भगवान कौन??

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*भगवान--भग वाला ।भग नाम क्यों रखा?* *क्योंकि वह भाग जाती है सृष्टि रूपी रंगमंच से, सदा काल नहीं रहती।*
(वह बेहद का भग वाला भी है। इतनी भगें आकर इक्कठी कर लेता है मुकर्रर रथ में, जितनी कभी किसी मनुष्य मात्र ने इकट्ठे की ही नहीं)

भगवान किसे कहें?
 धनवान किसे कहें? जो धन वाला हो, उसे धनवान कहें। *वह धन वाला भी है बेहद का, और वह बेहद का भग वाला भी है। इतनी भगें आकर इक्कठी कर लेता है मुकर्रर रथ में, जितनी कभी किसी मनुष्य मात्र ने इकट्ठे की ही नहीं।* यह तो सब नई बातें आकर बताते हैं।
 *भग नाम क्यों रखा?* *क्योंकि वह भाग जाती है सृष्टि रूपी रंगमंच से, सदा काल नहीं रहती।*
तो यह सब नई बातें हैं। *जो भाग जाती हैं उनको भक्ति कहेंगे।* भक्ति में भागना होता है। कोई आत्मा, किसी जन्म में मंदिर में भागते हैं, तो किसी जन्म में मस्जिद में, तो किसी जन्म में गुरुद्वारे में। तो भागने वाली ही कहेंगे न। अगर भागने वाली ही हैं, और शरीर से रहते रहते कभी स्थिर नहीं रहती। *कोई ऐसी आत्मा है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर,कि जो भक्ति न करती हो तो भी चले। भक्ति कराए,  लेकिन करें या ना करे, यह कोई कंपल्शन नहीं है??*
          वह तो एक ही आदम की आत्मा है, जो द्वापर युग के आदि में जब सोमनाथ मंदिर बनता है तो भक्ति करने का रास्ता बताती है, राजा विक्रमादित्य को। तो बाबा आकर यह सब हमको नई-नई बातें पढ़ाते हैं। जो बेहद का बाबा है।
       *बाबा है तो एक है, अगर बाप है तो कहेंगे दो हैं बेहद के बाप।एक मनुष्य सृष्टि का बाप, और एक आत्माओं का बाप।*

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