*ईश्वर*
1. *क्यों ईश्वर कहा जाता?* इश माना शासन कर्ता और वर माना श्रेष्ठ। उससे ज्यादा शासन करनेवाला कोई आत्मा नही। वो आत्मा जब आकार शासन करती है। ब्रह्मा के तन मे प्रवेश कर के तो सब सुखी होते है संपर्क संबंध में आनेवाले। कोई भी दुख का किसी भी इंद्रियों से अनुभव नहीं करता।
2. ईश्वर जिसे शिव कहा जाता है, सदा शिव याने सदा कल्याणकारी। इस सृष्टि पर वो आता है जिस साकार तन द्वारा परम ब्रह्म का पार्ट बजाता है, जिससे ऊंची कोई माँ नही होती। तो *उस परब्रह्म के साथ अतिव सुख देता है। कब? जब परमब्रह्म भी इस संसार में प्रत्यक्षता रूपी जन्म ले।*
3. ऐसे *वो परमब्रह्म सारे संसार में प्रत्यक्ष होता है। उसको कहेंगे प्रैक्टिकल में परमब्रह्म परमेश्वर। परम ईश्वर, शासन करनेवाला तो है, श्रेष्ठ शासन करनेवाला है।*...
4. लेकिन जितने भी दुनिया में शासन कर्ता राजाए हुए है, सतयुग से लेकर कलियुग तक *उन सब मे प्रैक्टिकल में श्रेष्ठ पार्ट बजानेवाला।*
5. शिव किसी को कंट्रोल नही करता, प्रैक्टिकल में शरीर धारण करता है, तो *जो शरीर है, जिस आत्मा का, उसका नाम पड़ता है। तो जो प्रैक्टिकल ईश्वर का पार्ट है वही रामवाली आत्मा है, मनुष्य सृष्टि का बीज, महान योगी, उसको कहते है योगेश्वर, योगियों का शासन कर्ता, श्रेष्ठ शासन कर्ता।* *VCD-2438*
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