा है-- क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ, क्षेत्र को जानने वाला ज्ञानी, इन दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया।*

 *कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञान पूरा। और ज्ञान पूरा मिल गया तो कि मैं आत्मा हूँ ,और मेरा बाप परमपिता परमात्मा हाँ, ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वो मुझे मिल गया, तो आस थी परमब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए? डरने की बात है? फिर तो कोई डरने की बात नही।* 

*तो मौत से कब तक डरते है? हाँ? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के  मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है। कहेंगे अब हमने इंतहान कहां पूरा पार कर दिया। जो हम आत्माओं के लोक में चले जावे।*


 3186( 15.03.20)34मि






2.👉 ज्ञानेंद्रियां ही पांच पांडव हैं। वैराग्य का बढ़िया तरीका है साकार में निराकार को याद करो।*


गीता में एक श्लोक आया है-  यह शरीर एक क्षेत्र है युद्धभूमि। 

अच्छे संकल्प और बुरे संकल्प, तो दोनों का लड़ाई होता रहता है l इस आखरी जन्म में आकर सारे पास्ट जन्मों का अच्छे बुरे संकल्पों का पहले महाभारी गृहयुद्ध होता है। पहले ये गृह युद्ध शरीर के अंदर चल रहा है। स्ट्रगल खत्म हो जाए, तो सब खत्म।पांच रह जाएंगी ज्ञानेंद्रियां। पांच ज्ञानेंद्रियां ही पांच पांडव हैं। आत्मा इनका कंट्रोलर है। उनमें भी तीन मुख्य हैं - युधिष्ठिर, भीम अर्जुन, मन, बुद्धि, संस्कार। उनका कंट्रोलर है- आत्मा। बुद्धि का कंट्रोल होना चाहिए संस्कारों के ऊपर, और मन के ऊपर। मन के ऊपर जब बुद्धि का कंट्रोल हो जाएगा, तो संस्कार बुद्धि के सहयोगी बन जाएंगे, और युद्ध खलास।

 प्रैक्टिस करेंगे, तब होगा। जब इस दुनिया से वैराग्य आ जाए। बिनु बैराग विवेक न होई।

 वैराग्य का बढ़िया तरीका है- साकार में निराकार ज्योति बिंदु को याद करो, वैराग्य आता रहेगा। कॉरपोरियल सोल में इनकारपोरियल शिव को याद करना है, कारपोरियल सोल को नहीं याद करना।


वार्ता 1249(57मि)







3.👉 *Most Important Point*


बेहद की हर हर बंम्ब बंम्ब की नगरी बम्बई ने समुन्दर को सुखाया, कैसे?? 👇


*_बाबा कहतें है-पहले ये बम्बई ये इतना बड़ा था थोड़े ही। समुन्दर को सुखाया ना। क्या?? चैतन्य ज्ञान का सागर को कैसे सुखाया?? लोग जब जान जाते हैं, की यह अथाह ज्ञान का सागर है, अखुट ज्ञान का भंडार है, और साकार में भी है, तो तो उसका संग का रंग लेने की कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ। तो जो ढेर के ढेर इंद्रियों से सुख लेने वाले आत्माए है, वह इसका संग का रंग लेने के लिए नजदीक आवेगी, कम से कम मन बुद्धि से तो संग रहेगी? उसे भी नहीं रहेगी? वाचा  से तो संग करेंगी? करेंगी। तो देखो, यह सागर जो है-ऐसे ही भरा पूरा रहेगा या बेहद का सागर सूखेगा? देहअभिमानियो की देह का मिट्टी, पड़ते पड़ते पड़ते पड़ते मुंबई की तरह सूखेगा या नहीं सूखेगा? नहीं सूखेगा? अच्छा क्षीण नहीं होगा? अच्छा, यह बम्बई डूबेगी नहीं? हाँ, हर हर बम बम की नगरी बम्बई, क्या नगरी? अरे आत्मा की नगरी यह शरीर है ना? हाँ। तो यह शरीर मन बुद्धि से खत्म होगा या नहीं होगा? हाँ, तो देखो समुंदर को सुखाया है।_*


_★ *बाबा समझाते हैं अभी देखो यह बांबे है। यह कितना इतना बड़ा हो जाता है। पहले पहले यह बॉम्बे इतना बड़ा था थोड़े ही। अरे यह समुंदर को सुखाया है ना, हाँ? वह तो स्थूल समंदर है, बेहद का समंदर कौन है? हाँ? अरे इस दुनिया में वह बेहद समंदर का पार्ट भी तो बजाने वाला कोई है ना! वह तो कवियों ने अपनी रूपक, अलंकारिक भाषा बनाई है। हाँ,  जो मुकर्रर रथधारी आत्मा हीरो पार्ट धारी वही तो ज्ञान सागर है ना। तो जब बाप हैं नॉलेज देते हैं क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की। जान तो गए हैं ना क्षेत्र क्या है। हे, अर्जुन यह तेरा शरीर ही क्षेत्र है। हाँ। यह ज्ञान सूर्य नहीं है। ज्ञान सागर है अथाहा ज्ञान सागर। तो लोग जब जान जाते हैं, की यह अथाह ज्ञान का सागर है, अखुट ज्ञान का भंडार है, और साकार में भी है, तो तो उसका संग का रंग लेने की कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ। इंद्रियों से भी संग का रंग लेने का कोशिश करेंगे या नहीं करेंगे? हाँ, यह है श्रेष्ठ आत्माएं जो देवात्माएं  कहीं जाते हैं उनकी बुद्धि में बैठ जाता है जल्दी। बाप इशारे से समझाते है तभी बैठ जाता है। क्या? की श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ तो सुख है- ज्ञान इंद्रियों का सुख। हाँ। तो वह ज्ञान इंद्रियों के आधार पर संग का रंग लगाएंगे श्रेष्ठ बनेंगे या भ्रष्ट इंद्रियों का संग लगाते रहेंगे? हाँ, नहीं लगाएंगे ना। ना मनसा में, वाचा में, न कर्मणा में। तो देखो ऐसी देवात्माओं की संख्या तो दुनिया में बहुत कम है ना, की स्वर्ग में ढेर के ढेर होंगे? नहीं होंगे। तो जो ऐसी आत्माएं नही है श्रेष्ठ इंद्रियों का सुख भोगने वाली, भ्रष्ट इंद्रियों का सुख भोगने वाली जो धर्म पिताओ ने सिखाया है, उनकी फॉलोवर्स की संख्या बहुत है ना, तो वह कौन सा संग का रंग लग जावेगी, कौन सा संग का रंग लेगी? क्या कोशिश करेंगी? हाँ? भ्रष्ट इंद्रियों का सुख छोड़ेंगे क्या??  नहीं छोड़ेंगे। तो देखो ये जो मुकर्रर रथ धारी आत्मा है, जो ज्ञान सूर्य तो वास्तव में नहीं है, ज्ञान सूर्य तो शिव है, लेकिन यह इस मुक़र्रर रथधारी में प्रवेश करते हैं, वह तो ज्ञान का सागर है। अथाहा ज्ञान का सागर सुख का सागर है, शांति का सागर है, प्यार का सागर है। सागर तो है परंतु जो ढेर के ढेर इंद्रियों से सुख लेने वाले आत्माए है, वह इसका संग का रंग लेने के लिए नजदीक आवेगी, या नहीं आवेगी? हाँ? कम से कम मन बुद्धि से तो संग रहेगी? उसे भी नहीं रहेगी? वाचा  से तो संग करेंगी? करेंगी। तो देखो, यह सागर जो है- ऐसे ही भरा पूरा रहेगा यह बेहद का सागर, या सूखेगा? देहअभिमानियो की देह का मिट्टी, पड़ते पड़ते पड़ते पड़ते मुंबई की तरह सूखेगा या नहीं सूखेगा? नहीं सूखेगा? अच्छा क्षीण नहीं होगा? अच्छा, यह बम्बई डूबेगी नहीं? हाँ, हर हर बम बम की नगरी बम्बई, क्या नगरी? अरे आत्मा की नगरी यह शरीर है ना? हाँ। तो यह शरीर मन बुद्धि से खत्म होगा या नहीं होगा? हाँ, तो देखो समुंदर को सुखाया है। तो फिर जरूर ऐसा होगा। क्या? जो मच्छीमार है, अच्छा वह मच्छी बयानी हो जाएगी। (time@8.27-13.48*_ dt 31.03.2020







