अब्बल नम्बर का धर्मपिता अल्लाह अब्बल दिन क्या करता है?इतनी नीच बन जाती है कुछ न कुछ लोभ में आकर के कुछ न कुछ उठाके अपने आप खाता है, फिर बाद में बुद्धि में आता है हम ने ये पाप कर्म कर लिया, फिर फट से जाकर भंडारी को बता देगा।

 


1.

_*रावण का पहला सिर अल्लाह अब्बल भी इस लायक नही बना, कैसा?  जो पीस स्थापन करें! शांति स्थापन करें। कुछ ना कुछ मन से वाइब्रेशन ऐसा फैलाएगा, जो उस वाइब्रेशन के कनेक्शन में आने वाले को अशांति हो जाएगी।कुछ न कुछ दृष्टि से लाल लाल आँखे भी कर लेगा बीच बीच मे तो दूसरों को दुख होगा कि नही? हाँ, दुख होगा। मनसा से गलत संकल्प छोड़ना, गलत विकल्प छोड़ना, वाचा से गंदी बात बोल देना दुसरो को दुख देने वाली। और कर्मेन्द्रियों से कुछ न कुछ कर्म करना! क्या? रावण चोरी का काम करता है कि नही? कुछ न कुछ उठाके खालेगा*_


_*★ अभी पीस का तो वह जब ही चलता है पीस पीस पीस कॉन्फ्रेंस करने के लिए दौड़ते हैं ना एक देश से दूसरे देश में बड़े-बड़े शहरों में जाकर के पीस कॉन्फ्रेंस बनाते हैं ना, हाँ तो अभी पीस तो स्थापन तो तुम नही बच्चे कर सकेंगे। क्या? तुम बच्चे जो 500-700 करोड़ कर सकेंगे? चाहे वह रावण का पहला सिर, अल्लाह अव्वल दीन बनने वाला अव्वल नंबर का धर्म पिता बनता है, लेकिन अभी वह भी इस लायक बना है? अभी इस लायक नहीं बना है। कैसा? कैसा लायक नहीं बना है? जो पीस स्थापन करें! शांति स्थापन करें। कुछ ना कुछ मन से वाइब्रेशन ऐसा फैलाएगा, जो उस वाइब्रेशन के कनेक्शन में आने वाले को अशांति हो जाएगी। कुछ न कुछ दृष्टि से लाल लाल आँखे भी कर लेगा बीच बीच मे तो दूसरों को दुख होगा कि नही? हाँ, दुख होगा। मनसा से गलत संकल्प छोड़ना, गलत विकल्प छोड़ना, वाचा से गंदी बात बोल देना दुसरो को दुख देने वाली। और कर्मेन्द्रियों से कुछ न कुछ कर्म करना! क्या? रावण चोरी का काम करता है कि नही? कुछ न कुछ उठाके खालेगा! अरे बाप ने नियम बताया। क्या नियम बताया? कि भाई जिसको निमित्त बनाया है-भंडारी में उसको बता कर के, उस से पूछ करके कोई चीज लो। तो क्या करते हैं? जो अव्वल नंबर धर्मपिता बनने वाली आत्मा है, वह भी इतनी नीच बन जाती है, की कुछ ना कुछ लोभ में आकर के, कुछ ना कुछ उठा कर के अपने आप खा लेती हैं कि नहीं? फिर बाद में ज्ञान तो है ना बुद्धि में, फिर बाद में बुद्धि में आता है की हाँ हमने यह पाप कर्म कर दिया, तो फट से जा करके भंडारी को बता देगा। क्या बताएगा? भंडारी, भंडारी भी माता हुई ना। उसको बताएं देते हैं। भाई हमसे यह भूल। ऐसा कहेंगे नहीं भले, अहंकार है ना, कहेगा-कि यह हमने किया ऐसा। तो पूछते हैं-तुम पीस स्थापन कर सकते हो,  शांति स्थापन कर सकते हो, शांतिदेवा बने हो या अशांति देवा बने हो? क्या जवाब देंगे? क्या बने हो? अरे एक अक्षर लिखो, हाँ अशांति देवा बने हैं भाई। कह दो हमको हम रावण संप्रदाय है, हम मान लेंगे।  (time @42.06-46.47) dt 28.06.2020*_



2. 



बाबा ने नियम बनाया कोई चीज लो तो भंडारी से पूछो, लेकिन अब्बल नम्बर का धर्मपिता अल्लाह अब्बल दिन क्या करता है?? 👇


_*रावण चोरी का कर्म करता है, कुछ न कुछ उठाके खा लेगा भंडारी को बताए बिगर।  बाबा ने तो नियम बनाया-भंडारी को पूछ करके कोई चीज लो। लेकिन वो क्या करता है? इतनी नीच बन जाती है कुछ न कुछ लोभ में आकर के कुछ न कुछ उठाके अपने आप खाता है, फिर बाद में बुद्धि में आता है हम ने ये पाप कर्म कर लिया, फिर फट से जाकर भंडारी को बता देगा*_



_*★   और कर्मेन्द्रियों से कुछ न कुछ कर्म करना! क्या? रावण चोरी का काम करता है कि नही? कुछ न कुछ उठाके खालेगा! अरे बाप ने नियम बताया। क्या नियम बताया? कि भाई जिसको निमित्त बनाया है-भंडारी में उसको बता कर के, उस से पूछ करके कोई चीज लो। तो क्या करते हैं? जो अव्वल नंबर धर्मपिता बनने वाली आत्मा है, वह भी इतनी नीच बन जाती है, की कुछ ना कुछ लोभ में आकर के, कुछ ना कुछ उठा कर के अपने आप खा लेती हैं कि नहीं? फिर बाद में ज्ञान तो है ना बुद्धि में, फिर बाद में बुद्धि में आता है की हाँ हमने यह पाप कर्म कर दिया, तो फट से जा करके भंडारी को बता देगा। क्या बताएगा? भंडारी, भंडारी भी माता हुई ना। उसको बताएं देते हैं। भाई हमसे यह भूल। ऐसा कहेंगे नहीं भले, अहंकार है ना, कहेगा-कि यह हमने किया ऐसा। तो पूछते हैं-तुम पीस स्थापन कर सकते हो,  शांति स्थापन कर सकते हो, शांतिदेवा बने हो या अशांति देवा बने हो? क्या जवाब देंगे? क्या बने हो? अरे एक अक्षर लिखो, हाँ अशांति देवा बने हैं भाई। कह दो हमको हम रावण संप्रदाय है, हम मान लेंगे।  (time @45.17-46.47) dt 28.06.2020*_

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