जो सूर्यवंशी बच्चे हैं बाप के, वह खुद जलते हैं और रावण को जलाते हैं।*
*जो सूर्यवंशी बच्चे हैं बाप के, वह खुद जलते हैं और रावण को जलाते हैं।* माना जो कचरा है काम क्रोध लोभ मोह अहंकार का, जो खाद पड़ी हुई है लोहे की,चांदी की उसको जलाते हैं।और जलाने के टाइम पर खुद भी गर्म होते हैं। *इतना गरम होते हैं गर्म होते होते तो खुद भी खाक हो जाते हैं।* यज्ञ की आदि में भी वो आत्माएं थी। *विनाश ज्वाला कब प्रज्ज्वलित हुई?* यज्ञ की आदि से ही विनाश ज्वाला प्रज्ज्वलित हुई सारे ही चंद्रवंशी इस्लाम बौधि वंशी एक तरफ हो गए। और सूर्यवंशी आत्माएं एक तरफ हो गई मुठ्ठ भर। आदि में भी झगड़ा चला था।
अभी भी ये झगड़ा सामान खड़ा हुआ है।
ज्ञान की अग्नि ऐसी है, जो योग अग्नि का रूप धारण करती है। काम क्रोध लोभ मोह अहंकार इन विकारों को भस्म करती है।भस्म करती है तो नई दुनिया प्रत्यक्ष होती है।
Vcd 603(1.03मि
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