साक्षात्कार संबंधित प्वाइंट
1. *झूठी चीज का साक्षात्कार नहीं होता, जो भी साक्षात्कार होते हैं वह सच्चे होते हैं।* वीसीडी 225
2.बाप की याद में रह सर्विस करेंगे तो आगे चल तुमको साक्षात्कार भी होते रहेंगे।*घर बैठे आपेही साक्षात्कार आदि होते रहते हैं। बहुतों को ब्रह्मा का साक्षात्कार होता है, उनके साक्षात्कार के लिए कोई पुरूषार्थ नहीं करते। बेहद का बाप इन द्वारा साक्षात्कार कराते हैं।*
Mu 4-6-2020
3.ओम भाई: तुम तो पहाड़ी पर बैठे हो। *अन्त में सब पहाड़ी पर ही साक्षात्कार होंगे। बाबा बतलाते हैं - मुझे भी जब साक्षात्कार हुआ था तो मैं पहाड़ी पर था।* मु०-10-12-21
4. ओम भाई: *शुरू-शुरू में बहुतों को यह साक्षात्कार होते थे। लाइट ही लाइट दिखाई देती थी। अपने लाइट के क्राउन के भी अनेक बार साक्षात्कार करते थे। जो आदि में सैम्पल था, वह अन्त में प्रैक्टिकल स्वरूप होगा। संकल्प की सिद्धि का साक्षात्कार होगा।*
18-1-22
5. ओम भाई: *बहुतों को तो आगे चलकर के साक्षात्कार भी होता रहेगा। कहाँ-कहाँ के तुम राजायें होंगे वह भी तुमको साक्षात्कार होगा; क्योंकि राजाओं की ड्रेस भिन्न-भिन्न होती है ना !*
वीसीडी 3796
साक्षात्कार से दुख भी होता है, तो बन्द आखो का साक्षात्कार शिव कराते? नही। ये तो सब ड्रामा में नुध है।
"साक्षात्कार से दुख भी होता है। जैसे ब्रह्मा बाबा को विनाश का साक्षात्कार हुआ तो रोना शुरू कर दिया। Vcd 1293"
''यह साक्षात्कार क्यों होते हैं? इनकी क्या दरकार है? साक्षात्कार होते हैं खुशी में लाने के लिए। vcd-1293"
"शुरू में जो साक्षात्कार होते थे, उसका आधार था भक्ति मार्ग। बंद आंखों के साक्षात्कार होते थे। उस समय तो ज्ञान नहीं था। अभी तो बुद्धि में ज्ञान भरा हुआ है। तो बुद्धि में सारी बातें क्लियर दिखाई देंगी। विद प्रूफ प्रमाण हर बात समझ में आ जाएगी। vcd 1293"
बेहद में साक्षात्कार का मतलब है साक्षात प्रत्यक्ष प्रमाण सहित बुद्धि में आ जाए वह बात, अनुभव के सहित रीयलायज़ हो जाए। कोई भी वस्तु घटनाएं होती है उसकी आध्यात्मिक राज़ बुद्धि में बैठें।
बोला - '' साक्षात्कार कराते जाएंगे और ट्रांसफर होते जावेंगे। काहे का साक्षात्कार कराते जावेंगे? ज्ञान में आने के बाद श्रीमद् के अनुकूल कौन-कौन से कर्म किए हैं? और श्रीमद् के प्रतिकूल विपरीत कौन-कौन से कर्म किए हैं, वो सब साक्षात्कार कराते जावेंगे। फिर ट्रांसफर हो जाएंगे। ''Vcd 1293''
साक्षात माना ज्ञान की बुद्धि रूपी नेत्र/ ज्ञान की दृष्टि द्वारा समझना पक्का पक्का प्रूफ प्रमाण सहित।
फिर बताया- साक्षात्कार कोई ज्ञान नही है, भक्ति है, भक्तों को हुआ, रहदास, तुलसी दास और मीरा सब को साक्षात्कार होते थे ऐसे ही हुआ ब्रह्मा बाबा को। ये ड्रामा में नुध है ये साक्षात्कार।
'' ब्रह्मा बाबा को साक्षात्कार हुआ सिंध हैद्राबाद में, तो अपने गुरु के पास गये और गुरुओं के पास भी गये, वाराणसी में विद्वान आचार्य पण्डितो से भी मिले, किसीने उनके साक्षात्कारों का संतुष्ट जनक जवाब नही दिया, तो उनको याद आया कि हमारा जो दुकान का भागीदार है, वो ज्यादा होशियार है, उसके पास ये बात रखे जाकर के, तो वहाँ गये तो उनके साक्षात्कारों का हल उन्हें मिल गया, उनकी बुद्धि में बैठ गया कि कृष्ण का जो साक्षात्कार मैं करता था, वो कृष्ण का पार्ट बजाने वाली आत्मा मैं ही हूँ ब्रह्मा के रूप में, सफेद पोश के रूप में और विष्णु का साक्षात्कार किया, तो बुद्धि में बैठा मैं ही लक्ष्मी-नारायण का कम्बाइन्ड रूप विष्णु बनने वाला हूँ, और विनाश का साक्षात्कार किया- तो ब्रह्मा बाबा रोने लगे; लेकिन ये समझ मे आ गया था कि अब इस दुनिया का विनाश होने वाला है। ये सारी बात तो समझ मे आई; लेकिन ये नही समझ मे आया कि जिसके द्वारा इन साक्षात्कारों का क्लेरिफिकेशन मिला, ये ज्ञान मिला वही हमारा गुरु, वही हमारा पिता हुआ, यही हमारी आत्मा का ज्ञान देने वाला हूआ। vcd 2174"
