भगवान को जितना रुलाया है उतना दुनिया में किसी को भी नहीं रुलाया है।प्रत्यक्षता के समय की बात है।इसीलिए नर्क की दुनिया में जो भी बच्चे पैदा होते हैं रोते-रोते होते हैं।
*भगवान को जितना रुलाया है उतना दुनिया में किसी को भी नहीं रुलाया है।प्रत्यक्षता के समय की बात है।इसीलिए नर्क की दुनिया में जो भी बच्चे पैदा होते हैं रोते-रोते होते हैं*
यहाँ तो बाप ने समझाया-- *जो पहले आते हैं सतोप्रधान में, उनके आने से ही, उनको इतनी सजा?? यह कौन सा कर्म है? जिसके कारण उनको सजा मिली।* जो क्रॉस पर चढ़ाया गया। सजा जीसस को मिली। प्रवेश करने वाली आत्मा को तो सजा मिल ना सके।
*संगम युग में बाबा जो उदाहरण दे रहे हैं, वो टेली करने के लिए दे रहे हैं ना। तो किससे टेली किया??*
*भगवान को जितना रुलाया है, उतना दुनिया मैं और किसी को भी नहीं रुलाया।*
*ये तो प्रत्यक्षता के समय की बात है। जो भी बच्चे पैदा होते हैं, नर्क की दुनिया में खास द्वापर कलयुग में, तो (नरक की दुनिया में ही बाप प्रत्यक्ष होते हैं) तो हंसते-हंसते पैदा होते हैं या रोते रोते हैं??*
जन्म होता है , जब बच्चा बाहर आता है तो रोते रोते ही आता है। तो *मनुष्य को इस बात की समझ नहीं कि क्राइस्ट को सजा मिली या जिसने प्रवेश किया उसको?*
Vcd 2601(6-8-18)
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