4.👉 *क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ कौन है???*


*_★ क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान होना चाहिए। क्षेत्र माना शरीर रूपी धरणी, क्षेत्र माने खेत, बिगड़ा हुआ रूप हुआ ना क्षेत्र का खेत। तो शरीर रूपी चैतन्य धरणी जो है, वो कौनसी है जो पहचाननी है, उसका ज्ञान, जानकारी होना चाहिए। होना चाहिए कि नही? वो एक है या 2, 4 है? वो एक ही है क्षेत्र रूपी धरणी, शरीर रूपी धरणी, और उसको जानते है तो कहेंगे सोजरा। जैसे जानेंगे? उस अकेले को जानने की बात है? नही। उसमे जो क्षेत्रज्ञ है। उस क्षेत्र को पहले नम्बर में जानने वाला, पहला नम्बर? पहला नम्बर तो वो खुद ही हो गया। क्योंकि नम्बर लगाएंगे तो हीरो पार्ट धारी और जिसको नम्बर नही लगाया जाता है वो है सुप्रीम सोल, हैवेनली गॉड फादर, शिव सुप्रीम सोल जो है ना, सदा ज्योति है। तुमको भी ये स्थुल आँखे तो है, परंतु तुम्हारी आत्मा है सूक्ष्म। तो सूक्ष्म आत्मा की शक्ति है मन बुद्धि रूपी आत्मा। (time @14.37-17.05) dt 30.07.2020_*








5.👉 जो गीता में बोला है अर्जुन से – *अर्जुन की तरफ इशारा किया👉 इदम् शरीरं कौन्तेय। और? क्षेत्रम इति अभिधीयते। (गीता 13/1) हे अर्जुन! तुम्हारा यह जो शरीर है वो कर्म, अकर्म, विकर्म, सिखाने का, प्रैक्टिकल में करने का क्षेत्र है। क्षेत्र माना खेत। उस खेत में युद्ध भी लड़ा जाता है। युद्ध क्षेत्र है। मूल रूप में कर्मक्षेत्र भी है।*

           जो गीता में पहले ही अध्याय में बोला---धर्मक्षेत्रे

कुरुक्षेत्रे... इस धर्मक्षेत्र में और कुरुक्षेत्र में, कैसा धर्मक्षेत्र?जिसमें सब धर्म समाए हुए हैं। जो भी दुनिया में धर्म फैले हुए हैं, सत धर्म से लेकर असत धर्म तक भी। और उन धर्मों के आधार पर उन धर्म के जो प्रणेता गाए हुए हैं, धर्मपिताएं गाए हुए हैं, उनके द्वारा अथवा उनके फालोअर्स के द्वारा, या गद्दीनशीन गुरुओं के द्वारा।

      *धर्म के आधार पर जो कर्म निर्धारित किए गए हैं, हर धर्म में अलग-अलग,उन कर्मों के आधार पर भाग्य बनता भी है और भाग्य बिगड़ता भी है।* अब हिस्ट्री में देखा जाए तो धर्म जितने भी हैं दुनिया में वो सभी धर्म इस संसार में सदाकाल रहते हैं या नंबरवार अल्पकाल रहते हैं? लेकिन गीता में कहा है--- *नासतेविद्यते भावो, ना भावो विद्यते सतः। (गीता 2/16) जो सत है माना सतधर्म है उसका इस संसार में कभी अभाव नहीं हो सकता।* कि आज है और कल न हो। उस धर्म के धर्मखण्ड का भी कभी विनाश नहीं हो सकता। कि आज वो धर्मखण्ड रहे, सत धर्मखण्ड और कल न रहे।  


Vcd 2388(12मि






6.👉 _*राजयोग की राज भरा हुआ बात न रुद्रमाला समझ पाती है न विजयमाला।  सब से गहरा राज क्या है? जो अंत तक समझ मे नही आता है, निश्चय अनिश्चय का चक्कर चलता ही रहता है, रुद्रमाला के मणको को भी और विजयमाला के मणको को भी, वह क्या है? बता दिया ना, गीता में भी लिखा हुया है क्षेत्र क्षेत्रज्ञ का ज्ञान। अगर क्षेत्र को पहचान लिया, क्षेत्र माने धरणी, शरीर रूपी धरणी वो कौन सी है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर, जो सारी मनुष्य सृष्टि का विज है, वो आदम को पहचान ले पक्का-2, और बूद्धि हिले नही, आदम कहो आदिदेव शंकर कहो, पहचान ले, तो उसको कोई पहचान नही सकते जिसमे वो ज्ञानसूर्य त्रिनेत्री शिव प्रवेश करते है*_


_*★ न रुद्रमाला की आत्माये समझ पाती है, हाँ, जो राजयोग की बातें है गहरी-2, राज भरा हुया है न गहरा-2, वो समझ नही, सब से गहरा राज क्या है? हाँ? जो अंत तक समझमे नही आता है, निश्चय अनिश्चय का चक्कर चलता ही रहता है, रुद्रमाला के मणको को भी और विजयमाला के मणको को भी, हाँ? क्या है? बता दिया ना- गीता में भी लिखा हुया है क्षेत्र क्षेत्रज्ञ का ज्ञान, अगर क्षेत्र को पहचान लिया, क्षेत्र माने धरणी, शरीर रूपी धरनी वो कौन सी है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर जो सारी मनुष्य सृष्टि का विज है? वो आदम को पहचान ले पक्का-2 और बूद्धि हिले नही। आदम कहो, आदिदेव शंकर कहो, पहचान ले। तो उसको कोई पहचान नही सकते। जिसमे वो ज्ञानसूर्य त्रिनेत्री शिव प्रवेश करते है। और तीसरा नेत्र किसको दिखाए जाता है? महादेव शंकर को दिखाते है ना? हाँ! तो उसमे तीसरा नेत्र त्रिनेत्री शिव नेत्र भी प्रवेश करता है और चंद्रमा भी, ज्ञान चंद्रमा ब्रह्मा सोम, सोम माने सोमनाथ कहा जाता है ना, वो भी प्रवेश करता है कि नही? वो भी प्रवेश करता है। तो कोई समझ नही सकते है की वो पार्ट बजानेवाला आत्मा कौन सी है, जिसमे 16 कला सम्पूर्ण बनने वाला सत्ययुगी कृष्ण की सोल भी प्रवेश करती है और सुप्रिम सोल शिव भी प्रवेश करता है। देखो, समझने की इतनी समझ ही नही है किसीको, घड़ी-2 निश्चय अनिश्चय निश्चय अनिश्चय आता ही रहता है, हाँ। मैं आपनेको आत्मा समझता हुँ? हाँ। उसको भी बाप समझता हुँ? (time@21.30-24.05) dt 18.01.2021*_





