तुम बच्चों को बहुत बहुत ही गुप्त रहना चाहिए, जब तक तुम्हारी प्रत्यक्षता नही होती है, तुम सम्पन्न आत्मा नही बनते हो।
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*तुम बच्चों को बहुत बहुत ही गुप्त रहना चाहिए, जब तक तुम्हारी प्रत्यक्षता नही होती है, तुम सम्पन्न आत्मा नही बनते हो।*
*बच्चों को बहुत,बहूत ही गुप्त रहना चाहिए, तुम बच्चों को।ये चूहरे वाली बात बताई ना। हल्दी की गाँठ मिली, और पंसारी बनके बैठ गए। ऐसे करेंगे, तो तुम चाहते हो, कि हमको प्रेसिडेंट पहचान ले, हमको प्राइम मिनिस्टर पहचान लें, मिनिस्टर लोग पहचान ले, कि हम कितने ज्ञानी हैं।नहीं ,तुमको गुप्त रहना चाहिए। कब तक?*
*जैसे बच्चा गर्भ में गुप्त रहता है ना पहले। जब संपन्न देह तैयार हो जाती है, नाक आंख, कान, कर्मइंद्रिया, ज्ञानेंद्रिय पूरा शरीर का ढांचा बिल्कुल तैयार हो जाता है तभी तो बाहर आता है ना। आत्मा भी 4 महीना 5 महीना गर्भ में पकती है, तो अंजाम करती है कि हमको बाहर निकालो, बाहर निकालो। बहुत त्राहि-2 करती है।तो फिर बाहर आते है।*
*तो ऐसे ही तुम बच्चें गर्भ महल में हो कि गर्भ जेल में हो? अभी कहाँ हो? जेल में हो। जेल में कहेंगें दुख होता है और गर्भ महल में कोई दुख नही होता। आराम से बच्चा पैदा होता है कि रोते-2 पैदा होता है? नही। और जब शरीर छोड़ेंगे तो अपने स्वेकक्षा से जैसे कपडे उतारे जाते है, तो ऐसे आत्मा शरीर रूपी वस्त्र त्यागेगी, तो दूसरे शरीर मे, माँ के पेट में, गर्भ महल में प्रवेश कर जाएगी।*
*तो तुम बच्चों को भी, जब तक तुम्हारी प्रत्यक्षता नही होती है, तुम सम्पन्न नही बनते हो। आत्मा से भी और देह से भी। कैसे? मैं आता हूँ, तो तुम्हारे आत्मा रूपी बिठैया और शरीर रूपी नवैया, दोनों का पार लगाने वाला इस विषय वैतरणी नदी कहो, विषय सागर कहो, इस से पार ले जाने वाला। कौन? खिवैया आया है। जब तक तुम्हारीआत्मा सम्पन्न नही बने। तुम्हारी आत्मा सम्पन कैसे कही जाएगी? तुम्हें अपने पार्ट का पक्का पता चल जाये कि मैं आत्मा इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर कौंनसा हीरो पार्ट धारी का बच्चा हीरो पार्ट बजाने वाले हूं।
अरे हीरे के बच्चे हीरे ही होंगे ना। हाँ। *तो तुम बच्चे को तब तक गुप्त रहना चाहिए। इस समय मे कोई भी आवाज़ करने की दरकार नही है।* किस समय मे? गर्भ में बच्चा चिल्लाता है, आवाज करता है? नही। आवाज नही करता है।
31.03.19
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