फिर बोला है- ★ दिव्य दृष्टि की चाबी। सतयुग में इस चाबी की दरकार नहीं रहती। जब भक्तिमार्ग शुरू होता है तो भक्तों को खुश करने के लिए साक्षात्कार कराना पड़ता है। उस समय यह चाबी बाप के काम आती है इसलिए बाप को दिव्य दृष्टि दाता कहा जाता है। बाप तुम बच्चों को विश्व की बादशाही देते हैं, दिव्य दृष्टि की चाबी नहीं। मुरली 11.12.2021
- कहते है बच्चे मै निराकार हूँ, ज्ञान का सागर हूँ, मेरा पार्ट ज्ञान देने का है इस समय इमर्ज होता है। बाप अपना परिचय देते है। भक्ति मार्ग में मेरा ज्ञान इमर्ज नहीं होता है। उस समय सारा रसम-रिवाज भक्ति मार्ग का चलता है। ड्रामा अनुसार जो भक्त जिस भावना से पूजा करते है उनका साक्षात्कार कराने के लिये मै निमित्त बना हूआ हूँ। उस समय मेरी आत्मा में ज्ञान का पार्ट इमर्ज नही है। वो तो अभी इमर्ज हूआ है। जैसे तुम्हारी 84 जन्मो की रील भरी हुई है, मेरा भी जो-जो पार्ट ड्रामा में नुंधा हूवा है वो उसी समय चलता है, उसमे संशय की बात नही। अगर मेरे में ज्ञान इमर्ज होता तो भक्ति मार्ग में भी किसको सुनाता!... *ऑडियों-02*
अब प्रश्न शिवबाबा भक्तों को दैतवादी दुनिया से साक्षात्कार कराते है। कैसे?
ये बन्द आखो का साक्षातकार तो ड्रामा में नुध है। लेकिन यहा भक्तों को साक्षात्कार कराने की बात उस स्थूल बन्द आख के लिए नही कहा।
तो भक्तिमार्ग में भगवान साक्षात्कार करवाते, क्या मतलब?
द्वापर युग से शुरू होता है साक्षात्कार कराने का, कभी शिवाजी के रूप में साक्षात्कार कराय देगा, अभी महाराष्ट्र में जाओ तो, सबसे महान किसको मानते है? शिवाजी को मानते है। पंजाब में जाओ तो सबसे महान किसको मानते है? गुरुनानक को।गुरुनानक से भी ज्यादा आगे वाले गुरु गोविंद सिंह जी है, उनको मानते है।तो ये बात तो,ऊंच ते ऊंच और नीच ते नीच,ये अलग अलग है। time @ 22 mins, varta 31
बाकी साक्षात्कार ड्रामा में नुध है, ये भक्तिमार्ग की साक्षात्कार की बात बताई, जो ब्रह्मा को हुआ, ब्रह्माकुमारी को होती है, तुलसी दास को हुआ, रह दास को हुआ, मीरा को हुआ।
'' साक्षात्कार सब ड्रामा में नूँध है। बाकी आत्मा कोई शरीर से निकलकर नहीं जाती है। ड्रामा का राज समझना है।नई बातें हैं,उन बातों को समझने के लिये बच्चों को रेगुलर क्लास में आना पड़ेगा। ऑडियो-96''
- आगे रास-विलास बहुत चलता था। फिर वह सब बन्द कर दिया। मनुष्य समझते थे - जादू है। भक्ति में जब नौधा भक्ति करते हैं तब मुश्किल साक्षात्कार होता है। यहाँ भक्ति की तो बात ही नहीं, बैठे-बैठे साक्षात्कार में चले जाते थे, इसलिए जादू समझते थे। मुरली 28/10/2021
अब आदि में हद का साक्षात्कार था जब कि वह सभी ज्ञान की गहराई की बात थी।