7.👉 Most imp--


*तुम क्या सिद्ध करते हो? कौन से सार की बात तुम करते हो??*

*तुम सिद्ध  कर लेते हो प्रजापिता, मनुष्य सृष्टि में मनुष्य का बाप कौन है?*



*तुम हो सारस्वत ब्राह्मण सार की बात को सिद्ध करते हो। सार की बात प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर लेते हो। कौन से सार की बात?*

         आत्मा, वह तो बाप बताता है। *तुम क्या सिद्ध करते हो? कौन से सार की बात तुम करते हो??*

*तुम सिद्ध  कर लेते हो प्रजापिता, मनुष्य सृष्टि में मनुष्य का बाप कौन है??* जिस बाप में वो निराकार शिव बाप, जो सतगुरु निराकार कहा जाता है,वो प्रवेश करके रेगुलर पार्ट बजाता है,तो उसे तुम सिद्ध कर लेते हो उसकी जानकारी लेने में सफलता प्राप्त करते हो। *तो बाप कहते हैं-- वो हैं पुष्कर्णी ब्राह्मण। और तुम हो सारसिद्ध ब्राह्मण।*

 सारे ज्ञान की जो भी बेसिक नॉलेज है और एडवांस नॉलेज है उस सारे ज्ञान की सार की बात कौन सी है? 

*जैसे गीता में भी बताया क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञानी ही सारा ज्ञान है। और कोई दूसरा ज्ञान नहीं है।*

           *क्षेत्र-- माना यह शरीर रूपी क्षेत्र, अर्थात धरनी और इस धरनी को पहचानने वाला,जानने वाला।*

कौन??

सबसे पहला जानकार तो वही शिव बाप है, जो जन्म मरण में नहीं आता है। फिर नंबर बार तुम बच्चे हो। 

*नंबर बाहर बच्चों में पहला नंबर कौन?आदम*

आदिनारायण तो बाद में कहेंगे। पहले तो उसे कहेंगे आदम, प्रजापिता यानी इस सृष्टि पर जो भी 500- 700 करोड़ प्रजा है उन सब को जन्म देने वाला सब का बाप।

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8.👉 *★ गीता में भी क्या लिखा है? दो ही का ज्ञान है। किसका-किसका? हाँ? रथ का और सारथी का। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का। क्षेत्र शरीर को कहा जाता है। तो ज़रूर कोई धरम स्थापन होता है तो धर्म की स्थापना करने वाला कोई एक क्षेत्र रूपी शरीर होता है ना। तो उस एक से सब जान जावेंगे। पूछने का कुछ रहेगा ही नहीं। VCD-2829*






9.👉 *क्या सीखना है? क्या पढ़ाई पढ़नी है ?और क्या समझना है? जो गीता में भी श्लोक आया है-- क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान बुद्धि में आ गया तो पूरी गीता पढ़ ली, पूरी पढ़ाई पढ़ ली।*

*उस बाप को पहचानो, जिसको बड़े-बड़े धर्म पिताओं ने भी नहीं पहचाना*


 *सिखाने की चीज ये ज्ञान है। क्या ज्ञान??*

 उसको पहचानो *जिसको बड़े बड़े पिताओं ने भी नहीं पहचाना। कौन कौन? इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट, गुरु नानक या उनके सहयोगी धर्म पिताए जो भी आए उन्होंने निराकार को तो जाना, लेकिन वो निराकार किसके द्वारा कर्म करता कराता है, उसको नहीं जाना।*

तो *उसको पहचानो जो सारी सृष्टि का बाप है। और बाप एक होता है।* या कोई को भी बाप बना दे देंगे? या ये कहेंगे कि साढे 99 /.परसेंटेज हमारा बाप है और 1/2परसेंट बाप नहीं होगा, तो अम्मा से पूछ लूंगा ,कि थोड़ा बहुत गड़बड़ है?

 तो आधा परसेंट गड़बड़ है तो निश्चय बुद्धि कहेंगे? नहीं संशय आएगा कि नहीं? वो संशय जब बाहर की दुनिया में जाएंगे तो चौड़ा हो जाएगा।

*तो क्या सीखना है? क्या पढ़ाई करनी है? और क्या समझना है? बाप क्या पढ़ाई पढ़ाने आया है?*

                  अरे *पहचान हो जाएगी कि एक बाप की, कि यह मेरा बाप है। मैं हिलने वाला नहीं हूं। मैं एक बाप का बच्चा हूं। नहीं तो अम्मा को गाली देंगे कि मैं दो बाप का बच्चा हूं। अम्मा को गाली लगी तो कुलक्ष्मी हो गई।* तो मैं तो एक बाप का बच्चा हूं 2-4 बाप का नहीं।

*ये निश्चय बुद्धि बन गए तो संशय पैदा ही नहीं होगा। बस इतनी पढ़ाई है।* यह गीता में भी श्लोक आया हुआ है-- *क्षेत्र क्षेत्रज्ञ का ज्ञान बुद्धि में आ गया तो पूरी गीता पढ़ ली। पूरी पढ़ाई पढ़ ली।।*

 क्षेत्र-- माना जिस में प्रवेश करता है ,शरीर और

 *क्षेत्रज्ञ-- उस ऊँच ते ऊँच क्षेत्र का ज्ञान रखने वाला, जानने वाला ,वो कौन??*

 *ऊंच ते ऊंच क्षेत्र (धरनी) कौन?? अर्जुन।*

ऊँच ते ऊँच धरनी, जिसका वह आधार लेता है वो क्षेत्र है, जिसे कुरुक्षेत्र भी कह देते हैं। धर्म क्षेत्र भी कह देते हैं।

 क्षेत्र-- माना मैदान लेकिन है तो धरनी।

 *तो वह जो क्षेत्र है वह कौन हुआ ऊँच ते ऊँच क्षेत्र??*

 *कुरु- माना कर्म क्षेत्र, स्थान (आधार) जिसके ऊपर कर्म किया जाए। तो परमब्रह्म है क्षेत्र ,जिस पहले पहले ब्रह्मा में प्रवेश किया। और वो हो गया उसको पहचानने वाला।*

 *जब वो आता है तो पहचान कर प्रवेश करता है कि इस दुनिया में ऊंचे ते ऊंचा क्षेत्र कौन सा है?? क्षेत्र माना धरनी आधार।* 8-12-18







10.👉 Most imp--


*योग बल कब आता है?*


 *असली योग बल तो तब ही आएगा जब क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को पहचानेंगे, जो पक्का पक्का आधार है उसे पहचाने। जो आधार कभी टूटता ही नहीं।*

       *आधार-- माने धरनी। और उसमें जो बीज रूप आत्मा है मनुष्य सृष्टि की, वह प्रवेश करें। तो बीज भी और आधार भी। तो ऊंचे ते ऊंचा बीज आत्माओं का कौन सा हुआ? शिव बाप।*

