इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को, यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है।

 _*इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को,  यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है, पहले तो यह पता चले। और उस ग्रुप में भी मेरा नंबर कौन सा है!...*_


_*★  क्या ज्ञान होना चाहिए ब्यद्धि में? इतना ज्ञान होना चाहिए बुद्धि में, की ज्ञान की गहराई में घुसना चाहिए, की हरेक रूद्र माला को, मणके को,  यह पहचान हो जाए कि मेरा नंबर कौन सा है रूद्र माला में, किस ग्रुप में है, पहले तो यह पता चले। और उस ग्रुप में भी मेरा नंबर कौन सा है!... और फिर विजय माला में भी मेरा साथी कौन सा है। जैसे पहले नंबर को पता चलता है कि नहीं? ज्ञानी आत्मा है तो उसे पता चलेगा कि नहीं? चलेगा ना। ऐसे ही विजय माला के जो पहले नंबर का होगा, उसको कंफर्म हो जाएगा? नही हो जाएगा। कंफर्म हो जाएगा तो निकल पड़ेगा ना। दिल और दिमाग जहां पहुंच गया। जहां हमारा मन होगा वहां हमारा तन होगा। तो मन पहुंच गया? मन बुद्धि से निश्चय बुद्धि बन गया? नहीं। तो यह तो तब ही होगा जब ज्ञान मिले। तो रूद्र माला तैयार होकर, पहले तैयार हो जाते हैं। विजय माला भी अंदर अंदर तैयार हो रही है लेकिन वह कंप्लीट तैयार तब होगी वह मण के जब रूद्र माला के कनेक्शन में आवे। तो बतादिया कि, सासु माँ पहले कनेक्शन में आती है। VCD-2709*_

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