एलियंस के सन्दर्भ में!!

 *एलियंस के सन्दर्भ में*


👉  *एलियंस कौन होते हैं? उड़नतश्तरी क्या होती है? क्या दूसरे ग्रह पर जीवन है?*


_पॉइंट: क्या बोले जाते हैं? एलियन? एलियन दूसरी दुनिया के लोग होते हैं? एलियन सुना किसी ने? अरे उड़नतश्तरी की बात कर रहे क्या? हाँ। ये उड़नतश्तरी कोई दूसरी चीज़ नहीं है। ये भूत-प्रेतों की दुनिया है जो संगठित हो कर के देखने में आती है। और सबको देखने में नहीं आवेगी। जो भूत-प्रेत बनते-रहते हैं उनको ही देखने में आती है। बाकि कोई दुनिया नहीं है जहाँ मनुष्य रहते हों, जीव-जंतु रहते हों। एक पृथ्वी पर ही उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं दूर होने के कारण, तो वहाँ कोई जीव-जंतु नहीं है। और दुसरे ग्रह-उपग्रह तो सूर्य से कितनी दूर और कितने नज़दीक हैं। वहाँ तो कितनी सर्दी और कितना गर्मी पड़ती होगी। जीवन होने की कोई सम्भावना ही नहीं है। एक ही पृथ्वी है जहाँ जीव-जंतु होते हैं। जीवन है। और कोई ग्रह-उपग्रह पर जीवन नहीं है। (वार्ता 603 A समय 8:51)_


_पॉइंट: कोई दुसरे ग्रह पर कोई सृष्टि नहीं है। ये तो इस दुनिया में ही सृष्टि है, जीव-जंतु हैं। सोचने की बात है, एक पृथ्वी पर ही जीवन है और उसमें भी नार्थ पोल और दक्षिणी पोल पर कोई जीवन नहीं है। पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा और दक्षिणी हिस्सा, जहाँ मीलों ऊँचे पहाड़ बनें हुए हैं बर्फ़ के, वहाँ कोई भी जीव-जंतु नहीं है। तो जब पृथ्वी पर ही सूर्य की दूरी जहाँ ज़्यादा हो जाती है, तिरछी किरणे पड़ती हैं सूर्य की, वहाँ जीव-जंतु नहीं हैं। तो और ग्रह-उपग्रह तो कितने दूर होंगे सूर्य से, और कितने नज़दीक होंगे। वहाँ जीवन कहाँ से आ गया? (वार्ता 1192 समय 30:21)_


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👉 *2031 तक पृथ्वी पर धाबा बोल देंगे एलियंस। इसका बेहद में क्या अर्थ है? बेहद के एलियंस कौन?*


_पॉइंट: ये तो सूर्यवंशियों की बात है, जिनका नाम रख दिया एलियंस। क्या नाम दिया? एलियंस। हाँ। ये हैं, जिन्होंने ली, क्या ली? अंस की बात ले ली, सार की बात ग्रहण कर ली। तो सार की बात ग्रहण करने वाले कौनसे धर्म के हुए? कौन से कुल के हुए? जो सूर्यवंशी हैं, 4.5 लाख हैं. अभी भारत में हैं या दुनिया में फैले हुए हैं? अरे ये बीज रूप आत्माएँ भारत के अंदर हैं या दुनिया में फैली हुई हैं? भारत में हैं। जब ये भगवान का अंश बन जावेंगी, आत्मा सो परमात्म स्टेज में टिक जावेंगी, निराकारी निर्विकारी निरहंकारी बन जावेंगी, तो सारी पृथ्वी पर फ़ैल जावेंगी या भारत में ही धरे रहेंगे? सारी पृथ्वी पर फ़ैल जावेंगे। कौन सा सन बताया? 2031। पृथ्वी पर धाबा बोल देंगे। वो हैं ही रुद्रमाला के मणके। रूद्रों ने क्या किया? आखिरी विनाश उनके द्वारा होता है। ये रूद्र ज्ञान महायज्ञ है। इसमें सारी दुनिया स्वाहा हो जाती है। कि भारत ही स्वाहा होगा? सारी दुनिया स्वाहा होगी। तो सारी दुनिया में फ़ैल जावेंगे तब स्वाहा होगी या भारत में ही बैठे रहेंगे तब स्वाहा होगी? ऐसे जो एलियंस होंगे उनको मरने का डर होगा? कि बाहर जावेंगे तो पता नहीं वापस लौट पाए या ना लौट पाए। बाबा ने तो बोला हुआ है की 60-70 लाख भी देंगे तो भी वापस नहीं आ सकेंगे। विदेशों में आने-जाने की परमिशन ही नहीं मिलेगी। तो लोगों बाहर जाने में डर लगेगा के निडर हो जाएँगे? डर लगेगा? ये तो एलियंस की बात है। ये बेहद के एलियंस है जो वो समझे बैठे हैं। के बाहर के ग्रह-उपग्रहों से आवेंगे। उनकी बात है? बेहद के एलियंस की बात है। (वार्ता 1192 समय 32:17)_