 *शिव बाप जिस मनुष्य सृष्टि के बाप में प्रवेश करता है, उसके योग बल से विश्व में शांति होती है। औरों के बल से शांति नहीं हो जाएगी। उसको कहेंगे- योग बल, औरों का है-- भोग बल।*


3413(29-10-20)21मि







11.👉 _*जब तक निराकार आत्माओ का बाप साकार में प्रवेश ना करें,और पार्ट न बजावे, तब तक कुछ भी समझ मे नही आएगा जब तक क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान बुद्धि में नही बैठेगा। गीता में बताया है ना*_  


_*★ वही बाबा बोलते है- पर देखो, तुम बच्चों को तो कितनी मेहनत करनी पड़ती है। वो देखो, 63 जन्म भक्तिमार्ग में भी भक्ति की मेहनत की। और अभी ज्ञान में आए तो घड़ी घड़ी माया तुमको पछाड़ती है क्योंकि लड़ाई तो है ना माया से। और बाप तो समझाते है कि बहुत सहज है, लड़ाई झगड़े की बात ही नही है। चपटी का ज्ञान है। जैसे निराकार आत्मा साकार शरीर के बिगर कोई काम नही कर सकती ऐसे ही निराकार आत्माओ का बाप जब तक साकारी मुकर्रर रथ में प्रवेश न करे और पार्ट न बजावे, तब तक ये बात कुछ भी बुद्धि में समझ मे नही आवेगी, जब तक ये छोटी सी बात समझ मे नही आई। क्या? क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ, जो गीता में बताया ना!  तो बताया-बाप पीछे कह देते है, ये जो माया के तूफान आए ना, ये जो छोटे छोटे बीरे है, उनको बुझाने के लिए आए। उनको तो बहुत हैरान करती है। ज्ञान का पुरुषार्थ, याद का पुरुषार्थ थोड़ा थोड़ा करते है, तो आत्मा में रोशनी आती नही, ज्ञान कम होता है, तो याद भी बड़ी दुश्तर। और ये याद की तो बड़ी मजबूत, यानी बड़ी शक्ति है इस याद में। परन्तु माया भी बड़ी शक्तिमान बनती है। बच्चों को कितना भुलाई देती है। (time @5.38-8.58) dt 28.10.2020*_







12.👉 गीता ज्ञान अनुसार 👇


*युद्ध का क्षेत्र क्या है?*


जवाब -  श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर 'क्षेत्र' (जैसे खेत में बोए हुए बीजों का उनके अनुरूप फल समय पर प्रकट होता है, वैसे ही इसमें बोए हुए कर्मों के संस्कार रूप बीजों का फल समय पर प्रकट होता है, इसलिए इसका नाम 'क्षेत्र' ऐसा कहा है) इस नाम से कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसको 'क्षेत्रज्ञ' इस नाम से उनके तत्व को जानने वाले ज्ञानीजन कहते हैं।


(श्लोक:

*कज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय)*

 *श्री भगवानुवाच*

*इदं शरीरं कौन्तेय* *क्षेत्रमित्यभिधीयते।*

*एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥ (अध्याय 13, श्लोक 1)*







13.👉 *Most Important point*


*_पूरा ज्ञानी पहले बने फिर योगी। तो पूरा ज्ञान किसे कहेंगे?? आज रेगुलर क्लास आएंगे, पंक्चुअल आएंगे, फिर मुगालते में आ गए, शंकर का वंडरफुल पार्ट को देख के, फिर भाग गए, तो उसे कहेंगे ज्ञानी?? क्षेत्र और  क्षेत्रज्ञ कौन है, उसे पहचाने-तो कहेंगे  ज्ञानी।_* 








14.👉शंकर का पार्ट तो ऐसा वंडरफुल है जो तुम बच्चे भी समझ ना सको। यह क्या मुसीबत? नहीं समझते हैं तो क्या करते हैं? अरे कुछ करते हैं ऊपर निचेे कि नहीं? अभी अभी बड़ा विश्वास एकदम रेगुलर स्टूडेंट हो जाएंगे, फिर? अनिश्चय तो भाग गए


_*★ पूरा योगी क्या? शार्ट में परिभाषा क्या?  पूरा ज्ञानी क्या? क्योंकि पहले ज्ञानी फिर योगी। कौन ज्ञानी? अरे भूल गए? अरे ज्ञान है ही सिर्फ दो बातों का। क्षेत्र, माने धरणी, धरणी माने शरीर। अरे शरीर रूपी धरणी है कि नही? इसमे पांच तत्व है कि नहीं? हाँ। क्षेत्र माने खेत। खेद धरणी कहा जाता है ना। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ, क्षेत्र को जानने वाला, कौनसी क्षेत्र को?? एक्स वाई जेड कोई को भी? 500 करोड़ के क्षेत्र को? नहीं। उनमें जो अब्बल नंबर जो गाया हुआ है, क्या? अल्लाह अब्बलदिन जिसे कहते हैं। हाँ! वह है क्षेत्रज्ञ! क्या? क्षेत्र को, उस धरणी को, उस देह रूपी धरणी को पहचानने वाला। कौनसी रूपी देह रूपी धरणी शरीर को पहचानने वाला? वही अर्जुन, आदम, एडम, आदि नाथ, आदि देव, अलग अलग धर्म मे बोला जाता है ना? हाँ! उसको पहचाने! उसको पहचाने, पक्का-2 पहचाने। हम बच्चे क्या कहते है? बाबा आप ने तो बताई दिया- जिसे आदिदेव आप बताए रहे है शंकर को, आदि देव, आदिनाथ कहा ना? तुम आदि देव पुरुष पुराण। तो उसके लिए तो आपने बोल दिया शंकर का पार्ट तो ऐसा वंडरफुल है जो तुम बच्चे भी समझ ना सको। यह क्या मुसीबत? नहीं समझते हैं तो क्या करते हैं? अरे कुछ करते हैं ऊपर निचेे कि नहीं? अभी अभी बड़ा विश्वास एकदम रेगुलर स्टूडेंट हो जाएंगे,  कैसे? रेगुलर माने रोज क्लास करने वाले, और पंक्चुअल भी हो जाएंगे। पंक्चुअल माने टाइम से क्लास में आने वाले और बीच में भागने वालले? नहीं। पूरा क्लास होने के बाद फिर भले छुट्टी! ऐसे बन जाते हैं। फिर क्या होता है? कोई घड़ी धक से ऐसी आती है-वो वंडरफुल पार्ट देख करके, सुन कर केे, क्या करते हैं? फिर कुछ अंतर पड़ता है कि नहीं? क्या अंतर पड़ता है? फिर दिल दिल थापक हो जाती है। तो फिर बाबा आ करके रखते है-कि भाई पुरा योग नही है। पूरा योग मॉने5 जो निश्चय बुद्धि बनना चाहिए, अपने आत्मा के पार्ट के ऊपर, और आत्मा के बाप के पार्ट के ऊपर, जोअटल निश्चय बुद्धि बनना चाहिए, वह बनते नहीं है। तो पूरा ज्ञान, ज्ञानी कहेंगे? नहीं कहेंगे। पूरा ज्ञान ही नहीं, तो पूरा योगी भी, है? योगी भी नही। (time @19.45-23.51) dt 8.07.2020*_







