शिव बाप सूक्ष्म शरीर धारण नहीं करता। उसे तो सूक्ष्म शरीर ही नहीं है। वो तो अकर्ता है।*

 *शिव बाप सूक्ष्म शरीर धारण नहीं करता। उसे तो सूक्ष्म शरीर ही नहीं है। वो तो अकर्ता है।*

1.

 *सूक्ष्म शरीर उनका बनता है,जो कर्ताधर्ता है।कर्म करेंगे तो सूक्ष्म में स्मृति रहेगी। उनका पार्ट सूक्ष्म वतन में है ही नहीं। वह तो सरकार में आता है या तो परमधाम में निरंकारी स्टेज में रहता है।*

*तो बाप दादा का बच्चों से वायदा है-- सदा साथ रहेंगे, और साथ ही चलेंगे। सिर्फ संगम में नहीं, 84 जन्मों में भी साथ रहेंगे। तो साथ रहने की बात शिव ज्योति बिंदु की नहीं है। किसकी बात है? साकार में जो बाप है राम बाप और दादा कृष्ण वाली आत्मा। तो साथ रहेंगे भी और परमधाम में भी साथ चलेंगे*


Vcd 1257




2.


*यह सीढ़ियां है-- पहले स्थूल सेवा, फिर उससे ऊंचे उठकर के सूक्ष्म मनन मंथन की सेवा, स्थूल शरीर रहते हुए भी आत्म सूक्ष्म स्टेज में जा सकती है। फिर उससे ऊंचा है-- बीज रूप स्टेज जिसमें आत्मा अपने स्वरुप को पहचानेगी, जो उसका ऊंचे से ऊंचा स्वरूप है।*



 *चंद्रवंशीयों की सर्विस?  जगदंबा बेसिक नॉलेज वालों की बढ़िया सर्विस करेगी। उससे ऊंची नॉलेज एडवांस नॉलेज। एडवांस नॉलेज की सर्विस, वो करेगी जो शहर आज भी सारी दुनिया में ज्ञान का बड़ा भंडारी माना जाता है-- बनारस। उसे ही कहते हैं-- काशी।*

 *तो ऐसा पद पा सकती है अगर लक्ष्य रखे तो। सिर्फ कर्मणा सेवा नही। कर्मणा सेवा से भी ऊँची उठ करके ,जो सूक्ष्म आत्माओ की सेवा करने वाले है रुद्रमाला के मणके, आत्मिक स्टेज में स्थिर होने वाले है, कि खुद ही सूक्ष्म शरीर मे बने रहते है?*  

                  *सदाकाल मननंचिन्तन मन्थन की ही स्टेज में बने रहेंगे, तो अपने आत्मा के स्वरूप को पहचानेंगे, कि ऊँच ते ऊँच स्वरूप है। हाँ, पहचानेंगे ना। सूक्ष्म मननंचिन्तन मन्थन के द्वारा ही अपनी आत्मा का ऊँचा पद से पहचानेंगे ना। वो तो पता लगेगा, लेकिन कब पता लगेगा? जब बीजरूप स्टेज में स्थिर होंगे सदाकाल, जो बाबा कहते है--- मुझे निरंतर याद करो। तो ये सीढियां है।*

        *पहले स्थूल सेवा, फिर उस से ऊँची उठ करके कौनसी सेवा? सूक्ष्म मननंचिंतन मन्थन की सेवा। स्थूल शरीर रहते हुए भी सूक्ष्म स्टेज में आत्मा जा सकती है या नही जा सकती है? जा सकती है। जहाँ स्थूल शरीर, स्थूल शरीर के देह के सम्बन्धी, देह के पदार्थ सब भूल जाएंगे। बस नई दुनिया मननंचिन्तन मन्थन प्लानिंग ईश्वरीय सेवा की प्लानिंग याद रहेगी ना। देखों, ऐसा ऐसा ऊँच पद पाए सकते है। है ना?*


 3162(20.02.20)34मि



3.


🌷 बाबा ने कहा शरीर तीन प्रकार के है। कारण कहते है बाप को.. सूक्ष्म शरीर है उसमें स्थूलता नहीं है पांच तत्वों का भी सूक्ष्म रूप है स्थूल रूप नहीं है मनसा के आधार पर सारे तत्व मौजूद हैं स्थूल इन्द्रियाँ नहीं है। और स्थूल शरीर है स्थूल शरीर ज्यादा पावरफुल या सूक्ष्म शरीर ज्यादा पावरफुल?हें?क्यों? क्योंकि वो स्थूल शरीर के मुकाबले ज्यादा सूक्ष्म है। जो चीज जितनी ज्यादा सूक्ष्म होगी उतनी ज्यादा पावरफुल होगी।सूक्ष्म शरीर वाले जो भूतप्रेत हैं वो देह अभिमानी पर एटेक करेंगे या जो बिंदु रूप में टिका है उन पर एटेक करेंगे?हें? हांजी.. सूक्ष्म शरीर वाले जो भूतप्रेत है वो एटेक करते हैं जो बीजरूप स्टेज में नहीं है क्योंकि बीजरूपी स्टेज सूक्ष्म शरीर से भी ज्यादा सूक्ष्म है इसलिए बाप कहते हैं घडी घडी कहते हैं अपन को आत्मा समझो अपन को बिंदु समझो। जो ध्यान देते हैं इस बात की गहराई पर वो ज्यादा से ज्यादा प्रेक्टिस करते हैं। जो अलबेले बन जाते हैं उन्हें अंत में पता चलेगा जब सारी दुनिया में ताबड़तोड़ मौत का बाजार लगेगा ढेर की ढेर अकाले मौतें होगी भूकंप आयेंगे बडी बडी मल्टी स्टोरी बिल्डिंगे गिरेगी कितनी अचानके मौतें होगी। बोला है दुनिया का बडे ते बडा विनाश होता है भूकंप से.. बडी बडी बिल्डिंगे जिसमें हजारों लाखों लोग रहे पडे़ है एक कोलोनी में वो ताश के पत्तों की तरह गिरेंगे जब एटम बम फटेंगे तब भी विनाश होगा इतने सूक्ष्म शरीर धारी भूतप्रेत तैयार हो जायेंगे अचानक मौत लेने वाले हैं उनको आधार चाहिए कि नहीं? तो कहां जायेंगे?हें? सारी दुनिया काल के गाल में जाने वाली है भूतप्रेत बनने वाले हैं! मुठ्ठी भर बच्चे हैं बाबा के जिनको बाबा रोज रोज पढाता है क्या? अपन को आत्मा समझो तब पता चलेगा अपन को आत्मा समझने की कितनी वेल्यू है!

वार्तालाप नं.1031

21.08.2010

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