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👉 *एलियंस जो मनुष्यों को उठा ले जाते हैं, वो क्या होता है?*


_पॉइंट: अरे भूत-प्रेत होते हैं कि नहीं? तो भूत-प्रेत तो वायु का रूप गोला धारण करते हैं। वायु को अपने कण्ट्रोल में लेकर के मनुष्यों को उड़ा ले जाते हैं। यहाँ का वहाँ छोड़ देते हैं जाके। दिल्ली में साइक्लोन आया था, तो थ्री-व्हीलर्स उठा-उठा के एक जगह से दूसरे मोहल्ले में फ़ेंक दिए। सब कोई जानता है। ये तो वो हुस्नआरा बाग़ में से, वो भूत-प्रेतों का अड्डा था, वो उठ गया। तो वो प्रकोप उन्होंने कर दिया। बाकि एलियंस-वलिएंस कोई दुसरे लोक से नहीं आते हैं। (वार्ता 1767 समय 25:46)_


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👉 *वैज्ञानिकों की बातों पर ज़्यादा ध्यान देना है या भगवान की?*


_पॉइंट: जो उड़न-तस्तरियाँ देखने में आती हैं, वो उड़न-तस्तरियाँ कोई दुसरे ग्रह-उपग्रह से आती हैं, ऐसा कहना है वैज्ञानिकों का। और बाबा का क्या कहना है? बाबा का कहना है कि इस पृथ्वी पर जो विषुवत रेखा, कर्क रेखा और मकर रेखा; इसके आस-पास का जो क्षेत्र है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, वहॉं ऐसा वातावरण है की प्राणी ज़िन्दा रह सकता है। नहीं तो उत्तरी ध्रुव, नार्थ पोल, और साऊथ पोल पर इतनी तिरछी किरणे पड़ती हैं सूर्य की के वहाँ कोई जीव-जंतु ज़िंदा ही नहीं रह सकता। तो दूसरे जो ग्रह-उपग्रह हैं, बहुत दूर कोई बहुत नज़दीक हैं, वहाँ कैसे जीव-जंतु होंगे? इसलिए ये जो उड़न-तश्तरियाँ देखने में आती हैं ये भूत-प्रेतनियाँ हैं। सबको नहीं दिखाई देती। तुमने कभी देखी? तुम्हारे संगी-साथियों ने किसी ने देखी? देखी? तो वैज्ञानिकों की बातों पर इतना विश्वास नहीं करना चाहिए जितना भगवान की बातों पर विश्वास करना है। इसलिए बाबा कहते हैं पहले ये निश्चय बैठाओ की बाप आया हुआ है। एक ही बात पक्की हो जाएगी तो फिर सारी बात मानेगा। एक ही बात अगर पक्की नहीं है तो आज नहीं तो कल फ्रंट में आ जाए। (वार्ता 1884 समय 48:08)_

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