15.👉 तो ये है ही भक्ति। क्योंकि ज्ञान तो नही है कुछ भी। क्या ज्ञान? अरे ज्ञान तो बताई दिया ना, अरे गीता में भी बताई दिया भक्तिमार्ग की गीता में, क्या? ज्ञान किसे कहेंगे? इतना ही ज्ञान है, क्या? क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ 2 का ज्ञान हो गया तो ज्ञान, और नही हुआ, या घड़ी घड़ी माया मुग़ालते में डाल देती है, अनिश्चय में डाल देती है, तो क्या कहे? ज्ञान हो गया? नही हुआ। ज्ञान तो नही हुआ ना कुछ भी। (time@11.48-12.43) dt 16.06.2020






16.👉 *सदाकाल का क्षेत्रज्ञ कौन है? शिव सुप्रीम सोल।* 👇


_*इस सृष्टि का अब्बल नम्बर का जानकारी क्षेत्रज्ञ, कौन? रामबली आत्मा। वही वो क्षेत्रज्ञ इस सृष्टि पर पहला नंबर बनती है। और क्षेत्र/ खेत। कौन? अर्जुन, आदम। लेकिन उस से भी पहले कोई आत्मा है कि नही? उससे भी पहले कोई आत्मा है या नहीं? उससे पहले कोई आत्मा नहीं? तो बताओ ना, पहले तो कोई मना ही कर दे, उसको तो सब भूल जाते है, वो तो कोई चीज ही नही, रामावली आत्मा ही भगवान है? वही शिव है? अलग से कोई होता ही नहीं उसका जानकार। किसका? जो इस सृष्टि पर बेहद का ज्ञान सूर्य चैतन्य उदय होता है जिसका शाश्त्रो मे नाम विवस्वत दिया है, उसका जानकार सिर्फ वही आत्मा है अर्जुन, आदम वाली? वहीं क्षेत्रज्ञ है? क्षेत्र+ज्ञ, ज्ञ माने जानने वाली। क्षेत्र माने स्थान। शरीर रूपी स्थान। शरीर रूपी खेत।  शरीर रूपी रथ को जानने वाली सिर्फ वही आत्मा है आदम वाली? कौन है? हाँ, सुप्रीम सोल जो है, वो, उसको कहेंगे हाँ भाई असली क्षेत्रज्ञ तो वो है। सदाकाल का जानने वाला है या अल्प काल का जानने वाला है? सदाकाल का जानकार है।*_



 _*★ तो बताया, क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ , मानेे उस क्षेत्र को ज्ञान जिनको है, उनको कहेंगे क्षेत्रज्ञ। तो इस दुनिया में कितने क्षेत्रज्ञ बनते हैं? एक ही बनता है बस? उसके राज्य में एक वो खुद ही होगा राजा, एक खुद ही होगा प्रजा, खुद ही होगा दासदासी, खुद ही होगा राज्य अधिकारी? ऐसे? खुद ही चांडाल? लक्ष्मी आया ही नही? लक्ष्मी नहीं आया? पहले कैसे पहचानेंगे? लक्ष्मी की आत्मा ने यह पहचान लिया कि मैं किसकी लक्ष्मी हूँ? ये पक्का पहचान लिया कि मैं किसकी लक्ष्मी हूँ, और मुझे किसके साथ रहना चाहिए?  तन से मन से धन से किसके प्रति समर्पण होना चाहिए प्रैक्टिकल रूप में इस संसार में, यह बुद्धि में है? नहीं है ना। वह तो बाद में पता चलता है। और जब पता चलता है, तभी पता चलता है जब बेसिक ज्ञान से, जो बेसिक ज्ञान का व्याख्या मिलती है, विस्तार मिलता है ज्ञान का, उसको कहते हैं सांख्य। सांख्य योग, एडवांस ज्ञान। तो एडवांस ज्ञान मिले तो उसको अपने आत्मा का भी अपने पद का भी ज्ञान मिले कि नहीं, कि मेरी कुर्सी कौन सी है, किसके साथ बैठने की है, नारायण के साथ बैठने की है, की अभी तो बेटी ....? मेरी पहली भामरिया रे, अब तो बेटी भावेकी, फिर दूसरी भावर, फिर तीसरी  भावर फिर चौथी भावर फिर... सातवे भावर पूरी होती है तो अभी जो है अपने पति की बन गई। शादी करते है तो 7 भावरे डॉलते है की नही? दक्षिण भारत मे डालते है कि नही? दक्षिण भारत मे भी डालते है। तो बताया, ये ज्ञान इस सृष्टि में किसी को नही है, क्या? वो क्षेत्र कौनसा है अब्बल नम्बर सृष्टि रूपी रंगमंच पर, जिसे आदम, एडम, अर्जुन कहा जाता है और वो क्षेत्र को जानने वाला पहला नम्बर कौन है, कौन है? हाँ? जानने वालीे पहलो नंबर की इस मनुष्य सृष्टि में है राम वली आत्मा,  जिसको आदिनारायण की आत्मा कहो, महादेव की आत्मा कहो, आदिदेव की आत्मा कहो। तो वो क्षेत्रज्ञ इस सृष्टि पर पहला नंबर बनती है। बाकी उससे भी पहले कोई आत्मा है या नहीं? उससे पहले कोई आत्मा नहीं? तो बताओ ना, पहले तो कोई मना ही कर दे, उसको तो सब भूल जाते है, वो तो कोई चीज ही नही, रामावली आत्मा ही भगवान है? वही शिव है? अलग से कोई होता ही नहीं उसका जानकार। किसका? जो इस सृष्टि पर बेहद का ज्ञान सूर्य चैतन्य उदय होता है जिसका शाश्त्रो मे नाम विवस्वत दिया है, उसका जानकार सिर्फ वही आत्मा है अर्जुन, आदम वाली? वहीं क्षेत्रज्ञ है? क्षेत्र+ज्ञ, ज्ञ माने जानने वाली। क्षेत्र माने स्थान। शरीर रूपी स्थान। शरीर रूपी खेत।  शरीर रूपी रथ को जानने वाली सिर्फ वही आत्मा है आदम वाली? कौन है? हाँ, सुप्रीम सोल जो है, वो, उसको कहेंगे हाँ भाई असली क्षेत्रज्ञ तो वो है। सदाकाल का जानने वाला है या अल्प काल का जानने वाला है? सदाकाल का जानकार है। तो बताया-ज्ञान और अज्ञान किसे कहा जाता है वो तो कोई ऋषि मुनि पंडित विद्धवान आचार्य सन्यासी जानते ही नही, शिवाए, शिवाए तुम बच्चों को। तुम बच्चों ने जान लिया कि वो शरीर रूपी मुकर्रर रथ कौनसा है, जिसका शाश्त्रों मे और खासकर जिसके बारे मे ढेर सारे टिकाए सबसे ज्यादा टिकाए हुई है, व्याख्याए हुई है। कौनसा? कौनसा शास्त्र? हाँ, गीता, भगवत गीता, भगवान की गाई हुई गीता। तो उस भगवान की गीता मे बताया है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान जो है वही ज्ञान है, और बाकी सब? बाकी सब ज्ञान नही। (time @32.46-38.35) dt 09.06.2020 VCD-3272*_







17.👉 ★ तो अब समझ मे आया गीता में जो क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ बताया हुआ है वो क्षेत्र है शरीर रूपी क्षेत्र मुकर्रर रथ। वो क्षेत्र का ज्ञान मीले, जानकारी मिलें। ज्ञान माने जानकारी मीले, जानना। उसके साथ साथ बाप का भी पता चले।  कौनसा रथ? वही जो उस रथ में प्रवेश करता है। माना रथ धारी आत्मा तो पहले से थी उसमे। रथ किसका है? शाश्त्रो मे रथ अर्जुन का बताया। और उसमे भगवान ने प्रवेश किया उस शरीर को/रथ को चलाने के लिए, कंट्रोल करने के लिए। (time @30.57-32.05) dt 09.06.2020







