भक्ति मार्ग में शंकरजी, पार्वती की परीक्षा क्यों लेते है?
भक्ति मार्ग में शंकरजी पार्वती की परीक्षा क्यों लेते है?
★ भक्ति मार्ग में ही परीक्षा लेते है या ज्ञान मार्ग में भी परीक्षा लेते है ? ज्ञान मार्ग होता है संगम युग में और भक्ति मार्ग होता है द्वापर कलियुग में, तो द्वापर कलियुग में जो भी बाते होती है या शास्त्रों में जो भी बाते है वो कहा कि यादगार है ? संगम युग की। संगम युग में बोला है तुम सब पर्वतियाँ हो । जब सब तुम पर्वतियाँ हो तो पर्वतियों की purity की परीक्षा ली जानी चाहिए * या नही ली जानी चाहिए ? सब से बड़ी पवित्रता तन की होती है, धन की होती है, जन की होती है या मन की होती है तो *पार्वती की मन की परीक्षा* का गायन शास्त्रों में है की ऋषि मुनियों को भेजा कि उनकी परीक्षा लेके आवो देखे मन हिलता है कि नही । मन जो है, वो भगवान एक को छोड़ करके दूसरों के ऊपर लुपयमान होता है कि नही ? तो परीक्षा में पार्वती पास होगयी। फिर ऋषियों कि भी बात छोड़ दी, विश्वास नही हुआ, पता नहीं इन ऋषियों ने पार्वती की तपस्या कठोर को देखकरके उन के ऊपर दया भाव दिखाई दिया हो। इस लिए खुद गए।... खुद साधु का वेश धारण किया और लगे ग्लानि करने । अपनी ग्लानि अपने आप ही करना शुरू करदी । तो भी पार्वती का मन हिला डुला नही सके । तो ये मन की परीक्षा होगयी । *तो भक्ति मार्ग में ही परीक्षा नही होती है, प्यूरिटी की परीक्षा ज्ञान मार्ग में भी होती है।... वार्तालाप 907 B@15:45min
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