ब्रह्मा बाबा झूठा हिरो का धंदा करते थे। खोटा माल बेचता था।
_*ब्रह्मा बाबा झूठा हिरो का धंदा करते थे। खोटा माल बेचता था।*_
★ _*ब्रह्मा बाबा झूठा धंधा करते थे।* बड़े-2 *राजाओं के घर में घुस जाते थे और बढ़िया डब्बी में भरके दे आते थे खोटा माल।* और वो भागीदार? *भागीदार सच्चा धंधा करता था।* *ईमानदारी* का धंधा करता था *इसलिए आज की दुनिया में कौनसा धंधा पनपता है? झूठा धंधा पनपता है और सच्चा धंधा? नहीं पनपता है।* तो श्रेष्ठ कौन हुआ और भ्रष्ठ कौन हुआ? किसीने कहा - सच्चा धन्धा श्रेष्ठ हुआ। *जो राम वाली आत्मा है उसने सच्चा धंधा तो किया।* चलो नौकर बनना पड़ा, ये क्या बड़ी बात हो गई? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ, जी-2। *नौकर बनना पड़े, फिर गुरु कौन बना? (सभी ने कहा – वही।* ) varta 596_
_सभी ब्रह्मा कुमार कुमारियों के लिए, ब्रह्मा बाबा क्या सच्चा व्यापार करते थे? (For bks seva)_
*_यज्ञ की आदि में क्या दादा लेखराज ब्रह्मा सच्चा धंधा करता था की दिखावे की धंधा करता था, जो घटिया भी रत्न होगा न तो सोने की डिब्बी में सजा के बढ़िया तरह से रखके बेचता हो?_*
★ _*बाप कब आतेे है? जब इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर उनका जो अजीज बच्चा है, वो तीब्र पुरुषार्थी होते हुए भी, और सच्चा होते हुए भी संसार मे उसको कोई सफलता नही मिलती है। और जो झूठे है दिखावा करने वाले है, उनको? उनको सफलता मिल जाती है। हीरों की व्यापार की ही बात ले लो, ऊँच से ऊँचा धंधा है ना। तो ॐ मंडली में सत्संग की जब सुरुवात हुई, तो उस से पहले उन हीरो के व्यापारी में जो बहुत प्रशिद्ध हुआ, वो कौन हो गया? दादा लेखराज। बड़ी बड़ी महारानिया इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ भी उस से रत्न लेने आती थी कि नही? हाँ। हीरे जवाहरात लेने आती थी ना। तो देखों, इतना ऊँचा व्यापारी और? क्रिश्चिनिटी को फलो करने वाला दिखावा करने वाला या बहुत होशियार हीरो का पारखी? नही। खुद हीरो का पारखी नही। क्या? घटिया भी रत्न होगा न, तो सोने की डिब्बी में सजा के बढ़िया तरह से रखेगा, की देखने वाला समझेगा, की हाँ ये जरूर ऊँचा रत्न होगा। तो दिखावा हुआ ना? और दुकान भी कैसी बनाए? दुकान भी फर्स्ट क्लास बनेगी की थर्ड क्लास छोटी सी दुकान? नही! और भागीदार का क्या हाल था? छोटी सी दुकान और उसमे भी कोई लेने वाला आता ही नही था। क्या समझते थे सब? अरे ये छोटी सी दुकान के पास ये तो गरीब होगा, इसके पास क्या बढ़िया बढ़िया ज्यादा किमती रत्न होंगे, आएंगे? नही आते। अब इस बात को दादा लेखराज ब्रह्मा ने समझा कि नहीं समझा? अंदर से जानते तो थे ना। कि इस दुनिया के जो हीरो के व्यापारी हैं उनमें सबसे ज्यादा उस्ताद और होशियार कौन सा व्यापारी? जानते थे ना? जानते थे। तो क्या चालाकी की? उसको अपने दुकान में यह भी जान लिया कि यह सच्चा भी है अपने दुकान में नौकर बना के रखिए दिया। भले बड़ा नोकर मैनेजर बनाया, रख दिया न। और खुद से स्वतंत्र हो गए। स्वतंत्र हो गए और जाकर के सत्संग करने लग गए-सिंध हैदराबाद। झांन मजिना बजाने लगे। और जानते है कि सच्चा है तो आधा-2 का हिसाव हुआ ना कि भाई तुम्हारी दुकान में मेहनत तुम्हारी, और पैसा धन सम्पत्ति सारी दुकान की हमारी। तो आधा-2 बटवारा तो वो तो दिया होगा न कुछ समय तक। जरूर दिया होगा! इस दुनिया मे जो लायकात है उसकी कदर नही है, जो सच्चाई है उसकी कदर नही है, कोई कितना भी होशियार हो, सच्चा हो, उसकी कदर न होने के कारण आज देखों क्या रिजल्ट देखने मे?? विदेश में जा रहे और भारत की सेवा का कोई ध्यान नही देते है। क्यों? क्योंकि यहा किसी की कदर नही है। (time@22.15-27.33) dt 09.02.2020*_
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