18.👉 Most important point


*क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान पहले किसको पहचान होगीं? पहले एक बाप को पहचान होगी फिर दो को पहचान होगी। दूसरा कौन? लक्ष्मी। उसके बाद, उसके बाद क्या कहेंगे? उसके बाद कितने? 6 और है। हाँ। जो 6 है उनमे नम्बर वार है, अब्बल नंबर योगिनी माता। फिर योगिनी माता के जो बच्चे है नजदीक।*👇


*_ज्ञान है असली बाप बेहद का बाप आत्माओ का बाप और मनुष्य सृष्टि का बाप। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का पहचान ही ज्ञान है। वो अर्जुन रूपी शरीर का क्षेत्र का पहचान हो जाए भाई इस दुनिया मे पार्ट बजाने वाला ये अर्जुन आदम आदि देव एडम ये मनुष्य है। ये पहले एक को पहचान होगी कि पहले 8 को पहचान हो जाएगी? पहले एक को पहचान होगी फिर दो को पहचान होगी। दूसरा कौन? पक्की पहचान, एक बार पहचान हो जाए तो फिर अनिश्चय बुद्धि जीवन मे कभी भी न बने। हाँ, लक्ष्मी को होगीं। पहली पहचान आदि नारायण, दूसरी पहचान किसको आदि लक्ष्मी को, फिर उसके बाद? हाँ, उसके बाद, उसके बाद क्या कहेंगे? उसके बाद कितने? 6 और है। हाँ। जो 6 है उनमे नम्बर वार है, अब्बल नंबर योगिनी माता। फिर योगिनी माता के जो बच्चे है नजदीक। ज्यादा सहयोगी है। बहुत सहयोग देते है ईश्वरीय सेवा में। तो उनका नंबर आएगा ना? उनका नंबर आएगा।_*


_*★ अभी अज्ञान और ज्ञान इनको तो कोई जानते ही नही है। अज्ञान क्या होता है, और ज्ञान क्या होता है। क्या होता है ज्ञान और अज्ञान? ज्ञान किसे कहें? और अज्ञान किसे कहे? ऐसे तो शाश्त्रो मे भी बताया हुआ है ज्ञान क्या है अज्ञान क्या है। हाँ? 84 जन्म का ज्ञान ही ज्ञान है? बस? 84 जन्म में क्या पार्ट है मेरी आत्माका यही ज्ञान है? हाँ, अरे मेरी आत्माका तो 84 जन्मो का ज्ञान तब होगा जब उसको पहचान देने वाला कोई हो। वो 84 जन्म का ज्ञान देने वाला भी कोई होगा कि नही? बाप ही तो माँ-बाप ही तो बच्चे को पहचान देते है ना। तो कहा से पहचान मिलती है? माँ बचपन मे बच्चों को पहचान देती है, बार बार बोलती है बच्चे बच्चा ये तुम्हारा बाप है, ये तुम्हारा बाप है। तो बेसिक ज्ञान में बार बार ये समझाया गया ना! ढेर सारे महावाक्यो मे पॉइंट मे समझाया गया। क्या? की तुम्हारा असली बेहद का बाप इस मनुष्य सृष्टि रूपी रंगमंच पर कौन  है और और उसमे वो मनुष्य सृष्टि रूपी रंगमंच का साकार बाप है, उसमे वो सुप्रीम सोल कैसे पार्ट वजा रहा है, ये पहचान मुरलियो मे दी गई है कि नही? ब्रह्मा के द्वारा जो मुरलीया बोली गई, उनमें विशियो मुरलियों मे सैकडौ मुरलियों में ये पहचान दी है या नही दी है? पहचान तो दी है। तो उसको गीता में लिखा हुआ है ज्ञान है असली बाप बेहद का बाप आत्माओ का बाप और मनुष्य सृष्टि का बाप। माने मनुष्य सृष्टि का बाप है क्षेत्र, क्षेत्र माने स्थान।  खेत। क्षेत्र का बिगड़ा हुआ रूप हो गया खेत। खेत माने स्थान हुआ ना। तो वो कौनसा चैतन्य खेत, चैतन्य छेत्र? चैतन्य शरीर रूपी क्षेत्र है, अर्जुन का शरीर रूपी क्षेत्र है। वो अर्जुन रूपी शरीर का क्षेत्र का पहचान हो जाए भाई इस दुनिया मे पार्ट बजाने वाला ये अर्जुन आदम आदि देव एडम ये मनुष्य है। ये पहले एक को पहचान होगी कि पहले 8 को पहचान हो जाएगी? पहले एक को पहचान होगी फिर दो को पहचान होगी। दूसरा कौन? पक्की पहचान, एक बार पहचान हो जाए तो फिर अनिश्चय बुद्धि जीवन मे कभी भी न बने। हाँ, लक्ष्मी को होगीं। पहली पहचान आदि नारायण, दूसरी पहचान किसको आदि लक्ष्मी को, फिर उसके बाद? हाँ, उसके बाद, उसके बाद क्या कहेंगे? उसके बाद कितने? 6 और है। हाँ। जो 6 है उनमे नम्बर वार है, अब्बल नंबर योगिनी माता। फिर योगिनी माता के जो बच्चे है नजदीक। ज्यादा सहयोगी है। बहुत सहयोग देते है ईश्वरीय सेवा में। तो उनका नंबर आएगा ना? उनका नंबर आएगा। तो अब समझ मे आया गीता में जो छेत्र और छेत्रज्ञ बताया हुआ है वो छेत्र है शरीर रूपी छेत्र मुकर्रर रथ। वो छेत्र का ज्ञान मीले, जानकारी मिलें। उसके साथ साथ बाप का भी पता चले।  कौनसा रथ? वही जो उस रथ में प्रवेश करता है। माना रथ धारी आत्मा तो पहले से थी उसमे। रथ किसका है? शाश्त्रो मे रथ अर्जुन का बताया। और उसमे भगवान ने प्रवेश किया शरीर को चलाने के लिए कंट्रोल करने के लिए।  (time @27.11-32.22) dt 09.06.2020*_








19.👉 हमारा परिचय देना है। ये हमारा कौन सी आत्माए है?


