बाबा जाता था जगन्नाथ पुरी में। तो बाबा ने क्या देखा??*
*बाबा जाता था जगन्नाथ पुरी में। तो बाबा ने क्या देखा??*
★ *बाबा ने बताया है - बाबा जाता था जगन्नाथ पुरी में। वहां वैश्याएं बैठी हुई थी। बाबा को प्रश्न पैदा होता था वहां वैश्याएं बैठी हुई थी। बाबा को प्रश्न पैदा होता था ये वैश्याएं यहाँ क्यों बैठाई गई है! अरे रुद्रमाला के मणके जो है, वो जन्म जन्मान्तर के राजाए है। उन राजाओ में सूर्यवंशीओ को छोड़ करके, बाकी जो राजाए है और और धर्म वंश के विजरूप वो व्यभिचारी बनते है या नही बनते है? बनते है ना। बहुत रानियां रखते है ना। तो काम विकार की रग पड़ जाती है ना व्यभिचार की। अरे व्यभिचार का अभ्यास पक्का हो जाता है। और स्त्रीं जन्म लेना पड़े अगले जन्म में तब क्या करेंगे? वो व्यभिचार की आदत पूर्व जन्म की खत्म हो जाएगी? नही खत्म होती।*
👉 *एक शिवबाबा से संतुष्ट नही हो सकते। और और चाहिए कि नही चाहिए? अरे, बोलते नही जल्दी। तो समझ मे आया? नही समझ मे आया? अरे प्रश्न किसने किया था? फाउंडेशन वेश्याओं के द्वारा वैश्या वृत्ति द्वारा पड़ता है कि नही? जगदम्बा एक से संतुष्ट होती है? नही होती। तो जगतम्बा की भुजाए नही है रुद्रमाला में? फाउंडेशन नही बनती जगतम्बा? बनती है। varta 1671*
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