★ साक्षात्कार की। बच्चियां साक्षात्कार में जाती थी तो बस आँखें बंद हो जाती थी। हँ? बेहद में क्या अर्थ हुआ? हँ? परमधाम जाएगी आत्मा तो ये इन्द्रियां जाएंगी क्या? सूक्षम इन्द्रियां भी जाएंगी? या स्थूल जाएंगी? नहीं। कोई नहीं जाएंगी। आँखें बंद। आँखों का काम खत्म। तो आँखें बंद हो जाती थी। फिर वहां जब वैकुण्ठ में जाते थे, हँ, वहां डांस वगैरा करते थे तो क्या अंधे होके करते थे? हँ? आँखें खुल जाती थी। यहां से साक्षात्कार में गए, बंद आँखों से गए और वहां आँखें खुल जाती थी। तो यहां की आँखों में और वहां की आँखों में क्या अंतर हुआ? हँ? कुछ अंतर हुआ? यहां की इन्द्रियां तमोप्रधान और नई दुनिया में इन्द्रियां भी सतोप्रधान; आत्मा भी? आत्मा तो यहां से ही सतोप्रधान बनके जाती है। सतोप्रधान कि सत बनके जाती है? हँ? नहीं। आत्माएं जो हैं वो नंबरवार जाती हैं ना ब्रह्मलोक में। तो जो नंबरवार जाती हैं तो जैसे गर्भ में कभी-कभी दो बच्चे पैदा होते हैं ना? हाँ। तो वो आत्मा एक साथ प्रवेश करती होंगी या आगे-पीछे? आगे-पीछे प्रवेश करती हैं। ऐसे ही है। ये 500-700 करोड़ आत्माएं जो हैं परमधाम तो सब इकट्ठी ही जाएंगी। लेकिन फिर भी क्या नंबर नहीं बनेंगे? एक के पीछे एक नहीं जाएंगी? हाँ, जाएंगी। vcd 2940
★ फिर जाती थी। इधर से जाती थी तो आँखें यहां की यहां रही। और वहां की आँखें? हँ? सात्विक आँखें। जैसे; जैसे वो समय का चक्र है ना? तो समय की जो सुई है; जैसे रिकार्ड बजता है तो रिकार्ड में सुई जब शुरुआत में बजती है ना, तो शरुर से लेकरके अंत तक समय के अनुसार ही पार्ट क्लीयर होता है ना? कि अंतर तो पड़ेगा ना? हाँ, अंतर पड़ेगा। तो वहां सात्विक आँखें। हँ? फिर जब इस सृष्टि पर आते थे, हँ, साक्षात्कार वाले, तो आँखें खुल जाती थीं। माना यहां की आँखें और वहां की आँखें, क्या अंतर हुआ? जो आँखें होंगी वैकुण्ठ में; इन्द्रियों का सुख तो वहां होता नहीं; तो फिर? कौनसी आँख से? बुद्धि की आँख काम करती वहां या ये आँखें काम करती? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, बुद्धि का सुख मिलता है। तो बुद्धि से जो सुख भोगते हैं वो श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ सुख। बाकि तो फिर इन्द्रियों का जो है वो नीचापन है। उनमें भी नंबरवार इन्द्रियां हैं। तो देखो वहां भी आँखें बंद करके थोड़ेही डांस करते? वो भी तो अच्छा नहीं है ना? तो ये कायदा ही है कि पहले आँखें यहां से जाते समय आहिस्ते-आहिस्ते बंद हो जावेंगी। फिर वैकुण्ठ में पहुंच गई फिर आँखें खुलेंगी। हँ? कौनसी आँखें खुलेंगी? बुद्धि की। हाँ। बस। पीछे डांस शुरु कर दिया। अब जितना डांस किया उतना किया। हँ? देखा। जास्ती नहीं किया। जैसे बच्चे जास्ती खेल करते हैं तो फिर उनको खेल से बुलाया जाता है ना? हँ? नहीं आते हैं तो गुस्से से बुलाया जाता है। नहीं? हाँ। अरे, तुमने बहुत खेल कर लिया। अभी आ जाओ। अरे, आओ तो। बस। गोद में लिया, आँखों पर हाथ रख दिया, बस, झटपट खुल गया। हाँ। किसने हाथ रख दिया? हँ? किसने हाथ रख दिया? अधोमुखी ब्रह्मा ने या ऊर्ध्वमुखी ब्रह्मा ने? हाँ। बस, आँखें खुल गईं। vcd 2940
★ सको जादू कहेंगे ना? सब कोई कहेंगे जादू। पर जादू भी तो है ना बरोबर? और जादू भी एक हद का और एक? और एक बेहद का। हाँ। तो देखो जादू तो कहेंगे। और ये तो बेहद का फर्स्टक्लास जादू है। है ना? vcd 2490
★ यज्ञ के आदि में कृष्ण का साक्षात्कार करते थे, तो जिस कृष्ण का साक्षात्कार करते थे, जिसके साथ डांस करते थे, तो अचानक कृष्णा भाग जाता था, तो रोते थे। राडिया मारते थे। बेहद में?? अरे यहाँ भी संगमयुगी कृष्ण क्या हुआ? अचानक गुम हो गया की नही? तो बच्चे बुलाते है, आवाहन करते है बाबा आजाओ, रोते है, रडिया मारते है, तो रोने वालों के पास संगमयुगी नई दुनिया का कृष्ण रहेगा? नही। भाग जाता है। व्याख्या 25.06.2019.
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