 ★ ये-2 जो ये आए हुए हैं बाबा के पास, ये भी सर्विस कर सकते हैं। क्या सेवा? बाप का पैगाम देने की सेवा कर सकते हैं। हमारा परिचय, हमारा परिचय देना है। ‘हमारा’ क्यों कहा? ये क्यों नहीं कहा- ‘मेरा’ परिचय देना है। हाँ, क्योंकि शिव बाप ये नहीं कहते कि मुझ निराकार आत्मा का ही सिर्फ़ परिचय देना है। नहीं, क्या करना है? मैं निराकार आत्मा जिस मुकर्रर रथ में, हीरो पार्टधारी में प्रवेश करके विश्व की बादशाही देता हूँ, जन्म-जन्मान्तर की राजाई का वर्सा देता हूँ, मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देता हूँ, तो हम दो हैं ना! आत्माएँ दो हैं कि एक है? दो आत्माएँ हैं। तो ऊँच-ते-ऊँच पार्टधारी आत्माएँ हैं ना! तो हमारा परिचय देना है। तो उनको बताना है कि ये परिचय क्या है? और वो परिचय की बात तो गीता में भी बताई है, क्या? क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। क्षेत्र माने ये शरीर। जिस शरीर, मुकर्रर रथ में शिव बाप आते हैं उस शरीर का परिचय देना है। किस रथ में आते हैं? अर्जुन का रथ मुकर्रर है ना! तो आते हैं। उसका परिचय देना है और कौन आते हैं, उनका भी परिचय देना है। तो बेहद के बाप का परिचय देना है ना! दोनों ही बेहद के बाप हैं। वो निराकार, निराकार आत्माओं का बाप है और साकार जिसमें मुकर्रर रूप से प्रवेश करते हैं वो मनुष्य सृष्टि का, मनुष्यों का बाप है। तो परिचय देने के लिए अभी बेहद के बाप को याद करना है। क्या? और दोनों बेहद के बाप हैं। आत्माओं का भी बेहद का बाप, उससे ऊँचा कोई आत्माओं का बाप होता ही नहीं और मनुष्यों का भी बेहद का बाप, उससे ऊँचा कोई मनुष्य इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाला होता ही नहीं। तो बाबा कहते हैं- तुम मुझे याद करेंगे तो पावन बन जाएँगे। क्या? कौन कहते हैं ‘मुझे’? मुझे एक को या दो को? दो को? एक को। कौन एक? एक शिवबाबा नहीं, शिव बाप नहीं? एक शिव बाप नहीं कह सकते। मुख से कहा जाता है ना! शिव बाप तो निराकार, उनको मुख तो है ही नहीं। वो कैसे कहेंगे? तो वो साकार मुकर्रर रथ में आ करके कहते हैं- तुम मुझे याद करेंगे तो पावन बन जाएँगे। (time @5.34-9.14) dt 22.03.2020








20.👉 _*बताया,  छेत्र और छेत्रज्ञ को पूरा जान लिया पहचान लिया, तो समझो ये पढ़ाई पूरी हो गई। दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञानपुरा।ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए? डरने की बात है? फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? हाँ? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की  मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है।*_



 _*★ तो अभी तुम जरूर कहेंगे अभी मौत ना आवे, क्योंकि अभी हमने पूरी पढ़ाई पढ़ी थोड़े ही है तो तुम डरेंगे अभी मौत न आ जाए। क्या है पूरी पढ़ाई? वह गीता में भी बताया दिया पूरी पढ़ाई क्या है. क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। क्षेत्र माना यह शरीर इदम् शरीरम कौन्तेय क्षत्रं इत्या विदियते, ये शरीर रूपी क्षेत्र है, यह क्षेत्र क्या है? अर्जुन यह तेरा शरीर रूपी जो क्षेत्र है, युद्ध क्षेत्र है युद्ध भूमि है खेत है, खेत में बीज बोया जाता है कि नहीं? हाँ, बीज बोया जाता है। तो बताया इस क्षेत्र को जानने वाला कौन है, कौन है और कितने हैं इस दुनिया 8?? 8 ने जान लिया? उनको पढ़ाई पढ़ाने की अब दरकार नहीं रही, ऐसे? एक जानता है? अच्छा! एक जानता है अगर तो पढ़ाई पूरी हो गई। गीता में भी लिखा है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ, क्षेत्र को जानने वाला ज्ञानी, इन दो को समझ लिया, निश्चय बुद्धि हो गए, तो फिर ज्ञान पूरा हो गया। कभी भी अनिश्चय ना आवे, तो कहेंगे ज्ञानपुरा। और ज्ञान पूरा मिल गया तो कि मैं आत्मा हूँ और मेरा बाप परमपिता परमात्मा हाँ, ऊंचे ते ऊंचा भगवंत, हाँ वह मुझे मिल गया, तो आस थी परम ब्रह्म परमेश्वर की वह मिल गया तो और क्या चाहिए? डरने की बात है? फिर तो कोई डरने की बात नही। तो मौत से कब तक डरते है? हाँ? जब तक पूरा निश्चय नहीं हुआ है क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की  मेल का, तब तक यह डर अंदर रहता है। कहेंगे अब हमने इंतहान कहां पूरा पार कर दिया। जो हम आत्माओं के लोक में चले जावे! (Time@34.17-37.43)* dt 15.03.2020_








21.👉 *ज्ञान क्या है ??*


*असली ज्ञान तो है क्षेत्र को समझना, और क्षेत्रज्ञ को। क्षेत्र क्या है?क्षेत्र माने यह शरीर, जो गीता में बोला है--इदम शरीरं कौन्तेय.... हे अर्जुन तेरा जो शरीर है, वह क्षेत्र है। क्षेत्र का बिगड़ा हुआ रूप खेत है। खेत में क्या होता है? खेत में कृषि में होती है, और खेत में लड़ाई भी होती है।* 

*महाभारत युद्ध कोई शहर में होता है या खेत में? मैदान (खेत) में होता है।*

*तो मै भाई को समझता हूँ।पहले समझे फिर समझाए।क्या समझे?*


         *क्षेत्र को समझे,देह को समझे और जो देह से सदा परे है ,उस रूहानी बाप को समझे।जो रूहानी बाप उस साकार देहधारी में,जो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सदा काल रहता है मुकर्रर रूप से।कि देह से बाहर सूक्ष्म शरीर से रहता है??कभी नही।वो भूत प्रेत कभी बनता ही नही।वो भूतों को नाथने वाला है।*

*तो गहराई से समझना है आत्म अभियानी बने,पूरा आत्मभिमानी।देहभान का नाम निशान नही।*

       यह नहीं कि भ्रष्ट कर्म इंद्रियों के सुख से ऊंची उठे, और ज्ञान इंद्रियों में लटक गए। आंखों में बुद्धि चली गई। नहीं, पूरे आत्मभिमानी बने--- मैं भाई को देखता हूं। आत्मा- आत्मा भाई-भाई को देखता हूं। *बच्ची यह आत्मा- आत्मा भाई भाई को देखना, यह बड़ी मुश्किल बात है।* यह उस अवस्था में बैठकर समझाना है, आत्मिक स्थिति में बैठकर। नहीं तो, थोड़ा भी देहभान आया, तो जो समझने आया है, उसका अहंकार में आकर अपमान कर देंगे।


3170(28-2-20)20मि








22.👉 *_ज्ञान क्या है? गीता में बताया, क्या बताया? क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। ‘क्षेत्र’ माने शरीर-मुकर्रर रथ ‘रथ’ माने शरीर और ‘क्षेत्रज्ञ’ माने उसका जानकार_*


★  *_एक के पिछाड़ी दूसरा आता गया। अभी कलियुग है तो फिर संगमयुग के बाद सतयुग होने का है, कितना टाइम लगेगा? संगमयुग के बाद सतयुग आने में कितना टाइम लगेगा? 5000 साल लगेगा? एक सेकेण्ड लगेगा, अच्छा! एक सेकेण्ड में ज्ञान-चिक्षा पर चढ़ जाएँगे? एक सेकेण्ड में ज्ञान कोई समझ पाता है? ज्ञान क्या है? जैसे गीता में बताया, क्या बताया? क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। ‘क्षेत्र’ माने शरीर/मुकर्रर रथ ‘रथ’ माने शरीर और ‘क्षेत्रज्ञ’ माने उसका जानकार। तो मुकर्रर  रथ का जानकार इस दुनिया में तो कोई है ही नहीं कि उस मुकर्रर रथ को किसने कण्ट्रोल किया, किसने जाना? इस दुनिया में कोई नहीं जानता। (time@13.45-15.00) dt 14.11.2019_*







23.👉 *_शरीर रूपी क्षेत्र को मनुष्य सृष्टि का पिता मान लेना चाहिए, जान लेना चाहिए, पहचान लेना चाहिए और पहचान करके उसको जीवन मे फॉलो करना चाहिए। अगर नही किया तो क्या होगा? सब के शरीर रूपी जो क्षेत्र है, वो सब ध्वस्त हो जावेंगे। कम से कम बर्फ में तो जरूर दब जाएंगे।  5 तत्व के गिरफ्त में आजायेंगे।_*


 _★ *क्षेत्र और छेत्रज्ञ दोनों के ज्ञान को जो जनता है वही सच्चा ज्ञानी है। अगर दोनों में से एक को भी भूलता है, तो अज्ञानी। माना उस शरीर रूपी क्षेत्र को मनुष्य सृष्टि का पिता मान लेना चाहिए, जान लेना चाहिए, पहचान लेना चाहिए और पहचान करके उसको जीवन मे फॉलो करना चाहिए। अगर नही किया तो क्या होगा? सब के शरीर रूपी जो क्षेत्र है, वो सब ध्वस्त हो जावेंगे। क्या? कम से कम बर्फ में तो जरूर दब जाएंगे।  5 तत्व के गिरफ्त में आजायेंगे। इसलिए जीवन अगर मनुष्यों का है, तो मन का उपयोग करके क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को वो इस सृष्टि पर का काम कर रहा है, कहा है, कैसी स्टेज में है, उसकी क्या हिस्ट्री है, उसकी क्या जीवन कहानी है, वह जीवन कहानी औरो की जीवन कहानी वर्थ कौड़ी और उस एक कि जीवन कहानी वर्थ पौंड। उसको कहा शिव की जीवन कहानी।  शिव समान बना। तो वो शिव ज्योति बिंदु जो लिंग में दिखाया गया, वो बिंदु जो हीरा दिखाया गया वो कभी पत्थर बुद्धि नही बनता। (time@3.10.24-3.14.56)* vcd 2344._








24.👉 _*ज्ञानी का मतलब है ज्ञानी वो जो सब कुछ जानने का  इच्छुक हो।  ज्ञानी वो जो शरीर रूपी क्षेत्र और उसकव जानने वाला छेत्री (या कहो क्षेत्रज्ञ) का जानकार हो*_


★ _*ज्ञानी क्या मतलब ही है, ज्ञानी का मतलब बताया, ज्ञानी वह जो सब कुछ जानने का इच्छुक हो! हाँ? ज्ञानी वो, किस को? जो गीता में बताया, क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान जिसको संपूर्ण ज्ञान हो जाए। क्षेत्र माने शरीर। इस शरीर रूपी क्षेत्र में आत्मा रहती है ना। जमीन है ना ये। धरणी है शरीर। तो इसमें* आत्मा रहती है। *तो अर्जुन हुआ क्षेत्र। दुनिया का बहुत बड़े से बड़ा चैतन्य क्षेत्र हुआ कौन? अर्जुन। उस क्षेत्रको पहचानना और उस क्षेत्र में क्षेत्री, जो उस क्षेत्रको कंट्रोल करने वाला कंट्रोलर है। क्या? भगवान दिखाते हैं, कि अर्जुन के रथ को किसने कंट्रोल किया? भगवान ने।  तो वह भगवान साकार नहीं होता कभी भी। वह सदैव निराकार, सदाशिव है।* सदैव कल्याणकारी, कभी अकल्याणकारी किसी आत्मा का बनता ही नहीं। तो उसको भी पहचान लिया, एक ही शरीर में, उस मुकर्रर रथ में।  *दोनों को पक्का पक्का पहचान लिया तो ज्ञानी, ज्ञान पूरा हुआ। और एक सेकंड भी माया ने हीला दिया और अनिश्चय आगया, तो क्या?? ज्ञानी की अज्ञानी??  फिर बाद में कहते हैं हमको तो क्या हो गया? हमको तो कुछ हो गया था। क्या हो गया? डिप्रेशन हो गया* वो डिप्रेशन में आने के कारण हम गलत फहमी में आगए। एक सेकंड भी अगर माया ने गलतफहमी में लाया, *भले बाबा समझाते रहते हैं, भाई जल्दी मत करो, तुरंत का तुरंत फैसला लेना और तुरंत का तुरंत बेलिया बिस्तर बादना और भाग  जाना बाबा के घर मे से, ये अच्छी बात नही है। क्या करना चाहिए? सोच समझ कर फैसला करना चाहिए ना कि तुरंत करना चाहिए? कहते है ना जल्दी का काम शैतान का। तो शैतानी आत्मा होगी तो सारी दुनिया शैतान बन जाती। शैतान माने रावण।* मुसलमान लोग नाम रखते हैं ना शैतान, और भारत में नाम रखते हैं रावण। क्या? *अभी राम रावण की रस्सा कस्सी हो रही है। राम अपनी तरफ खींचता है और रावण अपनी तरफ खींचता है। 1 सेकंड भी अगर बुद्धि को भ्रष्ट कर दिया रावण ने माया रूपी रावण ने तो क्या होगा एकदम गड्ढे में ले जाएगा। हाँ।* तो भक्ति और ज्ञान को समझ लिया ना। भगत और ज्ञानी कौन है, समझ लिया ना। (time  @1.33.04-1.36.14 ) dt 12.04.2019_









25.👉 *शिव तो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सिर्फ थोड़े समय के लिए आता है। चारों युगों के चारो सीन की रिहर्सल कराने के लिए आता है, और सदैव पर्दे के पीछे ही रहता है। वह पर्दा है-- शंकर का शरीर रूपी क्षेत्र, जिसे विग्रह कहा है गीता में।*

      गीता में बोला है---* *इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते*

*(हे अर्जुन, यह तेरा जो शरीर रुपी रथ है, यह धर्म का क्षेत्र है, यही कुरु क्षेत्र है)*

        हे अर्जुन, तेरा यह शरीर क्षेत्र है। क्या क्षेत्र? क्षेत्र को कहते हैं रणभूमि, फील्ड ,धर्म युद्ध का क्षेत्र, कर्म युद्ध का क्षेत्र।*

   तो इस शरीर रूपी अर्जुन के रथ को कहो, आदम के रथ को कहो, महादेव के रथ को कहो, जो अर्जुन से पुरुषार्थ करते करते महादेव बन जाता है, महान देवता उस शंकर के मस्तक रूपी क्षेत्र में शिव नेत्र दिखाते हैं। जो शिव नेत्र निराकार आत्मा की यादगार है। तो जरूर वह तो कोई पाप तो नहीं करेंगे ना, *जिसमें भगवान प्रवेश करेगा वह कोई हिंसक तो नहीं बनेंगे न।*


3169(27-2-20)9मि




Youtube Link


I)  https://youtu.be/GuzJDj9RQhw


II) https://youtu.be/NoJ3wNUYj5g


III)     

http://www.unknownwarrior.in/2018/12/blog-post_12.html?m=1






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